मराठी फिल्म 'गोंधल' ऑस्कर 2027 में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि, सुभाष घई ने इशिता देशमुख और पूरी टीम को सराहा संतोष दावखर के निर्देशन में बनी मराठी फिल्म 'गोंधल' को 99वें अकादमी पुरस्कार यानी ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुना गया है। दिग्गज फिल्म निर्माता सुभाष घई ने मुख्य अभिनेत्री इशिता देशमुख और निर्देशक की जमकर तारीफ की है। भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तहत मराठी फीचर फिल्म ‘गोंधल’ को 99वें अकादमी पुरस्कार यानी ऑस्कर 2027 में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म वर्ग के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के तौर पर नामांकित किया गया है। कान्स में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तारीफ पाने के बाद इस फिल्म ने अब ऑस्कर की दौड़ में कदम रख दिया है। इस प्रतिष्ठित चयन के बाद मनोरंजन जगत में उत्साह की लहर है और जाने-माने फिल्म निर्देशक सुभाष घई ने सोशल मीडिया पर फिल्म की पूरी टीम को इस कामयाबी के लिए बधाई दी है। व्हिसलिंग वुड्स की छात्रा इशिता देशमुख की शानदार यात्रा फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री इशिता देशमुख के लिए यह पल बेहद खास है। सुभाष घई ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर ‘गोंधल’ का पोस्टर साझा करते हुए बताया कि अभिनय के क्षेत्र में पेशेवर कदम रखने से पहले इशिता ने उनके संस्थान व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल में कला की बारीकियां समझी थीं। घई ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उनके एक्टिंग स्टूडियो की पूर्व छात्रा की फिल्म आज वैश्विक स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रही है। उन्होंने अभिनेत्री की लगन और प्रतिभा की सराहना की। दूरदर्शन के धारावाहिक से लेकर ऑस्कर की दौड़ तक इशिता देशमुख ने इससे पहले छोटे पर्दे पर भी अपनी खास पहचान बनाई है। उन्होंने दूरदर्शन पर प्रसारित हुए मुक्ता आर्ट्स फिल्म्स द्वारा निर्मित ड्रामा धारावाहिक ‘जानकी’ में 208 कड़ियों तक मुख्य किरदार निभाया था। उनके अभिनय कौशल की बदौलत उन्होंने साल की शुरुआत में फिल्मफेयर पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ डेब्यू का सम्मान भी हासिल किया था। अपने इसी अनुभव और अभिनय प्रतिभा को उन्होंने ‘गोंधल’ के जटिल किरदार में बखूबी ढाला है, जिसे देखकर दर्शक और समीक्षक दोनों काफी प्रभावित हुए हैं। पारंपरिक अनुष्ठान और रहस्य से बुनी ग्रामीण कहानी मराठी फिल्म ‘गोंधल’ का लेखन और निर्देशन संतोष दावखर ने किया है। इस सिनेमाई रचना में इशिता देशमुख के साथ योगेश सोहोनी, किशोर कदम, सुरेश विश्वकर्मा और निषाद भोईर जैसे मंझे हुए कलाकारों ने अहम किरदार निभाए हैं। पूरी कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र की जमीन पर आधारित है, जिसका मुख्य कथानक रातभर चलने वाले पारंपरिक लोक अनुष्ठान ‘गोंधल’ के दौरान आकार लेता है। यह अनुष्ठान आगे चलकर रिश्तों की उलझनों, गहरे विश्वासघात और एक सुनियोजित हत्या के षड्यंत्र जैसे गंभीर रहस्यों की परतें खोलता है। सुभाष घई ने दर्शकों से की फिल्म देखने की खास अपील निर्देशक सुभाष घई ने निर्देशक संतोष दावखर की मौलिक सोच और कहानी को पर्दे पर उतारने के हुनर की सराहना की। उन्होंने कहा कि लेखक-निर्देशक दावखर और मुख्य कलाकार इशिता देशमुख ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुति से इस कहानी में जान फूंक दी है। घई ने दर्शकों और फिल्म प्रेमियों से अपील की कि वे इस सांस्कृतिक और रोमांचक फिल्म को अवश्य देखें, क्योंकि यह भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा की गहराई और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती पहचान का स्पष्ट प्रमाण है। इसका आप पर असर मराठी सिनेमा के ऑस्कर की दौड़ में शामिल होने से क्षेत्रीय फिल्म उद्योग और कलाकारों के लिए वैश्विक अवसर बढ़ेंगे। • भारतीय सिनेमा के लिए: क्षेत्रीय भाषाओं की स्थानीय कहानियों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक पहचान और सम्मान मिलेगा। इससे अन्य भारतीय फिल्मकारों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी मौलिक कहानियों को वैश्विक स्तर पर पेश करने का प्रोत्साहन मिलेगा। • कलाकारों और छात्रों के लिए: अभिनय संस्थानों से पेशेवर प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं के लिए बड़े रास्ते खुल रहे हैं। छोटे पर्दे और क्षेत्रीय सिनेमा में की गई मेहनत अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती है। • दर्शकों के लिए: दर्शकों को पारंपरिक भारतीय संस्कृति और लोक अनुष्ठानों पर आधारित गंभीर व प्रामाणिक कहानियां देखने का मौका मिलेगा। यह फिल्म लोक कला और सिनेमाई रहस्य के मिश्रण को बड़े पर्दे पर पेश करती है। • सिनेमा उद्योग के लिए: बड़े बजट की फिल्मों के मुकाबले मजबूत कथानक और लोक कथाओं पर आधारित फिल्मों का बाजार मजबूत होगा। फिल्म समीक्षक और वैश्विक वितरक भी क्षेत्रीय भारतीय फिल्मों में अधिक रुचि दिखाएंगे। ऐसा क्यों हुआ फिल्म 'गोंधल' को उसकी मौलिक कहानी, प्रामाणिक सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना के आधार पर ऑस्कर 2027 की दौड़ के लिए चुना गया है। • कान्स में मिली सराहना: फिल्म ने प्रतिष्ठित कान्स फिल्म समारोह के दौरान अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया था। इस वैश्विक स्वीकार्यता ने भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में इसके चयन को काफी मजबूती दी। • गहन लोककथा और रहस्य का संगम: फिल्म का कथानक महाराष्ट्र के पारंपरिक 'गोंधल' अनुष्ठान के दौरान रातभर में घटित होने वाले विश्वासघात और साजिश को दर्शाता है। यह अनूठी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि कहानी को वैश्विक दर्शकों के लिए बेहद सम्मोहक बनाती है। • मजबूत अभिनय और निर्देशन: संतोष दावखर के लेखन और निर्देशन के साथ-साथ इशिता देशमुख व पूरी टीम के प्रभावशाली अभिनय को उद्योग के जानकारों द्वारा सराहा गया है। अनुभवी फिल्म निर्माता सुभाष घई द्वारा फिल्म की खुली प्रशंसा भी इसके महत्व को दर्शाती है। सवाल-जवाब 1. ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि कौन सी फिल्म बनी है? संतोष दावखर के निर्देशन में बनी मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को 99वें अकादमी पुरस्कार में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए चुना गया है। 2. फिल्म ‘गोंधल’ में मुख्य भूमिका किसने निभाई है? इस फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनेत्री इशिता देशमुख ने निभाई है, जिनके साथ योगेश सोहोनी, किशोर कदम, सुरेश विश्वकर्मा और निषाद भोईर शामिल हैं। 3. सुभाष घई ने फिल्म की अभिनेत्री इशिता देशमुख के बारे में क्या कहा? सुभाष घई ने बताया कि इशिता उनके संस्थान व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल की पूर्व छात्रा हैं और उन्हें उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बेहद गर्व है। 4. इशिता देशमुख ने इससे पहले किस टीवी धारावाहिक में काम किया था? इशिता ने मुक्ता आर्ट्स द्वारा निर्मित दूरदर्शन के धारावाहिक ‘जानकी’ में 208 कड़ियों तक मुख्य भूमिका निभाई थी। 5. फिल्म ‘गोंधल’ की कहानी किस विषय पर आधारित है? यह फिल्म ग्रामीण महाराष्ट्र में रातभर चलने वाले पारंपरिक ‘गोंधल’ अनुष्ठान के दौरान धोखे, पारिवारिक तनाव और हत्या की साजिश के खुलासे पर आधारित है। 6. क्या फिल्म ‘गोंधल’ को पहले भी किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहा गया है? हां, ऑस्कर की दौड़ में शामिल होने से पहले इस फिल्म को कान्स में भी खासी सराहना मिल चुकी है। प्रेरणा और सबक इशिता देशमुख की यह यात्रा कड़ी मेहनत, कला के प्रति समर्पण और निरंतर सीखने की शक्ति को दर्शाती है। • बुनियादी प्रशिक्षण का महत्व: अभिनय की औपचारिक बारीकियों को गंभीरता से सीखने से कलाकारों को हर तरह के माध्यम में खुद को साबित करने का मजबूत आधार मिलता है। • छोटे पर्दे पर निरंतरता: 208 कड़ियों के टीवी धारावाहिक में मुख्य भूमिका निभाकर अपने काम के प्रति अनुशासन बनाए रखना बड़े मंचों के लिए रास्ता तैयार करता है। • अपनी जड़ों से जुड़ाव: पारंपरिक लोक अनुष्ठानों और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि पर आधारित कहानियों पर विश्वास करना वैश्विक पहचान दिला सकता है। • धैर्य और लगन: शुरुआत से लेकर डेब्यू पुरस्कार जीतने और फिर ऑस्कर प्रविष्टि तक का सफर साबित करता है कि प्रामाणिक प्रयास का फल जरूर मिलता है। https://trendkia.com/entertainment/marathi-philma-gondhal-skara-2027-men-bharata-ki-adhikarika-pravishti-subhash-ghai-ne-ishita-deshmukh-aura-puri-tima-ko-saraha-34208 TrendKia — Har trend, sabse pehle.