मयंक जोशी के किरदार के लिए मिला था सिर्फ 60 मिनट का वक्त, निखिल अंगरिश ने सुनाया पूजा मेरी जान की कास्टिंग का किस्सा क्राइम कोर्टरूम थ्रिलर पूजा मेरी जान में नजर आ रहे अभिनेता निखिल अंगरिश ने बताया कि कैसे महज एक घंटे की तैयारी में उन्होंने मयंक जोशी का रोल हासिल किया। साथ ही उन्होंने मृणाल ठाकुर और विजय राज के साथ काम करने का अनुभव भी साझा किया। क्राइम और कोर्टरूम ड्रामा थ्रिलर फिल्म ‘पूजा मेरी जान’ में अहम किरदार निभा रहे अभिनेता निखिल अंगरिश ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ने के पूरे सफर का खुलासा किया है। एक अनपेक्षित ऑडिशन से शुरू होकर बड़े पर्दे पर कई जाने-माने कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा करने तक, निखिल का यह अनुभव काफी दिलचस्प रहा। उन्होंने न केवल इस रोल के मिलने की परिस्थितियां साझा कीं, बल्कि फिल्म की मुख्य अभिनेत्री मृणाल ठाकुर की अभिनय क्षमता और दिग्गज अभिनेता विजय राज के साथ शूटिंग के दौरान सीखने के मौकों पर भी खुलकर बात की। दूसरे प्रोजेक्ट का ऑडिशन और 60 मिनट की चुनौती निखिल अंगरिश ने बताया कि इस थ्रिलर फिल्म का शुरुआती कामकाजी शीर्षक ‘डियर पूजा’ रखा गया था, जो उन्हें काफी आकर्षक लगा था। दरअसल, वह एक कास्टिंग स्टूडियो में किसी अन्य प्रोजेक्ट के लिए ऑडिशन देने पहुंचे थे। उसी समय वहां ‘कास्टिंग बे मुंबई’ की टीम मौजूद थी, जो इस फिल्म में मयंक जोशी के किरदार के लिए उपयुक्त चेहरे की तलाश कर रही थी। टीम ने निखिल से संपर्क किया और पूछा कि क्या वह मयंक जोशी के रोल के लिए ऑडिशन देना चाहेंगे। निखिल ने बिना देर किए इस मौके को स्वीकार कर लिया। हालांकि, चुनौती यह थी कि कास्टिंग टीम के पास समय बेहद सीमित था क्योंकि उन्हें अगले ही दिन कहीं और रवाना होना था। ऐसे में निखिल को तैयारी करने और कैमरे के सामने परफॉर्म करने के लिए सिर्फ एक घंटे का समय दिया गया। कॉल बैक और स्क्रिप्ट रीडिंग का दौर एक घंटे की संक्षिप्त तैयारी के बाद निखिल ने ऑडिशन दिया। इसके कुछ दिनों बाद उन्हें प्रोडक्शन टीम की तरफ से बुलावा आया और पुष्टि की गई कि उन्हें मयंक जोशी के रोल के लिए चुन लिया गया है। इस चयन से निखिल बेहद उत्साहित थे। चयन के बाद उन्हें पूरी स्क्रिप्ट सौंपी गई, जिसे समझने और अपने किरदार में ढलने के लिए उन्हें पर्याप्त समय मिला। किरदार की बारीकियों को पकड़ने के लिए नवजोत और विपाशा अरविंद के साथ व्यवस्थित रीडिंग सेशन आयोजित किए गए। इन सत्रों के दौरान निखिल को मयंक की पृष्ठभूमि, उसके व्यवहार और कहानी में उसके महत्व के बारे में गहराई से समझाया गया, जिससे उन्हें शूटिंग फ्लोर पर जाने से पहले अपने किरदार को पुख्ता करने में मदद मिली। मृणाल ठाकुर के अभिनय के कायल हुए निखिल सह-कलाकारों के साथ काम करने के अनुभव पर बात करते हुए निखिल ने बताया कि वह फिल्म ‘सुपर 30’ देखने के समय से ही मृणाल ठाकुर के काम के बड़े प्रशंसक रहे हैं। इतने प्रतिभाशाली कलाकारों के साथ एक ही फ्रेम में काम करना उनके लिए बेहद खास था। निखिल ने कहा कि मृणाल से मिलने पर उनकी सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास तुरंत महसूस होता है। जब उन्होंने फिल्म की स्क्रीनिंग देखी, तो वह यह देखकर दंग रह गए कि मृणाल ने पर्दे पर कई जटिल और अलग-अलग भावनाओं को कितनी सहजता और गहराई के साथ पेश किया है। विजय राज के साथ स्क्रीन शेयर करना रहा सपने जैसा दिग्गज अभिनेता विजय राज के साथ काम करने को निखिल अंगरिश ने अपने लिए एक सपना सच होने जैसा बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि वह बचपन से ही विजय राज की फिल्में देखकर बड़े हुए हैं और उनके अभिनय से हमेशा प्रभावित रहे हैं। सेट पर निखिल ने एक सीखने वाले छात्र की तरह विजय राज की कार्यशैली का बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने देखा कि विजय राज किसी बेहद सामान्य दृश्य को भी अपने अनूठे अंदाज से असाधारण बना देते हैं। एक ही दृश्य में वह एक पंक्ति पूरी गंभीरता से बोलते हैं और ठीक अगली पंक्ति में ऐसा हास्य पैदा कर देते हैं जो दर्शकों को हंसाने के साथ थोड़ा हैरान भी करता है। निखिल के अनुसार, एक मंझे हुए कलाकार की यही खूबियां किसी भी पटकथा को कागज़ से उठाकर पर्दे पर जीवंत बना देती हैं। इस फिल्म में निखिल अंगरिश के अलावा मृणाल ठाकुर, हुमा कुरैशी, विक्रम सिंह चौहान और विजय राज जैसे चर्चित चेहरे मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसका आप पर असर सिनेमा प्रेमियों और उभरते कलाकारों के लिए यह खबर ऑडिशन प्रक्रिया और फिल्म निर्माण के पर्दे के पीछे की कार्यप्रणाली को दर्शाती है। • कलाकारों के लिए सीख: त्वरित ऑडिशन के दबाव को संभालना किसी भी अभिनेता के करियर में बड़ा मोड़ ला सकता है। एक घंटे की तैयारी में रोल हासिल करना यह बताता है कि हर मौके के लिए तत्पर रहना कितना आवश्यक है। • थ्रिलर दर्शकों के लिए: क्राइम और कोर्टरूम ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों को एक मजबूत स्टारकास्ट देखने को मिलेगी। फिल्म में अनुभवी और युवा प्रतिभाओं का संयोजन कहानी को अधिक प्रभावशाली बनाता है। • उद्योग में नेटवर्किंग: कास्टिंग स्टूडियो में अचानक मिले अवसरों का लाभ उठाना नए कलाकारों के लिए करियर की दिशा बदल सकता है। यह घटना दर्शाती है कि सही समय पर सही जगह मौजूद होना अक्सर अप्रत्याशित प्रोजेक्ट्स दिला देता है। • स्क्रिप्ट वर्कशॉप का महत्व: शूटिंग से पहले निर्देशक और राइटर्स के साथ रीडिंग सेशन कलाकारों को अपने किरदार को गहराई देने में मदद करते हैं। यह प्रक्रिया किसी भी फिल्म की गुणवत्ता को शूटिंग फ्लोर पर जाने से पहले ही मजबूत बनाती है। ऐसा क्यों हुआ यह कास्टिंग अनुभव इसलिए सामने आया क्योंकि अभिनेता निखिल अंगरिश ने फिल्म की रिलीज और प्रमोशन के दौरान पर्दे के पीछे के किस्से साझा किए। • अचानक मिला अवसर: निखिल स्टूडियो में किसी दूसरे प्रोजेक्ट के लिए गए थे, जहां उसी वक्त कास्टिंग टीम इस किरदार के लिए ऑडिशन आयोजित कर रही थी। उन्होंने तुरंत इस मौके को लपक लिया। • समय की पाबंदी: कास्टिंग बे मुंबई की टीम को अगले ही दिन यात्रा पर निकलना था, जिसके चलते अभिनेता को तैयारी के लिए केवल एक घंटे का समय दिया गया। • चरित्र की तैयारी: रोल मिलने के बाद नवजोत और विपाशा अरविंद के साथ आयोजित रीडिंग सेशन ने अभिनेता को मयंक जोशी की पृष्ठभूमि को समझने में मदद की। सवाल-जवाब 1. फिल्म पूजा मेरी जान में निखिल अंगरिश कौन सा किरदार निभा रहे हैं? निखिल अंगरिश इस फिल्म में मयंक जोशी की भूमिका निभा रहे हैं। 2. फिल्म पूजा मेरी जान का शुरुआती शीर्षक क्या था? इस फिल्म का शुरुआती कामकाजी नाम 'डियर पूजा' रखा गया था। 3. निखिल अंगरिश को ऑडिशन की तैयारी के लिए कितना समय मिला था? उन्हें ऑडिशन तैयार करने और देने के लिए सिर्फ एक घंटे का समय दिया गया था क्योंकि कास्टिंग टीम को अगले दिन यात्रा पर जाना था। 4. मयंक जोशी के किरदार के लिए रीडिंग सेशन किसने आयोजित किए? नवजोत और विपाशा अरविंद के साथ रीडिंग सेशन आयोजित किए गए, जिन्होंने निखिल को किरदार की पृष्ठभूमि समझाई। 5. फिल्म पूजा मेरी जान में अन्य कौन से मुख्य कलाकार शामिल हैं? फिल्म में मृणाल ठाकुर, हुमा कुरैशी, विक्रम सिंह चौहान और विजय राज मुख्य भूमिकाओं में हैं। प्रेरणा और सबक निखिल अंगरिश का यह सफर दिखाता है कि तैयारी और तात्कालिक मौकों को स्वीकार करने का साहस किस तरह जीवन में बड़े अवसर खोल सकता है। • हर स्थिति के लिए तैयार रहें: किसी भी मौके के सामने आने पर घबराने के बजाय अपनी तैयारी पर भरोसा रखना सफलता दिलाता है। केवल एक घंटे के नोटिस पर परफॉर्म करना मानसिक तत्परता का प्रमाण है। • सीखने का रवैया बनाए रखें: वरिष्ठ सह-कलाकारों के साथ काम करते हुए एक छात्र की तरह निरीक्षण करना पेशेवर कौशल को निखारता है। विजय राज के काम को बारीकी से देखकर निखिल ने अपने अभिनय को समृद्ध किया। • सहयोग और तैयारी का सम्मान: स्क्रिप्ट रीडिंग और टीम डिस्कशन को गंभीरता से लेना अपने काम में उत्कृष्टता लाने की पहली सीढ़ी है। https://trendkia.com/entertainment/mayank-joshi-ke-kiradara-ke-lie-mila-tha-sirpha-60-minata-ka-vakta-nikhil-angrish-ne-sunaya-pooja-meri-jaan-ki-kastinga-ka-kissa-43386 TrendKia — Har trend, sabse pehle.