मुश्ताक खान का निधन: हॉकी के मैदान से फिल्मों के सफर तक, एक हादसे ने बदल दी थी जिंदगी दिग्गज अभिनेता मुश्ताक खान का 24 सितंबर को निधन हो गया। उनके शुरुआती संघर्ष, बालाघाट के दिनों और बॉलीवुड के सफर पर एक नजर। सिनेमा जगत के मशहूर अभिनेता मुश्ताक खान के निधन से उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई है। वह 24 सितंबर की शाम को इस दुनिया को अलविदा कह गए। इसके अगले दिन यानी 25 सितंबर को जुमे की नमाज के बाद उन्हें मुंबई के यारी रोड स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह पांच साल पहले कैंसर से जंग जीत चुके थे, लेकिन बीमारी ने एक बार फिर वापसी की जिसके बाद उन्हें मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह चार सितंबर तक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद 24 सितंबर की शाम को उनके निधन की खबर सामने आई। बैहर में जन्म और रंगमंच से जुड़ाव मुश्ताक खान का जन्म 31 दिसंबर 1959 को बालाघाट जिले के बैहर में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से कपड़ा और होटल के कारोबार से जुड़ा हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा बैहर में ही पूरी हुई। बचपन से ही उन्हें अभिनय के प्रति गहरा रुझान था, जिसके चलते वह रामलीला और स्थानीय नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करते थे। अभिनय की बारीकियों को सीखने के लिए उन्होंने भोपाल और दिल्ली के रंगमंच का रुख किया और थिएटर से जुड़कर अपने हुनर को मांजा। बालाघाट के दिन और किराए का कमरा शिक्षा के सिलसिले में वह बैहर से बालाघाट आए थे और यहां के पीजी कॉलेज से अर्थशास्त्र में एमए की पढ़ाई कर रहे थे। हालांकि, मास्टर डिग्री के फाइनल ईयर से पहले ही उन्होंने बालाघाट छोड़ दिया था। वह साल 1974 में बालाघाट आए थे और राजकुमार रायजादा के घर पर किराए का कमरा लेकर रहते थे। शरद श्रीवास्तव के निर्देशन में बने नाटक ‘गुनाह’ में उन्हें अपने अभिनय के लिए पहला अवार्ड मिला था। उनकी मिमिक्री की कला इतनी जबरदस्त थी कि वह बिना किसी विषय की पूरी जानकारी के भी घंटों मंच पर समा बांध सकते थे। एक बार शिवाजी के बारे में कोई खास जानकारी न होने के बावजूद उन्होंने लगातार 45 मिनट तक शानदार मिमिक्री करके सबको हैरान कर दिया था। कर्फ्यू की घटना और मुंबई का रुख बालाघाट में 20 फरवरी 1975 को एक थाना कांड हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने कई युवाओं को हिरासत में ले लिया था। इस घटना के कारण शहर में करीब एक महीने तक कर्फ्यू जैसे हालात बने रहे। उनके पिता को चिंता सताने लगी कि इस माहौल में उनके बेटे का करियर बर्बाद न हो जाए। ऐसी स्थिति में उनके दोस्तों ने मिलकर एक योजना बनाई और उन्हें छिपकर जबलपुर जाने वाली ट्रेन में बिठा दिया। वहां से वह मुंबई रवाना हो गए और एक कामयाब कलाकार बनकर ही वापस लौटे। जब भी वह बालाघाट आते और अपने घर पहुंचते, तो राजकुमार रायजादा और मुश्ताक एक-दूसरे को ‘लफाडू’ कहकर पुकारते थे। बालाघाट के पूर्व सांसद कंकर मुंजारे का कहना है कि जब मुश्ताक खान पढ़ाई के लिए बालाघाट आए थे, तब कुछ लोग उन्हें परेशान किया करते थे। ऐसे में वह कंकर से मदद मांगते थे और कंकर उन्हें बदमाशों से बचाते थे, जिससे दोनों गहरे दोस्त बन गए थे। कंकर 1981 में जब मुंबई गए थे, तब उनकी मुलाकात मुश्ताक से हुई थी और मुश्ताक उनके चुनाव प्रचार में भी हिस्सा लेने आते थे। संघर्ष भरे शुरुआती दिन और फिल्मी दुनिया में एंट्री मुंबई पहुंचने के बाद उनके पास रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं था। उन्होंने कई रातें रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म और फुटपाथ पर जागकर काटीं। जेब में फूटी कौड़ी नहीं होने के कारण वह स्थानीय किराने वाले को पैसे देकर अपने पास संदेश मंगवाते थे। आखिरकार उनकी किस्मत ने पलटी खाई और उनके दोस्त सुरेश जारगर उन्हें आईपीटीए थिएटर ले गए। वहां शंकर शेष के नाटक ‘द्रोणाचार्य’ में उनके अभिनय को देखकर वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया। इसी नाटक ने उनके लिए बॉलीवुड के दरवाजे खोले और उन्होंने साल 1980 में सईद मिर्जा की फिल्म ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ से फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने मुड़कर नहीं देखा। अपने चार दशक लंबे करियर में उन्होंने 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। ‘आशिकी’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘हेरा फेरी’, ‘गदर’, ‘मुझसे शादी करोगी’ और साल 2007 में आई फिल्म ‘वेलकम’ में निभाया गया बल्लू का किरदार आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है। सवाल-जवाब 1. मुश्ताक खान का निधन कब और कहां हुआ? मुश्ताक खान का निधन 24 सितंबर की शाम को हुआ और उन्हें 25 सितंबर को मुंबई के यारी रोड स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। 2. मुश्ताक खान का जन्म कहां हुआ था? मुश्ताक खान का जन्म 31 दिसंबर 1959 को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर में हुआ था। 3. उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत किस फिल्म से की थी? उन्होंने साल 1980 में सईद मिर्जा की फिल्म ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ से फिल्मों में कदम रखा था। 4. मुश्ताक खान ने अपने करियर में कितनी फिल्मों में काम किया? अपने 40 साल लंबे करियर में उन्होंने 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। प्रेरणा और सबक मुश्ताक खान के जीवन का संघर्ष और सफलता का सफर कला प्रेमियों और संघर्षरत कलाकारों के लिए प्रेरणादायक है। • कड़ा संघर्ष: मुंबई पहुंचने के बाद जिनके पास रहने की छत नहीं थी और जो फुटपाथ पर सोते थे, उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर 250 से अधिक फिल्मों में अपनी पहचान बनाई। • थिएटर से शुरुआत: स्थानीय नाटकों और रंगमंच से अभिनय की बारीकियां सीखकर उन्होंने बड़े पर्दे पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। • विपरीत परिस्थितियों में डटे रहना: जीवन में कर्फ्यू और आर्थिक तंगी जैसी कई बाधाएं आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने सपने को पूरा किया। • बहुमुखी प्रतिभा: बिना किसी पूर्व तैयारी के लंबी मिमिक्री करना और हर छोटे-बड़े किरदार में जान डालना उनकी लगन का प्रमाण था। https://trendkia.com/entertainment/mushtaq-khan-ka-nidhana-hoki-ke-maidana-se-philmon-ke-saphara-taka-eka-hadase-ne-badala-di-thi-jindagi-39040 TrendKia — Har trend, sabse pehle.