नीम करोली बाबा की बेटी गिरिजा जी को खूब भाई फिल्म 'हनुमान अंश', निर्माता रागिनी सोना ने साझा की भावुक मुलाकात फिल्म 'हनुमान अंश' की निर्माता रागिनी सोना ने बताया कि नीम करोली बाबा की बेटी गिरिजा जी इस फिल्म को करीब 15 बार देख चुकी हैं और हर बार भावुक हो जाती हैं। सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच चर्चा बटोर रही फिल्म 'हनुमान अंश' से जुड़ा एक बेहद भावुक और हैरान कर देने वाला वाकया सामने आया है। फिल्म की निर्माता रागिनी सोना ने इस आध्यात्मिक प्रोजेक्ट से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि नीम करोली बाबा की सुपुत्री गिरिजा जी, जिन्हें श्रद्धालु प्यार से अम्मा जी कहते हैं, इस फिल्म को अब तक तकरीबन 15 बार देख चुकी हैं। निर्माता के अनुसार, जब भी वह पर्दे पर इस कहानी को देखती हैं, उनकी आंखें आंसुओं से छलक उठती हैं। इस मुलाकात के दौरान अम्मा जी ने रागिनी के परिवार से जुड़े पचास दशक पुराने ऐसे विवरण भी साझा किए, जिसे सुनकर फिल्म की पूरी टीम स्तब्ध रह गई। रिलीज से पहले आशीर्वाद लेने की जद्दोजहद रागिनी सोना और फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के मन में काम शुरू करने से पहले ही यह स्पष्ट विचार था कि वे नीम करोली बाबा के परिवार से संपर्क करेंगे। दोनों की दिली ख्वाहिश थी कि इस महत्वपूर्ण सिनेमाई सफर की शुरुआत से पूर्व उन्हें बाबा की बेटी गिरिजा जी का पावन आशीर्वाद प्राप्त हो। हालांकि, उनसे संपर्क साधना कतई आसान नहीं था। काफी प्रयासों और लंबी मशक्कत के बाद आखिरकार फोन पर दोनों की बातचीत अम्मा जी से संभव हो पाई। जब रागिनी और विशाल ने उनसे आग्रह किया कि वे इस फिल्म को जरूर देखें, तो अम्मा जी ने सहजता से उत्तर दिया कि जब भी उन्हें फुर्सत मिलेगी, वे इसे अवश्य देखेंगी। समय बीतने के साथ यह जुड़ाव इतना गहरा हुआ कि अम्मा जी ने इस रचना को लगभग 15 बार देखा और हर बार उनके भीतर गहरी आध्यात्मिक भावनाएं उमड़ पड़ीं। पचास साल पुरानी बातें और पिता का नाम इस संवाद के दौरान अम्मा जी ने जब यह सवाल किया कि आखिर इस विषय पर फिल्म तैयार करने की प्रेरणा कहां से मिली, तो रागिनी सोना ने अपने बचपन का संस्मरण साझा किया। रागिनी ने बताया कि जब वह मात्र छह वर्ष की नन्हीं बालिका थीं, तब उन्हें साक्षात नीम करोली बाबा के दर्शन का सौभाग्य मिला था। वहीं, निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म के निर्माण में किए गए गहन शोध और ऐतिहासिक तथ्यों की पड़ताल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जब बातचीत के क्रम में रागिनी ने उल्लेख किया कि उनके पिता की तैनाती नैनीताल में रही थी, तब अम्मा जी ने बिना किसी पूर्व जानकारी के उनके पिता का नाम तुरंत बता दिया। अम्मा जी यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने रागिनी के पुराने आवास का सटीक पता और उनके बड़े भाई का जिक्र भी खुद अपनी जुबानी किया, जबकि यह पूरा प्रसंग करीब 50 साल पुराना था। सादगी से भरा परिवार और अलौकिक अनुभव अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान रागिनी सोना की भेंट नीम करोली बाबा के पोते धनंजय जी से भी हुई। उन्होंने अनुभव किया कि बाबा का समूचा परिवार आज भी उसी असाधारण सादगी और विनम्रता के साथ जीवन यापन कर रहा है, जो कभी खुद बाबा की पहचान हुआ करती थी। रागिनी ने कहा कि बाबा के परिजनों से मिलना और उनका स्नेह पाना उनके जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य है। गिरिजा जी से अपनी पहली आमने-सामने की मुलाकात को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अम्मा जी के दर्शन करते ही ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात नीम करोली बाबा की दिव्य छवि ही सामने उपस्थित हो। रागिनी ने यह भी स्वीकारा कि इस मुलाकात से पूर्व उन्हें इस बात की तनिक भी जानकारी नहीं थी कि बाबा की कोई बेटी भी संसार में मौजूद हैं। इसका आप पर असर धार्मिक और पौराणिक सिनेमा देखने वाले दर्शकों के लिए यह खबर फिल्म के भावनात्मक प्रभाव को दर्शाती है। • दर्शकों के लिए: यह जानकारी दर्शाती है कि फिल्म 'हनुमान अंश' की पटकथा और प्रस्तुति में गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव मौजूद है। नीम करोली बाबा के अनुयायी और सिनेमा प्रेमी इस फिल्म के प्रति अधिक उत्सुकता दिखा सकते हैं। • आध्यात्मिक श्रद्धालुओं के लिए: बाबा के परिवार का समर्थन इस बात का प्रमाण है कि फिल्म में श्रद्धा और परंपरा का सम्मान रखा गया है। जो लोग बाबा की शिक्षाओं से जुड़े हैं, वे इस सिनेमाई अनुभव को प्राथमिकता दे सकते हैं। • फिल्म निर्माण जगत के लिए: वास्तविक शोध और व्यक्तिगत संस्मरणों पर आधारित सिनेमा दर्शकों के साथ गहरा संवाद स्थापित करता है। फिल्म निर्माता अब पौराणिक विषयों में प्रामाणिक अनुभवों को जोड़ने पर अधिक बल देंगे। • आगामी दर्शक वर्ग के लिए: सकारात्मक चर्चाओं के चलते सिनेमाघरों में फिल्म की मांग और टिकटिंग पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है। दर्शक टिकट बुक करने से पहले इस प्रकार के भावनात्मक पहलुओं को महत्व देते हैं। ऐसा क्यों हुआ फिल्म 'हनुमान अंश' के निर्माण और इस मुलाकात के पीछे निर्माता रागिनी सोना के बचपन का आध्यात्मिक अनुभव तथा टीम की गहन शोध प्रक्रिया मुख्य वजह रही। • बचपन का दर्शन: जब रागिनी सोना छह साल की थीं, तब उनकी मुलाकात नीम करोली बाबा से हुई थी। उसी बाल्यकाल की स्मृति ने उन्हें इस विषय पर फिल्म तैयार करने के लिए प्रेरित किया। • आशीर्वाद की इच्छा: निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और रागिनी सोना चाहते थे कि काम शुरू करने से पहले परिवार का मार्गदर्शन और आशीर्वाद मिले। इसी कारण उन्होंने बाबा की बेटी गिरिजा जी से फोन पर संपर्क साधा। • गहन शोध का प्रभाव: निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने निर्माण से पूर्व व्यापक तथ्य जुटाए थे। जब उन्होंने अम्मा जी को विवरण दिए, तो उन्होंने भी परिवार के पुराने नैनीताल के दिनों की बातें साझा कीं। सवाल-जवाब 1. फिल्म 'हनुमान अंश' की निर्माता कौन हैं? इस फिल्म की निर्माता रागिनी सोना हैं, जिन्होंने निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम किया है। 2. नीम करोली बाबा की बेटी गिरिजा जी ने फिल्म कितनी बार देखी है? रागिनी सोना के अनुसार, गिरिजा जी (अम्मा जी) इस फिल्म को अब तक लगभग 15 बार देख चुकी हैं। 3. अम्मा जी ने रागिनी के परिवार के बारे में क्या बताया? अम्मा जी ने रागिनी के पिता का नाम, उनके पुराने घर का पता और उनके बड़े भाई का जिक्र बिना किसी को बताए खुद याद कर दिया। 4. रागिनी सोना नीम करोली बाबा के परिवार के किस अन्य सदस्य से मिलीं? रागिनी सोना ने नीम करोली बाबा के पोते धनंजय जी से भी मुलाकात की और उनके परिवार की सादगी की प्रशंसा की। https://trendkia.com/entertainment/neem-karoli-baba-ki-beti-girija-ji-ko-khuba-bhai-philma-hanuman-ansh-nirmata-ragini-sona-ne-sajha-ki-bhavuka-mulakata-35390 TrendKia — Har trend, sabse pehle.