नीम करोली बाबा पर बनी 'हनुमान अंश' ने कमाए 50 करोड़, फिर भी राज्यों में टैक्स-फ्री फैसले का क्यों है इंतजार? कम बजट में बनी फिल्म 'हनुमान अंश' ने 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर मिसाल कायम की है, लेकिन कई राज्यों में अन्य फिल्मों को मिली कर छूट के बीच इसे टैक्स-फ्री किए जाने का फैसला अभी अटका हुआ है। फिल्म जगत में सफलता का दायरा केवल बड़े सितारों की मौजूदगी, विशाल बजट या करोड़ों रुपये के प्रचार अभियान तक सीमित नहीं रहता। कई बार विषय-प्रधान और सादगी से भरी फिल्में बिना किसी शोर-शराबे के दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बना लेती हैं। नीम करोली बाबा के जीवन, आध्यात्मिक दर्शन और जनसेवा के संदेश पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' इसका एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है। 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई इस फिल्म ने शुरुआती दिनों में धीमी शुरुआत के बाद दर्शकों की मौखिक तारीफ के दम पर बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त पकड़ बना ली। करीब 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने भारत में 50 करोड़ रुपये से अधिक के कलेक्शन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। सांस्कृतिक जुड़ाव और कर राहत की उठती मांग इस फिल्म की व्यापक सफलता का कारण सिर्फ इसकी पटकथा नहीं है, बल्कि इसके संगीत और भजनों ने भी जनमानस को गहराई से प्रभावित किया है। फिल्म का चर्चित भजन 'मैंने तेरे ही भरोसे' और बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोकगायक सुनील लोधी की सुरीली आवाज गांव-कस्बों से लेकर शहरों तक गूंज रही है। एक छोटी सी स्वतंत्र फिल्म ने वह उपलब्धि हासिल कर दिखाई है, जिसे हासिल करने में कई बड़े बजट की व्यावसायिक फिल्में असफल रह जाती हैं। फिल्म की बढ़ती लोकप्रियता के बीच अब यह सार्वजनिक सवाल उठने लगा है कि जब यह फिल्म सामाजिक सद्भाव और करुणा का संदेश दे रही है, तो इसे अब तक किसी राज्य में टैक्स-फ्री क्यों नहीं घोषित किया गया है। उपलब्ध आधिकारिक विवरणों के अनुसार, 2 सितंबर 2026 तक भारत के किसी भी राज्य सरकार द्वारा इस फिल्म को मनोरंजन कर या SGST में छूट देने की कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। हालांकि, मध्य प्रदेश में इसे कर-मुक्त करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर मांग उठ चुकी है। 29 अगस्त 2026 को एक नागरिक संगठन ने मध्य प्रदेश सरकार के समक्ष औपचारिक आवेदन सौंपकर 'हनुमान अंश' को राज्य में टैक्स-फ्री किए जाने का अनुरोध किया था, जिस पर फैसला होना अभी बाकी है। फिल्मों को टैक्स-फ्री घोषित करने के नीतिगत मानक इस विषय पर यह समझना आवश्यक है कि क्या हर चर्चित या व्यावसायिक रूप से सफल फिल्म को टैक्स-फ्री किया जाना चाहिए। राज्य सरकारों का यह मानना रहता है कि केवल बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करने या सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने के आधार पर किसी भी फिल्म को कर में राहत नहीं दी जा सकती। राज्यों के पास यह तय करने का पूर्ण संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकार होता है कि वे किस विषय को कर प्रोत्साहन के योग्य मानते हैं। आमतौर पर किसी फिल्म को टैक्स-फ्री करने के पीछे कुछ तय नीतिगत आधार होते हैं। यदि कोई फिल्म किसी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों, शिक्षा, कला, संस्कृति, जनजागरूकता या सामाजिक सुधार के संदेश को बड़े पैमाने पर आम जनता तक पहुंचाती है, तो सरकारें उसे कर राहत देने पर विचार करती हैं। उद्देश्य यह होता है कि टिकट की दरें सस्ती होने से अधिक से अधिक नागरिक उस प्रेरणादायक संदेश को देख सकें। नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित 'हनुमान अंश' में करुणा, निस्वार्थ सेवा और आध्यात्मिक चेतना का चित्रण किया गया है, जिसके आधार पर दर्शक और सामाजिक संगठन इसे सार्वजनिक नीति के तहत कर राहत का हकदार मान रहे हैं। GST व्यवस्था में 'टैक्स-फ्री' का वास्तविक कानूनी गणित जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद 'टैक्स-फ्री फिल्म' की परिभाषा और प्रक्रिया में मौलिक बदलाव आया है। पुराने समय की तरह अब राज्यों के पास स्वतंत्र मनोरंजन कर हटाने का सीधा अधिकार नहीं है, क्योंकि अब सिनेमा टिकट पूरी तरह जीएसटी के दायरे में आते हैं। दिसंबर 2018 में आयोजित जीएसटी काउंसिल की बैठक में सिनेमा टिकटों पर कर की दरों में संशोधन किया गया था। इसके तहत ₹100 तक के टिकटों पर जीएसटी दर को 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत किया गया था, जबकि ₹100 से अधिक कीमत वाले टिकटों पर जीएसटी दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था। कानूनी प्रक्रिया के दृष्टिकोण से, केंद्रीय माल और सेवा कर (CGST) अधिनियम की धारा 11 और संबंधित राज्य जीएसटी (SGST) प्रावधानों के तहत जनहित में किसी वस्तु या सेवा को आंशिक या पूर्ण कर छूट दी जा सकती है। इसके लिए जीएसटी काउंसिल की सिफारिशों और राज्य वित्त विभाग द्वारा जारी विशेष अधिसूचना की आवश्यकता होती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि थिएटर मालिक या निर्माता अपनी इच्छा से टिकट सस्ता नहीं कर सकते; इसके लिए राज्य सरकार को बाकायदा कानूनी आदेश जारी करना पड़ता है। ₹100 की टिकट पर दर्शकों को कितनी मिलती है सीधी बचत? दर्शक अक्सर यह सोचते हैं कि फिल्म टैक्स-फ्री होते ही टिकट के दाम आधे या बहुत कम हो जाएंगे, जबकि वास्तविक गणित अलग होता है। इसे एक व्यावहारिक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि किसी सिनेमा घर में एक टिकट की अंतिम बिक्री दर ₹100 है, जिसमें 12 प्रतिशत जीएसटी शामिल है। चूकि ₹100 कर-सहित अंतिम मूल्य है, इसलिए इसमें कुल कर का हिस्सा ₹12 न होकर लगभग ₹10.71 होता है। जीएसटी का नियम यह है कि एकत्रित कर का आधा हिस्सा केंद्र सरकार (CGST) और आधा हिस्सा राज्य सरकार (SGST) के पास जाता है। इस प्रकार ₹100 की टिकट में राज्य सरकार का SGST हिस्सा केवल करीब ₹5.36 बनता है। जब कोई राज्य सरकार किसी फिल्म को टैक्स-फ्री घोषित करती है, तो वह आमतौर पर केवल अपना SGST हिस्सा ही माफ करती है। इसका अर्थ यह हुआ कि ₹100 की टिकट पर दर्शक को वास्तव में करीब ₹5.36 की ही सीधी राहत मिल पाती है। यदि ₹100 की राशि टिकट की मूल कीमत (टैक्स से पहले) है, तो उस पर 12 प्रतिशत की दर से ₹12 जीएसटी लगेगा, जिसमें राज्य का हिस्सा ₹6 होगा। दर्शकों को मिलने वाली अंतिम राहत टिकट के बेस प्राइस, थिएटर के अन्य मेंटेनेंस शुल्कों और कर छूट के स्वरूप पर निर्भर करती है। इसलिए 'टैक्स-फ्री' की घोषणा का अर्थ टिकट का ₹88 या ₹94 हो जाना नहीं है; वास्तविक बचत अक्सर कुछ रुपये तक ही सीमित रहती है। बीते एक वर्ष में राज्यों द्वारा टैक्स-फ्री की गई प्रमुख फिल्में 2 सितंबर 2025 से 2 सितंबर 2026 के बीच की अवधि पर नजर डालें तो देश के अलग-अलग राज्यों ने विभिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों से कई फिल्मों को कर राहत प्रदान की है • 120 बहादुर: इस फिल्म को दिल्ली और राजस्थान सरकार द्वारा टैक्स-फ्री घोषित किया गया था। राजस्थान सरकार ने फिल्म को छह महीने की अवधि के लिए SGST से पूर्ण छूट दी थी। • धुरंधर: जनवरी 2026 में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के प्रशासन ने इस फिल्म को कर-मुक्त करने का आदेश जारी किया। सरकार ने इस फैसले को लद्दाख में फिल्म शूटिंग को प्रोत्साहन देने और क्षेत्र को पर्यटन गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने के प्रयासों से जोड़ा था। • शतक: संघ के 100 वर्ष: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर बनी इस फिल्म को मध्य प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी राज्य सरकारों द्वारा कर में छूट प्रदान की गई। • कृष्णावतारम पार्ट 1: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग देखने के बाद इसे राज्य भर में टैक्स-फ्री करने का ऐलान किया था और सभी जिलों में विशेष प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश दिए थे। • भारत भाग्य विधाता: इस फिल्म को दिल्ली और हरियाणा सरकारों ने कर राहत दी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं फिल्म देखने के बाद इसे राज्य में टैक्स-फ्री करने की घोषणा की थी। • आफा: उड़िया भाषा की इस फिल्म को जुलाई 2026 में ओडिशा सरकार ने टैक्स-फ्री घोषित किया था। सरकार ने अंगदान के प्रति जन जागरूकता फैलाने वाले इसके महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश को कर छूट का मुख्य आधार बताया था। इसका आप पर असर सिनेमा टिकटों पर मिलने वाली कर छूट का सीधा असर दर्शकों की जेब और सिनेमाघरों की दर्शक संख्या पर पड़ता है। • भारत में: दर्शक 'टैक्स-फ्री' शब्द सुनकर अक्सर बड़ी छूट की उम्मीद करते हैं, लेकिन जीएसटी व्यवस्था में केवल राज्य का SGST हिस्सा माफ होने के कारण ₹100 की टिकट पर दर्शक को औसतन ₹5.36 तक की ही सीधी बचत होती है। • मध्य प्रदेश में: नीम करोली बाबा के भक्तों और स्थानीय नागरिकों द्वारा 29 अगस्त 2026 को दिए गए आवेदन पर यदि राज्य सरकार फैसला लेती है, तो राज्य के सिनेमाघरों में फिल्म देखना थोड़ा किफायती हो जाएगा। • फिल्म दर्शकों के लिए: कर राहत से टिकट दरों में होने वाली मामूली कमी भी बड़े परिवारों और समूह में फिल्म देखने वाले दर्शकों को सिनेमाघर आने के लिए प्रोत्साहित करती है। • छोटे बजट के निर्माताओं के लिए: कर प्रोत्साहन मिलने से आध्यात्मिक और सामाजिक विषयों पर बनने वाली कम बजट की फिल्मों को बड़ा दर्शक वर्ग और अतिरिक्त प्रचार लाभ मिलता है। सवाल-जवाब 1. फिल्म 'हनुमान अंश' किस पर आधारित है और यह कब रिलीज हुई थी? 'हनुमान अंश' नीम करोली बाबा के जीवन, आध्यात्मिक संदेश और निस्वार्थ सेवा पर आधारित फिल्म है, जो 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। 2. फिल्म 'हनुमान अंश' का बजट कितना था और इसने कुल कितनी कमाई की? यह फिल्म करीब ₹2 करोड़ के सीमित बजट में बनाई गई थी और दर्शकों के सकारात्मक प्रचार के दम पर इसने ₹50 करोड़ से अधिक का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दर्ज किया है। 3. टैक्स-फ्री होने पर ₹100 की सिनेमा टिकट पर दर्शकों को कितनी बचत होती है? जीएसटी व्यवस्था के तहत राज्य सरकार द्वारा अपना SGST हिस्सा माफ करने पर ₹100 की टिकट (12% जीएसटी समेत) पर दर्शक को लगभग ₹5.36 की ही सीधी राहत मिलती है। 4. क्या 2 सितंबर 2026 तक किसी राज्य ने 'हनुमान अंश' को टैक्स-फ्री घोषित किया है? 2 सितंबर 2026 तक किसी भी राज्य सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से टैक्स-फ्री नहीं किया है, हालांकि 29 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश सरकार के पास इसके लिए आवेदन दिया गया था। 5. हाल के एक साल में किन प्रमुख फिल्मों को विभिन्न राज्यों में टैक्स-फ्री किया गया है? 2 सितंबर 2025 से 2 सितंबर 2026 के बीच '120 बहादुर', 'धुरंधर', 'शतक: संघ के 100 वर्ष', 'कृष्णावतारम पार्ट 1', 'भारत भाग्य विधाता' और 'आफा' जैसी फिल्मों को राज्यों में कर छूट मिली है। प्रेरणा और सबक एक छोटी और कम बजट की फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ की कमाई पार करना स्वतंत्र रचनाकारों के लिए प्रेरणादायक है। • विषय की प्रामाणिकता: बिना बड़े बजट और भारी प्रचार के दर्शकों तक पहुंचने के लिए कहानी का भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत होना आवश्यक है। • लोक कला और संगीत की ताकत: स्थानीय बोलियों और लोक गायकों की आवाज से सजे भजन दर्शकों के साथ गहरा और स्थायी जुड़ाव कायम करते हैं। • माउथ पब्लिसिटी का महत्व: सकारात्मक दर्शक समीक्षाएं किसी भी फिल्म को सीमित संसाधनों के बावजूद ऐतिहासिक सफलता तक पहुंचा सकती हैं। https://trendkia.com/entertainment/neem-karoli-baba-para-bani-hanuman-ansh-ne-kamae-50-karora-phira-bhi-taiksa-phri-phaisale-ka-kyon-hai-intajara-26615 TrendKia — Har trend, sabse pehle.