नेपाल आपदा के बाद मानसी पारेख ने बयां की कैलाश मानसरोवर यात्रा की यादें, शेयर किया खास वीडियो अभिनेत्री मानसी पारेख ने अपनी कैलाश मानसरोवर यात्रा की खूबसूरत झलकियां साझा की हैं। तिब्बती कैलेंडर के 'घोड़े के वर्ष' में हुई इस कठिन यात्रा के साथ ही उन्होंने नेपाल त्रासदी से अपने बाल-बाल बचने का अनुभव भी बताया। अभिनेत्री मानसी पारेख ने हाल ही में अपनी कैलाश मानसरोवर की आध्यात्मिक यात्रा पूरी की है और इस यादगार सफर की खूबसूरत झलकियां साझा की हैं। उन्होंने इस यात्रा को अपने जीवन के अब तक के सबसे खास और परिवर्तनकारी अनुभवों में से एक बताया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए अभिनेत्री ने अत्यधिक ऊंचाई पर 20 किमी पैदल चलने, अचानक हुई बारिश का सामना करने और अंत में घोड़े पर सवार होकर यात्रा का अंतिम हिस्सा पूरा करने के अपने अनुभवों को याद किया। यह सफर इसलिए भी खास रहा क्योंकि नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा से ठीक पहले वे वहां से सुरक्षित गुजर चुकी थीं। सुबह की तैयारी और उच्च पर्वतीय क्षेत्र की जरूरी सावधानियां अपनी यात्रा की शुरुआत को याद करते हुए मानसी पारेख ने बताया कि पहाड़ों की हाड़ कंपाने वाली ठंड के बावजूद वे अत्यधिक उत्साह के कारण सुबह 5 बजे बिना किसी अलार्म के उठ गईं। अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शरीर को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पहाड़ों में शुष्क हवा के कारण नाक से खून निकलने की समस्या हो जाती है, जिससे बचने के लिए नाक में कैस्टर ऑयल (अरंडी का तेल) लगाना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, पहाड़ों के कठिन वातावरण में कोई ब्यूटी प्रॉडक्ट या मेकअप काम नहीं करता, केवल एक चीज सबसे ज्यादा मायने रखती है और वह है ढेर सारा सनब्लॉक ताकि तेज धूप से त्वचा का बचाव हो सके। ऊंचाई पर चढ़ाई के साथ-साथ भारी बैकपैक भी खुद ही उठाना पड़ता है, इसलिए अभिनेत्री ने चढ़ाई शुरू करने से पहले भरपेट और भारी नाश्ता किया। नाश्ता करने के बाद जब उनकी टीम बस की ओर बढ़ी, तो उन्होंने देखा कि मौसम अचानक बहुत खराब हो गया था और काले बादलों को देखकर बारिश होने के साफ आसार लग रहे थे। यमद्वार का आध्यात्मिक महत्व और तिब्बती 'घोड़े का वर्ष' मानसी पारेख और उनके साथी यात्रियों ने अपनी पैदल यात्रा यमद्वार से शुरू की। यमद्वार का सांकेतिक और धार्मिक महत्व बहुत गहरा है। माना जाता है कि यमद्वार में प्रवेश करते ही यात्री अपनी पुरानी सभी शिकायतों, दुखों और परेशानियों को पीछे छोड़ देते हैं और एक नए आध्यात्मिक स्वरूप की ओर कदम बढ़ाते हैं। इस वर्ष की यात्रा का महत्व इसलिए भी कई गुना बढ़ गया क्योंकि तिब्बती कैलेंडर के अनुसार यह 'घोड़े का वर्ष' है। तिब्बती संस्कृति में ऐसी मान्यता है कि घोड़े के वर्ष में कैलाश मानसरोवर की यात्रा करना 13 बार यात्रा करने के बराबर पुण्य प्रदान करता है। अभिनेत्री ने साझा किया कि घोड़े का वर्ष पूर्ण समर्पण, आंतरिक परिवर्तन और ईश्वर में विलीन होने का प्रतीक है। उनके लिए यह यात्रा इसी समर्पण और बदलाव का जरिया बनी और यह अद्भुत सफर हमेशा के लिए उनके दिल में बस गया है। 20 किमी की कठिन चढ़ाई और कैलाश पर्वत के पूर्वी छोर के दर्शन जैसे-जैसे यात्रा ऊंचाई की ओर बढ़ती गई, आसपास के प्राकृतिक नजारे और भी ज्यादा मनमोहक होते गए। 20 किमी लंबे कठिन पैदल मार्ग के दौरान अपनी ऊर्जा बनाए रखने के लिए मानसी अपने साथ घर से लाया हुआ क्विक स्नैक खाती रहीं, जिसमें उनकी मां द्वारा पैक किए गए ड्राई फ्रूट्स शामिल थे। पहाड़ों के खूबसूरत दृश्यों के बीच अचानक उन्हें पवित्र कैलाश पर्वत का पूर्वी छोर दिखाई दिया। पूर्वी छोर का अलौकिक दृश्य देखते ही उन्हें असीम शांति और आत्मिक संतुष्टि का अनुभव हुआ, जिससे पूरी यात्रा की थकान मिट गई और सब कुछ सार्थक लगने लगा। इसके बाद, यात्रा के अंतिम 1 किमी के हिस्से को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने शेरपा के साथ घोड़े पर बैठकर जाने का निर्णय लिया। नेपाल की त्रासदी से बाल-बाल बचने का अनुभव आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ मानसी पारेख ने संकट के समय मिले जीवनदान के लिए भी आभार व्यक्त किया। यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि जिस जगह पर नेपाल में विनाशकारी बाढ़ आई, वहां त्रासदी से ठीक 5 दिन पहले उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया गया था। लेकिन कुछ ही दिनों में वह पूरा इलाका पानी में डूब गया। उन्होंने बताया कि इस तरह कुदरत के प्रकोप से बाल-बाल बचकर निकलना उनके लिए एक चमत्कार जैसा था। इसका आप पर असर कैलाश मानसरोवर या उच्च पर्वतीय यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए सीख: • त्वचा और स्वास्थ्य सुरक्षा: अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शुष्क हवा से नाक से खून बहने को रोकने के लिए अरंडी का तेल (कैस्टर ऑयल) लगाना और तेज धूप से बचाव के लिए सनस्क्रीन का प्रयोग अनिवार्य है। • शारीरिक तैयारी: 20 किमी जैसी कठिन चढ़ाई और बैकपैक के साथ ट्रैकिंग के लिए पौष्टिक नाश्ते और ऊर्जा प्रदान करने वाले सूखे मेवों का साथ होना बेहद जरूरी है। • मौसम के प्रति सतर्कता: पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए अचानक बाढ़ या भारी बारिश के जोखिम को ध्यान में रखते हुए स्थानीय सलाह पर अमल करें। सवाल-जवाब 1. मानसी पारेख हाल ही में कहां की यात्रा पर गई थीं? मानसी पारेख हाल ही में कैलाश मानसरोवर की आध्यात्मिक यात्रा पर गई थीं। 2. तिब्बती कैलेंडर में 'घोड़े के वर्ष' का क्या महत्व है? मान्यता के अनुसार 'घोड़े के वर्ष' में कैलाश यात्रा करने से 13 बार यात्रा करने के बराबर पुण्य मिलता है। 3. मानसी पारेख ने नेपाल त्रासदी के बारे में क्या बताया? उन्होंने बताया कि जिस जगह का उन्होंने 5 दिन पहले दौरा किया था, वह नेपाल त्रासदी के दौरान पूरी तरह पानी में डूब गई थी। 4. ऊंचाई वाले पहाड़ों पर यात्रा के दौरान मानसी ने क्या सावधानियां अपनाईं? उन्होंने नाक से खून बहने से रोकने के लिए कैस्टर ऑयल लगाया और तेज धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल किया। प्रेरणा और सबक मानसी पारेख की कैलाश मानसरोवर यात्रा से मिलने वाली मुख्य प्रेरणाएं और जीवन की सीख: • आंतरिक संकल्प का महत्व: बिना अलार्म के सुबह 5 बजे उठना और 20 किमी का पैदल सफर तय करना यह दिखाता है कि मजबूत इच्छाशक्ति से कठिन चुनौतियां भी आसान हो जाती हैं। • तैयारी और अनुशासन: उच्च पर्वतीय स्थिति के अनुसार स्वास्थ्य सुरक्षा (कैस्टर ऑयल व सनस्क्रीन) और उचित खानपान का ध्यान रखना किसी भी बड़े लक्ष्य को पाने के लिए जरूरी है। • समर्पण और आभार: प्रकृति की सुंदरता के आगे सिर झुकाना और विपरीत परिस्थितियों के बाद भी सुरक्षित रहने पर आभार व्यक्त करना जीवन को सकारात्मक दिशा देता है। https://trendkia.com/entertainment/nepala-apada-ke-bada-manasi-parekh-ne-bayan-ki-kailash-mansarovar-yatra-ki-yaden-sheyara-kiya-khasa-vidiyo-24107 TrendKia — Har trend, sabse pehle.