नितेश तिवारी की 'रामायण' में रावण का किरदार निभाने पर अभिनेता यश के बेटे ने उठाए सीधे सवाल फिल्म 'रामायण' में रावण का रूप धर रहे अभिनेता यश के बेटे ने उनसे पूछा कि वे बुरे इंसान का किरदार क्यों निभा रहे हैं, जिस पर यश ने उन्हें अभिनय और वास्तविक जीवन के आदर्शों का अंतर समझाया। फिल्म जगत में किरदारों की विविधता किसी भी कलाकार की प्रतिभा का पैमाना मानी जाती है, लेकिन जब वही किरदार घर के भीतर मासूम बच्चों की नजरों में आते हैं, तो कई बार अनोखी स्थितियां पैदा हो जाती हैं। अभिनेता यश के साथ भी हाल ही में कुछ ऐसा ही वाकया पेश आया। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही बहुचर्चित फिल्म रामायण में यश लंकापति रावण की भूमिका निभा रहे हैं। इस पौराणिक गाथा में रावण के चयन को लेकर यश के बेटे ने उनसे बेहद सीधा और हैरान करने वाला सवाल पूछ लिया। बेटे को जब यह पता चला कि उसके पिता पर्दे पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की जगह खलनायक माने जाने वाले रावण का रूप धारण कर रहे हैं, तो वह इस बात को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाया और उसने अपने पिता से पूछ लिया कि वे एक बुरे व्यक्ति का किरदार क्यों निभा रहे हैं। लॉस एंजिल्स के प्रीमियर पर बच्चों ने पहली बार देखा सिनेमा पर्दा इस पूरे प्रसंग की शुरुआत लॉस एंजिल्स में आयोजित एक विशेष प्रीमियर के दौरान हुई। यह मौका यश के परिवार के लिए बेहद खास था क्योंकि उनके दोनों बच्चों ने अपने जीवन में पहली बार किसी फिल्म को बड़े सिनेमाई पर्दे पर देखा था। फिल्म का लुत्फ उठाने के साथ ही बच्चों की नजर अपने पिता के काम पर भी पड़ी। यश इस महत्वाकांक्षी परियोजना में केवल रावण की मुख्य भूमिका ही नहीं निभा रहे हैं, बल्कि वे इस फिल्म के सह-निर्माता के तौर पर भी पूरी शिद्दत से जुड़े हुए हैं। इस स्क्रीनिंग के बाद यश ने सार्वजनिक रूप से एक पोस्ट साझा करते हुए अपने बेटे की प्रतिक्रिया और उसके साथ हुई दिलचस्प बातचीत की परतें खोलीं। कहानी में खलनायक की जरूरत और अभिनय का सच यश के अनुसार उनका बेटा इस सच्चाई से वाकिफ था कि उसके पिता सिनेमा में काम करते हैं। हालांकि जब रामायण की मूल कथा और उसमें रावण के चरित्र की असलियत उसके सामने आई, तो वह काफी असहज हो गया। बेटे ने मासूमियत से अपने पिता से कहा कि रावण तो एक बुरा इंसान है, फिर वे ऐसा रोल क्यों कर रहे हैं। इस पर यश ने अपने बेटे को बहुत सरल तरीके से समझाया कि किसी भी महान कथा को पर्दे पर सजीव करने के लिए हर किरदार का होना अनिवार्य है। रामायण की संरचना में रावण एक केंद्रीय धुरी है और यदि उसके किरदार को सामने न लाया जाए, तो पूरी कहानी का मूल संदेश और उसका विस्तार अधूरा रह जाएगा। पर्दे की चमक बनाम असल जिंदगी के मानवीय आदर्श बातचीत के दौरान यश ने अपने बेटे को यह भी समझाया कि सिनेमा के पर्दे पर दिखाई देने वाला अभिनय और वास्तविक जीवन में किसी इंसान की अपनी निजी पहचान दो बिल्कुल अलग बातें होती हैं। उन्होंने अपने बेटे को सीख दी कि रामायण के संदर्भ में केवल भगवान राम ही ऐसे सर्वोच्च आदर्श हैं, जिनके दिखाए गए आचरण, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर हर व्यक्ति को चलने का प्रयास करना चाहिए। यश ने स्पष्ट किया कि भले ही पर्दे पर रावण का रूप बहुत शक्तिशाली, भव्य, ज्ञानवान और प्रभावशाली नजर आए, लेकिन जीवन में अंतिम और सच्ची विजय हमेशा सदाचार और सत्य के रास्ते पर चलने वालों की ही होती है। उन्होंने अपने बेटे से कहा कि वह थिएटर में अपने पिता के अभिनय कौशल पर तालियां बजा सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में रावण के अवगुणों या उसके चरित्र को अपना आदर्श नहीं बनाना चाहिए। हार और अंत को लेकर बेटे की मासूम चिंता इस संवाद के दौरान एक ऐसा क्षण भी आया जिसने यश को भावुक और विचारमग्न कर दिया। जब बेटे को यह ज्ञात हुआ कि रामायण के अंत में रावण पराजित होता है और उसका वध हो जाता है, तो उसने घबराकर अपने पिता से पूछा कि क्या कहानी के अंत में वे भी मर जाएंगे और क्या उनकी भी हार हो जाएगी। यश ने स्वीकार किया कि एक पिता के तौर पर अपने छोटे बच्चे के इस मासूम और गहरे सवाल का जवाब देना उनके लिए काफी कठिन हो गया था। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस फिल्म को करने का निर्णय लिया था, तब उनका ध्यान केवल दर्शकों के सामने एक बेजोड़ और यादगार अभिनय प्रस्तुत करने पर केंद्रित था। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें घर के भीतर अपने ही बच्चे को अभिनय, अच्छाई और बुराई के इतने सूक्ष्म पहलुओं को समझाना पड़ेगा। फिल्म के निर्माण की बारीकियां और रिलीज का कार्यक्रम कलाकार के रूप में यश के लिए यह अनुभव बेहद अनोखा रहा, क्योंकि पहली बार उन्हें यह रेखांकित करना पड़ा कि अभिनेता पर्दे पर कई तरह के रूप धरता है, लेकिन उन किरदारों की बुराई को असल जिंदगी के इंसान से नहीं जोड़ना चाहिए। नितेश तिवारी के निर्देशन में भव्य पैमाने पर तैयार की जा रही यह फिल्म रामायण दो अलग-अलग भागों में सिनेमाघरों में उतारी जाएगी। इस भारी भरकम प्रोजेक्ट का निर्माण नमित मल्होत्रा की कंपनी प्राइम फोकस स्टूडियोज और यश की अपनी निर्माण कंपनी मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस मिलकर कर रही हैं। फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर 2026 को पूरी दुनिया के सिनेमाघरों में एक साथ प्रदर्शित किया जाएगा। इस बड़े ऐलान के बाद से ही वैश्विक स्तर पर दर्शक यश को रावण के इस भव्य और चुनौतीपूर्ण अवतार में देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसका आप पर असर सिनेमा और पौराणिक फिल्मों से जुड़े दर्शकों एवं परिवारों पर इस बातचीत का सीधा और व्यावहारिक प्रभाव पड़ता है। • बच्चों में समझ: यह प्रसंग दिखाता है कि पौराणिक फिल्मों को देखते समय माता-पिता को बच्चों को रील और रियल लाइफ का अंतर समझाना जरूरी होता है। इससे बच्चे पर्दे के नकारात्मक किरदारों की भव्यता से भ्रमित होने के बजाय सही नैतिक मूल्यों को पहचानना सीखते हैं। • फिल्म रिलीज का इंतजार: यश के प्रशंसकों और सिनेमा प्रेमियों के लिए फिल्म के पहले भाग की रिलीज तारीख तय हो चुकी है। दर्शक 5 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के भव्य दृश्य और यश के अभिनय को बड़े पर्दे पर देख सकेंगे। • पारिवारिक बातचीत: ऐतिहासिक और पौराणिक विषयों को लेकर घरों में नई पीढ़ी के साथ सार्थक चर्चा के रास्ते खुलते हैं। अभिभावक अपने बच्चों को भगवान राम के आदर्शों और सत्य के महत्व को बहुत सहजता से समझा सकते हैं। • सिनेमाई उम्मीदें: दो भागों में आ रही इस फिल्म के सह-निर्माण में यश और नमित मल्होत्रा की साझेदारी से तकनीक और पैमाने का उच्च स्तर देखने को मिलेगा। इससे भारतीय सिनेमा के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। ऐसा क्यों हुआ अभिनेता यश और उनके बेटे के बीच यह संवेदनशील बातचीत तब शुरू हुई जब बच्चों ने पहली बार सिनेमा हॉल में अपने पिता के काम को देखा। घर में इस तरह का संवाद उभरने के पीछे मुख्य रूप से बच्चों की दुनिया को समझने की मासूमियत और पौराणिक किरदारों की जटिलता रही है। • पहली बार बड़े पर्दे पर देखना: यश के दोनों बच्चों ने लॉस एंजिल्स में आयोजित विशेष स्क्रीनिंग के दौरान जिंदगी में पहली बार थिएटर स्क्रीन पर फिल्म देखी थी। इस अनुभव ने स्वाभाविक रूप से बच्चों के मन में अपने पिता की ऑन-स्क्रीन भूमिका को लेकर गहरी उत्सुकता जगा दी। • राम और रावण के अंतर की समझ: बच्चे ने जब रामायण की बुनियादी कहानी समझी तो उसने देखा कि उसके पिता नायक राम की जगह प्रतिनायक रावण बने हैं। बच्चे के सीधे नैतिक दृष्टिकोण में पिता का नकारात्मक भूमिका चुनना चौंकाने वाला था, जिसके कारण उसने तुरंत यह सवाल पूछ लिया। • कला और वास्तविकता का भेद: यश ने एक कलाकार के रूप में दर्शकों को प्रभावित करने के लिए यह भूमिका चुनी थी, लेकिन एक पिता के रूप में उन्हें यह दायित्व निभाना पड़ा कि उनका बच्चा काल्पनिक कहानी और वास्तविक जीवन के आदर्शों में उलझ न जाए। सवाल-जवाब 1. फिल्म रामायण में अभिनेता यश कौन सा किरदार निभा रहे हैं? नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही फिल्म रामायण में अभिनेता यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं। 2. यश के बेटे ने उनसे क्या सवाल पूछा था? यश के बेटे ने उनसे पूछा कि जब वे जानते हैं कि रावण एक बुरा इंसान है, तो वे कहानी में ऐसा नकारात्मक किरदार क्यों निभा रहे हैं। 3. यश ने अपने बेटे को अभिनय और जीवन मूल्यों के बारे में क्या समझाया? यश ने समझाया कि अभिनय और असल पहचान अलग होती है, और भव्य दिखने वाले रावण के अभिनय पर तालियां बजाई जा सकती हैं लेकिन जीवन का आदर्श केवल भगवान राम को ही मानना चाहिए। 4. फिल्म रामायण का निर्माण कौन कर रहा है और यह कितने भागों में बनेगी? इस फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस द्वारा मिलकर किया जा रहा है, और यह दो भागों में रिलीज होगी। 5. फिल्म रामायण का पहला भाग सिनेमाघरों में कब रिलीज होगा? फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाला है। https://trendkia.com/entertainment/nitesh-tiwari-ki-ramayana-men-ravana-ka-kiradara-nibhane-para-abhineta-yash-ke-bete-ne-uthae-sidhe-savala-53932 TrendKia — Har trend, sabse pehle.