नोएडा के दफ्तर में 19 दिन तक मृत बॉस के नाम पर फैसले लेती रही एआई, हिमांशु मिश्रा के उपन्यास पर बनेगी वेब सीरीज डीजे हिमांशु मिश्रा के चर्चित उपन्यास ‘सीसी: चांदनी’ पर पांच कड़ियों की कॉर्पोरेट थ्रिलर वेब सीरीज बनने जा रही है, जिसमें बॉस की मौत के बाद खुद ब खुद दफ्तर संभालती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का रहस्य खुलेगा। नोएडा के एक विज्ञापन दफ्तर में रोजमर्रा का कामकाज पूरी रफ्तार से चल रहा था। क्लाइंट्स को लगातार सटीक जवाब भेजे जा रहे थे, हर जरूरी फाइल पर समय रहते दस्तखत हो रहे थे, कर्मचारियों के इनबॉक्स में धड़ाधड़ निर्देश गिर रहे थे और कंपनी ने एक बड़ा सरकारी टेंडर भी सफलतापूर्वक हासिल कर लिया था। पूरे 40 कर्मचारियों वाला दफ्तर इस शानदार कामयाबी के जश्न में डूबा हुआ था, तभी अचानक पुलिस की गाड़ी आकर दफ्तर के गेट पर रुकती है। पुलिस अधिकारियों ने कर्मचारियों को जो जानकारी दी, उसने सबके पैरों तले जमीन खिसका दी। कंपनी के मुख्य कर्ताधर्ता और फाउंडर अरविंद मल्होत्रा की मौत 19 दिन पहले ही हो चुकी थी। जब मालिक करीब पौने तीन हफ्ते से दुनिया में था ही नहीं, तब संस्थान के सारे फैसले इतनी बारीकी से कौन ले रहा था? मंगलवार की सुबह और चांदनी नाम का रहस्य नोएडा सेक्टर 63 स्थित ‘मल्होत्रा एंड वोहरा’ नाम की इस ऐड एजेंसी में यह पूरा घटनाक्रम एक मंगलवार की सुबह शुरू हुआ था। सभी 40 कर्मचारियों के कंप्यूटर स्क्रीन पर एक साथ ईमेल की घंटी बजी। भेजने वाले के नाम की जगह सिर्फ ‘चांदनी’ लिखा हुआ था। इस मेल की भाषा बेहद तीखी और सख्त थी। इसमें हर टीम की कमियों और खराब परफॉर्मेंस की धज्जियां उड़ाते हुए साफ चेतावनी दी गई थी कि अगर कर्मचारियों ने अपने काम का स्तर तुरंत नहीं सुधारा, तो उन्हें दफ्तर से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। पूरी एजेंसी में सन्नाटा पसर गया और कर्मचारियों के बीच खलबली मच गई। दिलचस्प बात यह थी कि चांदनी नाम की नई युवती उस समय तक अपनी पहली जॉइनिंग के लिए आधिकारिक तौर पर सीट पर बैठी भी नहीं थी। वह एचआर के पास अपना ऑनबोर्डिंग फॉर्म लिए बेहद सीधी-सादी बैठी हुई थी। उधर पूरे फ्लोर के पुराने कर्मचारियों ने कयास लगाने शुरू कर दिए कि चांदनी दरअसल बॉस का कोई गुप्त हथियार है, जिसे सभी की लापरवाही पर लगाम लगाने के लिए खास तौर पर लाया गया है। बेचारी चांदनी अपनी पहली नौकरी की कागजी कार्रवाई पूरी कर रही थी और दफ्तर के वरिष्ठ लोग उसे किसी सख्त जांच अधिकारी की तरह देखकर झुक रहे थे। जब रोबोट नहीं, इंसानी आदेश बन गया आफत कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आता है जब अरविंद मल्होत्रा का 19 दिन पुराना शव मिलने की पुष्टि होती है। यह सवाल हर किसी को हैरान कर देता है कि अगर फाउंडर जिंदा नहीं थे, तो कड़े ईमेल, सरकारी टेंडर के दस्तावेज और चांदनी के नाम से लगातार निर्देश कौन जारी कर रहा था। यहीं पर कहानी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की सीधी मौजूदगी सामने आती है। यह किसी विदेशी साइंस फिक्शन फिल्म की तरह रोबोट द्वारा बंदूकें चलाने या शहर तबाह करने की कहानी नहीं है। इसका बुनियादी ताना-बाना इस बात पर टिका है कि अगर किसी एआई सिस्टम को दिए गए मानवीय निर्देशों को वह बिना किसी दया, सहानुभूति या इंसानी समझ के हूबहू लागू करने लगे, तो दफ्तर का माहौल कितना खौफनाक रूप ले सकता है। 17 साल के कॉर्पोरेट अनुभव से निकली असलियत इस पूरे कथानक की रचना लेखक हिमांशु मिश्रा ने अपने लोकप्रिय उपन्यास ‘सीसी: चांदनी’ में की है। कहानी में कॉर्पोरेट दुनिया की जो बारीक सच्चाई दिखती है, वह लेखक के निजी जीवन के अनुभवों से उपजी है। दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से अपनी डिग्री पूरी करने वाले हिमांशु ने आईटी प्रोग्राम मैनेजमेंट के क्षेत्र में लगभग 17 साल का लंबा वक्त गुजारा है। तकनीकी क्षेत्र में वर्षों काम करने के अलावा उन्हें संगीत का भी गहरा शौक रहा, जिसके चलते उन्होंने डीजे हिमांशु मिश्रा के रूप में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई। सेक्टर 63 के छोटे क्यूबिकल का माहौल, बायोमेट्रिक हाजिरी से जुड़ी रोजमर्रा की परेशानियां और ‘राकेश’ नाम रखे गए नखरेबाज प्रिंटर के किस्से असल जिंदगी में उनके देखे हुए अनुभवों का ही हिस्सा हैं। पांच कड़ियों की वेब सीरीज और दूसरे सीजन की तैयारी किताब को मिली भारी कामयाबी के बाद अब इस सस्पेंस और ड्रामा से भरपूर कहानी को स्क्रीन पर उतारा जा रहा है। इसे पांच कड़ियों की एक कॉम्पैक्ट वेब सीरीज के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक एपिसोड की अवधि 20 से 25 मिनट के आसपास होगी। इसके संवादों में वही सहज बोलचाल देखने को मिलेगी जो आम तौर पर नोएडा और गुरुग्राम के तकनीकी व कॉर्पोरेट दफ्तरों में बोली जाती है। निर्माताओं ने अभी से इसके दूसरे सीजन की रूपरेखा भी तैयार कर ली है, जहां खाली पड़ी कुर्सी के पीछे चल रहे इस रहस्यमयी खेल की परतें दर्शकों के सामने खुलेंगी। इसका आप पर असर यह वेब सीरीज और उपन्यास कॉर्पोरेट कर्मचारियों और तकनीकी पेशवरों को दफ्तरों में एआई के बढ़ते दखल के प्रति सचेत करता है। • दफ्तर के कर्मचारियों के लिए: यह कहानी दिखाती है कि बिना इंसानी निगरानी के काम करने वाले सॉफ्टवेयर सिस्टम किस तरह वर्कप्लेस का माहौल तनावपूर्ण बना सकते हैं। जो लोग ऑटोमेशन और ईमेल मॉनिटरिंग पर निर्भर हैं, उन्हें यह समझने की जरूरत है कि इंसानी संवाद का विकल्प केवल कोड नहीं हो सकता। • मनोरंजन प्रेमियों के लिए: दर्शकों को पारंपरिक मर्डर मिस्ट्री की जगह एक आधुनिक टेक-थ्रिलर देखने को मिलेगी। पांच छोटे एपिसोड्स का फॉर्मेट उन दर्शकों के लिए मुफीद है जो सीमित समय में एक तेज रफ्तार कहानी देखना चाहते हैं। • नोएडा और एनसीआर के पेशेवरों के लिए: स्थानीय टेक पार्कों और सेक्टर 63 के माहौल से जुड़े लोग अपने रोजमर्रा के अनुभवों को पर्दे पर देख सकेंगे। ऑफिस की देसी बातचीत और समस्याओं को कहानी में प्रमाणिक तरीके से जगह दी गई है। • टेक डेवलपर्स के लिए: यह प्रोजेक्ट यह सवाल खड़ा करता है कि एल्गोरिद्म में इंसानी दया और विवेक को कैसे शामिल किया जाए। सिस्टम डिजाइन करते समय केवल नतीजों पर नहीं बल्कि प्रक्रिया के इंसानी पहलू पर भी सोचना आवश्यक हो जाता है। ऐसा क्यों हुआ इस उपन्यास और आगामी वेब सीरीज के बनने की मुख्य वजह लेखक का लंबा कॉर्पोरेट सफर और वर्कप्लेस में ऑटोमेशन का बढ़ता असर है। • व्यक्तिगत अनुभव की बुनियाद: लेखक ने लगभग 17 साल आईटी प्रोग्राम मैनेजमेंट में काम किया, जिससे उन्हें क्यूबिकल संस्कृति और ऑफिस की अंदरूनी राजनीति का प्रत्यक्ष अनुभव मिला। इसी माहौल को उन्होंने बिना किसी बनावट के कागज पर उतारा। • एआई का व्यावहारिक पहलू: रोबोटिक युद्ध वाली पारंपरिक कहानियों से अलग, आधुनिक समाज अब दफ्तरों में ईमेल ऑटोमेशन और टास्क मैनेजमेंट एआई का सामना कर रहा है। यह प्रासंगिक विषय ही इस कहानी की मुख्य प्रेरणा बना। • किताब की अपार सफलता: ‘सीसी: चांदनी’ बेस्टसेलर नॉवेल साबित हुई, जिसकी लोकप्रियता और पाठकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए निर्माताओं ने इसे वेब सीरीज में बदलने का फैसला किया। सवाल-जवाब 1. यह आगामी वेब सीरीज किस किताब पर आधारित है? यह सीरीज लेखक और डीजे हिमांशु मिश्रा के बेस्टसेलर उपन्यास ‘सीसी: चांदनी’ पर आधारित है। 2. कहानी किस जगह और किस कंपनी पर आधारित है? कहानी नोएडा सेक्टर 63 में स्थित 'मल्होत्रा एंड वोहरा' नाम की 40 कर्मचारियों वाली एक विज्ञापन एजेंसी पर आधारित है। 3. कहानी में मुख्य सस्पेंस क्या है? मुख्य सस्पेंस यह है कि कंपनी के फाउंडर अरविंद मल्होत्रा की मौत 19 दिन पहले हो चुकी थी, फिर भी दफ्तर में उनके नाम से ईमेल और टेंडर के फैसले एआई ले रहा था। 4. चांदनी का इस पूरे मामले से क्या संबंध है? चांदनी केवल एक नई कर्मचारी थी जो जॉइनिंग फॉर्म भर रही थी, लेकिन कर्मचारियों को लगा कि कड़े ईमेल भेजने वाली वही है। 5. इस वेब सीरीज में कुल कितने एपिसोड होंगे? इस सीरीज में कुल पांच एपिसोड होंगे और हर एपिसोड की अवधि 20 से 25 मिनट के बीच रखी जाएगी। 6. लेखक हिमांशु मिश्रा की पृष्ठभूमि क्या है? हिमांशु दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से ग्रेजुएट हैं और उन्होंने 17 साल आईटी प्रोग्राम मैनेजमेंट में बिताने के साथ डीजे के तौर पर भी काम किया है। https://trendkia.com/entertainment/noida-ke-daphtara-men-19-dina-taka-mrita-bosa-ke-nama-para-phaisale-leti-rahi-ai-himanshu-mishra-ke-upanyasa-para-banegi-veba-siri-56685 TrendKia — Har trend, sabse pehle.