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  "type": "article",
  "title": "ओशो की माला फ्लश करने के बाद क्यों फरार हुए महेश भट्ट और उनका परिवार",
  "summary": "पूजा भट्ट ने साझा किया है कि कैसे उनके पिता महेश भट्ट के ओशो से अलग होने के फैसले ने पूरे परिवार को मुश्किल में डाल दिया था और उन्हें जान बचाकर छिपना पड़ा था।",
  "content": "बॉलीवुड के सुनहरे दौर में एक समय ऐसा भी था जब ओशो रजनीश के विचारों और उनके आंदोलन का प्रभाव फिल्म इंडस्ट्री के बड़े चेहरों पर गहरा था। विनोद खन्ना से लेकर महेश भट्ट जैसे दिग्गज कलाकार उस दौरान ओशो के अनुयायियों की कतार में खड़े नजर आते थे। हाल ही में, महेश भट्ट की बेटी और अभिनेत्री पूजा भट्ट ने उस दौर के उन अनछुए पहलुओं को साझा किया है जो उनके परिवार के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं थे। पूजा भट्ट ने एक पॉडकास्ट में इस बात का खुलासा किया कि कैसे उनके पिता का ओशो से मोहभंग हुआ और उनके उस निर्णय ने पूरे परिवार की जान जोखिम में डाल दी थी।\n\nमाला को टॉयलेट में बहाना पड़ा भारी\nपूजा भट्ट ने बताया कि महेश भट्ट एक समय तक ओशो के कट्टर अनुयायी थे, लेकिन धीरे-धीरे उनके मन में उस आंदोलन को लेकर संशय पैदा होने लगा। स्थिति तब चरम पर पहुंच गई जब महेश भट्ट ने ओशो से अपना नाता पूरी तरह तोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने गले में पहनी हुई माला को उतारा और उसे टॉयलेट में फ्लश कर दिया। यह कदम केवल एक विरोध नहीं था, बल्कि एक बड़ा धमाका था, जिसके बाद उन्हें उस समूह से तुरंत बाहर कर दिया गया।\n\nविनोद खन्ना का वह खौफनाक संदेश\nओशो से अलग होने की घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। पूजा भट्ट के अनुसार, उन्हें अब भी वह दिन बखूबी याद है जब विनोद खन्ना के जरिए उनके घर एक संदेश पहुँचा। उस वक्त महेश भट्ट के परिवार को चेतावनी दी गई कि 'भगवान' यानी ओशो, महेश भट्ट से अत्यधिक क्रोधित हैं और वे उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर देंगे। उस समय पूजा भट्ट काफी छोटी थीं, लेकिन उस धमकी भरे संदेश ने पूरे परिवार को दहशत में डाल दिया था। सुरक्षा की दृष्टि से और अनहोनी के डर से, महेश भट्ट और उनके परिजनों को आधी रात के वक्त ही पुणे के एक सेफ हाउस में शिफ्ट होना पड़ा था।\n\nमहेश भट्ट ने क्यों छोड़ा था रास्ता\nवर्षों पहले एक साक्षात्कार में महेश भट्ट ने खुद इस रहस्य पर से पर्दा उठाया था कि उन्होंने ओशो का साथ क्यों छोड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि वे वास्तव में आत्मिक शांति की तलाश में थे और ओशो के प्रभाव में आकर उन्होंने भगवा वस्त्र भी धारण कर लिए थे। वे दिन में पांच बार ध्यान में लीन रहने लगे थे। हालांकि, समय बीतने के साथ उन्हें अहसास हुआ कि उनके भीतर अभी भी मानवीय जलन और ईर्ष्या मौजूद है। उन्होंने महसूस किया कि वे केवल एक आध्यात्मिक होने का दिखावा कर रहे थे, जबकि उनका अंतर्मन वैसा नहीं था। महेश भट्ट ने स्पष्ट किया कि वे अपने स्वयं के अस्तित्व के साथ झूठ नहीं बोलना चाहते थे और इसी कारण उन्होंने उस रास्ते से बाहर निकलने का फैसला किया।\n\nइसका आप पर असर\nसामान्य जानकारी: यह घटना दिखाती है कि कैसे किसी बड़े आध्यात्मिक या सामाजिक आंदोलन से जुड़ना और बाद में अलग होना व्यक्तिगत सुरक्षा और मानसिक शांति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. महेश भट्ट ओशो से क्यों जुड़े थे?\nमहेश भट्ट आध्यात्मिक शांति की तलाश में थे और उस दौरान ओशो के विचारों से प्रभावित होकर उनके अनुयायी बन गए थे।\n\n2. महेश भट्ट ने ओशो की माला क्यों फ्लश की?\nउन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वे उस आंदोलन से पूरी तरह अपना नाता तोड़ना चाहते थे और उनका मोहभंग हो चुका था।\n\n3. विनोद खन्ना ने क्या संदेश दिया था?\nविनोद खन्ना के जरिए संदेश आया था कि ओशो महेश भट्ट से बहुत नाराज हैं और उन्हें बर्बाद कर देंगे।\n\n4. महेश भट्ट को सेफ हाउस क्यों जाना पड़ा?\nओशो के समूह से अलग होने के बाद मिली धमकियों के कारण सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें परिवार सहित पुणे के सेफ हाउस में छिपना पड़ा।",
  "url": "https://trendkia.com/entertainment/osho-ki-mala-phlasha-karane-ke-bada-kyon-pharara-hue-mahesh-bhatt-aura-unaka-parivara-5533",
  "category": "मनोरंजन",
  "publishedAt": "2026-07-07",
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    "महेश भट्ट",
    "ओशो",
    "पूजा भट्ट",
    "विनोद खन्ना",
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