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  "title": "पंचायत के विधायक पंकज झा क्यों नहीं चाहते खुद को एक्टर कहलवाना, बॉलीवुड की चकाचौंध पर खुलकर रखी बात",
  "summary": "वेब सीरीज पंचायत में विधायक का किरदार निभाकर चर्चा बटोरने वाले पंकज झा ने फिल्म इंडस्ट्री की बनावटी दुनिया और कलाकारों के नजरिए पर अपने बेबाक विचार साझा किए हैं।",
  "content": "लोकप्रिय वेब सीरीज पंचायत ने भारतीय मनोरंजन जगत में कई सशक्त प्रतिभाओं को घर-घर तक पहुँचाया है। जितेंद्र कुमार, नीना गुप्ता और रघुवीर यादव के मुख्य अभिनय से सजी इस सीरीज ने सहायक कलाकारों को भी खास मुकाम दिया। शो में दामाद का किरदार निभाने वाले आसिफ खान जहाँ बिग बॉस के घर में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं, वहीं चंदन रॉय, सान्विका और विधायक चंद्र किशोर सिंह के किरदार में दिखे पंकज झा को इस शो से जबर्दस्त लोकप्रियता मिली। दर्शकों के बीच अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने वाले पंकज झा अपने पेशे और अभिनय कला को लेकर एक बेहद अलग दृष्टिकोण रखते हैं। वे खुद को महज एक एक्टर कहलाने से अलग रखना पसंद करते हैं और एक व्यापक कलाकार के रूप में अपनी पहचान देखते हैं।\n\nअभिनय पर गर्व मगर एक्टर के तमगे से दूरी\nपंकज झा का मानना है कि एक अभिनेता होना बेहद गर्व का विषय है, लेकिन आधुनिक दौर में जिस तरह एक्टर शब्द का इस्तेमाल होता है, वे उससे दूरी बनाना चाहते हैं। उनके अनुसार हिंदी सिनेमा जगत का माहौल काफी हद तक बनावटी और आडंबरपूर्ण हो चुका है। इस चकाचौंध भरी दुनिया में कई चीजें स्वाभाविक न रहकर दिखावे पर टिकी हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे फिल्म जगत का हिस्सा रहते हुए किसी दुर्भावना से यह बात नहीं कह रहे हैं, बल्कि इस माहौल की वास्तविकता को सामने रख रहे हैं जिससे वे पूरी तरह वाकिफ हैं।\n\nफिल्मों में काम करना किसी भी अन्य नौकरी जैसा\nफिल्म उद्योग में किसी अन्य की नकल करने या दिखावा करने की प्रवृत्ति से पंकज झा पूरी तरह परहेज करते हैं। उनका साफ मत है कि फिल्मों में अभिनय को भी समाज की अन्य नौकरियों की तरह एक सामान्य काम समझा जाना चाहिए। वे इस बात पर हैरानी जताते हैं कि आम लोग और समाज सिनेमा में काम करने वाले चेहरों को जरूरत से ज्यादा बड़ा दर्जा और सम्मान क्यों देते हैं। उनके मुताबिक यह भी अपनी आजीविका चलाने का एक जरिया मात्र है, जिसे अत्यधिक महिमामंडित करने की आवश्यकता नहीं है।\n\nइंडस्ट्री के माहौल को बताया बीमारी जैसा असर\nसिनेमा की दुनिया से जुड़े लोगों के व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए पंकज झा ने कहा कि उन्हें यह समझना मुश्किल लगता है कि यहाँ काम करने वाले लोग इतने अजीब और अस्वाभाविक क्यों हो जाते हैं। वे इस दिखावे और बदलाव की तुलना एक ऐसी बीमारी से करते हैं जो धीरे-धीरे फैलती रहती है। वे खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्होंने इस तरह के प्रभाव से खुद को बचाकर रखा है। अपने मानसिक संतुलन और मौलिकता को बनाए रखने के लिए वे पेंटिंग का सहारा लेते हैं और लेखन कार्य में समय बिताते हैं, जिससे वे इस बनावटीपन से दूर रह सकें।\n\nकलाकारों को फिल्में कम देखने की अजीबोगरीब सलाह\nपंकज झा ने साथी कलाकारों के लिए एक अनोखा सुझाव भी रखा कि अभिनेताओं को फिल्में देखने से बचना चाहिए। उनका तर्क है कि जब कोई अभिनेता बहुत ज्यादा सिनेमा देखता है, तो अनजाने में वह अन्य कलाकारों के हावभाव, बोलने के ढंग और स्टाइल की नकल करने लगता है, जिससे उसकी अपनी मौलिकता खो जाती है। पूरी फिल्म इंडस्ट्री का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके नजरिए में केवल इरफान खान ही एक सच्चे और वास्तविक कलाकार थे।\n\nथिएटर की पृष्ठभूमि से लेकर प्राइम वीडियो तक का सफर\nपंकज झा ने अभिनय की बारीकियों को सीखने के लिए नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से विधिवत प्रशिक्षण हासिल किया था। सिनेमाई पर्दे पर उन्होंने अनुराग कश्यप की चर्चित फिल्म ब्लैक फ्राइडे से अपनी छाप छोड़ी थी। इसके बाद वे गुलाल, चमेली और अनवर जैसी फिल्मों में अहम किरदारों में नजर आए। हालांकि लंबे समय तक विभिन्न चरित्र निभाने के बाद उन्हें देशव्यापी पहचान और दर्शकों का भरपूर प्यार अमेजन प्राइम वीडियो की सुपरहिट सीरीज पंचायत के जरिए मिला।\n\nइसका आप पर असर\nपंकज झा के इस बेबाक बयान से दर्शकों और उभरते कलाकारों को सिनेमाई चकाचौंध के पीछे की असलियत समझने का मौका मिलता है।\n\n• कलाकारों के लिए: अभिनय में खुद की मौलिक पहचान बनाए रखने के लिए दूसरों की नकल करने से बचना जरूरी है। पंकज झा की सलाह के मुताबिक अंधाधुंध फिल्में देखने के बजाय अपनी निजी सोच और रचनात्मकता को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।\n• दर्शकों के लिए: फिल्मी सितारों को हद से ज्यादा पूजने के बजाय उनके अभिनय को एक सामान्य काम की तरह देखा जाना चाहिए। इससे सिनेमाई हस्तियों के प्रति अवास्तविक उम्मीदें खत्म होती हैं और वास्तविक कला की पहचान बढ़ती है।\n• करियर की दृष्टि से: अभिनय के साथ-साथ पेंटिंग या लेखन जैसे दूसरे रचनात्मक माध्यमों से जुड़े रहना मानसिक शांति देता है। यह संतुलन किसी भी पेशेवर व्यक्ति को कार्यक्षेत्र के तनाव और दिखावे से बचाए रखने में मदद करता है।\n• उद्योग के संदर्भ में: ग्लैमर जगत में जमीनी सच्चाई और सादगी की अहमियत को रेखांकित किया गया है। दिखावे से दूर रहकर भी पंचायत जैसी सीरीज के माध्यम से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई जा सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपंकज झा के ये विचार मनोरंजन जगत में बढ़ते दिखावे और कलाकारों की मौलिकता खत्म होने की चिंताओं से उपजे हैं।\n\n• दिखावे की संस्कृति का विरोध: फिल्म उद्योग में काम के मुकाबले पीआर और बाहरी छवि को ज्यादा तवज्जो मिलने से वास्तविक कलाकार असंतोष महसूस करते हैं। पंकज झा ने अपने अनुभवों के आधार पर इस बनावटी माहौल को रेखांकित किया है।\n• मौलिकता बचाने का प्रयास: साथी कलाकारों द्वारा दूसरों के हावभाव और अभिनय शैली की नकल करने की बढ़ती आदत ने उन्हें यह कहने पर प्रेरित किया। उनका मानना है कि अधिक फिल्में देखने से कलाकार अपनी नैसर्गिक प्रतिभा खो बैठते हैं।\n• आजीविका को सामान्य मानना: पारंपरिक थिएटर पृष्ठभूमि और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के संस्कारों के कारण वे कला को पूजनीय मानते हैं, लेकिन फिल्मी स्टारडम के आडंबर को सामान्य नौकरी से ज्यादा नहीं आंकते।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पंकज झा खुद को केवल एक्टर कहलवाने से क्यों बचते हैं?\nवे खुद को एक संपूर्ण कलाकार मानते हैं और बॉलीवुड में एक्टर शब्द से जुड़े दिखावे और बनावटीपन से दूर रहना पसंद करते हैं।\n\n2. पंकज झा ने साथी कलाकारों को फिल्में न देखने की सलाह क्यों दी?\nउनका मानना है कि अधिक फिल्में देखने से अभिनेता अनजाने में दूसरे कलाकारों के स्टाइल और अभिनय की नकल करने लगते हैं, जिससे उनकी मौलिकता खो जाती है।\n\n3. पंकज झा के अनुसार फिल्म जगत में सच्चा कलाकार कौन था?\nपंकज झा ने दिवंगत अभिनेता इरफान खान को फिल्म इंडस्ट्री का एकमात्र सच्चा कलाकार बताया।\n\n4. वेब सीरीज पंचायत में पंकज झा ने क्या भूमिका निभाई थी?\nउन्होंने इस लोकप्रिय ग्रामीण ड्रामा सीरीज में स्थानीय विधायक चंद्र किशोर सिंह का चर्चित किरदार निभाया था।\n\n5. पंकज झा ने अभिनय का प्रशिक्षण कहाँ से प्राप्त किया था?\nउन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय की औपचारिक और पेशेवर ट्रेनिंग ली थी।\n\n6. इंडस्ट्री के प्रभाव से बचने के लिए पंकज झा क्या करते हैं?\nवे अपने खाली समय में पेंटिंग करते हैं और किताबें लिखते हैं ताकि फिल्म उद्योग के अस्वाभाविक माहौल से खुद को अलग रख सकें।",
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  "category": "मनोरंजन",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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