बंटवारा 1947 रिव्यू (2026): शबाना आजमी की दमदार वापसी और सनी देओल के साथ भावुक कर देने वाली कहानी 75 साल की उम्र में शबाना आजमी ने तीन साल के अंतराल के बाद फिल्म बंटवारा 1947 से सिनेमाघरों में वापसी की है। इससे पहले उन्होंने धर्मेंद्र के साथ फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी में अभिनय किया था। फिल्म जगत में बढ़ती उम्र के साथ मुख्यधारा की भूमिकाओं से दूरी बना लेने का चलन आम है, लेकिन कुछ दिग्गज कलाकार अपने अभिनय के दम पर हर बार एक नई लकीर खींच देते हैं। शबाना आजमी ने अपनी अभिनय क्षमता से एक बार फिर साबित कर दिया है कि उम्र महज एक आंकड़ा भर है। तीन साल के लंबे अंतराल के बाद सिल्वर स्क्रीन पर उनकी यह वापसी सिनेमा प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उनके इस सफर का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि उन्होंने पहले पर्दे पर एक लीजेंड्री अभिनेता के साथ रोमांटिक केमिस्ट्री साझा की और अब उसी अभिनेता के बेटे के साथ काम कर दर्शकों की आंखें नम कर रही हैं। सिल्वर स्क्रीन पर तीन साल बाद वापसी इस प्रतिष्ठित अभिनेत्री की आखिरी बड़ी थियेटर रिलीज 2023 में आई थी। उस समय उन्होंने करण जौहर के निर्देशन में बनी फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी में काम किया था। इस मूवी में उन्होंने जामिनी चटर्जी नाम की एक ऐसी महिला की भूमिका निभाई थी जो अपनी पुरानी प्रेम कहानी को लेकर चर्चा में रही। फिल्म में उनके साथ धर्मेंद्र ने कंवल की भूमिका अदा की थी, जो जया बच्चन के किरदार धनलक्ष्मी रंधावा के पति थे। इस कहानी का मुख्य आकर्षण जामिनी और कंवल का वह अधूरा प्यार था जो जीवन के ढलते पड़ाव में फिर से परवान चढ़ता है। उम्र के इस पड़ाव पर फिल्माया गया उनका रोमांस भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार दृश्यों में शुमार हो गया था। पिछली फिल्म की बॉक्स ऑफिस सफलता रॉकी और रानी की प्रेम कहानी के व्यावसायिक आंकड़ों पर नजर डालें तो इसे बनाने में लगभग 170 से 180 करोड़ रुपये की लागत आई थी। घरेलू बॉक्स ऑफिस पर इस पारिवारिक ड्रामे ने लगभग 153.5 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया था। वहीं अगर वैश्विक स्तर की बात की जाए तो इसने दुनिया भर में करीब 357.5 करोड़ रुपये की कमाई का आंकड़ा छुआ था। बॉक्स ऑफिस पर इस प्रदर्शन के बाद इसे एक सफल फिल्म का दर्जा मिला था, और इसके गाने तथा संवाद लंबे समय तक दर्शकों की जुबान पर रहे थे। बंटवारा 1947 में सनी देओल के साथ नई पारी अब 2026 में शबाना आजमी ने राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी फिल्म बंटवारा 1947 के जरिए बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी की है। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस मूवी में उनके अलावा सनी देओल, प्रीति जिंटा, करण देओल और अली फजल जैसे जाने-माने कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। इस नई कहानी की पटकथा देश के ऐतिहासिक विभाजन के समय की पृष्ठभूमि पर बुनी गई है। इसमें विस्थापन के दर्द, इंसानियत और उस दौर के सांप्रदायिक तनाव के बीच पनपने वाले मानवीय रिश्तों की परतें खोली गई हैं। फिल्म में माई का किरदार और लाहौर का कनेक्शन इस हिस्टोरिकल ड्रामे में अभिनेत्री ने माई नाम की एक बुजुर्ग हिंदू महिला का किरदार जीवंत किया है। विभाजन के उस भीषण दौर में भी वह लाहौर में स्थित अपने पुश्तैनी घर को छोड़ने से मना कर देती हैं और वहीं जुड़ी रहती हैं। दूसरी तरफ कहानी में सनी देओल ने सिकंदर मिर्जा का किरदार निभाया है जो पाकिस्तान में रहने वाला एक मुस्लिम व्यक्ति है। जब सिकंदर को यह बात पता चलती है कि उस हवेली में अब भी एक बुजुर्ग हिंदू महिला अकेली मौजूद है, तो हालात एक नया मोड़ लेते हैं। इसके बाद दोनों के बीच इंसानियत के रिश्ते की एक ऐसी दास्तान शुरू होती है जहां सिकंदर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाता है। पिता से लेकर बेटे तक का सफर यह संयोग ही है कि जिस अदाकार ने कुछ साल पहले धर्मेंद्र के साथ उम्रदराज प्रेमियों के रिश्ते को परवान चढ़ाया था, वही अब उनके बेटे सनी देओल के साथ एक पीड़ित महिला के रूप में स्क्रीन साझा कर रही हैं। बंटवारा 1947 का कुल बजट लगभग 150 करोड़ रुपये के आसपास है। इस फिल्म में अभिनेत्री ने एक ऐसी बुजुर्ग महिला की लाचारी और दर्द को पर्दे पर उतारा है जो देखने वालों को अंदर तक झकझोर देता है। यही नहीं, हाल ही में उन्होंने एक हास्यपूर्ण बातचीत में सनी देओल के बाद बॉबी देओल के साथ भी काम करने की अपनी इच्छा खुलकर जाहिर की थी। अभिनंदन योग्य अभिनय यात्रा इस प्रकार 75 वर्ष की आयु में शबाना आजमी का यह कमबैक केवल एक साधारण फिल्म की रिलीज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके अभिनय करियर का एक स्वर्णिम अध्याय बन चुका है। एक तरफ जहां दर्शक उनके पुराने रोमांस को आज भी याद करते हैं, वहीं दूसरी तरफ इस नई फिल्म में निभाया गया उनका माई का किरदार लोगों के दिलों में एक अलग छाप छोड़ रहा है। उनकी यह बहुमुखी प्रतिभा दिखाती है कि एक मंझा हुआ कलाकार हर दौर में दर्शकों को अपनी कला से मंत्रमुग्ध कर सकता है। इसका आप पर असर फिल्म के दर्शक: यह फिल्म दर्शकों को ऐतिहासिक विभाजन के दौर की मानवीय संवेदनाओं और मजबूत अभिनय का अनुभव कराती है। सवाल-जवाब 1. क्या बंटवारा 1947 देखने लायक है? हाँ, यह फिल्म अपने मजबूत भावनात्मक पक्षों और शबाना आजमी तथा सनी देओल के बेहतरीन अभिनय के कारण देखने लायक है। 2. शबाना आजमी ने इससे पहले कौन सी बड़ी फिल्म में काम किया था? उन्होंने इससे पहले 2023 की फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी में अभिनय किया था। 3. बंटवारा 1947 के निर्देशक कौन हैं? इस फिल्म के निर्देशक राजकुमार संतोषी हैं। 4. फिल्म बंटवारा 1947 की पृष्ठभूमि क्या है? यह फिल्म 1947 के भारत विभाजन और उस दौरान के मानवीय संबंधों पर आधारित है। https://trendkia.com/entertainment/partition-1947-review-shabana-azmi-ki-wapsi-aur-sunny-deol-18058 TrendKia — Har trend, sabse pehle.