फिल्म हनुमान अंश के पर्दे के पीछे की कहानी: धारकुंडी आश्रम और चित्रकूट की असली लोकेशंस पर खिंचे आध्यात्मिक दृश्य नीम करौली बाबा के आरंभिक सफर पर बनी फिल्म हनुमान अंश का बड़ा हिस्सा सतना और चित्रकूट के वास्तविक धार्मिक स्थलों पर रिकॉर्ड किया गया। सिनेमा जगत में साल 2026 के दौरान अपनी सादगी और आध्यात्मिक गहराई के चलते चर्चा बटोरने वाली फिल्म हनुमान अंश की बनावट में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों ने केंद्रीय भूमिका निभाई है। संत बाबा नीम करौली महाराज के शुरुआती जीवन काल और उनके वैराग्य की डगर को पर्दे पर उतारने वाली इस कृति का अस्सी प्रतिशत से अधिक हिस्सा चित्रकूट के बीहड़ों, पर्वतों और ऐतिहासिक धार्मिक परिसरों में फिल्माया गया। फिल्म निर्माण दल ने कृत्रिम स्टूडियो सेट पर धन बहाने के बजाय असली जमीन और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले स्थलों को चुना, जिसमें सतना जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धारकुंडी आश्रम का अघमर्षण कुंड सबसे प्रमुख केंद्र बनकर उभरा। अघमर्षण कुंड और पौराणिक संदर्भों का ताना-बाना चित्रकूट क्षेत्र के जाने-माने धारकुंडी आश्रम परिसर में स्थित अघमर्षण कुंड को फिल्म के बेहद संवेदनशील आध्यात्मिक प्रसंगों की पृष्ठभूमि के रूप में उपयोग में लाया गया। यह जलाशय केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के लिए भी अंचल में श्रद्धा का केंद्र है। जनश्रुतियों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस कुंड का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है, जहां धर्मराज युधिष्ठिर और यक्ष के मध्य हुए प्रसिद्ध संवाद की घटना को इस भूमि से जोड़ा जाता है। फिल्म के निर्देशक ने इसी स्थान पर मुख्य पात्र और एक संन्यासी के बीच गहरे संवाद, ध्यान और साधना के दृश्य तैयार किए। इन दृश्यों का मूल उद्देश्य नायक के अंतर्मन में चल रहे अंतर्द्वंद्व, सांसारिक विरक्ति और आध्यात्मिक जागृति के सूक्ष्म पलों को प्रामाणिक रूप से दर्शकों तक पहुंचाना था। प्राकृतिक पर्वतमालाएं और कैमरे में ढला जीवंत माहौल अघमर्षण कुंड के चारों तरफ फैली घनी पर्वत श्रृंखलाएं और पहाड़ों से रिसती प्राकृतिक जलधाराएं सिनेमाई पर्दे पर एक अनोखा और शांत दृश्य संसार रचती हैं। निर्माताओं ने किसी भी प्रकार की बनावटी साज-सज्जा से बचते हुए कैमरे को प्रकृति के हवाले कर दिया, ताकि दर्शक उस स्थल के मूल आध्यात्मिक कंपन और शांत वातावरण को सीधे महसूस कर सकें। यद्यपि फिल्म के अंतिम संपादन में इस कुंड से जुड़े दृश्यों की समय अवधि लगभग 1 से 2 मिनट के आसपास ही रखी गई है, परंतु कथा के मोड़ और नायक के वैचारिक रूपांतरण के दृष्टिकोण से यह संक्षिप्त दृश्य पूरी फिल्म की आत्मा बनकर सामने आता है। मंदाकिनी तट स्थित पंजाबी बाबा आश्रम से आरंभ फिल्म की शूटिंग का एक और अत्यंत भावनात्मक पहलू चित्रकूट में पावन मंदाकिनी नदी के किनारे बने पंजाबी बाबा आश्रम से जुड़ा है। कथा का सबसे पहला दृश्य इसी आश्रम परिसर के उस ऐतिहासिक कमरे में रिकॉर्ड किया गया, जहां अतीत में स्वयं नीम करौली बाबा ने कुछ समय प्रवास किया था। फिल्म निर्माण से जुड़े दल की यह प्राथमिक कोशिश रही कि जिन स्थानों पर बाबा के चरण वास्तव में पड़े थे, उन्हीं कमरों और आंगनों को सिनेमाई फ्रेम में ढाला जाए, ताकि कहानी का जमीनी सत्य और ऐतिहासिक जुड़ाव पूरी तरह जीवंत बना रहे। बुंदेली-बघेली परिवेश और शिवरामपुर का पुराना विद्यालय चित्रकूट और उसके सीमावर्ती इलाकों की सांस्कृतिक पहचान बुंदेली और बघेली परंपराओं से जुड़ी हुई है। फिल्म में इस आंचलिक यथार्थ को उभारने के लिए स्थानीय ग्रामीणों को सीधे अभिनय और भीड़ के दृश्यों का हिस्सा बनाया गया, जिससे पर्दे पर क्षेत्र की सहज ग्रामीण दिनचर्या स्वाभाविक रूप में झलकी। इसके अतिरिक्त, शूटिंग के दौरान इलाके में मौजूद पुरानी इमारतों का रचनात्मक उपयोग किया गया। शिवरामपुर में स्थित एक पुराने जूनियर हाईस्कूल के भवन को कला निर्देशन के जरिए फतेहगढ़ जेल के प्रांगण में रूपांतरित कर दिया गया। इस तरह महंगे और भारी-भरकम स्टूडियो सेटअप की जगह इलाके के पुराने ढांचों को ही ऐतिहासिक कालखंड के अनुकूल ढाल लिया गया। कम लागत में असाधारण सफलता और अगले भाग की रूपरेखा स्वयंभू मीडिया नेटवर्क के बैनर तले निर्मित इस फिल्म का निर्देशन और लेखन डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने संभाला है। कहानी में बाबा नीम करौली महाराज के बचपन के नाम लक्ष्मी नारायण से लेकर उनके गृहत्याग, प्रभु की खोज और आंतरिक साधना के शुरुआती आयामों को प्रमुखता दी गई है। अभिनय के मोर्चे पर शोभित श्रीवास्तव और चंदन आनंद ने मुख्य भूमिकाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। केवल करीब 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने सिनेमाघरों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की कुल कमाई दर्ज कर भारतीय सिनेमा में भारी मुनाफा अर्जित करने वाली रचनाओं में अपना स्थान बनाया। इस अप्रत्याशित सफलता के उपरांत अब इसके दूसरे संस्करण हनुमान अंश 2 की रूपरेखा भी सामने आ चुकी है। आगामी फिल्म में बाबा के ब्रज क्षेत्र के जीवन, उनकी जन्मभूमि फिरोजाबाद के साथ-साथ आगरा, मथुरा और नैनीताल स्थित कैंची धाम के आध्यात्मिक विस्तार के प्रसंगों को समेटा जाएगा। इसका आप पर असर फिल्म की अपार सफलता और असली धार्मिक स्थलों के फिल्मांकन से क्षेत्रीय पर्यटन तथा कम बजट वाले स्वतंत्र सिनेमा को नई गति मिलेगी। • पर्यटन को बढ़ावा: धारकुंडी आश्रम और चित्रकूट के अज्ञात धार्मिक स्थलों पर अब बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही में वृद्धि होगी। इससे स्थानीय टैक्सी चालकों, धर्मशालाओं और छोटे दुकानदारों के रोजगार में सीधी बढ़ोतरी संभव होगी। • स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं के लिए: कम लागत में वास्तविक स्थलों का उपयोग करके बनाई गई फिल्मों के लिए यह एक मजबूत वित्तीय उदाहरण बन गया है। छोटे निर्माता अब भारी स्टूडियो सेट के स्थान पर प्राकृतिक लोकेशंस को चुनकर लागत नियंत्रित रख सकेंगे। • मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में: बुंदेलखंड और बघेलखंड अंचल के स्थानीय कलाकारों तथा ग्रामीणों को नई फिल्मों में काम मिलने के रास्ते खुलेंगे। क्षेत्रीय संस्कृति और पुरानी इमारतों को भी कलात्मक संरक्षण और पहचान मिल सकेगी। • आगामी भाग का इंतजार: बाबा नीम करौली के अनुयायियों को अब ब्रज क्षेत्र, फिरोजाबाद और कैंची धाम पर केंद्रित अगली कड़ी में नई ऐतिहासिक जानकारियां देखने को मिलेंगी। इससे उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीर्थ स्थलों में भी लोगों की रुचि और बढ़ेगी। ऐसा क्यों हुआ फिल्म को वास्तविक स्थलों पर फिल्माने और उसकी भारी सफलता के पीछे कई रचनात्मक तथा व्यावहारिक कारण शामिल रहे हैं। निर्माताओं ने कहानी की विश्वसनीयता और सीमित वित्तीय संसाधनों के बीच बेहतर संतुलन साधने का प्रयास किया। • आध्यात्मिक यथार्थ की मांग: नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित कथा को प्रामाणिक रूप देने के लिए उन वास्तविक स्थानों की आवश्यकता थी जहां उन्होंने स्वयं साधना की थी। मंदाकिनी किनारे स्थित आश्रम और धारकुंडी के प्राकृतिक कुंड ने बिना किसी कृत्रिम बनावट के दृश्यों को सच्चा माहौल प्रदान किया। • बजट की सख्त सीमाएं: पूरी परियोजना का निर्माण केवल करीब 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में पूरा करना था। भव्य स्टूडियो सेट लगाने का भारी खर्च बचाने के लिए दल ने शिवरामपुर के पुराने स्कूल भवन और ग्रामीण परिवेश का कुशल उपयोग किया। • श्रद्धालुओं और जनता का जुड़ाव: बाबा नीम करौली महाराज के प्रति देश-विदेश में अपार लोक श्रद्धा विद्यमान है। वास्तविक जीवन प्रसंगों और बचपन के नाम लक्ष्मी नारायण से जुड़े संघर्षों को बिना लाग-लपेट के दिखाने से दर्शकों ने भावनात्मक रूप से फिल्म को हाथों-हाथ लिया। सवाल-जवाब 1. फिल्म हनुमान अंश की शूटिंग किन प्रमुख जगहों पर हुई? इसकी अस्सी प्रतिशत से अधिक शूटिंग चित्रकूट तथा सतना जिले में हुई, जिसमें धारकुंडी आश्रम का अघमर्षण कुंड और मंदाकिनी तट का पंजाबी बाबा आश्रम शामिल हैं। 2. धारकुंडी आश्रम के अघमर्षण कुंड का क्या ऐतिहासिक महत्व बताया गया है? स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस कुंड का संबंध महाभारत काल से है, जहां युधिष्ठिर और यक्ष के बीच प्रसिद्ध संवाद घटित होने की बात कही जाती है। 3. फिल्म का पहला दृश्य कहां रिकॉर्ड किया गया था? फिल्म की शुरुआत चित्रकूट स्थित पंजाबी बाबा आश्रम के उस कमरे से रिकॉर्ड की गई, जहां अतीत में नीम करौली बाबा स्वयं ठहरे थे। 4. फिल्म में फतेहगढ़ जेल का दृश्य किस जगह तैयार किया गया था? कलाकारों और निर्माण दल ने शिवरामपुर में स्थित एक पुराने जूनियर हाईस्कूल के भवन को रूपांतरित करके जेल का सेट बनाया था। 5. हनुमान अंश का बजट कितना था और इसने कितनी कमाई की? यह फिल्म करीब 2 करोड़ रुपये की लागत में बनी थी और इसने सिनेमाघरों में 50 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया। 6. फिल्म के निर्देशक कौन हैं और मुख्य भूमिका किसने निभाई है? इसका लेखन और निर्देशन डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने किया, जबकि मुख्य भूमिकाओं में शोभित श्रीवास्तव और चंदन आनंद नजर आए। 7. हनुमान अंश 2 की कहानी किन जगहों पर आधारित होगी? अगली कड़ी बाबा के ब्रज क्षेत्र के जीवन, उनकी जन्मभूमि फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा तथा नैनीताल के कैंची धाम के प्रसंगों पर केंद्रित होगी। https://trendkia.com/entertainment/philma-hanuman-ansh-ke-parde-ke-pichhe-ki-kahani-dharkundi-ashrama-aura-chitrakoot-ki-asali-lokeshnsa-para-khinche-adhyatmika-dris-34818 TrendKia — Har trend, sabse pehle.