# फिल्मों में इंसानी जज्बातों की जगह नहीं ले सकती तकनीक, रामायण के सितारों ने रखा अपना पक्ष

> रामायण के बड़े पर्दे पर आने से ठीक पहले मुख्य कलाकारों ने सिनेमा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव और इंसानी रचनात्मकता के महत्व को स्पष्ट किया।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/philmon-men-insani-jajbaton-ki-jagaha-nahin-le-sakati-takanika-ramayana-ke-sitaron-ne-rakha-apana-paksha-56097 · **Language:** Hindi
**Tags:** रामायण फिल्म, रणबीर कपूर, यश, नितेश तिवारी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बॉलीवुड सिनेमा, विजुअल इफेक्ट्स

बड़े पर्दे पर भव्य पौराणिक सिनेमा को लेकर दर्शकों की उत्सुकता चरम पर पहुंच चुकी है, जहां 5 नवंबर को बहुप्रतीक्षित फिल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली है। प्रदर्शन से ठीक पहले 3 नवंबर, मंगलवार को मुंबई में एक भव्य प्रीमियर का आयोजन रखा गया था, जिसमें निर्देशक नितेश तिवारी और उनकी पूरी टीम अपने परिजनों के साथ शामिल हुई। टीजर के सामने आने के बाद से ही डिजिटल मंचों पर फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX), विशाल सेट निर्माण और संगीत को लेकर लगातार बातचीत देखने को मिल रही है। इसी माहौल के बीच मुख्य अभिनेता रणबीर कपूर और यश ने सिनेमा निर्माण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती पैठ पर अपने स्पष्ट विचार साझा किए हैं।

## तकनीक केवल एक साधन है, इंसानी स्पर्श का विकल्प नहीं
सिनेमा उद्योग में आधुनिक टूल्स के दखल पर दोनों प्रमुख कलाकारों का दृष्टिकोण बेहद संतुलित नजर आया। उनका स्पष्ट कहना है कि नई प्रणालियां निर्माण प्रक्रिया को रफ्तार दे सकती हैं और उसे तकनीकी तौर पर धारदार बना सकती हैं, लेकिन कभी भी जीवित अभिनय और इंसानी हुनर की बराबरी नहीं कर सकतीं। अभिनय के क्षेत्र में वास्तविक भावों की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया गया कि कला का मूल अस्तित्व ही इंसानी रिश्तों और संवेदनाओं से संचालित होता है।

रणबीर कपूर ने इस संबंध में जोर देकर कहा कि कलात्मक माध्यमों में मानवीय जुड़ाव सबसे बुनियादी तत्व है। उनके अनुसार आधुनिक तकनीकों को लेंस या विजुअल इफेक्ट्स की भांति केवल सुविधा बढ़ाने वाले औजार के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि कला तब अधिक व्यक्तिगत महसूस होती है जब उसमें मानवीय स्पर्श समाहित हो, और कहानी कहने या प्रदर्शन करने वाली कला की जगह मशीनें कभी नहीं ले सकतीं।

## रचनात्मकता और सतर्कता के साथ तकनीक का संतुलन
दूसरी तरफ फिल्म में रावण का किरदार निभाने वाले यश ने आधुनिक एल्गोरिद्म के उपयोग को लेकर अधिक सजग और सतर्क रहने की वकालत की। उन्होंने रेखांकित किया कि किसी भी कलात्मक उद्यम के केंद्र में अंततः इंसान ही होते हैं, इसलिए यह सीमा तय करना अनिवार्य है कि इन स्वचालित तकनीकों का प्रयोग कहां और कितनी मात्रा में किया जाए। उनके अनुसार नई कल्पनाएं गढ़ने और मौलिक रचना करने का जो सामर्थ्य मानवीय मस्तिष्क के पास है, वह हर जटिल मशीन को चुनौती दे सकता है।

यश ने इस बात पर खास बल दिया कि इंसान परिस्थितियों से लड़कर आगे बढ़ने वाले सर्वाइवर रहे हैं, इसलिए इस नई तकनीकी क्रांति के दौर में भी घबराने के बजाय समझदारी से रास्ता निकालने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक सोच के आगे कोई भी बनावटी प्रणाली टिक नहीं सकती, बशर्ते लोग इन टूल्स का उपयोग बिना अपनी पहचान खोए और पूरी सूझबूझ के साथ करें।

## इसका आप पर असर
फिल्म उद्योग में तकनीकी बदलावों के बीच शीर्ष कलाकारों का यह रुख दर्शकों और रचनात्मक क्षेत्र के युवाओं को यह भरोसा दिलाता है कि पर्दे पर मानवीय संवेदनाओं का महत्व बना रहेगा।

- **सिनेमा दर्शकों के लिए:** बड़ी फिल्मों में तकनीक का इस्तेमाल केवल भव्य दृश्यों तक सीमित रहने की उम्मीद है। इसका अर्थ यह है कि दर्शकों को स्क्रीन पर मशीनी भावशून्यता के बजाय वास्तविक कलाकारों के अभिनय और जीवंत भावनाओं का अनुभव मिलता रहेगा।
- **कलाकारों और लेखकों के लिए:** उभरते हुए कहानीकारों और अभिनेताओं के काम की अहमियत लगातार बनी रहेगी। कलाकारों को अपनी रचनात्मक सोच और भावनात्मक अभिव्यक्ति को और अधिक निखारने पर ध्यान देना होगा क्योंकि मशीनें इसकी जगह नहीं ले सकतीं।
- **तकनीकी पेशेवरों के लिए:** दृश्य प्रभाव और पोस्ट प्रोडक्शन से जुड़े पेशेवरों को नए टूल्स के अनुकूल खुद को ढालना होगा। इससे स्टूडियो में काम करने वाले तकनीशियनों के लिए अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने और आधुनिक उपकरणों के साथ समन्वय करने के अवसर बढ़ेंगे।
- **टिकट और मनोरंजन बाजार:** बड़े पैमाने की फिल्मों के भव्य निर्माण और तकनीकी गुणवत्ता में निरंतर सुधार होगा। इससे दर्शकों को सिनेमाघरों में बेहतर विजुअल और बड़े कैनवास की फिल्में देखने का अवसर मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह बहस उस समय खुलकर सामने आई जब भव्य विजुअल इफेक्ट्स वाली पौराणिक फिल्म के प्रदर्शन से ठीक पहले प्रमुख कलाकारों से सिनेमा में मशीनी प्रणालियों के दखल पर उनकी राय मांगी गई।

- **भव्य निर्माण का दबाव:** बड़े बजट की फिल्मों में विजुअल इफेक्ट्स और नए तकनीकी उपकरणों की भारी मांग रहती है। इसी कारण कलाकारों ने स्पष्ट किया कि तकनीक सिर्फ दृश्य निर्माण को बेहतर बनाने का साधन है, अभिनय बदलने का नहीं।
- **रचनात्मक स्वायत्तता की चिंता:** विश्वभर के मनोरंजन उद्योग में यह सवाल उठ रहा है कि क्या डिजिटल प्रणालियां इंसानी हुनर को सीमित कर देंगी। इस संदर्भ में कलाकारों ने मानवीय स्पर्श और सोचने की अनूठी क्षमता को सबसे ताकतवर आधार बताया।
- **संतुलित उपयोग की जरूरत:** आधुनिक टूल्स के तेजी से बढ़ते प्रसार के कारण यह तय करना जरूरी हो गया है कि उनका दायरा कहां तक हो। इसी आवश्यकता के चलते सितारों ने तकनीक के अंधाधुंध उपयोग के बजाय सतर्कता और सूझबूझ से काम लेने पर बल दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म रामायण सिनेमाघरों में किस तारीख को रिलीज हो रही है?
यह फिल्म 5 नवंबर को बड़े पर्दे पर रिलीज हो रही है।

### 2. फिल्म का भव्य प्रीमियर कब और कहां आयोजित किया गया था?
फिल्म का ग्रैंड प्रीमियर मंगलवार, 3 नवंबर को मुंबई में आयोजित किया गया था।

### 3. फिल्म में रावण का किरदार कौन निभा रहे हैं?
फिल्म में रावण की भूमिका अभिनेता यश निभा रहे हैं।

### 4. फिल्म का निर्देशन किसने किया है?
इस फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है।

### 5. रणबीर कपूर के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किस क्षेत्र में होना चाहिए?
रणबीर कपूर का मानना है कि इसका उपयोग विजुअल इफेक्ट्स और कैमरा लेंस जैसी तकनीकों की तरह फिल्म निर्माण को बेहतर बनाने वाले साधन के रूप में होना चाहिए।

### 6. यश ने इंसानी रचनात्मकता और तकनीक के संतुलन को लेकर क्या कहा?
यश ने कहा कि इंसान परिस्थितियों से पार पाने वाले सर्वाइवर हैं और उनकी नई चीजें सोचने की क्षमता मशीनों को भी चुनौती दे सकती है, इसलिए तकनीक का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए।

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