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  "title": "प्रतापगढ़ के बाबू पट्टी गांव में पुस्तकालय शुरू न होने पर कौन बनेगा करोड़पति में भावुक हुए अमिताभ बच्चन",
  "summary": "क्विज रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति 18 में अमिताभ बच्चन ने पुश्तैनी गांव बाबू पट्टी में लाइब्रेरी शुरू करने में हुई देरी पर माफी मांगी और जल्द सुविधाएं जुटाने का भरोसा दिया.",
  "content": "टेलीविजन के चर्चित क्विज रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति 18 के मंच पर उस समय बेहद भावुक माहौल देखने को मिला जब अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने पुश्तैनी गांव से जुड़े एक अधूरे सपने का जिक्र किया. शो में हॉटसीट पर बैठे प्रतियोगी से संवाद करते हुए अमिताभ बच्चन अपने पैतृक गांव के बच्चों के लिए प्रस्तावित लाइब्रेरी की चर्चा करते हुए भावुक हो गए. उन्होंने खुले मंच से इस बात को स्वीकार किया कि लंबे समय से इस पुस्तकालय को शुरू करने में भारी देरी हुई है और इसके लिए उन्होंने ग्रामीणों से माफी मांगते हुए जल्द ही इसे क्रियान्वित करने का पक्का भरोसा दिया.\n\nप्रतियोगी के प्रतापगढ़ कनेक्शन से ताजा हुईं पैतृक यादें\nकार्यक्रम के दौरान कंटेस्टेंट चंद्र प्रकाश तिवारी ने जैसे ही अपनी पृष्ठभूमि उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से जुड़ी बताई, अभिनेता की पुरानी यादें ताजा हो गईं. बातचीत में जैसे ही बाबू पट्टी गांव का नाम सामने आया, अमिताभ बच्चन भावुक हो उठे. उन्होंने दर्शक दीर्घा और प्रतियोगी को बताया कि यह क्षेत्र उनके पूर्वजों का मूल स्थान रहा है. उनके पिता और प्रख्यात हिंदी कवि हरिवंश राय बच्चन इसी गांव से ताल्लुक रखते थे. अपने जुड़ाव को रेखांकित करते हुए अभिनेता ने कहा कि बाबू पट्टी उनके पूर्वजों की जन्मभूमि रही है और उनके बाबूजी वहीं से आए थे.\n\nजया बच्चन की पहल पर तैयार हुई थी लाइब्रेरी की योजना\nपुस्तकालय की परिकल्पना कैसे शुरू हुई, इस पर रोशनी डालते हुए अमिताभ बच्चन ने बताया कि यह विचार मूल रूप से उनकी पत्नी और अभिनेत्री जया बच्चन की ओर से सामने आया था. जब जया बच्चन उनके साथ गांव के दौरे पर गई थीं, तब उन्होंने पाया कि वहां के स्थानीय बच्चों के पास बैठकर अध्ययन करने के लिए किसी उचित स्थान की भारी कमी है. इस जरूरत को देखते हुए दोनों ने मिलकर बाबू पट्टी में बच्चों के लिए एक आधुनिक और सुव्यवस्थित पुस्तकालय स्थापित करने का संकल्प लिया था. योजना के तहत भवन निर्माण का कार्य पूरा भी कर लिया गया था, लेकिन कई तरह के अवरोधों के कारण वहां जरूरी सुविधाएं नहीं जुटाई जा सकीं और लाइब्रेरी विधिवत शुरू नहीं हो पाई.\n\nबाबू पट्टी के निवासियों से मांगी माफी, दिया संचालन का आश्वासन\nशो के दौरान अमिताभ बच्चन ने सीधे तौर पर बाबू पट्टी के ग्रामीणों को संबोधित किया और अब तक हुए विलंब पर खेद जताया. उन्होंने कहा कि बाबू पट्टी के लोगों से वह माफी मांगते हैं और केबीसी के मंच से यह आश्वस्त करना चाहते हैं कि घबराने की कोई बात नहीं है क्योंकि यह पुस्तकालय बहुत जल्द खोल दिया जाएगा. अभिनेता ने स्पष्ट किया कि मुख्य इमारत पहले से तैयार खड़ी है और अब वहां अध्ययन सामग्री, जरूरी किताबें और अन्य आवश्यक साजो-सामान तेजी से उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि गांव के बच्चे बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई कर सकें.\n\nदो दशक पहले हुआ था उद्घाटन, अड़चनों से रुक गया था काम\nइस पुस्तकालय की पृष्ठभूमि काफी पुरानी है. वर्ष 2006 में जया बच्चन और पूर्व सांसद अमर सिंह ने मिलकर डॉ. हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में 'डॉ. हरिवंश राय बच्चन स्मारक पुस्तकालय' का औपचारिक उद्घाटन किया था. हालांकि उस उद्घाटन समारोह के बाद समुचित रखरखाव न होने और कई प्रशासनिक व व्यावहारिक अड़चनों की वजह से इसका नियमित संचालन नहीं हो सका. देखरेख के अभाव में लंबे अरसे तक बंद रहने के कारण पुस्तकालय का भवन भी काफी जर्जर स्थिति में पहुंच गया था. अब अभिनेता के नए वादे के बाद गांव में इस पुस्तकालय के पुनर्जीवित होने की नई उम्मीद जगी है.\n\nइसका आप पर असर\nअमिताभ बच्चन के इस वादे से प्रतापगढ़ के ग्रामीण छात्रों को जल्द ही अपने क्षेत्र में एक सुसज्जित अध्ययन केंद्र मिलने की उम्मीद बंधी है.\n\n• प्रतापगढ़ में: बाबू पट्टी और आसपास के ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और स्कूली पढ़ाई के लिए किताबें और शांत अध्ययन स्थल मिल सकेगा. स्थानीय छात्रों को पठन-पाठन की सामग्री के लिए दूरदराज के कस्बों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.\n• भारत में: यह घटनाक्रम देश के सुदूर गांवों में बुनियादी शैक्षणिक संसाधनों और सार्वजनिक पुस्तकालयों की गंभीर कमी की ओर ध्यान खींचता है. इससे अन्य प्रमुख हस्तियों और नीति-निर्माताओं को भी अपने पैतृक क्षेत्रों में सामुदायिक अध्ययन केंद्रों को सक्रिय करने की प्रेरणा मिल सकती है.\n• सांस्कृतिक विरासत के स्तर पर: प्रख्यात साहित्यकार डॉ. हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में बना स्मारक पुस्तकालय पुनर्जीवित होने से क्षेत्र की साहित्यिक पहचान मजबूत होगी. इससे नई पीढ़ी को महान कवि के साहित्यिक अवदान से रूबरू होने का सीधा अवसर मिलेगा.\n• सार्वजनिक वादे की निगरानी: राष्ट्रीय टेलीविजन मंच पर दिए गए आश्वासन के बाद अब स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि किताबें और फर्नीचर कब तक उपलब्ध कराए जाते हैं. इससे रुके हुए विकास कार्यों में तेजी आने की संभावना बढ़ जाती है.\n\nऐसा क्यों हुआ\nअमिताभ बच्चन के पुश्तैनी गांव में पुस्तकालय का विचार दो दशक पहले बना था, लेकिन प्रशासनिक और रखरखाव संबंधी रुकावटों के कारण यह योजना वर्षों तक अधर में लटकी रही.\n\n• जया बच्चन का अवलोकन: गांव यात्रा के दौरान जया बच्चन ने पाया कि स्थानीय बच्चों के पास पढ़ाई के लिए कोई समुचित जगह नहीं है. इसी के बाद बच्चन परिवार ने बाबू पट्टी में एक समर्पित पुस्तकालय स्थापित करने का निर्णय लिया.\n• 2006 का औपचारिक उद्घाटन: वर्ष 2006 में जया बच्चन और पूर्व सांसद अमर सिंह ने डॉ. हरिवंश राय बच्चन स्मारक पुस्तकालय का उद्घाटन किया था. इस शुरुआती कदम के बाद भी इमारत में आवश्यक संसाधन पूरी तरह नहीं जुटाए जा सके.\n• रखरखाव और व्यावहारिक अड़चनें: उद्घाटन के उपरांत नियमित देखरेख का अभाव रहा और कुछ स्थानीय अड़चनों के चलते केंद्र का संचालन शुरू नहीं हो पाया. लंबे समय तक निष्क्रिय पड़े रहने से निर्मित भवन जर्जर अवस्था में पहुंच गया.\n• केबीसी पर गांव का जिक्र: कौन बनेगा करोड़पति 18 में प्रतियोगी चंद्र प्रकाश तिवारी के प्रतापगढ़ संदर्भ ने इस पुराने वादे को फिर से सामने ला दिया. इसी चर्चा के बाद अमिताभ बच्चन ने विलंब की जिम्मेदारी लेते हुए इसे जल्द शुरू कराने का नया संकल्प लिया.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कौन बनेगा करोड़पति में अमिताभ बच्चन किस बात पर भावुक हुए?\nअमिताभ बच्चन अपने पुश्तैनी गांव बाबू पट्टी में बच्चों के लिए बनी लाइब्रेरी के वर्षों से चालू न हो पाने पर भावुक हुए.\n\n2. अमिताभ बच्चन का पैतृक गांव कौन सा है?\nअमिताभ बच्चन का पैतृक गांव उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित बाबू पट्टी है.\n\n3. गांव में लाइब्रेरी खोलने का सुझाव सबसे पहले किसने दिया था?\nगांव में बच्चों के लिए लाइब्रेरी खोलने का सुझाव अभिनेत्री जया बच्चन ने गांव भ्रमण के बाद दिया था.\n\n4. इस लाइब्रेरी का औपचारिक उद्घाटन कब और किसने किया था?\nइस पुस्तकालय का उद्घाटन वर्ष 2006 में जया बच्चन और पूर्व सांसद अमर सिंह ने किया था.\n\n5. लाइब्रेरी का नाम किसके नाम पर रखा गया था?\nइस पुस्तकालय का नाम प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में 'डॉ. हरिवंश राय बच्चन स्मारक पुस्तकालय' रखा गया था.\n\n6. लाइब्रेरी शुरू होने में अब तक क्या रुकावटें थीं?\nउद्घाटन के बाद समुचित रखरखाव की कमी और कुछ अड़चनों के कारण जरूरी सुविधाएं नहीं लग पाई थीं और इमारत जर्जर हो गई थी.\n\n7. अमिताभ बच्चन ने गांव वालों को क्या आश्वासन दिया है?\nउन्होंने ग्रामीणों से माफी मांगते हुए भरोसा दिया कि भवन तैयार है और जल्द ही जरूरी किताबें व सामान रखकर इसे शुरू किया जाएगा.",
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  "category": "मनोरंजन",
  "publishedAt": "2026-10-05",
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