शोले और दीवार से अलग अमिताभ बच्चन के वे 7 अनूठे किरदार, जो बॉक्स ऑफिस की भीड़ में कहीं दब गए शोले और डॉन जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बीच अमिताभ बच्चन की कई बेहतरीन फिल्में दर्शकों की नजरों से छूट गईं। सौदागर, चीनी कम, झुंड और ऊंचाई जैसी इन फिल्मों में उन्होंने कई यादगार और गैर-पारंपरिक भूमिकाएं निभाई हैं। भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमिताभ बच्चन की पहचान अक्सर उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्मों और एंग्री यंग मैन वाले किरदारों से की जाती है। ‘शोले’, ‘दीवार’ और ‘डॉन’ जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार के शिखर पर पहुंचाया। इसके बावजूद उनके लंबे फिल्मी सफर में कई ऐसी अनूठी कहानियां भी शामिल रही हैं, जिन्हें रिलीज के समय तो व्यापक बॉक्स ऑफिस सफलता या अपेक्षित चर्चा नहीं मिल सकी, लेकिन समय के साथ वे सिनेमा प्रेमियों के लिए यादगार बन गईं। इन फिल्मों में उन्होंने पारंपरिक नायक की छवि को तोड़ते हुए ऐसे जटिल और लीक से हटकर किरदार निभाए, जो उनकी वास्तविक अभिनय क्षमता का प्रमाण पेश करते हैं। 1. सौदागर (1973): स्वार्थ और रिश्ते का कड़वा ताना-बाना साल 1973 में रिलीज हुई निर्देशक सुधेंदु रॉय की फिल्म ‘सौदागर’ अमिताभ बच्चन के करियर के शुरुआती दौर की सबसे सशक्त और अनदेखी फिल्मों में गिनी जाती है। इस कहानी में उन्होंने एक गुड़ विक्रेता मोती का किरदार निभाया था, जो ताड़ के पेड़ों पर चढ़कर ताड़ी और रस जुटाने का काम करता है। घुटनों तक धोती बांधे उनका यह रूप एक ठेठ और प्रामाणिक ताड़ी व्यापारी जैसा दिखाई देता है। कहानी में मोती गांव की एक विधवा मजूरन (नूतन) से शादी सिर्फ इसलिए करता है ताकि उसके स्वादिष्ट गुड़ बनाने की कला का फायदा उठाकर पैसे जमा कर सके। यह फिल्म पुरुष सत्तात्मक लालच और स्वार्थी रिश्तों का बेहद बारीक विश्लेषण पेश करती है। नूतन के साथ अमिताभ बच्चन की अदाकारी ने एक ऐतिहासिक प्रभाव छोड़ा था। यदि आप इस क्लासिक ड्रामा को देखना चाहते हैं, तो यह वर्तमान में अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है। 2. बेमिसाल (1982): भाई के लिए अपराध अपने सिर लेने की दास्तान साल 1982 में मशहूर निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में आई ‘बेमिसाल’ एक गंभीर पारिवारिक और रोमांटिक ड्रामा फिल्म है। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने डॉक्टर सुधीर रॉय की मुख्य भूमिका निभाई थी। पूरी कहानी दो डॉक्टर भाइयों के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जहां पारिवारिक समर्पण और त्याग की चरम सीमा दिखाई देती है। जब कहानी में उनके भाई पर गंभीर कानूनी और नैतिक आरोप लगते हैं, तो सुधीर अपने भाई को हर संकट से बचाने का फैसला करता है। वह सारे इल्जाम खुद अपने सिर ले लेता है और उसके बचाव के लिए अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड तक बदल डालता है। बच्चन के अभिनय का यह संयमित और भावनात्मक पहलू दर्शकों को गहराई से छूता है। यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म वूट पर देखी जा सकती है। 3. चीनी कम (2007): 64 साल के शेफ और उम्र के फासले का अनोखा रोमांस साल 2007 में आई फिल्म ‘चीनी कम’ के जरिए निर्देशक आर बाल्की ने एक अनोखा और साहसी विषय पर्दे पर उतारा। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने लंदन में अपना आलीशान रेस्टोरेंट चलाने वाले 64 वर्षीय अहंकारी और सख्त मिजाज हेड शेफ बुद्धदेव गुप्ता का किरदार निभाया था। बुद्धदेव अपनी निजी जिंदगी में किसी भी इंसान का दखल पसंद नहीं करता। उसकी यह तयशुदा दुनिया तब पूरी तरह बदल जाती है, जब उसकी मुलाकात खुद से काफी कम उम्र की महिला नीना वर्मा (तब्बू) से होती है। बेमेल उम्र के इस प्यार में समाज और परिवार के स्तर पर कई जटिल रुकावटें आती हैं। नीना के पिता की भूमिका में परेश रावल ने भी शानदार काम किया है, जो बुद्धदेव की उम्र के लगभग बराबर होते हैं। यह खूबसूरत और मजेदार रोमांटिक ड्रामा दर्शकों के लिए वूट पर उपलब्ध है। 4. चेहरे (2021): बंद कमरे में इंसाफ का मनोवैज्ञानिक खेल साल 2021 में आई ‘चेहरे’ एक सस्पेंस और रहस्यों से भरी साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है, जिसमें अमिताभ बच्चन के साथ इमरान हाशमी मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म में सेवानिवृत्त कानूनविदों की एक टोली एक अजनबी के साथ न्याय और अपराध का एक काल्पनिक खेल खेलती है, जो धीरे-धीरे जानलेवा मोड़ ले लेता है। यह फिल्म रिलीज के समय काफी चर्चा में रही थी, क्योंकि इसमें सुशांत सिंह राजपूत मामले में जेल जाने के बाद अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती नजर आई थीं। हालांकि, भारी चर्चा और जबरदस्त ट्विस्ट्स के बावजूद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी। अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी की यह थ्रिलर अमेजन प्राइम वीडियो और एमएक्स प्लेयर पर देखी जा सकती है। 5. झुंड (2022): बस्ती के बच्चों को रास्ता दिखाती फुटबॉल क्रांति प्रशंसित निर्देशक नागराज मंजुले के निर्देशन में साल 2022 में बनी फिल्म ‘झुंड’ वास्तविक जीवन के सामाजिक बदलाव पर आधारित एक प्रेरणादायक कहानी है। यह फिल्म प्रसिद्ध फुटबॉल कोच विजय बारसे के जीवन से प्रेरित है। अमिताभ बच्चन ने इसमें विजय बोराडे नाम के एक सेवानिवृत्त खेल शिक्षक की भूमिका निभाई है। कहानी में विजय बोराडे झुग्गी-बस्ती के भटके हुए बच्चों में छिपी ऊर्जा और प्रतिभा को पहचानते हैं। वे उन बच्चों को अपराध और नशे की दुनिया से दूर रखने के लिए फुटबॉल की एक टीम तैयार करते हैं और उनके जीवन को नई दिशा देते हैं। बच्चन ने इस फिल्म में किसी पारंपरिक फिल्मी हीरो की तरह नहीं, बल्कि एक जमीनी, संवेदनशील और धैर्यवान शिक्षक के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। यह अंडररेटेड फिल्म जी5 पर देखने के लिए मौजूद है। 6. ऊंचाई (2022): ढलती उम्र में दोस्ती और एवरेस्ट की दुर्गम यात्रा साल 2022 में ही रिलीज हुई निर्देशक सूरज बड़जात्या की एडवेंचर ड्रामा फिल्म ‘ऊंचाई’ उम्र, दोस्ती और इच्छाशक्ति के जज्बे को समर्पित है। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने अमित श्रीवास्तव की भूमिका निभाई है। कहानी चार बुजुर्ग दोस्तों के भावनात्मक रिश्ते को दर्शाती है। जब उनके एक दोस्त भूपेन का अचानक निधन हो जाता है, तो अमित अपने अन्य दो साथियों ओम शर्मा (अनुपम खेर) और जावेद सिद्दीकी (बोमन ईरानी) के साथ भूपेन की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए एवरेस्ट बेस कैंप की बेहद कठिन चढ़ाई पर निकल पड़ते हैं। यह फिल्म ढलती उम्र की शारीरिक सीमाओं, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और दोस्ती के प्रति गहरी निष्ठा को बेहद सादगी से सामने रखती है। दर्शकों से ज्यादा सराहना न पाने वाली यह दिल छू लेने वाली फिल्म जी5 पर स्ट्रीम की जा सकती है। 7. गुडबाय (2022): जीवनसंगिनी के जाने का दुख और पीढ़ियों की सोच का टकराव साल 2022 में निर्देशक विकास बहल के निर्देशन में आई ‘गुडबाय’ एक संवेदनशील फैमिली ड्रामा है। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने हरीश भल्ला नाम के एक रूढ़िवादी लेकिन प्यारे पिता की भूमिका निभाई है। अचानक पत्नी गायत्री (नीना गुप्ता) के निधन के बाद उनका पूरा परिवार अंतिम संस्कार के लिए घर पर इकट्ठा होता है। कहानी में शोक मनाने के पारंपरिक तौर-तरीकों, पुरानी मान्यताओं और नई पीढ़ी के आधुनिक विचारों के बीच टकराव को बेहद संवेदनशीलता से दिखाया गया है। रश्मिका मंदाना ने उनकी विद्रोही बेटी तारा का किरदार निभाया है। अमिताभ बच्चन ने एक ऐसे बेबस पिता का दर्द बखूबी पर्दे पर जिया है, जो पत्नी के वियोग को सहते हुए बिखरे परिवार को जोड़े रखने की जद्दोजहद करता है। यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है। इसका आप पर असर अमिताभ बच्चन की इन अनदेखी फिल्मों की सूची दर्शकों को कमर्शियल शोरगुल से अलग वास्तविक और विचारोत्तेजक सिनेमाई अनुभवों को खोजने का व्यावहारिक मौका देती है। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: यह संकलन दर्शकों को पारंपरिक मसाला फिल्मों के दायरे से बाहर ले जाकर बिग बी के गंभीर अभिनय को दोबारा परखने की सुविधा देता है। दर्शक वीकेंड पर अपने स्वाद के अनुसार ड्रामा, थ्रिलर या सामाजिक कहानियों का आनंद ले सकते हैं। • ओटीटी दर्शकों के लिए: सभी 7 फिल्में अलग-अलग प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से मौजूद हैं। दर्शकों को सिनेमाघरों की टिकट खरीदे बिना अपने मौजूदा सब्सक्रिप्शन जैसे नेटफ्लिक्स, जी5, वूट या प्राइम वीडियो पर उच्च गुणवत्ता वाला कंटेंट मिल जाता है। • पारिवारिक दर्शकों के लिए: 'ऊंचाई' और 'गुडबाय' जैसी फिल्में बुजुर्गों और युवाओं के बीच संवाद कायम करने में मददगार साबित होती हैं। परिवार के सदस्य साथ बैठकर आधुनिक और पारंपरिक जीवन मूल्यों पर खुलकर चर्चा कर सकते हैं। • युवा फिल्मकारों के लिए: इन फिल्मों की पटकथा और निर्देशन से नए फिल्म प्रेमी यथार्थवादी कहानी कहने की कला सीख सकते हैं। कमर्शियल दबाव के बिना कैसे मजबूत विषय गढ़े जाते हैं, यह इसका शानदार उदाहरण है। ऐसा क्यों हुआ सुपरस्टारडम की भारी छाया और बदलती दर्शक प्राथमिकताओं के कारण कई बेहतरीन पटकथाएं रिलीज के वक्त दर्शकों का अपेक्षित ध्यान नहीं खींच पाती हैं। • एंग्री यंग मैन छवि का दबदबा: सत्तर और अस्सी के दशक में दर्शकों ने बच्चन को मारधाड़ और बागी नायक के रूप में इतना स्वीकार कर लिया था कि 'सौदागर' जैसी यथार्थवादी भूमिकाएं उनकी कमर्शियल छवि के आगे दब गईं। उस दौर का आम दर्शक उनसे सिर्फ लार्जर दैन लाइफ किरदारों की उम्मीद करता था। • गैर-पारंपरिक विषयों का चयन: 'चीनी कम' में उम्र के बड़े अंतर का प्यार और 'झुंड' में स्लम बच्चों की वास्तविकता जैसे विषयों को पारंपरिक मसाला फिल्मों जैसी भारी ओपनिंग नहीं मिलती। इन कहानियों को बड़े पैमाने पर स्वीकार किए जाने में लंबा वक्त लगता है। • बॉक्स ऑफिस बनाम ओटीटी बदलाव: 'चेहरे', 'ऊंचाई' और 'गुडबाय' जैसी फिल्में महामारी के दौर या उसके ठीक बाद के सिनेमाई बदलाव के दौरान रिलीज हुईं, जब दर्शक सिनेमाघरों में केवल भव्य दृश्यों वाली फिल्में देखना पसंद कर रहे थे। परिणामस्वरूप, ऐसी भावनात्मक कहानियों को अपनी असली पहचान बाद में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मिली। सवाल-जवाब 1. अमिताभ बच्चन ने फिल्म सौदागर में क्या किरदार निभाया था? उन्होंने मोती नाम के गुड़ और ताड़ी बेचने वाले व्यक्ति का किरदार निभाया था, जो नूतन के गुड़ बनाने के हुनर का फायदा उठाने के लिए उनसे शादी करता है। 2. फिल्म चीनी कम में अमिताभ बच्चन के अपोजिट कौन सी अभिनेत्री थीं? फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री तब्बू मुख्य भूमिका में थीं, जहां दोनों के बीच उम्र के बड़े अंतर वाले अनोखे प्रेम प्रसंग को दिखाया गया था। 3. नागराज मंजुले द्वारा निर्देशित फिल्म झुंड की कहानी किस पर आधारित है? यह फिल्म प्रसिद्ध फुटबॉल कोच विजय बारसे के वास्तविक जीवन और उनके द्वारा स्लम के बच्चों को फुटबॉल सिखाने के प्रयासों पर आधारित है। 4. फिल्म ऊंचाई में अमिताभ बच्चन का क्या उद्देश्य दिखाया गया है? फिल्म में वह अपने दिवंगत मित्र भूपेन की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए अपने दो अन्य बुजुर्ग दोस्तों के साथ एवरेस्ट बेस कैंप की यात्रा पर निकलते हैं। 5. पारिवारिक ड्रामा फिल्म गुडबाय में अमिताभ बच्चन की बेटी का किरदार किसने निभाया है? फिल्म में अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने उनकी बेटी तारा का किरदार निभाया है। 6. अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी की थ्रिलर फिल्म चेहरे किस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है? यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो और एमएक्स प्लेयर पर देखने के लिए उपलब्ध है। https://trendkia.com/entertainment/sholay-aura-deewar-se-alaga-amitabh-bachchan-ke-ve-7-anuthe-kiradara-jo-boksa-phisa-ki-bhira-men-kahin-daba-gae-53856 TrendKia — Har trend, sabse pehle.