# श्रद्धा कपूर के किरदार की वजह से श्रेया घोषाल को दोबारा गाना पड़ा था आशिकी 2 का यह दर्दभरा नगमा

> गायिका श्रेया घोषाल ने खुलासा किया है कि फिल्म आशिकी 2 के मशहूर गीत सुन रहा है न तू को उन्हें सादगी और किरदार की मांग के चलते दोबारा रिकॉर्ड करना पड़ा था।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-10-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/shraddha-kapoor-ke-kiradara-ki-vajaha-se-shreya-ghoshal-ko-dobara-gana-para-tha-aashiqui-2-ka-yaha-dardabhara-nagama-50805 · **Language:** Hindi
**Tags:** श्रेया घोषाल, आशिकी 2, श्रद्धा कपूर, मोहित सूरी, अंकित तिवारी, बॉलीवुड संगीत, मुकेश भट्ट

सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे यादगार गीत दर्ज हैं, जिनकी धुन के पीछे की दास्तान श्रोताओं को चकित कर देती है। साल 2013 में आई म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा आशिकी 2 का जब भी जिक्र छिड़ता है, तो उसके तरानों का दर्द सीधे दिल को छू जाता है। इस फिल्म का एक बेहद मकबूल गाना सुन रहा है न तू आज भी संगीत प्रेमियों के पसंदीदा गीतों में शुमार है। हालांकि, बहुत कम लोग यह तथ्य जानते हैं कि इस कालजयी रचना को गायिका श्रेया घोषाल ने स्टूडियो में दो अलग अंदाज में रिकॉर्ड किया था। पहले प्रयास में अपनी बेमिसाल गायकी और शास्त्रीय नक्काशी दिखाने के बावजूद उन्हें पूरी रिकॉर्डिंग दोबारा करनी पड़ी थी, जिसकी वजह कोई तकनीकी खामी या सुरों की चूक नहीं, बल्कि फिल्म की कहानी की खास जरूरत थी।

 

## निर्माता और निर्देशक की अनोखी मांग

बिल्बोर्ड इंडिया के साथ बातचीत के दौरान श्रेया घोषाल ने अपने सुदीर्घ गायन सफर के इस दिलचस्प वाकये का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब वे पहली मर्तबा इस ट्रैक की रिकॉर्डिंग के लिए माइक के सामने पहुंची थीं, तब उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में सुरों के जटिल उतार-चढ़ाव, सूक्ष्म हरकतें और गायकी की समृद्ध सजावट उसमें पिरो दी थी। एक हुनरमंद गायिका के तौर पर उनका पहला टेक बेहद खूबसूरत और तकनीकी रूप से त्रुटिहीन बना था। इसके बावजूद निर्देशक मोहित सूरी और निर्माता मुकेश भट्ट पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। दोनों ने बहुत सम्मान के साथ गायिका से गुजारिश की कि वे इस गीत को एक बार फिर से बिल्कुल अलग ढंग से गाएं।

 

## पर्दे के किरदार के साथ तालमेल बिठाने की चुनौती

इस फैसले के पीछे का तर्क विशुद्ध रूप से फिल्म के कथानक और चरित्र चित्रण से जुड़ा हुआ था। कहानी के मुताबिक अभिनेत्री श्रद्धा कपूर का निभाया किरदार आरोही एक साधारण बार गायिका का था, जो संगीत की दुनिया में संघर्ष करते हुए धीरे-धीरे अपनी पहचान तलाश रही थी। निर्माता और निर्देशक का मानना था कि एक शुरुआती गायिका के गले से निकलने वाली आवाज में जरूरत से ज्यादा शास्त्रीय चमक या तकनीकी जटिलता नहीं होनी चाहिए। अगर आवाज में इतनी परिपक्वता दिखाई देगी, तो वह पर्दे पर दिखने वाले एक नवोदित कलाकार के सीधे-सादे रूप से मेल नहीं खाएगी। इस रचनात्मक दृष्टि को श्रेया घोषाल ने फौरन स्वीकार किया और समझा कि पार्श्व गायन में केवल सुर साधना ही नहीं, बल्कि उस किरदार की रूह को आवाज देना सबसे अहम होता है जिसे दर्शक पर्दे पर देख रहे हैं।

 

## सादगी भरा दूसरा टेक और संगीत की सफलता

दूसरी रिकॉर्डिंग के दौरान श्रेया घोषाल ने अपनी कलात्मक सजावट को पूरी तरह सीमित कर दिया। उन्होंने पूरे ट्रैक को बेहद सीधा, सरल और अनगढ़ रखा, जिससे गाने में मासूमियत और वास्तविक दर्द उभरकर सामने आ सके। उन्होंने पूरे गीत के भीतर सिर्फ दो खास जगहों पर हल्की सी तान और अलग अंदाज का इस्तेमाल किया, जबकि बाकी पूरे हिस्से को बिल्कुल सहज सुरों पर टिकाए रखा। नतीजतन, जब यह गाना पर्दे पर उभरा तो इसने सीधे दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना ली। अंकित तिवारी के दिलकश संगीत और संदीप नाथ के संजीदा बोलों से सजा यह गीत फिल्म की सबसे बड़ी पहचान बन गया। फिल्म में श्रद्धा कपूर के साथ मुख्य भूमिका में आदित्य रॉय कपूर नजर आए थे, और दोनों की केमिस्ट्री को संगीत ने अमर बना दिया।

 

## लाइव कॉन्सर्ट और सिनेमाई गायन में अंतर

श्रेया घोषाल ने साझा किया कि आज जब वे दुनिया भर के मंचों पर लाइव कॉन्सर्ट करती हैं, तो वे इस गीत को उस सादगी में बांधकर नहीं रखतीं। मंच पर गाते समय वे अपनी पसंद के मुताबिक सुरों को भरपूर सजाती हैं, उसमें जटिल अलाप जोड़ती हैं और श्रोताओं को अपनी गायकी की पूरी रेंज का अहसास कराती हैं। उनका मानना है कि लाइव परफॉर्मेंस और फिल्म के लिए पार्श्व गायन दो बिल्कुल अलग माध्यम हैं। फिल्म का गाना गाते वक्त हमेशा यह ध्यान रखना जरूरी होता है कि कहानी का नायक या नायिका उस पल किस मानसिक स्थिति और जीवन की किस परिस्थिति से गुजर रहे हैं।

 

## संजय लीला भंसाली की देवदास से अब तक का सफर

बहुत कम उम्र में हिंदी फिल्म जगत में कदम रखने वाली श्रेया घोषाल को निर्देशक संजय लीला भंसाली की भव्य फिल्म देवदास से अभूतपूर्व पहचान मिली थी। अपनी रेशमी आवाज के दम पर कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकीं श्रेया ने इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जब वी मेट का सुपरहिट गीत ये इश्क हाय, गुरु का बारिश भरा नगमा बरसो रे, सिंह इज किंग का लोकप्रिय रोमांटिक ट्रैक तेरी ओर और बाजीराव मस्तानी का दीवानी मस्तानी उनके यादगार सफर की कुछ चुनिंदा मिसालें हैं। 26 अप्रैल 2013 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई 2 घंटे 12 मिनट की आशिकी 2 में तुम ही हो, हम मर जाएंगे, मेरी आशिकी और मिलने है मुझसे आई जैसे कई सदाबहार गीत थे, लेकिन सुन रहा है न तू के पीछे की यह अनोखी दास्तान श्रेया के चरित्र केंद्रित गायन का सबसे बेहतरीन उदाहरण मानी जाती है।

## इसका आप पर असर
फिल्म संगीत और पार्श्व गायन में रुचि रखने वाले श्रोताओं और नवोदित गायकों के लिए यह किस्सा कलात्मक बारीकियों को समझने का बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है।

- **कलाकारों के लिए सीख:** किसी भी फिल्म या प्रोजेक्ट के लिए गाते समय केवल अपनी गायकी का प्रदर्शन करने के बजाय किरदार की जरूरत को समझना जरूरी होता है। यदि आप भी अभिनय या गायन के क्षेत्र में हैं, तो तकनीक से ज्यादा दृश्य की मांग पर ध्यान केंद्रित करना सीखें।
- **श्रोताओं का नजरिया:** यह कहानी स्पष्ट करती है कि गानों की सादगी कई बार जानबूझकर गढ़ी जाती है ताकि वह दर्शक से जुड़ सके। अगली बार जब आप इस तरह के सीधे सुरों वाले गाने सुनेंगे, तो उनके पीछे की रचनात्मक सोच को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे।
- **फिल्म निर्माण की समझ:** निर्देशक और निर्माता केवल सुर नहीं देखते, बल्कि दृश्य की विश्वसनीयता की भी जांच करते हैं। संगीत निर्माण में शामिल नए रचनाकारों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कैसे सूक्ष्म बदलाव गाने को अमर बना देते हैं।
- **लाइव बनाम रिकॉर्डिंग का फर्क:** संगीत प्रेमी यह जान सकते हैं कि क्यों कोई गायक कॉन्सर्ट में अपने ही गाने को रिकॉर्डेड ट्रैक से काफी अलग अंदाज में पेश करता है। मंच पर कलाकार को स्वतंत्रता मिलती है, जबकि स्क्रीन पर उसे किरदार की सीमाओं में बंधना पड़ता है।

## ऐसा क्यों हुआ
श्रेया घोषाल द्वारा इस प्रसिद्ध गीत को दोबारा रिकॉर्ड करने का मुख्य कारण फिल्म के कथानक में छिपी प्रामाणिकता और किरदार की वास्तविक स्थिति को बनाए रखना था।

- **किरदार की पृष्ठभूमि:** फिल्म में श्रद्धा कपूर का किरदार एक छोटे बार में गाने वाली नवोदित गायिका का था। निर्देशक और निर्माता चाहते थे कि उसकी आवाज में नौसिखिएपन की सादगी दिखे, न कि किसी मंझे हुए शास्त्रीय उस्ताद की चमक।
- **पहला टेक अत्यधिक अलंकृत था:** श्रेया घोषाल ने अपने पहले प्रयास में कई शास्त्रीय हरकतें और सुरों के जटिल उतार-चढ़ाव शामिल कर दिए थे। हालांकि वह गायन बेदाग था, लेकिन वह एक संघर्षरत बार गायिका के किरदार से मेल नहीं खा रहा था।
- **सादगी से बना सदाबहार नगमा:** निर्माताओं के सुझाव पर श्रेया ने सादा और सीधा दूसरा टेक दिया, जिसमें केवल दो जगहों पर ही हल्का सा बदलाव किया गया। इसी सहजता ने गाने को भावनात्मक रूप से बेहद प्रभावशाली और लोकप्रिय बना दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. श्रेया घोषाल ने 'सुन रहा है न तू' दोबारा क्यों रिकॉर्ड किया था?
फिल्म में श्रद्धा कपूर एक साधारण बार सिंगर के किरदार में थीं, इसलिए मेकर्स चाहते थे कि गाने की आवाज में बहुत सजावट न होकर सादगी और सीधापन झलके।

### 2. फिल्म 'आशिकी 2' के निर्देशक और निर्माता कौन थे?
इस फिल्म का निर्देशन मोहित सूरी ने किया था और इसके निर्माता मुकेश भट्ट थे।

### 3. गाना 'सुन रहा है न तू' के संगीतकार और गीतकार कौन हैं?
इस गीत का संगीत अंकित तिवारी ने तैयार किया था और इसके बोल संदीप नाथ ने लिखे थे।

### 4. फिल्म 'आशिकी 2' कब रिलीज हुई थी और इसका रनटाइम कितना था?
यह फिल्म 26 अप्रैल 2013 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और इसका कुल रनटाइम 2 घंटे 12 मिनट था।

### 5. श्रेया घोषाल ने अपने करियर की शुरुआत किस फिल्म से की थी?
श्रेया घोषाल ने बहुत कम उम्र में बॉलीवुड में कदम रखा था और उन्हें संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' से बड़ी पहचान मिली थी।

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