# सुकेश चंद्रशेखर प्रकरण में अभिनेत्री नोरा फतेही ने अपनी कानूनी स्थिति पर दी सफाई

> अभिनेत्री नोरा फतेही के वकीलों ने स्पष्ट किया है कि सुकेश चंद्रशेखर उगाही मामले में उन्हें आरोपी नहीं बल्कि महज एक गवाह बनाया गया है।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/sukesh-chandrashekhar-prakarana-men-abhinetri-nora-fatehi-ne-apani-kanuni-sthiti-para-di-saphai-55615 · **Language:** Hindi
**Tags:** नोरा फतेही, सुकेश चंद्रशेखर, राउज एवेन्यू कोर्ट, आर्थिक अपराध शाखा, मकोका, बॉलीवुड

कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े बहुचर्चित वसूली प्रकरण में बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही के पक्ष की ओर से एक विस्तृत कानूनी स्पष्टीकरण सामने आया है। अभिनेत्री के वकीलों ने साफ लफ्जों में रेखांकित किया है कि इस पूरे आपराधिक मामले में उनका नाम किसी अभियुक्त के रूप में दर्ज नहीं है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें केवल एक अभियोजन गवाह के नाते बुलाया गया है, ताकि वे अदालती कार्रवाई को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में सहयोग दे सकें।

## राउज एवेन्यू अदालत में पेशी और तारीख
राजधानी दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट में 2 नवंबर को आर्थिक अपराध शाखा की चार्जशीट से जुड़े इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई रखी गई थी। नियमानुसार अभिनेत्री को अपनी गवाही दर्ज कराने के लिए अदालत के समक्ष उपस्थित रहना था। अदालत की कार्यवाही के दौरान अभिनेत्री के अधिवक्ताओं ने बेंच को सूचित किया कि समन की सूचना बेहद अल्प समय पहले प्राप्त हुई थी। पूर्व-निर्धारित पेशेवर व्यस्तताओं के चलते वे उस रोज सशरीर उपस्थित होने में असमर्थ रहीं।

वकीलों द्वारा उस तारीख पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर न हो पाने की विधिवत अर्जी दाखिल की गई। विशेष अदालत ने उनके तर्कों और कारणों पर विचार करते हुए छूट का अनुरोध स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही अदालत ने इस सुनवाई को 6 नवंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया तथा गवाही के प्रयोजन से नोरा को नया कानूनी समन प्रेषित करने का निर्देश जारी किया।

## कानूनी प्रतिनिधियों का औपचारिक रुख
स्थिति को सार्वजनिक पटल पर स्पष्ट करते हुए अभिनेत्री की कानूनी टीम ने अपना पक्ष रखा। उनके वकीलों ने कहा, "यह स्पष्ट किया जाता है कि नोरा फतेही न तो इस मामले में आरोपी हैं और न ही उन पर किसी अपराध में शामिल होने का आरोप है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें मात्र न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग देने हेतु साक्षी की हैसियत से तलब किया गया है और वे जांच एजेंसियों तथा न्यायपालिका के साथ निरंतर तालमेल बनाए हुए हैं।

## 200 करोड़ की रंगदारी का मूल विवाद
यह समूचा विवाद जेल के भीतर से रचे गए एक बड़े वित्तीय अपराध से संबंधित है। आरोपों के अनुसार, दिल्ली की रोहिणी जेल में निरुद्ध रहने के दौरान सुकेश चंद्रशेखर ने करीब 200 करोड़ रुपये के व्यापक जबरन वसूली गिरोह का संचालन किया था। उसने खुद को शासन का वरिष्ठ सरकारी अधिकारी प्रस्तुत करके विभिन्न लोगों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।

इस पूरे सुनियोजित नेटवर्क की विस्तृत तफ्तीश दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा संपन्न की गई थी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर पुलिस विभाग ने आरोपियों के विरुद्ध महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के कड़े प्रावधानों के तहत प्राथमिक आरोप पत्र दाखिल किया था।

## पूछताछ और सीआरपीसी धारा 164 का बयान
तफ्तीश के विभिन्न चरणों के दौरान दिल्ली पुलिस ने अभिनेत्री नोरा फतेही को भी पूछताछ की प्रक्रिया में शामिल किया था। जांच दल ने उनसे सुकेश चंद्रशेखर और उसकी पत्नी लीना मारिया पॉलोस के साथ कथित मुलाकातों अथवा संपर्कों के बाबत विस्तृत सवाल-जवाब किए थे। इस जांच के दौरान नोरा ने न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत अपना बयान विधिवत दर्ज कराया था।

सभी साक्ष्यों तथा बयानों के विश्लेषण के पश्चात, जांच एजेंसी ने अदालत में जो सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की, उसमें नोरा फतेही का नाम संदिग्ध या अपराधी के रूप में नहीं, बल्कि अभियोजन पक्ष के गवाह की सूची में शामिल किया गया था। इस प्रकार वे इस प्रकरण में कानूनी रूप से केवल गवाही की भूमिका निभा रही हैं।

## इसका आप पर असर
यह अदालती घटनाक्रम वित्तीय अपराध के मामलों में गवाहों की कानूनी स्थिति और सेलिब्रिटी से जुड़े अदालती समन की कार्यप्रणाली को दर्शाता है।

- **भारत में:** किसी भी आपराधिक मामले में गवाह के तौर पर समन मिलने पर व्यक्ति को कानूनी तौर पर अदालत में बयान दर्ज कराना होता है। हालांकि पूर्व व्यस्तताओं के आधार पर कानूनी छूट की अर्जी देकर अगली तारीख का अनुरोध किया जा सकता है।
- **मनोरंजन उद्योग के लिए:** यह स्पष्टीकरण दिखाता है कि किसी मामले में नाम आने का अर्थ स्वतः अपराधी या आरोपी होना नहीं होता है। जांच एजेंसियां अक्सर साक्ष्य जुटाने के लिए संबंधित लोगों को केवल गवाह के रूप में तलब करती हैं।
- **कानूनी जागरूकता:** सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान अदालत में कानूनी रूप से बाध्यकारी साक्ष्य माना जाता है। इस प्रक्रिया से आम नागरिकों को गवाहों की भूमिका और अभियोजन पक्ष के दायित्वों की समझ मिलती है।
- **अदालती प्रक्रिया:** यदि किसी गवाह को समन प्राप्त करने में पर्याप्त समय नहीं मिलता, तो वह अधिवक्ता के जरिए पेशी स्थगित करने का वैधानिक अनुरोध कर सकता है। अदालतें परिस्थितियों की समीक्षा के बाद नई तारीख निर्धारित करती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
नोरा फतेही द्वारा यह स्पष्टीकरण अदालत में उनकी अनुपस्थिति के बाद उत्पन्न संभावित भ्रांतियों को दूर करने के लिए जारी किया गया है।

- **तात्कालिक कारण:** दिल्ली की अदालत में गवाही के लिए निर्धारित तारीख पर अभिनेत्री पूर्व पेशेवर व्यस्तताओं के चलते व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकी थीं। इसके बाद उनकी अनुपस्थिति को लेकर सार्वजनिक भ्रम की स्थिति न बने, इसलिए उनके वकीलों ने बयान दिया।
- **अल्पकालिक समन:** कानूनी टीम के अनुसार समन सुनवाई से बेहद कम समय पूर्व मिला था जिससे कार्यक्रम में बदलाव संभव नहीं था। इसलिए वकीलों ने अदालत से नई तारीख देने की विधिवत गुहार लगाई।
- **जांच का दायरा:** सुकेश चंद्रशेखर के 200 करोड़ रुपये के जबरन वसूली मामले में कई हस्तियों से पूछताछ हुई थी। नोरा फतेही ने जांच के दौरान अपने बयान दर्ज कराए थे, जिसके चलते उन्हें अभियोजन पक्ष का गवाह बनाया गया था।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या सुकेश चंद्रशेखर केस में नोरा फतेही आरोपी हैं?
नहीं, नोरा फतेही की कानूनी टीम ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में आरोपी नहीं हैं, बल्कि केवल एक गवाह हैं।

### 2. नोरा फतेही 2 नवंबर को अदालत में क्यों पेश नहीं हुईं?
उन्हें समन बहुत कम समय पहले मिला था और पहले से तय पेशेवर व्यस्तताओं के कारण वे अदालत में उपस्थित नहीं हो सकीं।

### 3. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई किस तारीख को तय की है?
राउज एवेन्यू अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 तय करते हुए पेशी के लिए नया समन जारी किया है।

### 4. सुकेश चंद्रशेखर पर मुख्य आरोप क्या है?
सुकेश चंद्रशेखर पर रोहिणी जेल में बंद रहने के दौरान खुद को वरिष्ठ सरकारी अधिकारी बताकर 200 करोड़ रुपये की वसूली का रैकेट चलाने का आरोप है।

### 5. नोरा फतेही का बयान किस कानून के तहत दर्ज किया गया था?
जांच के दौरान नोरा फतेही का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत दर्ज कराया गया था।

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