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  "title": "द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट का छठी मैया गीत बना चर्चा का केंद्र, तमन्ना भाटिया के भक्ति अवतार ने बनाया रिकॉर्ड",
  "summary": "फिल्म द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट के भक्ति गीत छठी मैया में तमन्ना भाटिया के पारंपरिक अवतार ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। मात्र बहत्तर घंटों में सत्ताईस मिलियन से ज्यादा व्यूज हासिल कर यह ट्रैक व्यापक स्तर पर पसंद किया जा रहा है।",
  "content": "भारतीय सिनेमा के लंबे इतिहास में तीज त्योहारों और सांस्कृतिक पर्वों को हमेशा से एक बेहद खास मुकाम हासिल रहा है। रूपहले पर्दे पर करवा चौथ, ईद, दिवाली और होली जैसे अवसरों पर तैयार किए गए अनगिनत सदाबहार नगमे दशकों से दर्शकों के दिलों पर राज करते रहे हैं। इसके विपरीत, लोक आस्था और कठिन तप के महापर्व छठ की पावन परंपराएं लंबे अरसे तक मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा के केंद्र से अमूमन दूर ही नजर आती रही हैं। हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर भोजपुरी संगीत उद्योग हर साल हजारों छठ गीतों का निर्माण करता आया है, जो करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था और भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं। ऐसे दौर में आगामी फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ के गीत ‘छठी मैया’ का सामने आना और उसमें शीर्ष बॉलीवुड अभिनेत्री तमन्ना भाटिया का पूरी श्रद्धा से सराबोर दिखाई देना, एक युगांतरकारी सांस्कृतिक परिघटना के रूप में स्थापित हो चुका है।\n\nडिजिटल प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक होने के महज तीन दिनों यानी बहत्तर घंटों के भीतर 27 मिलियन से अधिक दर्शकों द्वारा इसे देखा जाना साफ तौर पर जाहिर करता है कि लोग इस सिनेमाई पहल को सिर्फ सराह ही नहीं रहे हैं, बल्कि दिल की गहराइयों से इससे जुड़ भी चुके हैं। तमन्ना भाटिया द्वारा अपनाए गए इस पारंपरिक रूप और भावपूर्ण अदायगी को मिल रहे अपार स्नेह के पीछे कई सामाजिक, सिनेमाई और भावनात्मक पहलू छिपे हुए हैं।\n\nमुख्यधारा की शीर्ष अभिनेत्री का ऐतिहासिक कदम\nसिनेमाई इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह पहला ऐसा अवसर है जब मुख्यधारा की ए-लिस्ट बॉलीवुड अभिनेत्री किसी बड़े बजट की हिंदी फीचर फिल्म के जरिए सीधे स्क्रीन पर छठी मैया की आराधना करते हुए सामने आई है। पूर्व में छठ महापर्व के दृश्य बड़े पर्दे पर या तो बेहद सतही अंदाज में एकाध प्रसंग तक सीमित रहते थे, या फिर उनकी संपूर्ण अभिव्यक्ति केवल क्षेत्रीय सिनेमा तक ही सिमट कर रह जाती थी। संपूर्ण भारत में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली वैश्विक स्तर की चर्चित कलाकार तमन्ना भाटिया को इस पावन पर्व की वेशभूषा, कठोर आस्था और सहज सादगी को साकार करते देखना दर्शकों के लिए एक अप्रतिम अनुभव साबित हुआ है। जब एक स्थापित अभिनेत्री पारंपरिक रीति के अनुसार हाथों में सूप और दौरा थामे पर्दे पर छठी मैया को नमन करती है, तो यह हिंदी फिल्म उद्योग की उत्तर भारतीय संस्कृति और जनमानस की आस्था के प्रति गहरी आत्मीयता को रेखांकित करता है।\n\nआस्था की पावनता और तमन्ना का सहज समर्पण\nछठ महापर्व सामान्य उत्सवों से अलग असीम अनुशासन, निष्ठा और आत्मिक पवित्रता का अनुष्ठान माना जाता है। इस प्रस्तुति में तमन्ना भाटिया की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि उन्होंने इसे किसी व्यावसायिक सिनेमाई गीत की तरह लेने के बजाय एक गहरे आध्यात्मिक अनुभव की तरह आत्मसात किया। उनके चेहरे पर झलकता अगाध भक्ति भाव, नयनों में समर्पण और मांग में सिंदूर के साथ लाल-पीली साड़ी तथा पारंपरिक आभूषणों का पहनावा इतना प्रामाणिक और सहज जान पड़ता है कि देखने वाले को किसी अभिनय का आभास तक नहीं होता। तमन्ना की इसी स्वाभाविकता और श्रद्धा ने जन-जन के मन को छू लिया है।\n\nक्षेत्रीय सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर छाने का गौरव\nभोजपुरी संगीत जगत बीते कई दशकों से अत्यंत कर्णप्रिय और मनभावन छठ गीतों का सृजन करता रहा है, जिन्हें पर्व के दौरान देश-विदेश में करोड़ों बार सुना जाता है। इसके बावजूद, एक भव्य और बड़े बजट की हिंदी सिनेमाई परियोजना के भीतर छठ गीत को केंद्रीय स्थान मिलना भोजपुरी और पूर्वांचल की समृद्ध लोक परंपरा के लिए अत्यंत गौरवशाली पल बन गया है। यह गीत अब केवल बिहार अथवा उत्तर प्रदेश के भौगोलिक दायरे तक सीमित न रहकर अपनी भव्य प्रस्तुति और व्यापक पहुंच के दम पर समूचे देश सहित सात समंदर पार बसे भारतीय समुदायों में भी शीर्ष ट्रेंड्स में शामिल हो चुका है। जब किसी लोक परंपरा को मुख्यधारा के मंच पर ऐसा सम्मानजनक स्थान दिया जाता है, तो लोकमानस का भावविभोर होना स्वाभाविक है।\n\nडिजिटल कीर्तिमान और कलात्मक संतुलन\nधार्मिक और आध्यात्मिक परिवेश पर केंद्रित ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों के कर्णप्रिय संगीत ने भक्ति रचनाओं के लिए सफलता का एक नया पैमाना तय किया था। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए ‘छठी मैया’ गीत ने रिलीज के शुरुआती 72 घंटों में ही 27 मिलियन से अधिक बार देखे जाने का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिखाया है। यह कीर्तिमान न केवल तमन्ना भाटिया की व्यापक स्टार अपील को प्रमाणित करता है, बल्कि इस तथ्य को भी उजागर करता है कि आज का दर्शक वर्ग अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पावन परंपराओं से जुड़ने के लिए पूरी तरह तत्पर है। फिल्म में अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा की मौजूदगी और तमन्ना के सशक्त अभिनय ने इस रचना के प्रभाव को कई गुना विस्तृत कर दिया है।\n\nगीत की इस असाधारण सफलता का बड़ा श्रेय इसके संगीत संयोजन, भावपूर्ण बोल और विजुअल प्रस्तुति को भी जाता है। पारंपरिक लोक धुनों की मूल आत्मा को संरक्षित रखते हुए आधुनिक वाद्ययंत्रों का जो मधुर समन्वय साधा गया है, वह बेहद कर्णप्रिय बन पड़ा है। नदी घाट का जीवंत दृश्य, अस्ताचलगामी और उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के पलों का सजीव चित्रण और उसमें तमन्ना का तन्मय भाव हर दृश्य में जान फूंक देता है। यह रचना न केवल सुनने में मधुर है, बल्कि दृश्यों के स्तर पर भी चित्त को पावन शांति प्रदान करती है।\n\nसांस्कृतिक समावेशन की नई राह\n‘छठी मैया’ में तमन्ना भाटिया का यह पावन रूप महज एक लोकप्रिय गीत भर नहीं है, बल्कि हिंदी सिनेमा के भीतर सांस्कृतिक समावेशन का एक नया अध्याय है। इस गीत की अभूतपूर्व स्वीकार्यता यह सिद्ध करती है कि जब मुख्यधारा की फिल्में लोकजीवन से जुड़ी गहरी परंपराओं को बिना किसी मिलावट, पूरे आदर और सच्चाई के साथ पेश करती हैं, तो दर्शक उसे खुले दिल से अपनाते हैं। यही बड़ा कारण है कि तमन्ना भाटिया के इस भक्ति रूप को देश और दुनिया के हर कोने से इतना असीम आदर मिल रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nयह सांस्कृतिक बदलाव और गीत की सफलता आम संगीत प्रेमियों और लोक कला से जुड़े लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।\n\n• पूर्वांचल और बिहार के दर्शकों के लिए: मुख्यधारा के सिनेमा में छठ महापर्व को मिले इस भव्य सम्मान से स्थानीय संस्कृति को देश-विदेश में नई पहचान मिली है। इससे लोक पर्व की परंपराओं को युवा पीढ़ी के बीच और अधिक सामाजिक स्वीकृति मिलती है।\n• देशभर के संगीत प्रेमियों के लिए: बड़े बजट की फिल्मों में पारंपरिक लोकधुनों और वाद्ययंत्रों का समावेशन नए प्रयोगों को बढ़ावा दे रहा है। श्रोताओं को आधुनिक ऑर्केस्ट्रा के साथ प्राचीन भक्ति संगीत सुनने का नया विकल्प मिल रहा है।\n• क्षेत्रीय कलाकारों के लिए: मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा द्वारा लोक आस्था को अपनाने से क्षेत्रीय गीतकारों और संगीत परंपराओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रास्ते खुलते हैं। इससे भविष्य में भी अन्य क्षेत्रीय लोक पर्वों को बड़े प्रोजेक्ट्स में जगह मिलने की संभावना बढ़ गई है।\n• डिजिटल दर्शकों के लिए: महज तीन दिनों में मिले भारी व्यूज यह साबित करते हैं कि पारंपरिक भक्ति संगीत को डिजिटल स्पेस में व्यापक दर्शक मिल रहे हैं। इसके चलते आगामी दिनों में स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह के सांस्कृतिक कंटेंट की उपलब्धता में तेजी आएगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nफिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ के गीत ‘छठी मैया’ के जबरदस्त प्रदर्शन और सराहना के पीछे कई कलात्मक और सामाजिक परिस्थितियां रही हैं। मुख्यधारा के सिनेमा और लोक संस्कृति के बीच उपजे इस अनूठे जुड़ाव ने इसे बेहद प्रभावशाली बना दिया।\n\n• प्रामाणिक अभिनय और सादगी: तमन्ना भाटिया ने इस प्रस्तुति को एक सतही नृत्य के रूप में लेने के बजाय पारंपरिक वेशभूषा और गहरी निष्ठा के साथ निभाया। चेहरे के समर्पण और सादगी भरे अंदाज ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से सीधे जोड़ लिया।\n• मुख्यधारा में छठ पूजा का अभाव: दशकों से हिंदी सिनेमा में होली, दिवाली और करवा चौथ को प्रचुरता से दिखाया जाता रहा, जबकि छठ पर्व बड़े पर्दे पर उपेक्षित रहा। इस बड़े सांस्कृतिक शून्य को पहली बार किसी ए-लिस्ट स्टार वाली फिल्म ने भव्यता के साथ भरा।\n• संगीत और दृश्यों का उत्कृष्ट समन्वय: पारंपरिक लोक गीतों की मूल भावना को संरक्षित रखते हुए आधुनिक वाद्ययंत्रों का सुरुचिपूर्ण संयोजन किया गया। घाट पर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के सजीव दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।\n• डिजिटल स्पेस में आध्यात्मिक संगीत की मांग: हाल के दौर में आध्यात्मिक और भक्ति गीतों के प्रति दर्शकों की रुचि में तेज वृद्धि देखी गई है। ‘हनुमान अंश’ के गानों की सफलता ने जिस आध्यात्मिक माहौल की जमीन तैयार की थी, उस पर यह गीत रिकॉर्ड समय में 27 मिलियन व्यूज पार कर गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. छठी मैया गीत किस फिल्म से संबंधित है?\nयह पावन गीत आगामी फिल्म 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' का हिस्सा है, जिसमें तमन्ना भाटिया और सिद्धार्थ मल्होत्रा नजर आ रहे हैं।\n\n2. इस गीत को रिलीज के बाद कितने समय में रिकॉर्ड व्यूज मिले?\nगाने ने सार्वजनिक होने के महज 72 घंटों यानी तीन दिनों के भीतर 27 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल कर लिए हैं।\n\n3. तमन्ना भाटिया के इस अभिनय को ऐतिहासिक क्यों माना जा रहा है?\nसिनेमा इतिहास में यह पहली बार है जब बॉलीवुड की किसी मुख्यधारा की ए-लिस्ट अभिनेत्री ने बड़े बजट की हिंदी फिल्म में छठ पूजा की रस्में निभाई हैं।\n\n4. गाने में तमन्ना भाटिया का लुक किस तरह तैयार किया गया है?\nतमन्ना पारंपरिक लाल-पीली साड़ी, बालों की मांग में सिंदूर और पारंपरिक आभूषण पहने हाथों में सूप और दौरा थामे नजर आई हैं।\n\n5. इस गीत की सफलता का श्रेय किन प्रमुख तत्वों को दिया गया है?\nगाने की सफलता में इसके कर्णप्रिय संगीत, पारंपरिक व आधुनिक वाद्ययंत्रों के संगम, घाट के विजुअल दृश्यों और तमन्ना के भक्ति भाव का बड़ा योगदान है।",
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  "publishedAt": "2026-09-19",
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