# वोटर लिस्ट विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग, नसीरुद्दीन शाह और शबाना आजमी सड़क पर उतरे संगठन के साथ आए

> मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले नसीरुद्दीन शाह ने अभिजीत दिपके से मुलाकात की, वहीं शबाना आजमी ने भी लोगों से लोकतंत्र बचाने की अपील की।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/votara-lista-vivada-ke-bicha-mukhya-chunava-ayukta-ke-istiphe-ki-manga-naseeruddin-shah-aura-shabana-azmi-saraka-para-utare-sngath-42016 · **Language:** Hindi
**Tags:** नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, अभिजीत दिपके, कॉकरोच जनता पार्टी, ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग, शिवाजी पार्क, वोटर लिस्ट

मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर लोगों के नाम काटे जाने के गंभीर आरोपों के बीच चुनावी प्रक्रिया को लेकर सियासी और नागरिक विरोध तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी और कई विपक्षी दलों का आरोप है कि जारी एसआईआर प्रक्रिया के बहाने आम नागरिकों के मताधिकार पर हमला किया गया है और भारी तादाद में वोटरों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क मैदान में एक विशाल विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग उठाई गई। इस बड़े प्रदर्शन के शुरू होने से ठीक पहले हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके से व्यक्तिगत रूप से मिलने पहुंचे, जिससे इस पूरे आंदोलन को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।

## नसीरुद्दीन शाह और अभिजीत दिपके की मुलाकात का वीडियो चर्चा में
नसीरुद्दीन शाह और कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की इस मुलाकात की एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और एक्स पर सामने आई है, जो तेजी से फैल रही है। इस वीडियो में वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह आगे बढ़कर अभिजीत का आभार जताते हुए उनसे हाथ मिलाते और उन्हें गले लगाते नजर आते हैं। बातचीत के दौरान जब दिपके ने हैरान होकर कहा कि वे अभिनेता के बहुत बड़े प्रशंसक हैं और उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे वहां मौजूद हैं, तब अभिनेता ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्हें पहले से पता था कि दिपके वहीं हैं और वे खुद उनके बहुत बड़े प्रशंसक हैं। समसामयिक और राजनीतिक विषयों पर बेबाक राय रखने के लिए पहचाने जाने वाले नसीरुद्दीन शाह का नाम पहले भी कई ज्वलंत मुद्दों पर मुखर रहने के चलते चर्चाओं में रहा है।

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## शबाना आजमी ने जनता से शिवाजी पार्क पहुंचने का किया आह्वान
इस विरोध प्रदर्शन को केवल नसीरुद्दीन शाह का ही नैतिक समर्थन नहीं मिला, बल्कि प्रसिद्ध अभिनेत्री शबाना आजमी समेत कई अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी नागरिकों के मताधिकार के इस मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का खुला समर्थन किया है। शबाना आजमी ने मुंबई के बाशिंदों से अपील करते हुए एक वीडियो साझा किया और लोगों को इस बात की गंभीरता समझने को कहा कि जब किसी नागरिक का नाम बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक मतदाता सूची से गायब कर दिया जाता है, तो उसके क्या मायने होते हैं। उन्होंने नागरिकों से सीधे मुखातिब होते हुए कहा कि वोट हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार और उसकी आवाज है, इसलिए जब यह अधिकार छीना जाए तो खामोश नहीं बैठना चाहिए। उन्होंने सभी से 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर शिवाजी पार्क में शाम 4 बजे अपने लोकतांत्रिक हक के लिए एकत्र होने का आग्रह किया और खुद वहां मौजूद रहने की बात कही।

## प्रशासन की अनुमति न मिलने पर भी सवाल पूछने के अधिकार पर जोर
अपने वक्तव्य में शबाना आजमी ने इस बात का भी खुलासा किया कि इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के आयोजन के लिए प्रशासनिक तंत्र से कई बार आधिकारिक मंजूरी मांगी गई थी, लेकिन प्रशासन ने हर बार अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन चाहे अनुमति रोके, लेकिन सत्ता और व्यवस्था से तीखे सवाल पूछना जनता का बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने घरों की दहलीज से बाहर निकलें, व्यवस्था से कड़े सवाल करें और अपने वोट तथा देश के लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी मजबूत आवाज बुलंद करें।

## चुनाव आयोग के भीतर दस महीनों में उभरे मतभेद और पारदर्शिता पर उठते सवाल
चुनावी व्यवस्था की कार्यप्रणाली को लेकर यह असंतोष केवल राजनीतिक दलों या सड़क पर उतरे संगठनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि संस्था के आंतरिक कामकाज पर भी गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। उपलब्ध जानकारियों के मुताबिक, चुनाव आयोग के भीतर ही अन्य सदस्यों ने बीते दस महीनों के लंबे अंतराल में आयोग के आधिकारिक नाम पर लिए गए कई नीतिगत और प्रशासनिक फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। जानकारों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं का साफ तर्क है कि आयोग के शीर्ष स्तर पर सामने आए ये गंभीर अंदरूनी मतभेद यह साबित करते हैं कि संस्था के भीतर पारदर्शिता की भारी कमी है और निर्णय प्रक्रिया में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है।

## इसका आप पर असर
इस विरोध प्रदर्शन और चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवालों का सीधा असर आम नागरिकों के मताधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही पर पड़ता है।

- **भारत में:** यदि किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से काट दिया गया है, तो वह चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित हो सकता है। सभी पात्र नागरिकों को समय रहते संबंधित आधिकारिक चुनावी पोर्टल पर जाकर अपने नाम की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
- **मुंबई में:** 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में हुए इस विरोध प्रदर्शन के चलते दादर और आसपास के इलाकों में नागरिक हलचल और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी देखी गई। स्थानीय लोगों को किसी भी प्रशासनिक रैली के दौरान सार्वजनिक आवाजाही के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी जाती है।
- **वोटरों के लिए:** एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बीच मतदाताओं के लिए अपनी प्रविष्टियों की जांच करना जरूरी हो गया है। किसी भी विसंगति या नाम कटने की स्थिति में समय रहते स्थानीय चुनाव पंजीकरण अधिकारी के पास दावा प्रस्तुत करना आवश्यक है।
- **नागरिक अधिकारों पर:** अनुमति न मिलने के बावजूद सवाल पूछने के अधिकार पर जोर देने से शांतिपूर्ण असंतोष और अभिव्यक्ति की सीमाओं पर सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। आम लोग अब चुनावी संस्थाओं से अधिक पारदर्शिता की अपेक्षा कर रहे हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पूरा विवाद मतदाता सूची में किए गए बड़े बदलावों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उपजे गहरे अविश्वास के कारण खड़ा हुआ है।

- **एसआईआर प्रक्रिया को लेकर आरोप:** कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्षी समूहों का सीधा आरोप है कि चल रही एसआईआर प्रक्रिया के कारण भारी संख्या में नागरिकों के नाम मतदाता सूची से मनमाने ढंग से हटा दिए गए हैं। इस कदम को मताधिकार पर हमला मानते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की गई।
- **प्रशासनिक अनुमति का न मिलना:** आयोजकों ने शिवाजी पार्क में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए कई बार औपचारिक मंजूरी मांगी थी, जिसे प्रशासन ने बार-बार खारिज कर दिया। इस रोक ने आंदोलनकारियों और मशहूर हस्तियों को लोकतांत्रिक अधिकारों के नाम पर मुखर होने के लिए और अधिक प्रेरित किया।
- **चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेद:** पिछले दस महीनों के अंतराल में चुनाव आयोग के अन्य सदस्यों द्वारा कई आधिकारिक फैसलों पर दर्ज कराई गई आपत्तियों ने संस्था के शीर्ष स्तर पर पारदर्शिता की भारी कमी को सार्वजनिक कर दिया, जिससे जनता का असंतोष और गहरा गया।

## सवाल-जवाब

### 1. शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
यह विरोध प्रदर्शन एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के खिलाफ था और इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी।

### 2. नसीरुद्दीन शाह और अभिजीत दिपके की मुलाकात में क्या हुआ?
नसीरुद्दीन शाह प्रदर्शन से पहले दिपके से मिलने पहुंचे, जहां दोनों ने एक-दूसरे का प्रशंसक होने की बात कही और इसका वीडियो वायरल हो गया।

### 3. शबाना आजमी ने लोगों से क्या अपील की थी?
शबाना आजमी ने लोगों से 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर शाम 4 बजे शिवाजी पार्क पहुंचकर अपने मताधिकार और लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने का आग्रह किया था।

### 4. प्रदर्शन के लिए प्रशासनिक मंजूरी को लेकर क्या स्थिति रही?
आयोजकों ने कई बार आधिकारिक अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्रशासन द्वारा प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।

### 5. चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर क्या आंतरिक सवाल सामने आए हैं?
दस महीनों के अंतराल में आयोग के सदस्यों ने कई फैसलों पर आपत्तियां जताई थीं, जिससे शीर्ष स्तर पर पारदर्शिता की कमी के आरोप लगे हैं।

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