# जी5 से हटाई गई फिल्म सतलुज के समर्थन में उतरे फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा, दिलजीत दोसांझ के अभिनय को बताया ऐतिहासिक घाव

> दिलजीत दोसांझ की विवादित फिल्म 'सतलुज' को जी5 से हटाए जाने के बाद फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा इसके समर्थन में आए हैं और उन्होंने इसे एक साहसी फिल्म बताया है।

**Type:** article · **Category:** मनोरंजन · **Published:** 2026-07-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/entertainment/zee5-se-hatai-gai-philma-satluj-ke-samarthana-men-utare-philmamekara-ram-gopal-varma-diljit-dosanjh-ke-abhinaya-ko-bataya-aitihasi-5436 · **Language:** Hindi
**Tags:** सतलुज फिल्म, दिलजीत दोसांझ, राम गोपाल वर्मा, जसवंत सिंह खालरा, हनी त्रेहान, ओटीटी विवाद, जी5

मशहूर पंजाबी अभिनेता दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को लेकर छिड़ा विवाद लगातार गरमाता जा रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज होने के महज 48 घंटों के भीतर ही इस फिल्म को अचानक हटा दिया गया था, जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर इसे वापस लाने की मांग तेज हो गई है। फिल्म के मुख्य कलाकार दिलजीत दोसांझ ने भी इस कदम पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका मानना है कि इस फिल्म के जरिए पंजाब के दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन की सच्चाई को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम और बढ़ते विवाद के बीच, भारतीय सिनेमा के जाने-माने फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा खुलकर 'सतलुज' के समर्थन में आ गए हैं।

 

## राम गोपाल वर्मा ने 'सतलुज' को बताया कभी न भरने वाला घाव

फिल्म 'सतलुज' को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी राय रखते हुए राम गोपाल वर्मा ने इसे एक बेहद साहसी और महत्वपूर्ण फिल्म करार दिया है। उन्होंने सरकारी तंत्र और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि इस फिल्म की आवाज को दबाया न जाए। फिल्म की जमकर सराहना करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह सिनेमाई कृति भारतीय इतिहास के सबसे काले और संवेदनशील अध्यायों में से एक को बेहद शांति और गंभीरता के साथ दर्शकों के सामने पेश करती है। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने अभी-अभी 'सतलुज' देखी है और यह सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह हमारे इतिहास का एक ऐसा गहरा घाव है जो शायद कभी नहीं भर पाएगा।

 

## कलाकारों की बेमिसाल अदाकारी और निर्देशक के संयम की तारीफ

राम गोपाल वर्मा ने फिल्म के मुख्य अभिनेताओं की परफॉर्मेंस की भी खुलकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने बिना किसी पारंपरिक हीरोइज्म या लाउड एक्टिंग के, एक बेहद शांत लेकिन गहरे गुस्से के साथ जसवंत सिंह खालरा के किरदार को जिया है। उनकी यह अदाकारी सीधे दर्शकों के दिलों पर चोट करती है। इसके साथ ही उन्होंने अर्जुन रामपाल के अभिनय को भी सराहा। राम गोपाल वर्मा के अनुसार, अर्जुन रामपाल ने व्यवस्था के भीतर पनप रही नैतिक सड़न और मिलीभगत की परतों को इतनी बारीकी और वास्तविकता के साथ पर्दे पर उतारा है कि वह बेहद डरावना और सच महसूस होता है।

फिल्म के निर्देशन की बात करते हुए राम गोपाल वर्मा ने डायरेक्टर हनी त्रेहान की सूझबूझ की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि हनी त्रेहान ने इस बेहद संवेदनशील और खौफनाक विषय को सनसनीखेज बनाने के बजाय एक गंभीर और धीमी गति से चलने वाली इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर के रूप में बुना है। फिल्म की कहानी सरकारी फाइलों, श्मशान घाट के दस्तावेजों और दबी हुई फुसफुसाहटों के सहारे आगे बढ़ती है। निर्देशक का यही संयम और अनुशासन फिल्म की बर्बरता को और अधिक प्रभावशाली बनाता है, क्योंकि यह किसी नाटकीयता के बजाय सीधे कड़वी सच्चाई को बयां करती है।

 

## लोकतांत्रिक व्यवस्था और सच्चाई को दबाने के प्रयासों पर तंज

इस फिल्म के बहाने राम गोपाल वर्मा ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की कमजोरियों पर भी तीखा कटाक्ष किया है। उन्होंने फिल्म के दार्शनिक पहलू को रेखांकित करते हुए लिखा कि यह कहानी इस बात को बेहद संजीदगी से दिखाती है कि कैसे एक लोकतांत्रिक व्यवस्था खुद अपने ही नागरिकों को निगल जाती है और बाद में उसके सारे सबूत मिटाने के प्रयासों में जुट जाती है। उन्होंने इस बात की विशेष सराहना की कि पूरी फिल्म में इस गंभीर विषय को बिना किसी उपदेशात्मक शैली या ज्ञान दिए बेहद सहजता के साथ दिखाया गया है, जो अपने आप में किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि राम गोपाल वर्मा जैसे दिग्गजों के समर्थन के बाद क्या इस फिल्म को दोबारा दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जाता है या नहीं।

## इसका आप पर असर
- **सिनेमा प्रेमियों के लिए:** यह विवाद यह दर्शाता है कि कैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक मुद्दों पर बनी फिल्मों को अक्सर दर्शकों तक पहुंचने से पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाता है।
- **मनोरंजन उद्योग में:** इस घटना से ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप और राजनीतिक अथवा सामाजिक दबावों को लेकर एक नई बहस छिड़ सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. 'सतलुज' फिल्म को किस ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाया गया है?
'सतलुज' फिल्म को इसके डिजिटल प्रीमियर के महज 48 घंटों के भीतर ही ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) से हटा दिया गया है।

### 2. इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने किसका किरदार निभाया है?
इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने पंजाब के दिवंगत प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा का मुख्य किरदार निभाया है।

### 3. राम गोपाल वर्मा ने इस फिल्म के बारे में क्या कहा है?
राम गोपाल वर्मा ने इसे एक बेहद साहसी और महत्वपूर्ण फिल्म बताया है, जो देश के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक को बिना किसी सनसनीखेज ड्रामे के पेश करती है।

### 4. फिल्म 'सतलुज' के निर्देशक और मुख्य कलाकार कौन-कौन हैं?
इस फिल्म का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है, और इसमें दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल ने भी मुख्य भूमिका निभाई है।

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