बर्लिन के सरकारी सिस्टम में सेंध लगाकर हैकर्स ने मांगी करोड़ों की रंगदारी, मेयर काई वेगनर ने ब्लैकमेल होने से किया इनकार बर्लिन के प्रशासनिक नेटवर्क में हैकर्स की सेंधमारी के बाद 30 बिटकॉइन की फिरौती मांगी गई है, हालांकि मेयर काई वेगनर ने स्पष्ट किया है कि राजधानी प्रशासन इस साइबर ब्लैकमेलिंग के आगे बिल्कुल नहीं झुकेगा। जर्मनी की राजधानी बर्लिन की प्रांतीय सरकार एक बड़े साइबर हमले और हैकर्स की रंगदारी की कोशिश से जूझ रही है। हैकर्स ने शहर के प्रशासनिक कंप्यूटर सिस्टम में सेंध लगाकर भारी मात्रा में सरकारी डेटा चुरा लिया है। इस गंभीर सुरक्षा चूक के बाद बर्लिन के मेयर काई वेगनर ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि राजधानी प्रशासन साइबर अपराधियों की फिरौती की मांग के आगे किसी भी कीमत पर नहीं झुकेगा। हैकर्स की ओर से गुरुवार शाम को फिरौती का संदेश भेजा गया था, जिसके बाद नगर निकाय के आईटी विभाग और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। रिपोर्टों के अनुसार, हैकर्स ने चुराए गए सरकारी रिकॉर्ड को सार्वजनिक नीलामी से बचाने के लिए 30 बिटकॉइन की मांग की है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 20 लाख यूरो (करीब 17 लाख पाउंड) है। सरकारी नेटवर्क ठप और फॉरेंसिक जांच के खुलासे साइबर घुसपैठ का यह मामला अगस्त की शुरुआत में शुरू हुआ था, जब संदिग्ध हैकर्स ने बर्लिन के प्रशासनिक सर्वर तक पहुंच बनाई। शहर-राज्य प्रशासन के आधिकारिक बयानों के अनुसार, डेटा में पहली बार सेंधमारी 7 अगस्त से 12 अगस्त के बीच दर्ज की गई थी। सुरक्षा टीमों द्वारा संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाए जाने के बाद, अधिकारियों ने 14 अगस्त को एहतियाती कदम उठाते हुए सरकार के दो प्रमुख विभागों के नेटवर्क को पूरी तरह बंद कर दिया। इस नेटवर्क ब्लैकआउट के कारण सरकारी ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित हुईं, जिससे स्थानीय नागरिक कई दिनों तक आवास भत्ते के आवेदन और सरकारी भुगतानों से जुड़ी डिजिटल सेवाओं का लाभ नहीं उठा सके। सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा की गई फॉरेंसिक जांच में यह बात सामने आई है कि हैकर्स ने बर्लिन के परिवहन और पर्यावरण विभाग के सिस्टम में भी सेंध लगाई थी। मेयर कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी एक बयान में स्वीकार किया गया कि इस हमले में व्यक्तिगत और अन्य गैर-सार्वजनिक डेटा प्रभावित होने की पूरी संभावना है। फिलहाल फॉरेंसिक विशेषज्ञ और तकनीकी दल इस बात का आकलन कर रहे हैं कि नेटवर्क से कितनी संवेदनशील जानकारी चोरी हुई है और प्रभावित डिजिटल ढांचे को सुरक्षित तरीके से बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। डार्क वेब पर डेटा नीलामी की चेतावनी और फिरौती की समयसीमा बर्लिन प्रशासन को फिरौती का संदेश भेजने के साथ ही हैकर्स ने डार्क वेब पर एक उलटी गिनती (काउंटडाउन) शुरू कर दी है। हैकर्स समूह का दावा है कि उन्होंने बर्लिन सरकार के सर्वर से कुल 5.79 टेराबाइट डेटा चुराया है। डार्क वेब पोर्टल पर दी गई चेतावनी के मुताबिक, यदि बर्लिन प्रशासन सात दिनों के भीतर 30 बिटकॉइन का भुगतान नहीं करता है, तो इस चोरी किए गए गोपनीय डेटा की ऑनलाइन नीलामी शुरू कर दी जाएगी। जर्मन मीडिया रिपोर्ट्स और डार्क वेब के स्क्रीनशॉट के अनुसार, हैकर्स के पास बर्लिन सरकार के कई बेहद संवेदनशील दस्तावेज मौजूद हैं। इसमें आधिकारिक सरकारी अनुबंध, गोपनीयता समझौते (एनडीए), कर्मचारियों की निजी फाइलें, प्रशासनिक पासवर्ड और हजारों अधिकारियों के निजी संपर्क विवरण शामिल हैं। डार्क वेब पर इस डेटा की शुरुआती नीलामी कीमत भी 30 बिटकॉइन ही रखी गई है, जो वही रकम है जो हैकर्स ने फिरौती के रूप में मांगी है। कुख्यात हैकर समूह रीसिडा का संदिग्ध हाथ हालांकि बर्लिन के आधिकारिक अधिकारियों ने साइबर हमले के जिम्मेदार समूह का नाम सार्वजनिक रूप से दर्ज नहीं कराया है, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस हमले के पीछे रीसिडा नाम के साइबर अपराध गिरोह का हाथ माना जा रहा है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, रीसिडा समूह मुख्य रूप से रूस और पूर्वी यूरोप से संचालित होता है। साल 2023 में अस्तित्व में आए इस हैकर समूह ने दुनिया भर के कई देशों में सरकारी संस्थानों, स्वास्थ्य संगठनों और निजी कंपनियों पर सैकड़ों रैनसमवेयर हमले किए हैं। रीसिडा समूह 2023 में तब सुर्खियों में आया था जब उसने ब्रिटेन के मशहूर ब्रिटिश म्यूजियम के कंप्यूटर सिस्टम को निशाना बनाया था। उस हमले के दौरान रीसिडा के हैकर्स ने म्यूजियम के नेटवर्क में घुसपैठ करके कामकाज ठप कर दिया था और लगभग 5 लाख (500,000) संवेदनशील फाइलें चुरा ली थीं। यह समूह आमतौर पर निशाना बनाए गए संस्थानों के डेटा को एनक्रिप्ट करके उसे बेचने या सार्वजनिक करने की धमकी देकर भारी फिरौती वसूलता है। कानूनी जांच की रफ्तार और आगामी चुनाव सुरक्षा का आश्वासन इस अभूतपूर्व साइबर संकट का सामना करते हुए बर्लिन के मेयर काई वेगनर ने अपना रुख दोहराया है कि बर्लिन किसी भी स्थिति में ब्लैकमेल नहीं होगा। प्रांतीय पुलिस, सरकारी अभियोजक और जर्मनी की संघीय सुरक्षा एजेंसियां मिलकर इस मामले की जांच कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां हैकर्स के डिजिटल सुरागों और सर्वर लॉग का गहनता से विश्लेषण कर रही हैं ताकि दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के कटघरे में लाया जा सके। यह साइबर हमला ऐसे समय में हुआ है जब बर्लिन में लगभग एक महीने बाद प्रांतीय चुनाव होने वाले हैं। चुनाव प्रक्रिया पर हमले के प्रभाव को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच, प्रांतीय गृह मंत्री (स्टेट सेनेटर) आइरिस स्प्रेंजर ने जनता को आश्वस्त किया है कि चुनाव से जुड़ा डिजिटल ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें कोई सेंधमारी नहीं हुई है। प्रशासन का कहना है कि चुनावी प्रक्रियाओं पर इस साइबर हमले का कोई असर नहीं पड़ेगा। इसका आप पर असर बर्लिन में सरकारी नेटवर्क पर साइबर हमले के बाद नागरिकों की निजी डेटा प्राइवेसी और डिजिटल सरकारी सेवाओं पर सीधा प्रभाव पड़ा है। • बर्लिन और जर्मनी में: स्थानीय नागरिकों को आवास भत्ते और सरकारी भुगतानों की डिजिटल अर्जियों में अस्थायी देरी का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित सरकारी विभागों से जुड़े अधिकारियों और नागरिकों की निजी जानकारी उजागर होने का जोखिम है। • भारत और वैश्विक पाठकों के लिए: यह घटना दर्शाती है कि सरकारी ढांचा किस प्रकार रैनसमवेयर हमलों के प्रति संवेदनशील है। वैश्विक संस्थानों के लिए साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल मजबूत करना अनिवार्य हो गया है। • डेटा प्राइवेसी और पासवर्ड सुरक्षा: हैकर्स द्वारा प्रशासनिक पासवर्ड चुराए जाने से सरकारी नेटवर्क की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए हैं। संस्थानों को मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करना होगा। • फिरौती नीति पर कड़ा रुख: सरकार द्वारा फिरौती देने से इनकार करने से अन्य हमलावरों को कड़ा संदेश मिलता है, हालांकि डेटा नीलाम होने का जोखिम बना रहता है। सवाल-जवाब 1. बर्लिन में क्या घटना हुई है? बर्लिन के सरकारी कंप्यूटर सिस्टम में हैकर्स ने सेंध लगाकर 5.79 टेराबाइट डेटा चुरा लिया और सरकार से फिरौती की मांग की है। 2. हैकर्स ने कितनी फिरौती मांगी है? हैकर्स ने 30 बिटकॉइन फिरौती के रूप में मांगे हैं, जिसकी बाजार कीमत लगभग 20 लाख यूरो (17 लाख पाउंड) है। 3. बर्लिन के मेयर का क्या रुख है? मेयर काई वेगनर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बर्लिन शहर प्रशासन हैकर्स की किसी भी ब्लैकमेलिंग या फिरौती की मांग के आगे नहीं झुकेगा। 4. इस साइबर हमले के पीछे किस समूह का हाथ माना जा रहा है? इस हमले के पीछे रीसिडा नाम के रैनसमवेयर समूह का हाथ माना जा रहा है, जो मुख्य रूप से रूस और पूर्वी यूरोप से संचालित होता है। 5. क्या इस साइबर हमले से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई है? नहीं, प्रांतीय गृह मंत्री आइरिस स्प्रेंजर ने पुष्टि की है कि चुनाव से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर अलग नेटवर्क पर है और वह पूरी तरह सुरक्षित है। https://trendkia.com/europe/berlin-ke-sarakari-sistama-men-sendha-lagakara-haikarsa-ne-mangi-karoron-ki-rngadari-meyara-kai-wegner-ne-blaikamela-hone-se-kiya--23917 TrendKia — Har trend, sabse pehle.