भीषण सूखे के कारण फ्रांस ने प्रसिद्ध माउंटेन चीज़ के सख्त नियमों में दी ढील गर्मियों के भीषण सूखे के कारण मवेशियों के चारे का संकट खड़ा होने पर फ्रांस सरकार ने आबोंडेंस और कॉम्टे जैसे प्रसिद्ध चीज़ के उत्पादन नियमों में अस्थायी छूट दी है। पश्चिमी यूरोप में गर्मियों की भीषण गर्मी और बारिश की भारी कमी के कारण फ्रांस के कृषि अधिकारियों को अपने कुछ सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक चीज़ के उत्पादन नियमों में अस्थायी आपातकालीन छूट देनी पड़ी है। महीनों तक चले भीषण सूखे के कारण चरवाहे चरागाह पूरी तरह सूख गए, जिससे डेयरी मवेशियों के लिए स्थानीय हरे चारे का गंभीर संकट पैदा हो गया। इसके बाद बुधवार को जारी सरकारी आदेशों के तहत पहाड़ी किसानों को अपने पशुओं के पोषण के लिए सदियों पुराने सख्त नियमों में ढील देने की अनुमति दी गई है। पहाड़ी चीज़ निर्माताओं के लिए आपातकालीन विनियामक राहत बुधवार को प्रकाशित सरकारी गजट में पूर्वी फ्रांस के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले कई प्रमुख चीज़ निर्माताओं को राहत प्रदान की गई है। इस छूट से मुख्य रूप से आबोंडेंस, बोफोर्ट और कॉम्टे चीज़ बनाने वाले किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। सामान्य कानूनी व्यवस्था के तहत इन पारंपरिक चीज़ों को विशेष भौगोलिक पहचान का संरक्षण प्राप्त है, जिसके तहत मवेशियों के भोजन और उनके चारे के स्रोत के लिए बेहद सख्त नियम निर्धारित किए गए हैं। हालांकि, लंबे समय से जारी सूखे ने स्थानीय चरागाहों को पूरी तरह सुखा दिया है, जिससे डेयरी किसानों के लिए पशु स्वास्थ्य को खतरे में डाले बिना मानक नियमों का पालन करना असंभव हो गया था। कृषि अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पर्यावरण संबंधी समान चुनौतियों का सामना कर रहे अन्य संरक्षित चीज़ों को भी जल्द ही इसी तरह की ढील दी जाएगी। आगामी छूटों में कैंटल, ब्लू डोवेर्न, फोरमे डी एम्बर्ट, ब्लू डु वेरकॉर्स-सासेनाज, रेब्लोचोन और प्रसिद्ध बकरे के दूध से बनने वाला रोकामाडूर चीज़ शामिल हैं। इन अस्थायी नियमों के लागू होने के बाद, निर्दिष्ट क्षेत्रों के पशुपालक अपने मवेशियों को अपनी तय भौगोलिक सीमा के बाहर से मंगाया गया हरा चारा और भूसा खिला सकेंगे। आबोंडेंस और कॉम्टे मवेशियों की खुराक के लिए विशेष ढील इन नियमों में बदलाव का मूल्यांकन नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ओरिजिन एंड क्वालिटी (आईएनएओ) द्वारा किया गया है, जो फ्रांस में संरक्षित गुणवत्ता टैग का नियंत्रण और नियमन करता है। आईएनएओ के प्रतिनिधियों ने आधिकारिक तौर पर वर्ष 2026 के गर्मियों के सूखे को ऐतिहासिक सूखा घोषित किया है। संस्था ने कहा कि मौसम के इस गंभीर बदलाव ने देश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में पारंपरिक कृषि चक्र को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। चारे की भारी कमी से निपटने के लिए विभिन्न प्रकार के चीज़ के लिए अलग-अलग आपातकालीन नियम बनाए गए हैं। फ्रांसीसी आल्प्स के पर्वतीय इलाकों में आबोंडेंस चीज़ बनाने वालों को गायों की दैनिक खुराक में ताजा चराई घास के न्यूनतम 50 प्रतिशत के मानक को घटाकर मात्र 15 प्रतिशत करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, आल्प्स क्षेत्र के किसान अपनी निर्धारित क्षेत्रीय सीमाओं के बाहर से चारा आयात कर सकते हैं और चारे की कमी के दौरान गायों के उचित पोषण के लिए पूरक आहार का उपयोग कर सकते हैं। इसी तरह, जुरा पर्वतीय श्रृंखला में कॉम्टे चीज़ बनाने वाले डेयरी किसानों को भी विशेष रियायतें दी गई हैं। पारंपरिक कॉम्टे नियमों के अनुसार मवेशियों को केवल स्थानीय स्तर पर उगाई गई हरी मकई खिलाना अनिवार्य होता है। हालांकि, तीव्र सूखे के कारण स्थानीय मकई की फसल नष्ट हो जाने की वजह से अब किसानों को अपने निर्धारित उत्पादन क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों से मकई लाकर खिलाने की कानूनी अनुमति दी गई है। चीज़ के परे वाइन, सीडर, भेड़ के मांस और फलों पर विस्तार आईएनएओ द्वारा दी गई यह विनियामक ढील केवल डेयरी उद्योग तक ही सीमित नहीं है। वर्ष 2026 के सूखे के व्यापक कृषि प्रभावों को देखते हुए संस्था ने कई अन्य संरक्षित क्षेत्रीय खाद्य और पेय पदार्थों के नियमों में भी अस्थायी बदलावों को मंजूरी दी है। इस राहत का लाभ उठाने वाले अन्य उत्पादों में नॉर्मंडी क्षेत्र का प्रसिद्ध कालवाडोस सेब ब्रांडी और सीडर शामिल हैं, जहां सेब के बागानों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा है। इसके अतिरिक्त, पूर्वी फ्रांस में क्रेमेंट डी एल्सस स्पार्कलिंग वाइन निर्माताओं को भी विनियामक छूट दी गई है। यही नहीं, पोइटो-चारेंटेस क्षेत्र में पालतू भेड़ के मांस का उत्पादन करने वाले किसानों और रीन-क्लॉड प्लम (आलू बुखारा) उगाने वाले बागवानों को भी अपनी पैदावार बनाए रखने के लिए विशेष छूट दी गई है। 'टेरुआ' की अवधारणा और जलवायु छूट का कानूनी ढांचा फ्रांस में उत्पत्ति के आधिकारिक प्रमाणपत्र किसानों को महत्वपूर्ण आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे वे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने उत्पादों को प्रीमियम कीमतों पर बेच पाते हैं। हालांकि, इन संरक्षित टैग को बनाए रखने के लिए खेतों के स्थान, मवेशियों की नस्ल, उनके आहार और पारंपरिक निर्माण विधियों के कड़े नियमों का पालन करना होता है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य खाद्य पदार्थों की अनूठी सांस्कृतिक पहचान और स्वाद को बनाए रखना है, जो 'टेरुआ' की अवधारणा से गहराई से जुड़े हैं। टेरुआ फ्रांस की एक मौलिक पाक और कृषि दर्शन है, जिसके अनुसार किसी उत्पाद का अंतिम स्वाद और गुणवत्ता उसकी सटीक भौगोलिक स्थिति, मिट्टी की संरचना, सूक्ष्म जलवायु और सदियों पुरानी स्थानीय खेती की तकनीकों पर निर्भर करती है। जब मौसम की चरम स्थितियां किसानों को स्थानीय घास खिलाने से रोकती हैं, तो टेरुआ का मूल सिद्धांत सीधे प्रभावित होता है। हालांकि इन कानूनों की प्रकृति बेहद सख्त है, फिर भी फ्रांसीसी राष्ट्रीय कानून और यूरोपीय संघ के कृषि नियमों में असाधारण जलवायु आपातकाल के दौरान कानूनी ढील देने का प्रावधान मौजूद है। इससे पहले वर्ष 2022 के भीषण सूखे के बाद भी इसी तरह के अस्थायी उपाय लागू किए गए थे, जिससे पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच पारंपरिक खाद्य क्षेत्रों को जीवित रखने के लिए नियामकों को समय-समय पर ढील देनी पड़ती है। स्वाद पर प्रभाव, बाजार मूल्य और संरक्षित टैग का भविष्य जैसे ही किसान बाहर से लाए गए भूसे, बाहरी मकई और पूरक आहार का उपयोग शुरू करेंगे, खाद्य विशेषज्ञ और उपभोक्ता इस बात पर कड़ी नजर रखेंगे कि क्या इस बदलाव से चीज़ की खुशबू, बनावट या स्वाद में कोई ध्यान देने योग्य अंतर आता है या नहीं। इसके साथ ही बाजार विश्लेषक इस बात का भी आकलन कर रहे हैं कि क्या ये आपातकालीन कदम उत्पादन की मात्रा को स्थिर रख पाएंगे या आपूर्ति में कमी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतें बढ़ेंगी। दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखें तो बार-बार आपातकालीन छूट की आवश्यकता फ्रांस और पूरे यूरोप में संरक्षित उत्पत्ति टैग की भविष्य की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि जलवायु परिवर्तन लगातार स्थानीय मौसम के मिजाज को बदलता है और पारंपरिक स्थानों में खेती की पुरानी पद्धतियों को असंभव बना देता है, तो टेरुआ की पारंपरिक अवधारणा अपने चरम परीक्षण का सामना करेगी, जिससे नियामकों और किसानों को पारंपरिक खाद्य उत्पादन के भविष्य पर फिर से विचार करना होगा। इसका आप पर असर यद्यपि यह निर्णय सीधे तौर पर फ्रांस की कृषि नीतियों से संबंधित है, लेकिन वैश्विक खाद्य आपूर्ति और विशेष चीज़ के शौकीनों के लिए इसके व्यावहारिक परिणाम महत्वपूर्ण हैं। • खाद्य विक्रेताओं और आयातकों के लिए: प्रीमियम चीज़ के आयातक और खुदरा विक्रेता आपूर्ति में अचानक कमी के बिना प्रामाणिक फ्रांसीसी चीज़ की निरंतर बिक्री जारी रख सकेंगे। आपातकालीन चारा छूट ने डेयरी फार्मों में उत्पादन ठप होने से बचा लिया है। • उपभोक्ताओं के लिए: चीज़ के पारखी आने वाले महीनों में स्वाद, सुगंध और बनावट में मामूली बदलाव महसूस कर सकते हैं। चूंकि गायों के आहार में स्थानीय घास के बजाय बाहरी चारा शामिल हो रहा है, इसलिए आबोंडेंस और कॉम्टे के पारंपरिक स्वाद में सूक्ष्म अंतर आ सकता है। • उपभोक्ता बजट के लिए: संरक्षित फ्रांसीसी चीज़ की कीमतें अचानक आसमान छूने के बजाय अल्पावधि में स्थिर बनी रहने की उम्मीद है। किसानों को बाहरी चारा आयात करने की अनुमति मिलने से भीषण सूखे के बावजूद उत्पादन लागत नियंत्रित रहेगी। • जलवायु नीति विश्लेषकों के लिए: पर्यावरण विश्लेषकों और कृषि नीति निर्माताओं को यह समझने का एक स्पष्ट उदाहरण मिला है कि जलवायु परिवर्तन कैसे यूरोपीय खाद्य संरक्षण कानूनों को बदल रहा है। यह मामला दर्शाता है कि सूखा कैसे परंपरा और जलवायु वास्तविकता के बीच समझौता करा रहा है। सवाल-जवाब 1. फ्रांस ने चीज़ बनाने के अपने आधिकारिक नियमों में ढील क्यों दी? फ्रांस ने नियमों में ढील इसलिए दी क्योंकि गर्मियों के भीषण सूखे ने स्थानीय चरागाहों को सुखा दिया था, जिससे डेयरी किसानों के पास सख्त नियमों के अनुसार मवेशियों को खिलाने के लिए पर्याप्त स्थानीय घास नहीं बची थी। 2. इन अस्थायी छूटों से कौन-कौन से चीज़ प्रभावित हुए हैं? प्रारंभिक छूट आबोंडेंस, बोफोर्ट और कॉम्टे पर लागू होती है, जबकि कैंटल, ब्लू डोवेर्न, फोरमे डी एम्बर्ट, ब्लू डु वेरकॉर्स-सासेनाज, रेब्लोचोन और रोकामाडूर के लिए भी जल्द छूट की उम्मीद है। 3. आबोंडेंस चीज़ के लिए क्या विशिष्ट नियम बदले गए हैं? आल्प्स में आबोंडेंस निर्माताओं के लिए गायों के आहार में ताजी घास का अनुपात 50% से घटाकर 15% कर दिया गया है और बाहर से चारा लाने की अनुमति दी गई है। 4. नियमों में उल्लिखित 'टेरुआ' की अवधारणा क्या है? टेरुआ फ्रांस की वह अवधारणा है जिसके अनुसार किसी खाद्य उत्पाद का अनूठा स्वाद और गुणवत्ता उसकी सटीक भौगोलिक स्थिति, मिट्टी, जलवायु और पारंपरिक तरीकों से जुड़ी होती है। 5. क्या फ्रांस ने अतीत में भी ऐसी जलवायु छूट दी है? हां, फ्रांसीसी और यूरोपीय संघ के कानून के तहत वर्ष 2022 के भीषण सूखे के बाद भी इसी तरह के अस्थायी उपाय लागू किए गए थे। https://trendkia.com/europe/bhishana-sukhe-ke-karana-france-ne-prasiddha-mauntena-chiza-ke-sakhta-niyamon-men-di-dhila-23366 TrendKia — Har trend, sabse pehle.