बुडापेस्ट ने 10 रूसी राजनयिकों को बाहर का रास्ता दिखाया, मॉस्को ने दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी हंगरी ने अपने देश में अवांछित गतिविधियों में लिप्त 10 रूसी राजनयिकों को तुरंत निष्कासित करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद मॉस्को ने कड़े और दर्दनाक जवाब की चेतावनी दी है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में भारी कड़वाहट आ गई है। हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट से 10 रूसी राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। यह कार्रवाई राजनयिकों द्वारा अवांछित गतिविधियों में शामिल होने की जांच के बाद की गई है। हंगरी की विदेश मंत्री अनिता ओर्बान ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम हंगरी की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए उठाया गया है। हालांकि बुडापेस्ट स्थित अधिकारियों ने इन राजनयिकों की विशिष्ट गतिविधियों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन विदेश मंत्री अनिता ओर्बान ने स्पष्ट किया है कि राजनयिकों को बाहर निकालने का मतलब रूस के साथ कूटनीतिक संबंधों को पूरी तरह समाप्त करना नहीं है। इसके बावजूद, यह निर्णय दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है और क्रेमलिन के प्रति हंगरी की विदेश नीति में आए बड़े बदलाव का संकेत देता है। मॉस्को की सख्त चेतावनी और कूटनीतिक संबंधों में गिरावट रूस की राजधानी मॉस्को से इस निष्कासन आदेश पर त्वरित और तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। मॉस्को में रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने बुडापेस्ट के फैसले की निंदा करते हुए चेतावनी दी कि यूरोपीय देशों में सक्रिय रूसी-विरोधी लॉबी को इसका सख्त और दर्दनाक जवाब दिया जाएगा। इस बयान से साफ है कि मॉस्को जल्द ही रूस में तैनात हंगेरियाई कूटनीतिक कर्मियों के खिलाफ इसी तरह की जवाबी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। वहीं, बुडापेस्ट में रूस के राजदूत एवगेनी स्तानिस्लावोव ने हंगरी सरकार के इस कूटनीतिक कदम पर गहरी निराशा व्यक्त की। राजदूत स्तानिस्लावोव ने विदेश मंत्री अनिता ओर्बान के उस बयान को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने परस्पर सम्मान और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत आवश्यक संवाद बनाए रखने की बात कही थी। उन्होंने शिकायत की कि हालिया घटनाओं को देखते हुए व्यावहारिक सहयोग का बुडापेस्ट का आश्वासन पूरी तरह अर्थहीन साबित हुआ है। एवगेनी स्तानिस्लावोव ने हंगरी के इस फैसले को एक बेहद अमित्रतापूर्ण कदम करार दिया और कहा कि यह बिना किसी आधार के तनाव बढ़ाने वाली अभूतपूर्व कार्रवाई है। प्रो-क्रेमलिन नीति से दूरी बनाने का रणनीतिक फैसला 10 रूसी राजनयिक कर्मियों का निष्कासन अप्रैल में आयोजित राष्ट्रीय चुनावों के बाद हंगरी की विदेश नीति में आए व्यापक बदलाव को रेखांकित करता है। पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान और उनकी सत्तारूढ़ फिदेस सरकार के तहत कई वर्षों तक हंगरी को यूरोपीय संघ और नाटो के भीतर रूस का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता था। तत्कालीन सरकार ने मॉस्को के साथ घनिष्ठ राजनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए रखे थे और अपने इस रुख को सही ठहराने के लिए हमेशा रूस से मिलने वाले सस्ते कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात का हवाला दिया था। विक्टर ओर्बान के नेतृत्व में हंगरी ने यूक्रेन के लिए यूरोपीय संघ के सहायता पैकेजों पर बार-बार आपत्तियां जताईं और वित्तीय और सैन्य सहायता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को रोका या टाला। इसके अलावा, 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण स्तर के सैन्य आक्रमण के बाद, पूर्ववर्ती हंगेरियाई सरकार ने रूसी राज्य के राजस्व पर प्रतिबंध लगाने वाले यूरोपीय संघ के व्यापक प्रतिबंध पैकेजों की मंजूरी में भी लगातार देरी की थी। हालांकि, अप्रैल के चुनावों में विक्टर ओर्बान की हार के साथ ही क्रेमलिन के प्रति यह झुकाव समाप्त हो गया। नए नेतृत्व ने मॉस्को के साथ संबंधों को फिर से परिभाषित किया अप्रैल के आम चुनावों में प्रधानमंत्री पीटर मगयार और उनकी टिज़ा पार्टी की जीत के बाद हंगरी ने अपनी पुरानी प्रो-क्रेमलिन नीतियों से दूरी बनानी शुरू कर दी। पदभार संभालने के बाद प्रधानमंत्री पीटर मगयार ने शुरू में मॉस्को के साथ व्यावहारिक संबंध बनाए रखने का वादा किया था, लेकिन उनके प्रशासन ने जल्द ही एक अधिक आक्रामक विदेश नीति अपना ली। प्रधानमंत्री पीटर मगयार और विदेश मंत्री अनिता ओर्बान दोनों ने रूस से यूक्रेन में अपने युद्ध को तुरंत समाप्त करने का बार-बार आह्वान किया है। विदेश नीति में यह कूटनीतिक बदलाव मई में तब स्पष्ट हुआ, जब विदेश मंत्री अनिता ओर्बान ने रूसी राजदूत एवगेनी स्तानिस्लावोव को तलब कर आधिकारिक विरोध दर्ज कराया। यह कदम पश्चिमी यूक्रेन के ट्रांसकारपेथिया क्षेत्र पर हुए एक बड़े रूसी ड्रोन हमले के बाद उठाया गया था। ट्रांसकारपेथिया क्षेत्र में हंगेरियाई मूल के लोगों की एक बड़ी आबादी रहती है। कूटनीतिक विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया कि फिदेस प्रशासन के तहत अनिता ओर्बान के पूर्वाधिकारी ने 2022 में रूस के पूर्ण स्तर के आक्रमण की शुरुआत के बाद से एक बार भी रूसी राजदूत को तलब नहीं किया था। विदेश नीति का यह नया रुख पिछले महीने तब और औपचारिक हो गया, जब प्रधानमंत्री पीटर मगयार ने पूर्ववर्ती फिदेस सरकार के रणनीतिक ढांचे को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया। सरकार ने नए आधिकारिक दिशानिर्देश जारी किए, जिनमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि यूक्रेन में रूस का आचरण हंगरी, यूरोप और वैश्विक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए सीधा खतरा पैदा करता है। इस रणनीतिक दस्तावेज में यह भी रेखांकित किया गया कि रूसी सैन्य अभियान ट्रांसकारपेथिया में रहने वाले हंगेरियाई अल्पसंख्यक समुदाय को गंभीर खतरे में डालते हैं। जासूसी की चिंताएं और दूतावास बंद होने का खतरा राजनयिकों के निष्कासन का यह फैसला हंगरी के भीतर संचालित गुप्त रूसी खुफिया गतिविधियों को लेकर लंबे समय से चली आ रही सुरक्षा चिंताओं से भी जुड़ा है। अप्रैल के आम चुनावों से पहले, स्वतंत्र रूसी खोजी वेबसाइट एजेंट्सवो ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि बुडापेस्ट में रूसी दूतावास में तैनात 47 कर्मियों में से 15 कर्मचारी सीधे तौर पर रूसी खुफिया एजेंसियों से जुड़े थे, जबकि 6 अन्य कर्मियों के भी जासूसी गतिविधियों से जुड़े होने का संदेह था। हंगरी के पूर्व काउंटर-इंटेलिजेंस प्रमुख एंड्रास टेल्केश ने बताया कि चुनाव से पहले हंगेरियाई खुफिया एजेंसियों ने देश में रूसी जासूसी गतिविधियों की सक्रिय रूप से जांच की थी। हालांकि, पूर्व फिदेस सरकार ने संदिग्ध विदेशी एजेंटों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई करने से रोक दिया था। सुरक्षा चिंताएं तब और बढ़ गईं जब कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि तीन रूसी सैन्य खुफिया अधिकारी हंगरी चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने के लिए विशेष रूप से बुडापेस्ट आए थे। यद्यपि बुडापेस्ट में रूसी दूतावास ने इन रिपोर्टों को खारिज कर दिया था और रूस लगातार जासूसी के लिए अपने राजनयिक मिशनों के इस्तेमाल से इनकार करता रहा है, लेकिन 2022 के बाद से पूरे यूरोप में सैकड़ों रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया जा चुका है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इन निष्कासनों से हंगेरियाई कूटनीतिक मिशन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। पूर्व काउंटर-इंटेलिजेंस प्रमुख एंड्रास टेल्केश ने कहा कि यदि मॉस्को जवाबी कार्रवाई करते हुए रूस से 10 हंगेरियाई राजनयिकों को निष्कासित करता है, तो इस कदम से मॉस्को में हंगरी का दूतावास प्रभावी रूप से बंद हो सकता है, क्योंकि वहां हंगरी के पास बेहद सीमित संख्या में राजनयिक कर्मचारी मौजूद हैं। इसका आप पर असर यह घटना यूरोप में गहराते राजनयिक संकट और वैश्विक भू-राजनीति में हो रहे बड़े बदलावों को दर्शाती है। • भारत-रूस कूटनीति: पश्चिमी और यूरोपीय देशों द्वारा रूसी राजनयिकों के निष्कासन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्रुवीकरण बढ़ेगा, जिससे भारत के लिए अपनी तटस्थ विदेश नीति बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। • वैश्विक ऊर्जा बाजार: हंगरी द्वारा रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता घटाने के कदमों से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों पर दबाव बन सकता है। • यूरोप में वीजा और सुरक्षा: कूटनीतिक तनाव बढ़ने से यूरोपीय संघ के देशों में सुरक्षा जांच और वीजा नियम सख्त हो सकते हैं, जिसका असर विदेशी यात्रियों पर पड़ेगा। • अंतरराष्ट्रीय व्यापार: रूस और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ता टकराव व्यापारिक मार्गों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता पैदा कर सकता है। ऐसा क्यों हुआ हंगरी द्वारा 10 रूसी राजनयिकों का निष्कासन कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह सरकार परिवर्तन और सुरक्षा समीक्षा की वजह से हुआ है। • अवांछित गतिविधियां: जांच में पाया गया कि दूतावास के कर्मी कूटनीतिक सीमाओं का उल्लंघन कर अवांछित गतिविधियों में शामिल थे। • अप्रैल चुनावों के बाद सत्ता परिवर्तन: पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान की हार और पीटर मगयार के प्रधानमंत्री बनने के बाद हंगरी ने प्रो-क्रेमलिन नीतियों को त्याग दिया। • ट्रांसकारपेथिया पर ड्रोन हमला: मई में यूक्रेन के ट्रांसकारपेथिया क्षेत्र पर हुए रूसी हमले से हंगेरियाई अल्पसंख्यक समुदाय के खतरे में आने से बुडापेस्ट नाराज हुआ। • नए सुरक्षा दिशानिर्देश: सरकार ने नए दिशानिर्देश जारी कर रूस के आचरण को हंगरी और यूरोप की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा घोषित किया। सवाल-जवाब 1. हंगरी ने कितने रूसी राजनयिकों को निकाला है? हंगरी सरकार ने बुडापेस्ट स्थित 10 रूसी राजनयिकों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया है। 2. राजनयिकों को निकालने का क्या कारण बताया गया है? विदेश मंत्री अनिता ओर्बान के अनुसार, यह कदम हंगरी की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए उनकी अवांछित गतिविधियों के कारण उठाया गया है। 3. रूस ने इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी है? रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कड़े और दर्दनाक जवाब की चेतावनी दी है, जबकि रूसी राजदूत ने इसे एक अमित्रतापूर्ण और अकारण तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया। 4. हंगरी की विदेश नीति में यह बदलाव कब आया? अप्रैल में हुए आम चुनावों के बाद प्रधानमंत्री पीटर मगयार की सरकार के सत्ता में आने पर हंगरी ने अपनी पुरानी प्रो-क्रेमलिन नीतियों को बदल दिया। 5. यदि मॉस्को भी जवाबी कार्रवाई करता है तो क्या होगा? पूर्व काउंटर-इंटेलिजेंस प्रमुख एंड्रास टेल्केश के अनुसार, यदि रूस 10 हंगेरियाई राजनयिकों को निकालता है तो मॉस्को में हंगरी का दूतावास प्रभावी रूप से बंद हो सकता है। https://trendkia.com/europe/budapest-ne-10-rusi-rajanayikon-ko-bahara-ka-rasta-dikhaya-moscow-ne-di-gnbhira-parinama-bhugatane-ki-chetavani-29735 TrendKia — Har trend, sabse pehle.