डॉनबास में यूक्रेनी सेना ने 277 वर्ग किमी इलाका छीना, स्टारशील्ड पाबंदियों ने बढ़ाई चिंता यूक्रेन ने ऑपरेशन विवाल्डी के तहत 277 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 16 बस्तियों को मुक्त कराने का दावा किया है। हालांकि, अमेरिकी स्टारशील्ड नेटवर्क पर अचानक लगी पाबंदियों और वाशिंगटन से बिगड़ते रिश्तों ने सैन्य हलकों में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। पूर्वी यूक्रेन के युद्धग्रस्त डॉनबास इलाके में सैन्य बंकरों के भीतर लगे मॉनिटरों पर लगातार दुश्मन के टोही ड्रोन्स की हलचल नजर आती रहती है। जमीन पर खुली जगह में आगे बढ़ रहे यूक्रेनी पैदल सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बंकर में तैनात सैन्य कमांडर पल-पल की फुटेज की निगरानी करते हैं और खतरा देखते ही हवा में अपने ड्रोन्स भेजकर दुश्मन के उपकरणों को निष्क्रिय करने के निर्देश देते हैं। अग्रिम मोर्चे पर रूसी सेना को पीछे धकेलने के लिए पिछले तीन महीनों से लगातार तैनात रही टुकड़ियों को जब बदला जा रहा था, तब भी हर सिपाही की जान इसी हवाई सतर्कता और तकनीकी तालमेल पर टिकी थी। यह पूरी मुहिम यूक्रेन के ऑपरेशन विवाल्डी का एक अहम हिस्सा रही है, जिसके अंतर्गत यूक्रेनी सेना ने डॉनबास के 277 वर्ग किलोमीटर इलाके को वापस अपने नियंत्रण में लेने का ऐलान किया है। ऑपरेशन विवाल्डी और चार चरणों की सामरिक योजना इस बड़े पलटवार का नामकरण प्रसिद्ध इतालवी संगीतकार के वायलिन कॉन्सर्ट की तर्ज पर चार ऋतुओं या चरणों के आधार पर ऑपरेशन विवाल्डी रखा गया था। इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य रूसी सेना की उस दोतरफा घेराबंदी योजना को ध्वस्त करना था, जो यूक्रेनी नियंत्रण वाले मजबूत फोर्ट्रेस बेल्ट के प्रमुख शहरों को घेरने के इरादे से बनाई गई थी। रूसी हमलों ने जहां इस महीने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया और बड़े पैमाने पर आम नागरिकों की जान ली, वहीं मोर्चे पर यूक्रेनी बलों ने जमीन वापस हासिल करने में सफलता पाई है। कीव के अनुसार, अकेले ऑपरेशन विवाल्डी में रूस के 8,000 सैनिक हताहत हुए, जबकि सितंबर के पूरे महीने में समूचे मोर्चे पर रूसी हताहतों का आंकड़ा 50,000 के करीब पहुंच गया। इसके विपरीत यूक्रेनी पक्ष को बहुत मामूली नुकसान झेलना पड़ा है। वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के आकलन के मुताबिक, रूस समर्थक सैन्य ब्लॉगर्स ने भी यूक्रेनी सेना की इस बढ़त को स्वीकार किया है और भविष्य में रूसी सेना को और बड़े झटके लगने की आशंका जताई है। हालांकि, रूसी प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर इन नुकसानों को कबूल नहीं किया गया है। रूसी रक्षा मंत्रालय की दैनिक ब्रीफिंग में केवल इतना कहा जा रहा है कि उनके सैनिक लाइमन क्षेत्र में हमलों को नाकाम कर रहे हैं या मोर्चे पर अपनी रणनीतिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहे हैं। हवाई ड्रोन्स की भिड़ंत और स्टारशील्ड का जाल जमीन पर यूक्रेनी सैनिकों की प्रगति के बावजूद रूसी ड्रोन्स का खतरा हर क्षण बना रहता है। रिवेंज ब्रिगेड की सिल्वर ट्रिनिटी यूनिट के कमांडेंट फीनिक्स बताते हैं कि उनकी टुकड़ी को एक सामान्य दिन में औसतन 10 रूसी ड्रोन्स का सामना करना पड़ता है। युद्ध के आधुनिक स्वरूप में यूक्रेनी ड्रोन्स जाल फेंककर रूसी टोही विमानों को आसमान से नीचे गिरा देते हैं, ताकि वे तोपखाने या आत्मघाती ड्रोन्स के लिए सैनिकों की लोकेशन न भेज सकें। इस बहुस्तरीय युद्ध में जमीन से लेकर आसमान तक हर गतिविधि डिजिटल कनेक्टिविटी से संचालित हो रही है। इस पूरे ऑपरेशन का सबसे अहम डिजिटल आधार एलन मस्क के स्टारलिंक उपग्रह संचार नेटवर्क का सैन्य संस्करण स्टारशील्ड रहा है, जो पूरे रणक्षेत्र में ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्टिविटी मुहैया कराता है। लेकिन ऑपरेशन विवाल्डी के समापन के साथ ही कीव के अधिकारियों ने खुलासा किया कि इस सिस्टम पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के पाबंदियां लगा दी गईं। इससे यूक्रेनी सेना की इंटरसेप्टर और मध्यम दूरी के स्ट्राइक ड्रोन्स की क्षमताएं प्रभावित हुई हैं। मीडिया रिपोर्टों और स्वयं मस्क के बयानों से संकेत मिले हैं कि यह आदेश व्हाइट हाउस की ओर से जारी किया गया था। इस अप्रत्याशित पाबंदी ने यूक्रेनी रणनीतिकारों को सकते में डाल दिया है, क्योंकि युद्ध के मैदान में मानव रहित जमीनी वाहन रसद पहुंचाने, घायलों को निकालने और अग्रिम पंक्ति पर हमला करने के लिए पूरी तरह डिजिटल नेटवर्क पर निर्भर हैं। कारपिवका का सन्नाटा और जीत की उम्मीदें कमांडेंट फीनिक्स के अनुसार, आक्रामक अभियान की तैयारी बेहद व्यापक थी और सैनिकों को कई महीनों तक रक्षात्मक रवैये से आक्रामक रुख अपनाने का कड़ा प्रशिक्षण दिया गया था। इस अभियान में पहली बार रोबोटिक उपकरणों और रिमोट संचालित विस्फोटक वाहनों को रूसी रक्षा पंक्ति के पीछे उतारा गया, जिसके चलते 250 रूसी सैनिकों को आत्मसमर्पण करना पड़ा। यूक्रेनी कमान का कहना है कि साल भर चले प्रयासों के बाद कुल 16 बस्तियों को रूसी कब्जे से मुक्त करा लिया गया है। अप्रैल 2025 से रूसी कब्जे में रहे कारपिवका गांव में यूक्रेनी सेना के दाखिल होने पर केवल एक स्थानीय नागरिक जीवित मिला। 61 वर्षीय वोलोदिमिर ज़ामोता पिछले आठ महीनों से पूरी तरह अलग-थलग रहकर मलबे में तब्दील हो चुके गांव में अकेले टिके रहे। ज़ामोता का कहना है कि उम्मीद सबसे आखिर में मरती है और वह अपने पूरे गांव में अकेले बचे व्यक्ति हैं क्योंकि बाकी सब पलायन कर चुके थे। हालांकि इलाका अभी भी आम नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लायक नहीं है, लेकिन रिवेंज ब्रिगेड के चीफ ऑफ स्टाफ आंद्रेई हिट का मानना है कि इस जीत से यूक्रेनी सेना को आगे के बड़े अभियानों के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त और अनुकूल मोर्चे हासिल हुए हैं। वाशिंगटन और कीव के बीच गहराते कूटनीतिक मतभेद जमीनी मोर्चे पर सैनिकों का मनोबल ऊंचा होने के बावजूद कीव और वाशिंगटन के कूटनीतिक रिश्तों में अभूतपूर्व कड़वाहट आ चुकी है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने डोनाल्ड ट्रंप के रुख को लेकर विश्वासघात महसूस होने की बात कही, जबकि ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर अपनी नापसंदगी जाहिर करते हुए उन्हें व्लादिमीर पुतिन से भी अधिक कठिन शख्स करार दिया। ट्रंप का आरोप है कि रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों की वजह से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जबकि यूक्रेन का तर्क है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध के कारण तेल बाजार में अस्थिरता आई है। इस कूटनीतिक तनातनी और अमेरिकी तकनीकी सहायता में कटौती के बीच मोर्चे पर डटे सिपाही और कारपिवका में बचे अकेले बुजुर्ग ज़ामोता केवल इस युद्ध के अंतिम अंत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसका आप पर असर यूक्रेन में रणनीतिक बुनियादी ढांचे और उपग्रह संचार पर लगाए गए प्रतिबंधों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय रक्षा नीतियों पर सीधा असर पड़ता है। • वैश्विक तेल कीमतें: रूसी रिफाइनरियों पर हमलों और मध्य पूर्व के तनाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इससे आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल और परिवहन लागत में बढ़ोतरी का जोखिम बना रहता है। • रक्षा तकनीक और उपग्रह नीतियां: निजी उपग्रह नेटवर्कों पर अचानक नियंत्रण लगाने की घटनाओं से वैश्विक सेनाओं की निर्भरता संबंधी रणनीतियों में बदलाव आएगा। विभिन्न देश अब वाणिज्यिक कंपनियों के बजाय पूरी तरह सरकारी और संप्रभु संचार प्रणालियों पर निवेश बढ़ाएंगे। • यूरोपीय सुरक्षा और विस्थापन: डॉनबास में बस्तियों के तबाह होने से युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से पलायन करने वाले नागरिकों की वापसी लंबे समय तक टल गई है। विस्थापित लोगों के पुनर्वास और मानवीय सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों पर आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ेगा। • कूटनीतिक समीकरण: अमेरिका और यूक्रेन के बीच राजनीतिक मतभेदों के चलते भविष्य में दी जाने वाली पश्चिमी सैन्य सहायता की शर्तों में बड़े फेरबदल हो सकते हैं। इससे वैश्विक कूटनीतिक समझौतों और क्षेत्रीय संधियों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। ऐसा क्यों हुआ डॉनबास में यूक्रेनी सेना का पलटवार रूसी घेराबंदी को तोड़ने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फोर्ट्रेस बेल्ट की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया था। इस अभियान के दौरान दोनों पक्षों के बीच ड्रोन युद्ध और उपग्रह आधारित कनेक्टिविटी का टकराव केंद्र में आ गया। • रूसी घेराबंदी को नाकाम करना: रूसी सेना दोनों तरफ से घेरा डालकर फोर्ट्रेस बेल्ट के यूक्रेनी नियंत्रण वाले प्रमुख शहरों को अलग-थलग करने की कोशिश कर रही थी। यूक्रेनी कमान ने इस खतरे को भांपते हुए चार चरणों वाला ऑपरेशन विवाल्डी शुरू किया ताकि दुश्मन की अग्रिम चौकियों को पीछे धकेला जा सके। • ड्रोन और रोबोटिक युद्ध तकनीक: इस अभियान में यूक्रेनी सेना ने पहली बार रिमोट चालित विस्फोटक वाहनों और उन्नत ड्रोन नेट का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। तकनीकी श्रेष्ठता और नए युद्धक तौर-तरीकों की वजह से रूसी सुरक्षा पंक्ति टूटी और उनके सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। • स्टारशील्ड नेटवर्क पर पाबंदियां: रिपोर्टों और बयानों के अनुसार, व्हाइट हाउस के कथित निर्देशों के बाद एलन मस्क की उपग्रह सेवा पर अचानक प्रतिबंध लगाए गए। तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों और वैश्विक कूटनीतिक दबावों के कारण वाशिंगटन और कीव के बीच रणनीतिक मतभेद गहरे हो गए थे। सवाल-जवाब 1. ऑपरेशन विवाल्डी क्या है? यह यूक्रेनी सेना द्वारा डॉनबास क्षेत्र में चलाया गया चार चरणों वाला आक्रामक अभियान है, जिसका उद्देश्य रूसी सेना को पीछे धकेलना था। 2. इस अभियान में यूक्रेन ने कितना इलाका वापस हासिल किया? यूक्रेनी सेना के अनुसार, इस अभियान के तहत 277 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 16 बस्तियों को रूसी नियंत्रण से मुक्त कराया गया है। 3. स्टारशील्ड क्या है और इस पर क्या पाबंदी लगी? स्टारशील्ड एलन मस्क के स्टारलिंक नेटवर्क का सैन्य संस्करण है, जिस पर अभियान के अंत में अचानक अघोषित पाबंदियां लगा दी गईं। 4. कारपिवका गांव में कौन बचा था? कारपिवका गांव में केवल 61 वर्षीय वोलोदिमिर ज़ामोता अकेले बचे थे, जिन्होंने आठ महीने पूरी तरह अलग-थलग रहकर गुजारे। 5. कीव और वाशिंगटन के बीच विवाद का मुख्य कारण क्या है? यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों पर किए गए हमलों और स्टारशील्ड पर लगी पाबंदियों को लेकर दोनों देशों के नेतृत्व में गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं। https://trendkia.com/europe/donbas-men-ukrainian-sena-ne-277-varga-kimi-ilaka-chhina-starshield-pabndiyon-ne-barhai-chinta-48335 TrendKia — Har trend, sabse pehle.