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  "type": "article",
  "title": "यूरोपीय संघ की पाबंदियों की सूची से दो रूसी अरबपतियों को हटाने पर यूक्रेन ने जताई कड़ी आपत्ति",
  "summary": "यूरोपीय संघ द्वारा दो प्रमुख रूसी उद्योगपतियों पर लगी पाबंदियां हटाने के फैसले पर यूक्रेन ने कड़ा विरोध जताया है, जबकि एक कूटनीतिक समझौते के तहत हजारों अन्य व्यक्तियों पर प्रतिबंध तीन साल के लिए बढ़ा दिए गए हैं।",
  "content": "यूरोपीय संघ ने वर्ष 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण सैन्य हमले के बाद लक्षित किए गए दो बेहद प्रभावशाली रूसी अरबपतियों पर से प्रतिबंध हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस राजनयिक फैसले की जानकारी सामने आने के तुरंत बाद कीव ने बेहद तल्ख प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे अस्वीकार्य करार दिया है। यूक्रेन के राजनयिकों का मानना है कि ऐसे कदम से मॉस्को को गलत संदेश जाता है और प्रतिबंध व्यवस्था कमजोर पड़ती है।\n\nफ्रांस और लक्ज़मबर्ग की पैरवी पर हुआ फैसला\nइस निर्णय के केंद्र में दो जाने-माने उद्योगपति हैं, जिनके नाम हटाने के लिए अलग-अलग यूरोपीय देशों ने पैरवी की थी। फ्रांस ने रूसी-उज्बेक मूल के उद्योगपति अलिशर उस्मानोव को पाबंदियों की सूची से बाहर करने की मांग उठाई थी। फ्रांसीसी पक्ष ने अपने रुख के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कारणों का हवाला दिया था। इसके अलावा राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा रही है कि फ्रांस की यह पहल अजरबैजान के साथ कैदियों की संभावित रिहाई के एक जटिल समझौते से जुड़ी हुई थी। उस्मानोव पर जब वर्ष 2022 में संपत्तियां जब्त करने जैसी सख्त पाबंदियां लगाई गई थीं, तब यूरोपीय संघ ने उन्हें क्रेमलिन समर्थक और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का बेहद करीबी बताया था। हालांकि, उस्मानोव लगातार इन प्रतिबंधों को अनुचित और भेदभावपूर्ण बताते रहे हैं।\n\nदूसरी ओर, लक्ज़मबर्ग ने रूसी-इजरायली कारोबारी मिखाइल फ्रिडमैन को सूची से हटाने का औपचारिक आग्रह किया था। यूक्रेन में जन्मे फ्रिडमैन अल्फा ग्रुप नामक विशाल निवेश समूह के संस्थापक हैं, जिसकी ऊर्जा और बैंकिंग क्षेत्र में व्यापक हिस्सेदारी है। यूरोपीय संघ ने उन्हें लंबे समय तक रूस के शीर्ष वित्तीय सिंडिकेट के सूत्रधार और पुतिन के करीबी घेरे को समर्थन देने वाले व्यक्ति के रूप में सूचीबद्ध किया था। फ्रिडमैन यूक्रेन में चल रहे युद्ध के लिए पुतिन की सार्वजनिक तौर पर सीधी निंदा करने से हमेशा बचते रहे हैं। वह अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों को मुक्त कराने के लिए यूरोपीय अदालत में लक्ज़मबर्ग के खिलाफ कानूनी मुकदमा भी लड़ रहे हैं, जिससे सदस्य देश पर विधिक दबाव बना हुआ था।\n\nलातविया का शुरुआती विरोध और कूटनीतिक समझौता\nइस पूरे प्रस्ताव पर यूरोपीय संघ के राजदूतों के बीच शुरुआत में सहमति नहीं बन पाई थी। सोमवार को हुए मतदान में लातविया ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल किया था। लातविया के कड़े रुख का एक बड़ा कारण फ्रिडमैन के कारोबारी सहयोगी प्योत्र एवेन से भी जुड़ा माना जाता है। रूसी-लातवियाई नागरिकता रखने वाले एवेन से वर्ष 2022 में लातविया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान वापस छीन लिया गया था, क्योंकि उन्होंने यूक्रेन पर सैन्य हमले की निंदा करने से साफ इनकार कर दिया था।\n\nलेकिन मंगलवार को कूटनीतिक वार्ताओं के बाद लातविया ने अपना रुख बदला और वीटो की जगह मतदान में अनुपस्थित रहने का विकल्प चुना। इस समझौते के तहत लातविया ने अपनी राष्ट्रीय चिंताओं के समाधान के बदले में बड़े रियायतें हासिल कीं। समझौते के अनुसार, यूरोपीय संघ की प्रतिबंध सूची में शामिल लगभग 3,000 अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं पर पाबंदियों की अवधि को एक झटके में तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया। इनमें से करीब 2,600 शेष व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए यह बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब तक इन प्रतिबंधों को जारी रखने के लिए सदस्य देशों को हर छह महीने में दोबारा मतदान करना पड़ता था, जिससे बार-बार कूटनीतिक खींचतान की स्थिति पैदा होती थी।\n\nसुरक्षा गारंटी और यूक्रेन की तीखी प्रतिक्रिया\nलातविया के प्रधानमंत्री आंद्रिस कुलबर्ग्स ने घोषणा की कि फ्रांस एक फ्रांसीसी परमाणु निरोधक पहल में लातविया को शामिल करने के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करने पर सहमत हो गया है। इसके साथ ही फ्रांस लातविया की सीमाओं पर अपनी सैन्य उपस्थिति को और अधिक मजबूत करने के लिए भी तैयार हुआ है। इस द्विपक्षीय सुरक्षा आश्वासन के बाद ही लातविया ने यूरोपीय संघ के स्तर पर दोनों अरबपतियों के नाम हटाने का रास्ता साफ किया।\n\nयूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने इस घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि मॉस्को इस समय खुशी मना रहा है क्योंकि उसे वह मिल गया जो वह चाहता था, जिसमें सजा से बचने का अहसास, यूरोपीय संघ का अपमान और यूरोपीय देशों के बीच दरार शामिल है। सिबिहा ने यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों से अपील की कि वे सामूहिक स्तर पर नाम हटने के बावजूद अपने-अपने राष्ट्रीय स्तर पर इन दोनों उद्योगपतियों पर अलग से कड़े प्रतिबंध लगाने की घोषणा करें। लातविया ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने देश में इन दोनों व्यक्तियों पर राष्ट्रीय स्तर पर पाबंदियां लागू करेगा।\n\nक्रेमलिन का स्वागत और कानूनी तर्क\nरूसी सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने दोनों प्रमुख कारोबारियों को प्रतिबंधों की सूची से बाहर किए जाने की संभावना का स्वागत किया। क्रेमलिन की तरफ से बार-बार यह दोहराया गया कि यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए सभी प्रतिबंध पूरी तरह से गैर-कानूनी और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। पेसकोव ने यह भी दावा किया कि केवल दो व्यक्तियों को ही नहीं, बल्कि इस अन्यायपूर्ण सूची से सभी रूसी नागरिकों और संस्थाओं के नाम तत्काल हटाए जाने चाहिए। इस घटनाक्रम ने युद्ध के तीसरे साल में यूरोपीय संघ की एकता और प्रतिबंधों की वास्तविक प्रभावशीलता को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।\n\nइसका आप पर असर\nयूरोपीय संघ द्वारा प्रतिबंधों में छूट देने से वैश्विक कूटनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के अनुपालन तंत्र पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• भारत में: नई दिल्ली के लिए पश्चिमी प्रतिबंधों में आने वाले किसी भी ढील से रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार और वित्तीय लेन-देन के जोखिम कम होंगे। भारतीय आयातकों और वित्तीय संस्थानों को प्रतिबंधों के संभावित विखंडन पर नजर रखनी होगी ताकि वे अनुपालन संबंधी विवादों से बच सकें।\n• वैश्विक वित्तीय क्षेत्र: अंतरराष्ट्रीय बैंकों और कॉर्पोरेट घरानों को अपने अनुपालन सॉफ्टवेयर और प्रतिबंध जांच प्रक्रियाओं को तुरंत अपडेट करना होगा। कई देशों द्वारा अलग से राष्ट्रीय पाबंदियां लगाने की संभावना के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए कानूनी जटिलताएं बढ़ेंगी।\n• ऊर्जा व निवेश बाजार: ऊर्जा और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े इन दिग्गजों की कानूनी स्थिति साफ होने से कुछ परिसंपत्तियों का बाजार में पुनरागमन हो सकता है। निवेशक यूरोपीय संघ की नीतिगत स्थिरता और भविष्य के प्रतिबंध संशोधनों को लेकर अधिक सतर्क रहेंगे।\n• यूरोपीय सुरक्षा और कूटनीति: तीन साल के लिए बाकी प्रतिबंधों का विस्तार होने से व्यापारिक अनिश्चितता का छह महीने वाला चक्र समाप्त हो गया है। इससे यह साफ होता है कि अन्य लगभग 3,000 रूसी संस्थाओं पर लंबे समय तक पश्चिमी बाजार के दरवाजे बंद रहेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयूरोपीय संघ के इस कदम के पीछे सदस्य देशों के विशिष्ट राष्ट्रीय हित, चल रही कानूनी चुनौतियां और व्यापक रक्षा सौदेबाजी मुख्य कारक रहे हैं।\n\n• फ्रांस और लक्ज़मबर्ग का दबाव: फ्रांस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों और अजरबैजान के साथ कैदियों की संभावित अदला-बदली से जुड़ी कूटनीति के चलते उस्मानोव का नाम हटाने की मांग की। वहीं लक्ज़मबर्ग पर मिखाइल फ्रिडमैन द्वारा अपनी जब्त संपत्तियों की बहाली के लिए दायर किए गए कानूनी मुकदमे का सीधा दबाव था।\n• लातविया के साथ रक्षा समझौता: लातविया ने शुरुआत में इस प्रस्ताव को वीटो कर दिया था क्योंकि उसके अपने राष्ट्रीय हित रूस विरोधी कड़े रुख से बंधे थे। फ्रांस द्वारा परमाणु निरोधक वार्ता शुरू करने और सैन्य उपस्थिति बढ़ाने के वादे के बाद लातविया ने अपना वीटो वापस ले लिया।\n• प्रतिबंधों के नवीनीकरण का तनाव: यूरोपीय संघ को हर छह महीने में लगभग 3,000 लोगों पर लगे प्रतिबंधों को सर्वसम्मति से नवीनीकृत करना पड़ता था, जिससे बार-बार कूटनीतिक गतिरोध बनता था। इस समझौते ने दो नामों को हटाने के बदले बाकी सभी प्रतिबंधों को एकमुश्त तीन साल के लिए सुरक्षित कर दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यूरोपीय संघ ने किन दो उद्योगपतियों पर से प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया है?\nयूरोपीय संघ ने रूसी-उज्बेक मूल के उद्योगपति अलिशर उस्मानोव और रूसी-इजरायली कारोबारी मिखाइल फ्रिडमैन पर से प्रतिबंध हटाने की दिशा में कदम उठाया है।\n\n2. यूक्रेन ने इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी है?\nयूक्रेन ने इस कदम को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि यह मॉस्को को दण्डमुक्ति का अहसास कराता है और यूरोपीय एकता में दरार डालता है।\n\n3. फ्रांस और लक्ज़मबर्ग ने इन दोनों नामों को हटाने की मांग क्यों की थी?\nफ्रांस ने राष्ट्रीय सुरक्षा और अजरबैजान से जुड़े कैदी रिहाई समझौते का हवाला दिया, जबकि लक्ज़मबर्ग फ्रिडमैन द्वारा संपत्तियों के लिए किए गए मुकदमे का सामना कर रहा था।\n\n4. लातविया ने इस प्रस्ताव पर अपना वीटो क्यों वापस लिया?\nलातविया ने फ्रांस से अपनी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सैन्य मौजूदगी और फ्रांसीसी परमाणु निरोधक वार्ता में शामिल होने का आश्वासन मिलने के बाद वीटो वापस लिया।\n\n5. इस कूटनीतिक समझौते के तहत बाकी रूसी नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?\nसमझौते के तहत सूची में शामिल करीब 3,000 अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं पर पाबंदियों को 6 महीने की बजाय एकमुश्त तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया है।\n\n6. क्रेमलिन ने इस फैसले पर क्या रुख अपनाया है?\nक्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इस कदम का स्वागत किया और सभी यूरोपीय प्रतिबंधों को अवैध बताते हुए सभी रूसी नागरिकों को सूची से हटाने की मांग की।",
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  "category": "यूरोप",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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    "रूस यूक्रेन युद्ध",
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