यूरोविज़न 2027 से पीछे हटा नीदरलैंड, इज़राइल की मौजूदगी पर उपजे मतभेदों के बाद उठाया कदम डच ब्रॉडकास्टर एनपीओ ने इज़राइल की भागीदारी से जुड़े सामाजिक मतभेदों को देखते हुए यूरोविज़न सॉन्ग कॉन्टेस्ट 2027 में हिस्सा न लेने का फैसला किया है। डच सार्वजनिक प्रसारक एनपीओ ने आगामी यूरोविज़न सॉन्ग कॉन्टेस्ट 2027 से बाहर रहने का ऐलान करते हुए अपने पुराने रुख को बदल दिया है। प्रसारण संगठन के अनुसार, प्रतियोगिता के मंच पर इज़राइल की निरंतर मौजूदगी से समाज के भीतर गहरी बहस और मतभेद पैदा हो रहे हैं। इसी संवेदनशील माहौल को आधार बनाते हुए नीदरलैंड ने प्रतियोगिता में भाग न लेने की पुष्टि की है। प्रसारक के भीतर विचार-विमर्श और फैसला डच नेटवर्क एवरोट्रोस के प्रतियोगिता से हटने के बाद, इस साल आयोजित मुख्य कार्यक्रम का नीदरलैंड समेत कुल पाँच मुल्कों ने बहिष्कार किया था। इस पृष्ठभूमि के बाद नए सत्र में भागीदारी की संभावनाओं को टटोलने के लिए व्यापक चर्चाएँ शुरू की गई थीं। एनपीओ के मीडिया निदेशक जुर्रे बॉसमैन ने स्पष्ट किया कि समाज में इज़राइल की मौजूदगी से विविध प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं, जिससे टकराव की स्थिति बन रही है। इसी के चलते संगठन ने 2027 के आयोजन से पूरी तरह अलग रहने का निर्णय लिया। एनपीओ की अध्यक्ष जेट डे रानित्ज़ ने बताया कि विभिन्न प्रसारकों के साथ आगामी प्रतियोगिता में शामिल होने को लेकर गहन बातचीत की गई थी। शुरुआत में ऐसा महसूस हुआ था कि मंच पर लौटने के लिए पर्याप्त समर्थन मौजूद है, मगर बाद में कोई उपयुक्त रूपरेखा तैयार नहीं हो सकी। उन्होंने कहा, "परिस्थितियों से जुड़े संवेदनशील विषयों को देखते हुए, हमने फिलहाल के लिए एक कदम पीछे हटने का फैसला किया है।" प्रसारक ने यह भी माना कि इस फैसले से स्थानीय प्रशंसकों को निराशा हो सकती है, हालांकि कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देश भर में हमेशा की तरह जारी रखा जाएगा। आयोजकों का रुख और एकता का संदेश प्रतियोगिता प्रबंधन ने डच प्रसारक के इस निर्णय पर खेद व्यक्त किया है। यूरोविज़न सॉन्ग कॉन्टेस्ट के निदेशक मार्टिन ग्रीन ने कहा, "हम उनके निर्णय को समझते हैं, और इसके पीछे की जनभावनाओं का सम्मान करते हैं।" उन्होंने आगे रेखांकित किया कि संगीत प्रतियोगिता को लेकर विभिन्न देशों के अंदर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण मौजूद हैं, और आयोजक किसी भी विचार को खारिज नहीं करते हैं। आयोजन समिति का मानना है कि मतभेदों से भरी दुनिया में इस तरह के सांस्कृतिक मंच का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह यूरोप और अन्य क्षेत्रों के लोगों को संगीत, रचनात्मकता व साझे अनुभवों के जरिए एक साथ लाता है। मार्टिन ग्रीन ने उम्मीद जताई कि जब भी नीदरलैंड को समय अनुकूल लगेगा, उसका प्रतियोगिता में दोबारा स्वागत किया जाएगा। यूरोप भर में बढ़ता बहिष्कार और नए नियम गाज़ा और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य अभियानों की तीखी आलोचना के बीच वर्ष 2026 की प्रतियोगिता का व्यापक विरोध हुआ था। उस समय नीदरलैंड, आइसलैंड, स्पेन, आयरलैंड और स्लोवेनिया ने इज़राइल की मौजूदगी के विरोध में आयोजन का साझा बहिष्कार किया था। इन गंभीर मतभेदों को सुलझाने के लिए आयोजकों ने नियमों में कई फेरबदल किए हैं। नए प्रावधानों के तहत किसी भी सशस्त्र संघर्ष में लिप्त देश को प्रतियोगिता की मेजबानी से बाहर रखने का नियम जोड़ा गया है, साथ ही मतदान प्रणाली में भी संशोधन किए गए हैं। इन सुधारात्मक कदमों के बावजूद असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा है। वर्ष 2027 के लिए नीदरलैंड के अलावा आयरलैंड ने भी अलग रहने की घोषणा कर दी है, जबकि स्पेन के सरकारी प्रसारक के प्रमुख ने भी खुलकर बहिष्कार के पक्ष में समर्थन जताया है। दूसरी ओर, चेक गणराज्य के सार्वजनिक प्रसारक ने भी आगामी प्रतियोगिता से खुद को अलग कर लिया है, हालांकि उसने इसके पीछे बजट में की गई कटौतियों को मुख्य वजह बताया है। आगामी यूरोविज़न 2027 का आयोजन बुल्गारिया के शहर बर्गास में 15 मई को निर्धारित है। विएना में आयोजित पिछले मुकाबले में दारा ने अपने चर्चित डांस ट्रैक बंगारंगा के दम पर जीत दर्ज कर अपने देश को मेजबानी का हक दिलाया था। इसके बावजूद, भू-राजनीतिक तनावों और प्रसारकों के कड़े रुख ने इस सांस्कृतिक उत्सव के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय विमर्श छेड़ दिया है। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय संगीत उत्सवों से जुड़े कूटनीतिक बहिष्कार सांस्कृतिक जगत और दर्शकों पर सीधा असर डालते हैं। • दर्शकों के लिए: डच दर्शक इस बार अपने राष्ट्रीय कलाकार को मुख्य मंच पर प्रदर्शन करते नहीं देख पाएंगे। हालांकि सार्वजनिक प्रसारक एनपीओ इस संगीत कार्यक्रम का सीधा प्रसारण टीवी पर जारी रखेगा ताकि प्रशंसक शो से जुड़े रह सकें। • कलाकारों के लिए: नीदरलैंड के उभरते संगीतकारों के लिए यूरोप के सबसे बड़े मंच पर अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर छिन गया है। कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल करने के लिए अब वैकल्पिक वैश्विक कार्यक्रमों का रुख करना पड़ेगा। • आयोजकों के लिए: कई प्रमुख यूरोपीय देशों के लगातार हटने से यूरोविज़न की साख और दर्शक संख्या पर विपरीत असर पड़ सकता है। आयोजकों पर भविष्य में राजनीतिक तटस्थता और नियमों को और अधिक कड़ा करने का दबाव बढ़ेगा। • वैश्विक मंच पर: गाज़ा और पश्चिम एशिया के मुद्दों पर कला और कूटनीति का टकराव अब सार्वजनिक संस्थानों के निर्णयों में स्पष्ट दिखाई देने लगा है। अन्य देश भी अपने घरेलू जनमत के दबाव में आकर भविष्य में ऐसे बहिष्कार का रास्ता चुन सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ डच सार्वजनिक प्रसारक एनपीओ ने समाज में बढ़ते ध्रुवीकरण और इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों के चलते यह कड़ा फैसला लिया है। • सीधा कारण: इज़राइल की भागीदारी को लेकर डच समाज में लगातार तीखी बहसें और विभाजनकारी माहौल देखा जा रहा था। प्रसारक को लगा कि मौजूदा तनावपूर्ण हालात में एक संयुक्त और उपयुक्त भागीदारी प्रारूप तैयार करना संभव नहीं है। • पूर्व पृष्ठभूमि: गाज़ा और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य कार्रवाइयों के विरोध में वर्ष 2026 में भी नीदरलैंड, आइसलैंड, स्पेन, आयरलैंड और स्लोवेनिया ने प्रतियोगिता का बहिष्कार किया था। डच नेटवर्क एवरोट्रोस के हटने के बाद से ही देश में विरोध की जमीन तैयार हो चुकी थी। • नियमों में बदलाव बेअसर: आयोजकों ने युद्ध में शामिल देशों को मेजबानी से रोकने और वोटिंग में बदलाव जैसे कदम उठाए, लेकिन ये असंतुष्ट प्रसारकों को मनाने में नाकाफी साबित हुए। नतीजतन आयरलैंड ने भी हटने का फैसला किया और स्पेन में भी विरोध की मांग तेज हो गई। सवाल-जवाब 1. नीदरलैंड ने यूरोविज़न 2027 से बाहर होने का फैसला क्यों किया? सार्वजनिक प्रसारक एनपीओ के अनुसार इज़राइल की भागीदारी से समाज में मतभेद और तीखी बहसें पैदा हो रही थीं, जिसके चलते यह कदम उठाया गया। 2. क्या डच नागरिक यूरोविज़न 2027 का प्रसारण देख सकेंगे? हाँ, नीदरलैंड की टीम भले ही भाग नहीं ले रही है, लेकिन प्रसारक एनपीओ इसका सीधा प्रसारण टीवी पर जारी रखेगा। 3. यूरोविज़न 2027 का आयोजन कहाँ और कब होगा? यह संगीत प्रतियोगिता 15 मई को बुल्गारिया के बर्गास शहर में आयोजित की जाएगी। 4. क्या अन्य देशों ने भी इस प्रतियोगिता से हटने का निर्णय लिया है? हाँ, आयरलैंड ने भी 2027 से हटने की घोषणा की है, जबकि चेक गणराज्य ने बजट कटौतियों के कारण अपना नाम वापस लिया है। 5. वर्ष 2026 में किन देशों ने यूरोविज़न का बहिष्कार किया था? इज़राइल की भागीदारी के विरोध में नीदरलैंड, आइसलैंड, स्पेन, आयरलैंड और स्लोवेनिया ने 2026 की प्रतियोगिता का बहिष्कार किया था। 6. इस साल विएना में आयोजित यूरोविज़न मुकाबला किसने जीता था? दारा ने अपने डांस ट्रैक बंगारंगा की प्रस्तुति के साथ विएना में जीत हासिल की थी। https://trendkia.com/europe/eurovision-2027-se-pichhe-hata-netherlands-israel-ki-maujudagi-para-upaje-matabhedon-ke-bada-uthaya-kadama-52503 TrendKia — Har trend, sabse pehle.