फ्रांस के मार्सिले में बड़े पैमाने पर लूटपाट और हिंसा के बाद सुरक्षा कड़ी, 500 से अधिक दुकानें क्षतिग्रस्त फ्रांस के दूसरे सबसे बड़े शहर मार्सिले में छात्र प्रदर्शनों के हिंसक रूप लेने के बाद 500 से अधिक दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट हुई, जिसमें 118 पुलिसकर्मी घायल हुए और 101 गिरफ्तारियां की गईं। फ्रांस के प्रमुख तटीय शहर मार्सिले में सप्ताहांत के दौरान भड़की व्यापक अशांति के बाद सड़कों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। छात्र विरोध प्रदर्शनों के अचानक हिंसक उपद्रव में तब्दील हो जाने के कारण शहर भर में भारी तबाही देखने को मिली। तूफानी मौसम और तेज गड़गड़ाहट के बीच व्यापारी टूटे हुए शीशों और क्षतिग्रस्त शटरों को ठीक करने में जुटे रहे। स्थानीय व्यापारिक प्रतिनिधियों के अनुसार, पूरे शहर में 500 से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, जिनमें से अधिकांश दुकानों में लूटपाट की गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने सोमवार को आठ घंटे के लिए सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रदर्शनों और सभाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, जबकि नाबालिगों के लिए रात का कर्फ्यू लागू करने की योजना तैयार की गई है। छात्र आंदोलन से बड़े पैमाने पर उपद्रव तक का सफर मार्सिले में हालिया अशांति की शुरुआत सितंबर महीने में स्कूलों की बदहाल व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों से हुई थी। समय बीतने के साथ यह आंदोलन केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें रहन-सहन के बढ़ते खर्च और व्यापक आर्थिक कठिनाइयों के मुद्दे भी जुड़ते चले गए। शनिवार को आयोजित छात्र मार्च में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए थे, लेकिन जैसे ही मार्च आगे बढ़ा, भीड़ में शामिल कुछ तत्वों ने दुकानों और व्यापारिक ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए। देखते ही देखते शांतिपूर्ण रैली अराजकता में बदल गई और व्यावसायिक केंद्रों में तोड़फोड़ शुरू हो गई। ग्रामीण इलाके से कुछ सप्ताह पहले ही मार्सिले आई 18 वर्षीय छात्रा मरियम ने बताया कि यह किसी बड़े शहर में रहने और किसी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने का उनका पहला अनुभव था। उनके अनुसार, शुरुआत में छात्रों के बीच दिखा एकजुटता का भाव बेहद सकारात्मक था, लेकिन अचानक शुरू हुई लूटपाट और हिंसा ने माहौल को बेहद डरावना बना दिया। उन्होंने इस बात पर भी विचार व्यक्त किया कि क्या अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए हिंसा का सहारा लेना जायज है। उनके अनुसार, फ्रांसीसी इतिहास हमेशा से क्रांतियों से जुड़ा रहा है और कभी-कभी समाज में बड़ा असर डालने के लिए ऐसे कदम उठाए जाते हैं, हालांकि हिंसा का यह रूप बेहद चिंताजनक था। पुलिस बल पर भारी दबाव और हथियारों की कमी सप्ताहांत में फैली इस हिंसा ने कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को भी स्तब्ध कर दिया। यूएन1टीई (UN1TE) पुलिस यूनियन के प्रतिनिधि अरनॉड ब्लेस ने बताया कि उस दिन स्थिति बिल्कुल युद्ध जैसी बन गई थी और इतनी भीषण हिंसा पहले कभी नहीं देखी गई थी। पूरे देश में घायल हुए पुलिसकर्मियों की कुल संख्या का दसवां हिस्सा अकेले मार्सिले से सामने आया, जहां 118 अधिकारी जख्मी हुए। शहर में अब तक 101 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से लगभग एक-चौथाई नाबालिग बच्चे हैं। अरनॉड ब्लेस ने स्थिति का विवरण देते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों पर चारों तरफ से दबाव बनाया गया, जिससे उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने 4,000 आंसू गैस के गोले दागे, लेकिन अंततः उनके पास गोला-बारूद खत्म हो गया। ऐसी असाधारण स्थिति में सुरक्षा बलों के पास पीछे हटने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। ब्लेस ने उन आरोपों को खारिज किया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण छात्रों पर सख्ती दिखाई और उपद्रवियों को छूट दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों की तुलना में कहीं अधिक संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि बल को सीधे तौर पर हिंसक तत्वों का सामना करना पड़ा। व्यावसायिक केंद्रों में तोड़फोड़ और लूटपाट का दायरा हिंसा का असर शहर के सबसे प्रतिष्ठित और व्यस्त इलाकों पर सबसे ज्यादा पड़ा। शहर के मध्य में स्थित ला कानेबिएरे, जिसे पेरिस के शांस-एलिजे के समकक्ष माना जाता है, वहां कई दुकानों के शीशे तोड़ दिए गए। इसके अलावा रुए पारादी और सेंटर बोर्स शॉपिंग सेंटर में भी भारी तोड़फोड़ की गई। उपद्रव केवल शहर के केंद्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तरी इलाकों में स्थित ग्रांड लिटोरल और ले मेरलन जैसे बड़े शॉपिंग मॉल भी हिंसक भीड़ के निशाने पर आ गए। पुलिस यूनियन के प्रतिनिधि ने चिंता जताई कि अगर भविष्य में भी ऐसे ही प्रदर्शन हुए, तो वंचित उत्तरी उपनगरों के युवा फिर से हिंसा का फायदा उठाकर लूटपाट कर सकते हैं। ब्लेस का मानना है कि इस अराजकता को दूर-वामपंथी आंदोलनकारियों, जिन्हें फ्रांस में 'ब्लैक ब्लॉक' कहा जाता है, द्वारा भड़काया गया था। उनके अनुसार, ब्लैक ब्लॉक तत्वों ने अशांति पैदा की और स्थानीय युवाओं ने उस अफरा-तफरी का लाभ उठाकर दुकानों में घुसकर सामान लूटना शुरू कर दिया, जिससे पुलिस चारों तरफ भागने पर मजबूर हो गई और पूरी व्यवस्था चरमरा गई। स्थानीय प्रशासन और सरकार की रणनीति पर सवाल मार्सिले के ऐतिहासिक सिटी हॉल की इमारत पर भी शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए कब्जा कर लिया था। इस गंभीर घटनाक्रम के बाद फ्रांस के आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज स्थिति की समीक्षा के लिए सोमवार शाम मार्सिले पहुंचे। गौरतलब है कि दंगों के बाद नुनेज ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी, जिसे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अस्वीकार कर दिया था। सिटी हॉल में उन्होंने मार्सिले के सोशलिस्ट मेयर बेनोइट पायन से मुलाकात की। मेयर बेनोइट पायन ने केंद्र सरकार से इस बात का जवाब मांगा कि इतने बड़े पैमाने पर अराजकता कैसे फैलने दी गई। पायन ने कहा कि शुरू से लेकर आखिर तक यह पूरी कार्रवाई एक बड़ी नाकामी साबित हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस बल में कर्मियों की भारी कमी है और उनकी तैनाती की रणनीति भी त्रुटिपूर्ण रही, जिसे तुरंत बदलने की आवश्यकता है। पायन ने आगाह किया कि यदि दृष्टिकोण में आमूलचूल परिवर्तन नहीं किया गया और ध्यान केवल हाई स्कूल के छात्रों पर केंद्रित रखा गया, तो लूटपाट की ऐसी घटनाएं दोबारा देखने को मिलेंगी। उन्होंने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि मार्सिले में अब शायद ही कुछ लूटने के लिए बचा हो, लेकिन जो थोड़ा-बहुत बाकी है, उसे भी निशाना बना लिया जाएगा। सामाजिक तनाव और भविष्य की चुनौतियां एक क्षतिग्रस्त ट्राम स्टॉप के पास खड़ी 79 वर्षीय बुजुर्ग शांताल बेलेंजर ने शहर की वर्तमान स्थिति पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फ्रांस कई बुनियादी व्यवस्थाओं पर अपना नियंत्रण खोता जा रहा है। सार्वजनिक सेवाएं, अस्पताल और शिक्षा प्रणाली अत्यंत दयनीय स्थिति में पहुंच चुकी हैं, जबकि दूरदराज के इलाके जर्जर और पूरी तरह उपेक्षित हो चुके हैं। शांताल बेलेंजर, जो पूर्व में इन उपेक्षित उत्तरी उपनगरों में काम कर चुकी हैं, ने बताया कि अत्यधिक गरीबी और उच्च अपराध दर के कारण युवा पीढ़ी गुस्से और हताशा में अपराध की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसे रास्ते पर चलते देखना बेहद पीड़ादायक है जो उन्हें मुख्यधारा के समाज से पूरी तरह बाहर कर देता है। हालांकि मार्सिले में आठ घंटे के सार्वजनिक जमावड़े पर प्रतिबंध और अन्य फ्रांसीसी शहरों में रात के आंशिक कर्फ्यू के कारण सोमवार को कुछ शांति रही, लेकिन आगामी सप्ताहांत के लिए नए प्रदर्शनों की योजना बनाई जा चुकी है, जिससे शहर में तनाव का माहौल बना हुआ है। इसका आप पर असर मार्सिले में बड़े पैमाने पर हुई तोड़फोड़ और लूटपाट के कारण आम नागरिकों, व्यापारियों और यात्रियों के दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ा है। • दुकानदारों और व्यापारियों के लिए: शहर में 500 से अधिक दुकानें और व्यावसायिक परिसर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। व्यापारियों को टूटे हुए प्रतिष्ठानों की मरम्मत और बीमा दावों के निपटारे में लंबा समय लग सकता है। • यात्रियों और पर्यटकों के लिए: बंदरगाह क्षेत्र और प्रमुख बाजारों में सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध और भारी पुलिस गश्त के कारण आवाजाही प्रभावित हुई है। आगामी सप्ताहांत में नए प्रदर्शनों की योजना के चलते यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। • स्थानीय परिवारों और युवाओं के लिए: मंगलवार से शहर के कुछ हिस्सों में नाबालिगों के लिए रात का कर्फ्यू लागू करने की घोषणा की गई है। इसके चलते रात के समय 18 वर्ष से कम उम्र के युवाओं की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। • सार्वजनिक परिवहन और सुविधाओं के लिए: ट्राम स्टॉप और सार्वजनिक संपत्तियों में तोड़फोड़ के कारण दैनिक आवागमन में बाधा आ रही है। सुरक्षा कारणों से परिवहन सेवाओं के मार्ग और समय में अचानक बदलाव किए जा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ मार्सिले में व्यापक हिंसा और लूटपाट की घटना लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक असंतोष और कमजोर प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है। • विरोध का विस्तार: यह आंदोलन सितंबर में स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर शुरू हुए छात्र प्रदर्शनों से निकला था। बाद में इसमें बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के बढ़ते खर्च जैसे व्यापक मुद्दे शामिल हो गए, जिससे असंतोष उग्र हो गया। • भीड़ का फायदा उठाकर लूटपाट: शांतिपूर्ण छात्र मार्च के दौरान दूर-वामपंथी ब्लैक ब्लॉक तत्वों और उपनगरों के युवाओं ने व्यवस्था की अफरा-तफरी का लाभ उठाया। इसके परिणामस्वरूप संगठित तरीके से व्यापारिक केंद्रों और मॉल को निशाना बनाया गया। • संसाधनों और रणनीति की कमी: पुलिस बल के पास पर्याप्त संख्याबल की कमी थी और 4,000 आंसू गैस के गोले दागने के बाद उनका गोला-बारूद समाप्त हो गया। रणनीति की खामियों और गोला-बारूद की कमी के चलते पुलिस को पीछे हटना पड़ा, जिससे उपद्रवियों को लूटपाट का अवसर मिल गया। • गहरा सामाजिक अलगाव: उत्तरी उपनगरों में लंबे समय से गरीबी, बेरोजगारी और शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली ने युवाओं में गहरा आक्रोश भर दिया है। उचित मार्गदर्शन के अभाव में यह निराशा सड़कों पर हिंसक रूप में सामने आई। सवाल-जवाब 1. मार्सिले में हालिया हिंसा के दौरान कितनी दुकानों को नुकसान पहुंचा है? स्थानीय व्यापारिक प्रतिनिधियों के अनुसार, शहर में 500 से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाया गया, जिनमें से अधिकांश में लूटपाट की गई। 2. इस उपद्रव में कितने पुलिसकर्मी घायल हुए और कितनी गिरफ्तारियां हुईं? सप्ताहांत की हिंसा में 118 पुलिस अधिकारी घायल हुए, जबकि 101 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से लगभग एक-चौथाई नाबालिग हैं। 3. मार्सिले में यह विरोध प्रदर्शन मूल रूप से किस मुद्दे पर शुरू हुआ था? यह विरोध प्रदर्शन सितंबर में स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ था, जो बाद में महंगाई और रहन-सहन की लागत जैसे व्यापक मुद्दों में बदल गया। 4. पुलिस बल को उपद्रव के दौरान पीछे क्यों हटना पड़ा? पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 4,000 आंसू गैस के गोले दागे, लेकिन अंततः गोला-बारूद समाप्त हो जाने के कारण उन्हें पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। 5. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने क्या तत्काल कदम उठाए हैं? प्रशासन ने आठ घंटे के लिए सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगाया और मंगलवार से शहर के कुछ इलाकों में नाबालिगों के लिए रात का कर्फ्यू लागू करने की योजना बनाई है। 6. मार्सिले के मेयर बेनोइट पायन ने पुलिस की रणनीति पर क्या टिप्पणी की? मेयर पायन ने सरकार की कार्रवाई को शुरू से अंत तक पूरी तरह विफल बताया और कहा कि अगर रणनीति में बदलाव नहीं हुआ तो लूटपाट दोबारा हो सकती है। https://trendkia.com/europe/france-ke-marseille-men-bare-paimane-para-lutapata-aura-hinsa-ke-bada-suraksha-kari-500-se-adhika-dukanen-kshatigrasta-49859 TrendKia — Har trend, sabse pehle.