# फ्रांस में महंगाई और शिक्षा व्यवस्था पर भड़का जनआक्रोश, आगजनी और लूटपाट के बीच सैकड़ों लोग गिरफ्तार

> फ्रांस में जीवन यापन की बढ़ती लागत और स्कूलों की बदहाली के खिलाफ शनिवार को सड़कों पर उतरे 5,50,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों के बीच भड़की व्यापक हिंसा के बाद कम से कम 400 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

**Type:** article · **Category:** यूरोप · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/europe/france-men-mahngai-aura-shiksha-vyavastha-para-bharaka-janaakrosha-agajani-aura-lutapata-ke-bicha-saikaron-loga-giraphtara-48880 · **Language:** Hindi
**Tags:** फ्रांस विरोध प्रदर्शन, पेरिस हिंसा, इमैनुएल मैक्रों, महंगाई विरोध, मरीन ले पेन, लीमोज टाउन हॉल आग

फ्रांस में जीवन यापन की भारी लागत और बदहाल शिक्षा प्रणाली के खिलाफ शनिवार को आयोजित राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के दौरान कई बड़े शहरों में भयंकर अशांति और हिंसक झड़पें देखने को मिलीं। देश की सड़कों पर उतरे करीब 5,50,000 आंदोलनकारियों के बीच उपद्रवियों ने कई प्रशासनिक भवनों और दुकानों को निशाना बनाया। अधिकारियों ने इन हिंसक घटनाओं को कानून व्यवस्था की स्थिति का गंभीर रूप से बिगड़ना करार दिया है, जिसके चलते कम से कम 400 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया। वहीं सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें से दो पुलिसकर्मियों को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।

## राजधानी पेरिस में आंसू गैस, वॉटर कैनन और लाठीचार्ज
राजधानी पेरिस में दोपहर के समय शुरू हुआ मुख्य मार्च शुरुआती घंटों में शांतिपूर्ण नजर आ रहा था। आंदोलन में शामिल युवा प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से मौजूदा नीतियों में बदलाव चाहते हैं क्योंकि लंबे समय से व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। हालांकि, दिन ढलते ही हालात तेजी से बिगड़ने लगे। उपद्रवियों ने शहर के मुख्य चौराहों और सड़कों पर आग लगाना शुरू कर दिया, वाहनों को आग के हवाले किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। ऐतिहासिक प्लास दे ला रिपब्लिक जैसे प्रमुख स्थानों पर खड़ी गाड़ियों को फूंका गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दंगा रोधी पुलिस को तुरंत तैनात किया गया, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे, वॉटर कैनन चलाई और लाठीचार्ज किया। राजधानी में कई कपड़ों और खाने-पीने की दुकानों में तोड़फोड़ कर लूटपाट की गई, जबकि एक रेस्तरां पूरी तरह जलकर खाक हो गया।

## प्रशासनिक इमारतों को आग के हवाले किया, ऐतिहासिक धरोहरों को भारी क्षति
अराजकता केवल राजधानी तक सीमित नहीं रही, बल्कि फ्रांस के कई अन्य हिस्सों में ऐतिहासिक और प्रशासनिक भवनों को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया। लीमोज शहर के टाउन हॉल में उपद्रवियों द्वारा लगाई गई भीषण आग से इमारत की छत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। स्थानीय प्रशासन के अनुसार इस आगजनी में ऐतिहासिक टाउन हॉल का ढांचा लगभग नष्ट हो गया है। इसी तरह ल्योन शहर के प्रसिद्ध स्थानीय पर्यटन कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया। ल्योन के मेयर ग्रेगरी डूसे ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि यह शहर के लिए एक बहुत बड़ी त्रासदी है क्योंकि यह एक बेहद प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक इमारत थी। वहां स्थानीय पुलिस ने पुष्टि की कि उग्र तत्वों ने दमकल कर्मियों को मौके पर सुरक्षित तरीके से पहुंचकर आग बुझाने से जबरन रोका।

## सेंट-एतिएन में युवक का हाथ उड़ा, कई शहरों में दुकानों में डाका
दक्षिण-पूर्वी शहर सेंट-एतिएन में हालात उस समय बेहद दर्दनाक हो गए जब एक ग्रेनेड फटने से एक युवक का हाथ कटकर अलग हो गया। सेंट-एतिएन के मेयर रेजिस जुआनिको ने सोशल मीडिया पर इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि ऐसी दुखद घटना कभी नहीं होनी चाहिए थी। आंतरिक मंत्रालय ने पुष्टि की कि नकाबपोश और हुडी पहने तत्वों ने पेरिस के अलावा मार्सिले, रेनेस, तूलूज़ और आंजर्स में सुनियोजित हिंसक कृत्यों को अंजाम दिया। लिल शहर में एक एप्पल स्टोर का शीशा तोड़कर वहां मौजूद सामान लूट लिया गया। इसके अलावा ग्रेनोबल, अवीन्यों, पो, मोंटपेलियर और वालेंस शहरों में भी कई सरकारी और वाणिज्यिक इमारतों में भारी तोड़फोड़ की गई। ग्रेनोबल की एक संकरी सड़क पर नकाबपोशों द्वारा एक पर्यटक ट्रेन को कम से कम तीन दंगा रोधी पुलिसकर्मियों की तरफ भगाने का खतरनाक दृश्य भी सामने आया।

## स्कूलों के संकट से शुरू हुआ आंदोलन, येलो वेस्ट और यूनियनों का मिला साथ
मौजूदा बड़े विरोध प्रदर्शन की जड़ें हाल के हफ्तों में फ्रांस के माध्यमिक विद्यालयों यानी 15 से 18 वर्ष के छात्रों के लीसे स्कूलों में शुरू हुए छात्र आंदोलन से जुड़ी हैं। शिक्षक और कर्मचारियों की भारी कमी तथा जर्जर बुनियादी ढांचे के खिलाफ लाखों छात्र हफ्तों से आंदोलन कर रहे थे। शनिवार को इस आंदोलन में ट्रेड यूनियनों और अन्य सामाजिक गुटों के जुड़ने से प्रदर्शनकारियों की तादाद बहुत ज्यादा बढ़ गई। इनमें वर्ष 2018 से जीवन यापन की महंगाई के खिलाफ एक साल से अधिक समय तक लंबा आंदोलन चलाने वाले प्रसिद्ध येलो वेस्ट यानी 'जिले जाउन' गुट के सदस्य भी शामिल हुए, जो फ्रांसीसी इतिहास के सबसे लंबे आंदोलनों में से एक रहा है। शिक्षा मंत्री एडुआर्ड जेफ्रे ने 8 अक्टूबर को एक टेलीविजन साक्षात्कार में 3,000 अतिरिक्त वैकल्पिक शिक्षकों की भर्ती का वादा करके आंदोलन शांत करने का प्रयास किया था, लेकिन इसके बावजूद जनता का असंतोष थमने के बजाय और भड़क गया।

## गहरे राजनीतिक तनाव और भावी राष्ट्रपति चुनाव की गूंज
यह व्यापक जनआक्रोश ऐसे नाजुक समय में सामने आया है जब फ्रांस राजनीतिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अगले साल अपना पद छोड़ेंगे और चुनावी सर्वेक्षणों के अनुसार आगामी अप्रैल के राष्ट्रपति चुनाव में धुर दक्षिणपंथी नेशनल रैली की नेता मरीन ले पेन और कट्टर वामपंथी ला फ्रांस इंसौमीस पार्टी के ज्यां-लुक मेलेंशों के बीच कड़ा मुकाबला होने के आसार हैं। ज्यां-लुक मेलेंशों ने इन प्रदर्शनों में भाग लिया और बाद में आगजनी तथा लूटपाट की निंदा करते हुए पुलिस पर प्रदर्शनकारियों पर बेकाबू बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने मेलेंशों के बयान को खतरनाक और स्वार्थी बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पुलिस ने अत्यधिक तीव्रता की हिंसा का सामना किया है और कुछ समूह इन विरोध प्रदर्शनों का उपयोग आगामी राष्ट्रपति चुनावों के लिए वॉर्म-अप के तौर पर कर रहे हैं। वहीं मरीन ले पेन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की वैध मांगों को धुर वामपंथियों ने बंधक बना लिया है और मेलेंशों हिंसा को हवा दे रहे हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि जिन लोगों ने तोड़फोड़ की है, प्रीफेक्चर और व्यवसायों पर हमले किए हैं तथा टाउन हॉल को लूटा है, उन पर मुकदमा चलाया जाएगा और उन्हें सजा दी जाएगी।

## इसका आप पर असर
फ्रांस में हो रहे इस व्यापक जनआंदोलन और हिंसक टकराव के कारण स्थानीय नागरिकों, यात्रियों और प्रवासी समुदाय के दैनिक जीवन और सुरक्षा पर सीधा असर पड़ा है।

- **नागरिक सुरक्षा और आपातकालीन सेवाएं:** बड़े शहरों के प्रमुख चौराहों पर आगजनी, आंसू गैस और तोड़फोड़ के कारण आम नागरिकों को भारी जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। पेरिस, लीमोज और ल्योन जैसे इलाकों में स्थानीय निवासियों को अनावश्यक यात्रा से बचने और आपातकालीन चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
- **यात्रा और सार्वजनिक परिवहन:** पेरिस, ल्योन और मार्सिले में सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो सेवाओं और सड़कों पर आवागमन गंभीर रूप से बाधित हुआ है। कई ऐतिहासिक स्थलों और पर्यटन केंद्रों के बंद होने से पर्यटकों को अपनी यात्रा योजनाएं रद्द या पुनर्निर्धारित करनी पड़ रही हैं।
- **व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और दुकानों को नुकसान:** कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक्स और खुदरा किराना दुकानों में तोड़फोड़ व लूटपाट से स्थानीय व्यापारियों को भारी आर्थिक झटका लगा है। सुरक्षा चिंताओं के कारण कई प्रमुख बाजारों और व्यापारिक केंद्रों को अस्थायी रूप से बंद रखा जा रहा है।
- **स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव:** माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी और जर्जर भवनों के खिलाफ छात्रों के सड़क पर उतरने से शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है। सरकार द्वारा 3,000 वैकल्पिक शिक्षकों की घोषणा के बावजूद शैक्षणिक व्यवस्था सामान्य होने में अभी समय लगेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
फ्रांस में इस व्यापक जनआक्रोश का मुख्य कारण माध्यमिक विद्यालयों में स्टाफ की भारी कमी, लचर बुनियादी ढांचा और लगातार बढ़ती महंगाई है। छात्रों और कर्मचारियों की पुरानी मांगों पर संतोषजनक समाधान न मिलने से जनाक्रोश भड़का, जिसे राजनीतिक दलों और पुराने आंदोलनकारियों का समर्थन मिलने से यह राष्ट्रव्यापी संकट में बदल गया।

- **शिक्षा प्रणाली की जर्जर स्थिति:** देश के 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के छात्रों वाले लीसे स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और जर्जर भवनों को लेकर छात्रों में हफ्तों से गहरा असंतोष था। शिक्षा मंत्री द्वारा 3,000 अतिरिक्त शिक्षकों के वादे के बावजूद छात्र इसे अपर्याप्त मानकर सड़कों पर डटे रहे।
- **जीवन यापन की बढ़ती लागत:** फ्रांस में आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम नागरिकों और श्रमिकों की कमर तोड़ दी है। 2018 के चर्चित 'येलो वेस्ट' आंदोलन से जुड़े गुटों और ट्रेड यूनियनों के शामिल होने से इस विरोध को राष्ट्रव्यापी गति मिल गई।
- **आगामी राष्ट्रपति चुनाव और राजनीतिक तनाव:** राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के अगले साल पद छोड़ने और अप्रैल में होने वाले संभावित राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही बेहद तनावपूर्ण है। मरीन ले पेन और ज्यां-लुक मेलेंशों के बीच संभावित चुनावी टकराव ने इस आंदोलन में राजनीतिक खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है।

## सवाल-जवाब

### 1. फ्रांस में शनिवार को हुए प्रदर्शनों में कितने लोग शामिल हुए?
शनिवार को हुए इन राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों में लगभग 5,50,000 लोगों ने भाग लिया।

### 2. हिंसा और उपद्रव के आरोप में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
अधिकारियों के अनुसार हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में कम से कम 400 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

### 3. इस झड़प में कितने पुलिसकर्मी घायल हुए हैं?
प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें से दो बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती हैं।

### 4. लीमोज शहर में टाउन हॉल को क्या नुकसान पहुंचा?
उपद्रवियों द्वारा लगाई गई भीषण आग के कारण लीमोज टाउन हॉल की छत का एक हिस्सा ढह गया और पूरी इमारत को भारी नुकसान पहुंचा है।

### 5. छात्र मुख्य रूप से किन मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे?
माध्यमिक विद्यालयों यानी लीसे स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और जर्जर भवनों की मरम्मत को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे थे।

### 6. सरकार ने छात्रों के असंतोष को शांत करने के लिए क्या घोषणा की थी?
शिक्षा मंत्री ने 8 अक्टूबर को एक साक्षात्कार में 3,000 अतिरिक्त वैकल्पिक शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था।

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