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  "type": "article",
  "title": "जर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा के विरोध में सड़कों पर उतरे छात्र, स्कूलों में हड़ताल",
  "summary": "जर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा दोबारा शुरू करने की तैयारियों के खिलाफ छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है। देश भर के स्कूलों में हड़ताल और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।",
  "content": "जर्मनी के विभिन्न शहरों में कक्षाओं का बहिष्कार कर हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। युवा प्रदर्शनकारी अनिवार्य सैन्य सेवा को फिर से बहाल करने की दिशा में उठाए जा रहे सरकारी कदमों का कड़ा विरोध कर रहे हैं। स्कूलों में हड़ताल का आह्वान करने वाले संगठनों का कहना है कि प्रशासन धीरे-धीरे देश के युवाओं को सेना में भर्ती करने की कानूनी प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने की ओर बढ़ रहा है, जिसे वे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।\n\nसड़कों पर विरोध और छात्रों का आक्रोश\nहैम्बर्ग समेत कई बड़े केंद्रों में बड़ी संख्या में युवा एकत्र हुए, जहां उनके हाथों में झंडे और तख्तियां थीं। इन प्रदर्शनों में शामिल छात्रों का साफ कहना है कि वे किसी भी तरह के युद्ध या सैन्य टकराव का हिस्सा नहीं बनना चाहते। स्कूल स्ट्राइक अगेंस्ट कंपल्सरी मिलिट्री सर्विस संगठन से जुड़े बेला ब्रेटनर ने स्पष्ट किया कि प्रशासन चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य सैन्य सेवा को लागू करने की मंशा रखता है। इसी खतरे को देखते हुए युवाओं ने देशव्यापी आंदोलन छेड़ने का फैसला किया है।\n\nहैम्बर्ग के 16 वर्षीय छात्र एलियास बर्नहार्ड ने विरोध स्थल पर कहा कि हालिया सरकारी सवालों के जवाब यह साबित करते हैं कि नौजवान सेना में शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक अनिवार्य सैन्य सेवा का प्रस्ताव पूरी तरह खारिज नहीं हो जाता, तब तक वे सड़कों पर डटे रहेंगे और हड़ताल का सिलसिला लगातार जारी रहेगा।\n\nप्रश्नावली और अनिवार्य मेडिकल जांच का नया ढांचा\nमौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत जर्मनी में 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले सभी नागरिकों को एक आधिकारिक प्रश्नावली भेजी जा रही है। इस फॉर्म में उनसे पूछा जाता है कि क्या वे सशस्त्र बलों यानी बुंडेसवेहर में शामिल होने के इच्छुक और तैयार हैं। यह प्रश्नावली पुरुषों के लिए भरना अनिवार्य किया गया है, जबकि महिलाओं के लिए इसे स्वैच्छिक रखा गया है।\n\nइसके अलावा सभी 18 वर्षीय पुरुषों के लिए सेना की शारीरिक और चिकित्सीय उपयुक्तता का आकलन करने हेतु मेडिकल जांच से गुजरना अनिवार्य किया गया है। विरोध प्रदर्शनों के आयोजकों के अनुसार छात्रों का गुस्सा तब भड़का, जब उत्तरी जर्मनी के शहरों कील और फ्लेंसबर्ग में उन 18 साल के युवकों को भी मेडिकल जांच के आधिकारिक बुलावा पत्र भेज दिए गए, जिन्होंने पंजीकरण फॉर्म में साफ तौर पर सेना में शामिल होने से इनकार कर दिया था।\n\nरक्षा मंत्रालय का रुख और प्रदर्शनों का विस्तार\nछात्र संगठनों का कहना है कि कील, हैम्बर्ग, बर्लिन और फ्रैंकफर्ट समेत पूरे देश में 100 से अधिक विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाई गई है। वहीं रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मौजूदा कानून के अनुसार 31 दिसंबर 2007 के बाद जन्मे उन सभी पुरुषों के लिए मेडिकल जांच में शामिल होना अनिवार्य है जो सैन्य सेवा के दायरे में आते हैं।\n\nमंत्रालय के अनुसार यह नियम उन लोगों पर भी समान रूप से लागू होता है जिन्होंने फॉर्म में अनिवार्य सैन्य सेवा के प्रति कोई रुचि नहीं दिखाई है। प्रवक्ता ने यह भी जानकारी दी कि जुलाई के बाद से अब तक ऐसे लगभग 1,000 अठारह वर्षीय पुरुष मेडिकल जांच से गुजर चुके हैं, जिन्होंने सेना में जाने के प्रति अनिच्छा जताई थी।\n\nशीत युद्ध की विरासत से नई रणनीति तक\nशीत युद्ध के दौर में जर्मनी के पास एक विशाल और मजबूत सेना मौजूद थी। हालांकि 1990 के दशक में लोहे के पर्दे के पतन के बाद देश ने अपने सशस्त्र बलों के आकार में भारी कटौती की। बाद में जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल ने वर्ष 2011 में अनिवार्य सैन्य सेवा को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया था।\n\nवर्तमान समय में रूस से संभावित खतरों और जर्मनी के पारंपरिक सहयोगी अमेरिका के कड़े दबाव के बीच मर्ज़ ने बुंडेसवेहर को यूरोप की सबसे मजबूत पारंपरिक सेना में तब्दील करने का संकल्प लिया है। जर्मनी की संसद बुंडेसटैग इस बात पर विचार कर सकती है कि यदि सुरक्षा हालात बिगड़ते हैं या पर्याप्त संख्या में स्वयंसेवक सामने नहीं आते हैं, तो अनिवार्य सैन्य सेवा का कोई स्वरूप वापस लागू किया जाए।\n\nबुंडेसवेहर के विस्तार की योजनाएं\nफिलहाल जर्मनी की सेना बुंडेसवेहर में लगभग 186,700 सैनिक तैनात हैं। नाटो के नए सैन्य लक्ष्यों को पूरा करने और देश की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए जर्मनी 2030 के दशक की शुरुआत तक अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाकर 260,000 करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके साथ ही सेना को लगभग 200,000 अतिरिक्त रिज़र्व सैनिकों का समर्थन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसी महत्वाकांक्षी विस्तार के कारण देश के युवाओं के बीच जबरन भर्ती की आशंका गहरा गई है, जिसके चलते विरोध की लहर तेज हो रही है।\n\nइसका आप पर असर\nजर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा की संभावित वापसी और मेडिकल परीक्षणों का सीधा असर वहां रह रहे युवाओं और उनके परिवारों पर पड़ रहा है।\n\n• 18 वर्ष के युवाओं पर प्रभाव: 31 दिसंबर 2007 के बाद जन्मे सभी पुरुषों के लिए सेना की शारीरिक स्वास्थ्य जांच कराना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी युवक ने सेना में जाने से मना भी किया हो, तब भी उसे अनिवार्य रूप से जांच केंद्र पर उपस्थित होना होगा।\n• छात्रों की शिक्षा पर असर: देशव्यापी स्कूल हड़तालों और 100 से अधिक प्रदर्शनों के कारण सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा आ रही है। छात्रों का कहना है कि जब तक यह नियम वापस नहीं लिया जाता, वे कक्षाओं का बहिष्कार जारी रखेंगे।\n• यूरोपीय सुरक्षा और नियम: नाटो के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जर्मनी अपने सैनिकों की संख्या 260,000 तक बढ़ाना चाहता है। इससे जर्मनी और यूरोप में रहने वाले युवाओं के भविष्य और करियर विकल्पों पर सैन्य प्राथमिकताओं का असर बढ़ सकता है।\n• संसद के संभावित कदम: सुरक्षा स्थिति बिगड़ने या स्वयंसेवकों की कमी होने पर जर्मन संसद बुंडेसटैग अनिवार्य सेवा का कठोर कानून पारित कर सकती है। इसके लागू होने पर युवाओं को अपनी नागरिक पढ़ाई या नौकरी छोड़कर सैन्य प्रशिक्षण लेना पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा को लेकर तनाव और छात्र विरोध प्रदर्शन इसलिए शुरू हुए क्योंकि रक्षा मंत्रालय ने अनिच्छुक युवाओं को भी अनिवार्य मेडिकल जांच के लिए तलब करना शुरू कर दिया है।\n\n• तत्कालिक कारण: कील और फ्लेंसबर्ग में उन 18 वर्षीय पुरुषों को आधिकारिक मेडिकल जांच के लिए बुलाए जाने के बाद विरोध भड़का, जिन्होंने पंजीकरण फॉर्म में साफ लिख दिया था कि उन्हें सेना में कोई दिलचस्पी नहीं है। जुलाई से अब तक लगभग 1,000 अनिच्छुक युवाओं को ऐसे परीक्षणों से गुजरना पड़ा है।\n• सैन्य विस्तार के नए लक्ष्य: रूस से कथित खतरों और अमेरिका के कड़े दबाव के बीच बुंडेसवेहर को यूरोप की सबसे मजबूत पारंपरिक सेना बनाने का संकल्प लिया गया है। वर्तमान में 186,700 सैनिकों वाली सेना को 2030 के दशक की शुरुआत तक 260,000 सक्रिय जवानों और 200,000 रिज़र्व सैनिकों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।\n• ऐतिहासिक बदलाव और कानूनी स्थिति: शीत युद्ध के बाद सेना का आकार घटाया गया था और 2011 में पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल ने अनिवार्य सैन्य सेवा समाप्त कर दी थी। अब सुरक्षा स्थिति बिगड़ने या स्वयंसेवकों की कमी की स्थिति में जर्मन संसद बुंडेसटैग अनिवार्य भर्ती पर दोबारा विचार कर सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जर्मनी में छात्र सड़कों पर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?\nछात्र अनिवार्य सैन्य सेवा की संभावित बहाली और अनिच्छुक युवाओं को मेडिकल जांच के लिए भेजे जा रहे सरकारी नोटिसों के विरोध में हड़ताल कर रहे हैं।\n\n2. किन युवाओं के लिए मेडिकल जांच अनिवार्य की गई है?\n31 दिसंबर 2007 के बाद जन्मे उन सभी 18 वर्षीय पुरुषों के लिए मेडिकल जांच अनिवार्य है जो सैन्य सेवा के योग्य हैं, भले ही उन्होंने सेना में रुचि न दिखाई हो।\n\n3. जर्मनी में सैन्य सेवा से जुड़ी प्रश्नावली के नियम क्या हैं?\n18 वर्ष की आयु वाले सभी पुरुषों के लिए यह प्रश्नावली भरना कानूनी रूप से अनिवार्य है, जबकि महिलाओं के लिए इसे पूरी तरह स्वैच्छिक रखा गया है।\n\n4. जर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा कब समाप्त की गई थी?\nजर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2011 में अनिवार्य सैन्य सेवा को खत्म किया गया था।\n\n5. जर्मन सेना बुंडेसवेहर में वर्तमान में कितने सैनिक हैं और भविष्य का लक्ष्य क्या है?\nवर्तमान में बुंडेसवेहर में लगभग 186,700 सैनिक हैं, जिसे 2030 के दशक की शुरुआत तक बढ़ाकर 260,000 सैनिक और 200,000 रिज़र्व सैनिक करने की योजना है।\n\n6. जर्मनी के किन प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं?\nछात्र संगठनों ने कील, हैम्बर्ग, बर्लिन और फ्रैंकफर्ट सहित देश भर में 100 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शनों की रूपरेखा तैयार की है।",
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  "category": "यूरोप",
  "publishedAt": "2026-09-25",
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