हवाई हमले की चेतावनी देने वाले ऐप्स पर बड़ा साइबर हमला, यूक्रेन और रूस में परमाणु खतरे के फर्जी अलर्ट से फैली सनसनी यूक्रेन और रूस दोनों देशों में आपातकालीन चेतावनी ऐप्स में सेंधमारी के बाद उपयोगकर्ताओं को मिसाइल, विकिरण और परमाणु हमलों के फर्जी संदेश भेजे गए। अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए सतर्कता बरतने की सलाह दी है। यूक्रेन और रूस में नागरिकों को हवाई हमलों से सतर्क करने वाले डिजिटल सुरक्षा तंत्र पर रविवार रात एक बड़ा साइबर हमला हुआ। दोनों देशों के आधिकारिक अलर्ट ऐप्स में सुरक्षा सेंध लगाकर आम नागरिकों के मोबाइल फोन पर फर्जी आपातकालीन सूचनाएं भेजी गईं। इन संदेशों में भारी गोलाबारी, रासायनिक हथियारों, जमीनी झड़पों और यहां तक कि परमाणु हमले जैसी भयावह चेतावनियां शामिल थीं। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद दोनों पक्षों के सुरक्षा तंत्र हरकत में आ गए और नागरिकों को वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक बयान जारी करने पड़े। यूक्रेन में अलर्ट सिस्टम में सेंध और रेड लेवल चेतावनी यूक्रेन में व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले एयर अलार्म एप्लिकेशन ने अचानक पूरे देश में रेड-लेवल चेतावनी जारी करना शुरू कर दिया। राजधानी कीव सहित विभिन्न प्रमुख शहरों के निवासियों को मोबाइल स्क्रीन पर विकिरण के खतरे, रासायनिक गैस के हमले और सड़कों पर भारी संघर्ष छिड़ने के आपातकालीन नोटिफिकेशन मिले। चार साल से अधिक समय से जारी युद्ध के दौरान यूक्रेनी नागरिक लगभग हर रात रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों की वास्तविक चेतावनियां पाने के आदी हो चुके हैं। लगातार सायरन और अलर्ट के मानसिक दबाव के कारण कई नागरिक पहले ही इन ऐप्स को बंद कर चुके हैं, लेकिन जिन लोगों के फोन पर यह फर्जी संदेश पहुंचे, वे स्तब्ध रह गए। राजधानी कीव की निवासी ओलेना ने उस खौफनाक अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जब उन्हें यह अलर्ट मिला तो उनका पहला विचार था कि हे भगवान, मैं इसके लिए तैयार नहीं हूं। ओलेना ने कहा कि वह बिजली कटौती, हीटिंग सिस्टम बंद होने और पानी की आपूर्ति बाधित होने जैसी युद्धकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए मानसिक रूप से तैयार थीं, लेकिन किसी परमाणु हमले के लिए नहीं। इसके तुरंत बाद उनके पति के फोन पर कीव में सीधे सड़क पर लड़ाई शुरू होने की सूचना आई। ओलेना के अनुसार, यह चेतावनी रूसी भाषा में लिखी हुई थी, जिससे उन्हें तुरंत समझ आ गया कि ऐप पर हमला हुआ है, क्योंकि वास्तविक सिस्टम के सभी आधिकारिक नोटिफिकेशन हमेशा यूक्रेनी भाषा में प्रसारित किए जाते हैं। यूक्रेनी वायु सेना और सरकार का स्पष्टीकरण स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूक्रेनी वायु सेना ने एक आधिकारिक बयान जारी कर नागरिकों से घबराहट न फैलाने और केवल सत्यापित चैनलों पर भरोसा करने की अपील की। वायु सेना ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि एयर अलार्म एप्लिकेशन संभवतः शत्रुतापूर्ण बाहरी हस्तक्षेप का शिकार हुआ है, देश में किसी भी तरह का विकिरण खतरा नहीं है और लोग शांत रहकर आधिकारिक अपडेट देखते रहें। यूक्रेन सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए एप्लिकेशन को अस्थायी तौर पर मेंटेनेंस मोड में डालकर बंद कर दिया। सरकारी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि प्रणाली में स्पष्ट रूप से बाहरी दखल हुआ था। यूक्रेनी संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष ओलेक्जेंडर मेरेझको ने स्पष्ट किया कि इस हमले से जनता में कोई भारी दहशत या उग्र प्रतिक्रिया नहीं हुई। ओलेक्जेंडर मेरेझको के अनुसार, यूक्रेन के लोग लगातार मिलने वाले चेतावनियों के आदी हो चुके हैं और संदेश का रूसी भाषा में होना ही नागरिकों को सतर्क करने के लिए काफी था। उन्होंने कहा कि यह एक अप्रिय घटना जरूर है, लेकिन यह चल रहे साइबर युद्ध का ही हिस्सा है जिसके लिए देश तैयार है। रूस में भी अलर्ट ऐप पर हमला और फर्जी परमाणु चेतावनी यूक्रेन में हुई घटना के कुछ ही घंटों बाद रूसी अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि उनके एक समान हवाई चेतावनी ऐप पर व्यापक साइबर हमला किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक हमलावरों ने बड़े पैमाने पर जनता को गुमराह करने वाली भ्रामक चेतावनियां भेजीं। रूसी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सक्रिय यूक्रेनी पक्षधर समूह आतिश ने टेलीग्राम पर इस कथित फर्जी चेतावनी का एक स्क्रीनशॉट साझा किया। इस फर्जी अलर्ट में नागरिकों को चेतावनी दी गई थी कि यूक्रेन के पी1-सन्स अटैक ड्रोन पर परमाणु हथियार लोड करके रूस के सभी क्षेत्रों की ओर दागे जा चुके हैं। अभद्र भाषा और चेतावनियों से भरे इस संदेश में लिखा गया था कि हालात बेहद उग्र होने का खतरा है, इसलिए लोग तुरंत तीन हफ्तों के लिए पर्याप्त भोजन जुटा लें और सुरक्षित ठिकानों में छिप जाएं। हालांकि, सोमवार सुबह रूस में इस तरह के संदेशों से व्यापक स्तर पर भगदड़ मचने का कोई संकेत नहीं मिला और न ही देश के मुख्यधारा के मीडिया में इसे कोई प्रमुख स्थान दिया गया। क्रेमलिन और आपातकालीन मंत्रालय की प्रतिक्रिया इस सुरक्षा चूक पर प्रतिक्रिया देते हुए क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने किसी विशिष्ट विवरण पर जाने के बजाय कहा कि रूस के सभी सरकारी इंटरनेट संसाधन लगातार साइबर हमलों के निशाने पर रहते हैं। दिमित्री पेसकोव ने रेखांकित किया कि राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी चौबीसों घंटे हमले किए जाते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI तकनीक के बढ़ते प्रसार के कारण इस प्रकार के साइबर हमलों की संख्या और जटिलता में काफी इजाफा हुआ है। दूसरी ओर, रूस के आपातकालीन मंत्रालय ने सोमवार को आश्वस्त किया कि ऐप की संपूर्ण कार्यप्रणाली को दिन के अंत तक पूरी तरह बहाल कर दिया जाएगा। मंत्रालय ने साफ किया कि इस हैकिंग से मुख्य सार्वजनिक आपातकालीन सूचना तंत्र प्रभावित नहीं हुआ है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। साइबर विशेषज्ञों की राय और युद्ध का जमीनी संदर्भ हालांकि रूस और यूक्रेन दोनों लंबे समय से एक-दूसरे के खिलाफ डिजिटल अभियान चलाते रहे हैं, लेकिन इन फर्जी अलर्ट में इस्तेमाल की गई अनौपचारिक और अमर्यादित भाषा दर्शाती है कि इसमें हैक्टिविस्ट समूह शामिल हो सकते हैं। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे समूह मॉस्को या कीव की विचारधारा से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन वे औपचारिक रूप से किसी भी सरकार के सीधे नियंत्रण में काम नहीं करते। जानकारों का यह भी मानना है कि रूस के सिस्टम को निशाना बनाने वाले तत्वों के पास संभवतः काफी समय से यह तकनीकी क्षमता मौजूद थी, लेकिन उन्होंने यूक्रेन के ऐप के प्रभावित होने तक इसका इस्तेमाल टाल रखा था। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में साइबर नीति और सुरक्षा के वरिष्ठ शोध विद्वान हर्बर्ट लिन ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आधिकारिक यूक्रेनी सूचना ऐप पर इस तरह का हमला संभवतः पहली बार देखा गया है, लेकिन उन्हें संदेह है कि यह आखिरी नहीं होगा। यह फर्जी अलर्ट यूक्रेन के अग्रिम मोर्चे वाले खेरसॉन क्षेत्र में लागू एक स्थानीय संघर्ष विराम के समाप्त होने से ठीक कुछ मिनट पहले भेजे गए थे। यह संघर्ष विराम पिछले मंगलवार को लागू हुआ था, जिसमें अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की मध्यस्थता से रूसी कब्जे वाले ओलेशकी शहर से आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की सहमति बनी थी। इस स्थानीय शांति व्यवस्था के बावजूद अन्य मोर्चों पर भीषण जंग जारी रही, जहां केवल निप्रो शहर में ही गुरुवार को एक ट्रेन प्लेटफॉर्म पर हुए हमले में 15 लोगों की जान चली गई थी। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण स्तर का सैन्य आक्रमण शुरू किया था, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच जमीनी मोर्चे के साथ-साथ साइबर युद्ध भी लगातार तीखा होता जा रहा है। इसका आप पर असर नागरिक सुरक्षा और आपातकालीन चेतावनी तंत्र के हैक होने से युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों के बीच भ्रम और भय फैलने का वास्तविक जोखिम पैदा हो गया है। • चेतावनी तंत्र की विश्वसनीयता: जब मोबाइल अलर्ट ऐप्स पर फर्जी चेतावनियां आने लगती हैं, तो लोग वास्तविक खतरों के समय भी चेतावनियों को नजरअंदाज करने लगते हैं। युद्ध क्षेत्र में रहने वाले लोगों को अब किसी भी चेतावनी की पुष्टि अन्य आधिकारिक और पारंपरिक माध्यमों से करनी होगी। • मनोवैज्ञानिक दबाव: परमाणु और रासायनिक हमलों के फर्जी अलर्ट से नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। पहले से बिजली और पानी के संकट से जूझ रहे लोगों के लिए ऐसे संदेश भारी मानसिक तनाव पैदा करते हैं। • डिजिटल सुरक्षा कदम: आपातकालीन सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले उपयोगकर्ताओं को अपने ऐप्स को केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से अपडेट रखना होगा। इसके अलावा महत्वपूर्ण सुरक्षा सूचनाओं के लिए केवल एक ऐप पर निर्भर रहने के बजाय रेडियो या टेलीग्राम जैसे अतिरिक्त प्लेटफॉर्म से जुड़े रहना जरूरी है। • वैश्विक साइबर सुरक्षा सीख: सरकारी और सार्वजनिक सुरक्षा प्रणालियों पर इस तरह के हमले दुनिया भर के देशों के लिए एक चेतावनी हैं। नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित रखना राष्ट्रीय सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा बन गया है। ऐसा क्यों हुआ यह घटना दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष के तहत डिजिटल प्रणालियों और जन-संचार माध्यमों को निशाना बनाकर मनोवैज्ञानिक अस्थिरता फैलाने के उद्देश्य से अंजाम दी गई। • सेंधमारी का सीधा कारण: अज्ञात साइबर हमलावरों ने यूक्रेन और रूस दोनों के एयर अलर्ट मोबाइल एप्लिकेशन के सुरक्षा तंत्र में खामियों का फायदा उठाकर अनधिकृत संदेश प्रसारित किए। यूक्रेनी ऐप को रखरखाव के लिए बंद करना पड़ा, जबकि रूसी तंत्र को भी बड़े डिजिटल हमले का सामना करना पड़ा। • हैकटिविस्ट समूहों की भूमिका: चेतावनियों में प्रयुक्त अनौपचारिक और अमर्यादित भाषा इस बात की ओर इशारा करती है कि यह कार्रवाई किसी औपचारिक सरकारी सैन्य इकाई के बजाय स्वतंत्र साइबर समूहों द्वारा की गई। विशेषज्ञों का आकलन है कि रूसी तंत्र पर हमला यूक्रेन के सिस्टम के प्रभावित होने की प्रतिक्रिया में किया गया हो सकता है। • साइबर युद्ध और एआई का बढ़ता दायरा: क्रेमलिन के बयानों में रेखांकित किया गया कि सरकारी डिजिटल संसाधनों पर निरंतर हमले होते रहते हैं। आधुनिक एआई उपकरणों की सुलभता ने साइबर हमलों की जटिलता और तीव्रता को अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया है। • संघर्ष का संवेदनशील समय: यह घटनाक्रम खेरसॉन में एक स्थानीय मानवीय संघर्ष विराम के समाप्त होने के ठीक समय पर हुआ, जिससे संवेदनशील पलों में जनभावनाओं को भड़काने की कोशिश स्पष्ट दिखाई देती है। सवाल-जवाब 1. यूक्रेन और रूस के अलर्ट ऐप्स में क्या फर्जी संदेश भेजे गए? यूक्रेन में विकिरण के खतरे, रासायनिक हमले और सड़कों पर लड़ाई के फर्जी अलर्ट भेजे गए, जबकि रूस में यूक्रेन द्वारा ड्रोन से परमाणु हथियार दागने का झूठा दावा किया गया। 2. यूक्रेन के लोगों को संदेश के फर्जी होने का संदेह कैसे हुआ? यूक्रेन के आधिकारिक ऐप के सभी नोटिफिकेशन यूक्रेनी भाषा में आते हैं, जबकि भेजे गए कुछ फर्जी अलर्ट रूसी भाषा में लिखे हुए थे। 3. यूक्रेनी वायु सेना ने इस घटना पर क्या बयान दिया? वायु सेना ने स्पष्ट किया कि कोई विकिरण खतरा नहीं है, ऐप में बाहरी हस्तक्षेप हुआ था और लोगों को केवल आधिकारिक टेलीग्राम चैनल की जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। 4. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने साइबर हमलों को लेकर क्या कहा? दिमित्री पेसकोव ने कहा कि रूसी सरकारी वेबसाइट्स लगातार साइबर हमलों के निशाने पर रहती हैं और एआई के प्रसार से इन हमलों में बढ़ोतरी हुई है। 5. खेरसॉन में संघर्ष विराम किस उद्देश्य से लागू किया गया था? यह संघर्ष विराम अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की मध्यस्थता से रूसी कब्जे वाले ओलेशकी शहर से आम नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए लागू किया गया था। https://trendkia.com/europe/havai-hamale-ki-chetavani-dene-vale-aipsa-para-bara-saibara-hamala-ukraine-aura-russia-men-paramanu-khatare-ke-pharji-alarta-se-ph-55242 TrendKia — Har trend, sabse pehle.