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  "type": "article",
  "title": "हंगरी के बाद सर्बिया में सत्ता परिवर्तन, छात्र आंदोलन और चुनावी निगरानी ने बदल दिया राजनीतिक परिदृश्य",
  "summary": "हंगरी में विक्टर ओर्बन के हटने के बाद अब सर्बिया में अलेक्सांद्र वुचिच को भी सत्ता गंवानी पड़ी है। दोनों देशों में युवा मतदाताओं की भारी लामबंदी और चुनावी निगरानी की साझा रणनीति ने दशकों पुराने राजनीतिक दबदबे को समाप्त कर दिया।",
  "content": "पूर्वी और मध्य यूरोप की राजनीति में लंबे समय से अजेय माने जा रहे दो प्रमुख नेताओं का सत्ता से बाहर होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। लगभग एक साल पहले जब उत्तरी सर्बिया के सुबोटिका शहर में हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन और सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्सांद्र वुचिच एक बेकरी में पारंपरिक ब्यूरेक पेस्ट्री खा रहे थे, तब किसी ने यह नहीं सोचा था कि बारह महीने के भीतर दोनों नेता सत्ता से बाहर हो जाएंगे। 16 वर्षों तक हंगरी की सत्ता संभालने वाले 63 वर्षीय ओर्बन अप्रैल में चुनाव हार गए, जबकि 14 साल तक सर्बियाई राजनीति पर हावी रहे 56 वर्षीय वुचिच को हाल ही में संपन्न संसदीय चुनावों में अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। दोनों देशों में सत्ता परिवर्तन की यह पटकथा युवाओं और नागरिक निगरानी समूहों के मजबूत तालमेल से लिखी गई।\n\nयुवा लामबंदी और एआई निगरानी की अनोखी रणनीति\nहंगरी और सर्बिया दोनों देशों में राजनीतिक बदलाव की मुख्य वजह युवाओं का भारी संख्या में मतदान करना और चुनावी धांधली रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना रहा। हंगरी में 79 प्रतिशत और सर्बिया में 69 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसमें तकनीक की गहरी समझ रखने वाले युवाओं ने निर्णायक भूमिका निभाई। कार्यकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI आधारित टूल्स का उपयोग करके डेटा का विश्लेषण किया, संदिग्ध मतदान केंद्रों की पहचान की और हजारों की संख्या में चुनावी पर्यवेक्षकों को मैदान में उतारा ताकि मतदाताओं को डराने या धांधली करने की किसी भी कोशिश को रोका जा सके।\n\nचुनावी प्रबंधन और निगरानी के इस तरीके को दोनों देशों के कार्यकर्ताओं ने आपस में साझा किया। हंगरी के 'डीई' नामक नागरिक अधिकार समूह ने अपने 70 चुनाव पर्यवेक्षकों को सर्बिया भेजा, जिन्होंने उत्तरी सर्बिया के वोज्वोदिना प्रांत में छात्र आंदोलन के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर काम किया। गर्मियों के दौरान, चुनाव की आधिकारिक घोषणा होने से पहले ही हंगरी के कार्यकर्ताओं ने कार्यशालाएं आयोजित की थीं। इन कार्यशालाओं में सर्बियाई छात्रों को उन मतदान केंद्रों की पहले से पहचान करने का प्रशिक्षण दिया गया जहां पिछले चुनावों में सत्तारूढ़ दल को अप्रत्याशित रूप से अधिक वोट मिले थे और जहां मतदाताओं पर दबाव बनाने या कतारबद्ध मतदान जैसी गड़बड़ियों की आशंका थी।\n\nसुबोटिका के छात्र कार्यकर्ता पीटर क्लेम ने बताया कि मतदान के दिन लगभग 16:00 बजे से मतदान केंद्रों के बाहर नकाबपोश हुड़दंगियों के जमावड़े देखे गए, जो वुचिच के समर्थक थे। इसके जवाब में छात्रों ने तुरंत मोबाइल टीमें भेजीं और हर गतिविधि की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। प्रत्येक संवेदनशील मतदान केंद्र पर पहले से मौजूद स्थिर पर्यवेक्षकों के साथ 20 से 30 स्वयंसेवकों की मौजूदगी ने शरारती तत्वों के हौसले पस्त कर दिए और गड़बड़ी रोकने में मदद मिली।\n\nसमान सीटों का विचित्र संयोग और नेताओं का तालमेल\nहंगरी में पीटर मग्यार की टिस्जा पार्टी ने 199 सदस्यीय संसद में 140 सीटें हासिल की थीं। एक विचित्र संख्यात्मक संयोग के तहत, सर्बिया में दो साल से भी कम पुराने छात्र आंदोलन की 'स्टूडेंट लिस्ट' ने 250 सदस्यीय संसद में ठीक 140 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। टिस्जा पार्टी जहां अपने नेता पीटर मग्यार के व्यक्तिगत प्रभाव और ऊर्जा पर केंद्रित थी, वहीं सर्बियाई छात्रों का जोर इस बात पर रहा कि उनके आंदोलन का कोई एकल शीर्ष नेतृत्व नहीं है। इसके बावजूद दोनों के बीच गहरा वैचारिक संपर्क रहा।\n\nमतदान के नतीजे आने के बाद यूरोपीय नेताओं में से पीटर मग्यार ही एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने सीधे फोन करके छात्रों को बधाई दी। मग्यार ने कहा कि टिस्जा की सफलता दूसरी जगहों के लिए प्रेरणा बने, यह हमेशा सुखद होता है। वहीं मतदान से ठीक पहले स्टूडेंट लिस्ट के प्रमुख इलिजा सरदानोविच ने भी कहा था कि हंगरी के चुनाव परिणामों ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनका रास्ता सही है। परिणाम वाली रात मग्यार ने सीधे सरदानोविच से भी बातचीत की थी।\n\nदो दशकों के प्रभुत्व का शांतिपूर्ण अंत\nअलेक्सांद्र वुचिच और विक्टर ओर्बन के बीच सत्ता गंवाने के तरीके में भी हैरान करने वाली समानताएं देखी गईं। वुचिच ने रविवार रात ठीक 21:30 बजे अपनी हार स्वीकार की, जो बिल्कुल उसी समय के करीब थी जब 12 अप्रैल को विक्टर ओर्बन ने अपनी पराजय मानी थी। राजनीतिक विश्लेषकों को यह आशंका थी कि दोनों में से कोई भी नेता आसानी से शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता नहीं छोड़ेगा।\n\nसर्बिया में मतदान समाप्त होने से एक घंटा पहले राजधानी बेलग्रेड के मध्य में नकाबपोश और हुड पहने लोग तैनात होने लगे थे, लेकिन चुनावी कार्यकर्ताओं की सतर्कता ने स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया। इस दौरान यह चर्चा भी सामने आई कि वुचिच ने रविवार रात ओर्बन से दो बार सलाह ली थी, जिसमें एक बातचीत हार स्वीकार करने से पहले और दूसरी रात 23:15 बजे हुई। कुछ सूत्रों के अनुसार ओर्बन ने वुचिच को बल प्रयोग न करने की सलाह दी थी। वुचिच ने पहली कॉल से इनकार किया लेकिन बाद वाली बातचीत की पुष्टि की, जबकि ओर्बन ने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया।\n\nसाझा कारोबारी साम्राज्य और जांच एजेंसियों का शिकंजा\nअपने शासनकाल के दौरान ओर्बन और वुचिच ने न केवल अपनी घरेलू संस्थाओं पर कड़ा नियंत्रण स्थापित किया था, बल्कि दोनों देशों में फैले कारोबारी रिश्तों को भी बढ़ावा दिया था। सुबोटिका की बेकरी में नाश्ते के बाद दोनों नेता एक स्थानीय वाइनरी में मिले थे, जहां सर्बिया की निस तेल रिफाइनरी को हंगरी द्वारा खरीदे जाने पर बातचीत हुई थी। दोनों राष्ट्रवादी नेता रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से करीबी रिश्तों के साथ-साथ बोस्नियाई सर्बों के अलगाववादी नेता मिलोराद डोडिक के खुले समर्थन में भी एकमत थे। बेलग्रेड और बुडापेस्ट के बीच हाई-स्पीड रेलवे लाइन का निर्माण भी चीनी वित्त और तकनीक से चल रहा है।\n\nअब सत्ता से बाहर होने के बाद 63 वर्षीय ओर्बन और 56 वर्षीय वुचिच दोनों को भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। सर्बिया की संगठित अपराध विरोधी विशेष अभियोजन सेवा 'जेटीओके' और हंगरी के नए विशेष अभियोजक 'एनवीवीएच' के पास एक जैसे अधिकार हैं, जिससे वे एक-दूसरे की जांच में सहयोग कर सकते हैं। विशेष रूप से 1 नवंबर 2024 को नोवी साद रेलवे स्टेशन की छत गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस निर्माण परियोजना में ओर्बन के करीबी हंगेरियाई कारोबारी भी शामिल थे। भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोपों के बाद हुए इस हादसे ने ही सर्बियाई छात्र आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाया। नागरिक अधिकार समूह के संस्थापक एरोन तिमार के अनुसार, दोनों व्यवस्थाएं समय के साथ मजबूत नहीं बल्कि भीतर से कमजोर हो चुकी थीं, और जनता के उठ खड़े होते ही उनका पतन तय हो गया।\n\nइसका आप पर असर\nपूर्वी यूरोप में लंबे समय तक जमे राष्ट्रवादी शासनों के हटने से क्षेत्रीय कूटनीति, नागरिक अधिकारों और चुनावी व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।\n\n• नागरिक अधिकार और युवा राजनीति: यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक और संगठित निगरानी से मजबूत सत्ताओं को लोकतांत्रिक तरीके से चुनौती दी जा सकती है। इससे दुनिया भर के युवा आंदोलनों और चुनावी पारदर्शिता अभियानों को व्यावहारिक प्रेरणा मिलेगी।\n• द्विपक्षीय बुनियादी ढांचा परियोजनाएं: हंगरी और सर्बिया के बीच बुडापेस्ट-बेलग्रेड हाई-स्पीड रेल और तेल रिफाइनरी सौदों की नए सिरे से जांच हो सकती है। इन परियोजनाओं में हुए खर्च और भ्रष्टाचार के आरोपों की समीक्षा से परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है।\n• रूस और चीन के साथ संबंध: दोनों नेताओं की विदाई से क्षेत्र में रूसी प्रभाव और चीनी निवेश की शर्तों में बदलाव आने की संभावना है। नई सरकारें यूरोपीय संघ के नियमों और पारदर्शिता मानकों को अधिक प्राथमिकता दे सकती हैं।\n• कानूनी जवाबदेही और भ्रष्टाचार विरोधी जांच: दोनों देशों की विशेष जांच एजेंसियां पूर्व सत्ताधीशों और उनके करीबी कारोबारियों की संपत्तियों की जांच तेज कर सकती हैं। इससे सरकारी ठेकों में जवाबदेही और सार्वजनिक सुरक्षा मानकों में कड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह राजनीतिक उथल-पुथल वर्षों से संचित जनआक्रोश, नोवी साद त्रासदी के बाद भड़के विरोध और विपक्षी दलों की आधुनिक चुनावी रणनीति का सीधा परिणाम थी।\n\n• नोवी साद रेलवे स्टेशन हादसा: 1 नवंबर 2024 को नोवी साद स्टेशन की छत गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस त्रासदी में निर्माण कंपनियों के भ्रष्टाचार और सरकारी लापरवाही के खुलासे ने सर्बियाई छात्र आंदोलन को राष्ट्रव्यापी जनआक्रोश में बदल दिया।\n• प्रौद्योगिकी आधारित चुनावी सतर्कता: दोनों देशों में विपक्षी कार्यकर्ताओं ने एआई टूल्स का उपयोग करके संवेदनशील मतदान केंद्रों को पहले से चिह्नित किया। हजारों स्वयंसेवकों ने मतदान केंद्रों पर नकाबपोश हुड़दंगियों की वीडियोग्राफी कर चुनावी धांधली और दबाव की कोशिशों को नाकाम कर दिया।\n• शासन विरोधी असंतोष और सत्ता का खोखलापन: ओर्बन के 16 साल और वुचिच के 14 साल के कार्यकाल में राज्य की संस्थाओं पर कड़े नियंत्रण के बावजूद जनता के भीतर गहरा असंतोष पनप रहा था। नागरिक समूहों के अनुसार लंबे समय तक सत्ता में रहने से व्यवस्था भीतर से कमजोर हो चुकी थी, जिससे व्यापक जनआंदोलन के आगे उनका टिकना असंभव हो गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सर्बिया और हंगरी के पूर्व नेताओं का कार्यकाल कितने समय का था?\nहंगरी में विक्टर ओर्बन 16 वर्षों तक प्रधानमंत्री रहे, जबकि सर्बिया में अलेक्सांद्र वुचिच 14 वर्षों तक सत्ता में रहे।\n\n2. सर्बिया के संसदीय चुनाव में छात्र आंदोलन ने कितनी सीटें जीती हैं?\nसर्बियाई संसद की 250 सीटों में से स्टूडेंट लिस्ट ने 140 सीटों पर भारी जीत हासिल की है।\n\n3. हंगरी में किस विपक्षी दल ने विक्टर ओर्बन को हराया था?\nहंगरी में पीटर मग्यार की टिस्जा पार्टी ने अप्रैल के चुनाव में 199 में से 140 सीटें जीतकर जीत हासिल की थी।\n\n4. दोनों देशों में मतदान का प्रतिशत कितना दर्ज किया गया?\nहंगरी में 79 प्रतिशत और सर्बिया में 69 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।\n\n5. सर्बिया में छात्र आंदोलन को किस घटना ने सबसे बड़ा बढ़ावा दिया?\n1 नवंबर 2024 को नोवी साद रेलवे स्टेशन की छत गिरने से 16 लोगों की मौत की घटना ने छात्र आंदोलन को तेज किया।\n\n6. कार्यकर्ताओं ने चुनावी धांधली रोकने के लिए क्या तकनीक अपनाई?\nकार्यकर्ताओं ने संदिग्ध मतदान केंद्रों की पहचान के लिए एआई टूल्स का उपयोग किया और हजारों प्रशिक्षित पर्यवेक्षकों को वीडियो कैमरों के साथ तैनात 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