ब्रिटेन के एयरबेस पर हमले की साजिश में ईरान का हाथ, प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम का बड़ा दावा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने दावा किया है कि इंग्लैंड के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस पर हमले की साजिश के पीछे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का हाथ था। इस मामले में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया था जिन्हें बाद में जमानत मिल गई। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सोमवार को अपने देश की संसद में एक बेहद गंभीर बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि इंग्लैंड स्थित अमेरिकी सैन्य एयरबेस आरएएफ फेयरफोर्ड को निशाना बनाने की कथित साजिश के पीछे सीधे तौर पर ईरान का हाथ था। ब्रिटिश प्रशासन के खुफिया और सुरक्षा आकलन के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र का समन्वय ईरान के भीतर ही किया गया था और इसे मुख्य रूप से ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा निर्देशित किया गया था। एंडी बर्नहम ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिटेन अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और अपनी सीमा के भीतर इस तरह की किसी भी नापाक हरकत या सुरक्षा खतरे को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी याद दिलाया कि पिछले महीने सामने आई इस खतरनाक योजना को लेकर पहले भी शुरुआती संकेत मिले थे कि इसमें ईरान की संलिप्तता हो सकती है। इस रणनीतिक एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिकी बमवर्षक विमानों द्वारा चल रहे संघर्ष के दौरान ईरान के ठिकानों पर हमले करने के लिए किया गया था, जिसके बाद से यह ठिकाना सुरक्षा एजेंसियों के विशेष निशाने पर था। ब्रिटिश सरकार ने इस गंभीर घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को ही ईरानी राजदूत को अपने यहाँ तलब किया और उनके सामने अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज कराई। सरकार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि ईरान लगातार विभिन्न आपराधिक नेटवर्कों, अपने सहयोगी सशस्त्र समूहों और राज्य समर्थित अन्य दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से ब्रिटेन के साथ-साथ उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास कर रहा है। इसी कूटनीतिक तनाव के बीच अमेरिका ने पिछले सप्ताह ही आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से अपने सभी बमवर्षक विमानों को वापस हटा लिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का यह मानना था कि इस एयरबेस को ईरानी हमलों से गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, जिसका मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों की जान लेना और अमेरिकी सैन्य विमानों को तबाह करना था। सात संदिग्धों की गिरफ्तारी और जांच इस सनसनीखेज साजिश के खुलासे के बाद ब्रिटिश पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अब तक कुल सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। हालांकि शुरुआती पूछताछ और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद इन सभी संदिग्धों को पुलिस ने जमानत पर रिहा कर दिया है और फिलहाल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अदालत में औपचारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पकड़े गए सभी संदिग्धों की उम्र 20 से 29 वर्ष के बीच की है। इनमें से छह संदिग्ध ब्रिटेन के ही नागरिक हैं जबकि सातवें व्यक्ति के पास ब्रिटेन और ईरान दोनों देशों की दोहरी नागरिकता मौजूद है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए 27 सितंबर को सुरक्षा बलों ने एयरबेस के आसपास के ग्रामीण इलाकों में एक व्यापक और सघन सुरक्षा अभियान चलाया था। इस दौरान सुरक्षा के एहतियात के तौर पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों को उनके घरों से निकालकर पूरी तरह सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। इस बड़े ऑपरेशन में भारी संख्या में सशस्त्र पुलिसकर्मियों के साथ-साथ सेना के विशेष बम निरोधक विशेषज्ञों को भी तैनात किया गया था जिन्होंने चप्पे-चप्पे की तलाशी ली। पुलिस ने आगे की जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती दौर में पकड़े गए पांच संदिग्धों से जुड़ी कुल तीन वैनों की तलाशी ली गई थी जिनमें से भारी मात्रा में पेट्रोल बरामद किया गया था। इस पेट्रोल का इस्तेमाल किसी बड़ी आगजनी या खतरनाक विस्फोटक सामग्री के रूप में किए जाने की आशंका जताई गई थी, हालांकि तलाशी के दौरान पुलिस को मौके से कोई भी सीधा विस्फोटक पदार्थ नहीं मिला। मामले की गहन जाँच अभी भी लगातार जारी है और अधिकारी हर पहलू को खंगाल रहे हैं। इसका आप पर असर ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस पर हमले की साजिश और ईरान के साथ बढ़ते कूटनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और यात्रा नियमों पर पड़ सकता है। • भारत में: मध्य पूर्व और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्गों और सुरक्षा प्रोटोकॉल में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा सकती है। इससे विमानन कंपनियों और यात्रियों को वैश्विक सुरक्षा उपायों के तहत लंबी जाँच प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। • ब्रिटेन में: स्थानीय नागरिकों और सैन्य ठिकानों के आसपास रहने वाले लोगों को बढ़ी हुई पुलिस गश्त, सुरक्षा जाँच और संभावित आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यासों का सामना करना पड़ेगा। सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदमों से देश के भीतर अप्रवासी और वीजा नीतियों पर भी सख्त रुख अपनाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ ब्रिटेन के सैन्य ठिकाने पर हमले की यह साजिश भू-राजनीतिक संघर्ष और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव का परिणाम है। इस घटना के पीछे ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से चल रहा कूटनीतिक और सैन्य बैर मुख्य कारण है। • सैन्य इस्तेमाल: इंग्लैंड स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस का उपयोग अमेरिकी बमवर्षक विमानों द्वारा ईरान के खिलाफ अभियानों में किया गया था, जिससे यह ठिकाना रणनीतिक रूप से निशाना बन गया। • आईआरजीसी की भूमिका: ब्रिटिश खुफिया और सुरक्षा आकलन के अनुसार, इस पूरे हमले की योजना का समन्वय और निर्देशन ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा किया गया था। • अमेरिकी चेतावनी: अमेरिकी प्रशासन ने संभावित हमलों के खतरे को भाँपते हुए अपने बमवर्षक विमानों को सुरक्षा कारणों से समय रहते उस एयरबेस से हटा लिया था। सवाल-जवाब 1. ब्रिटेन के किस एयरबेस पर हमले की साजिश रची गई थी? इंग्लैंड स्थित अमेरिकी सैन्य एयरबेस आरएएफ फेयरफोर्ड पर हमले की साजिश रची गई थी। 2. ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने इस साजिश के पीछे किसका हाथ बताया है? एंडी बर्नहम ने कहा है कि इस साजिश के पीछे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का हाथ था। 3. इस मामले में अब तक कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है? पुलिस ने इस कथित साजिश के सिलसिले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है जिन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। 4. गिरफ्तार किए गए संदिग्धों की उम्र कितनी है? गिरफ्तार किए गए सभी संदिग्धों की उम्र 20 से 29 वर्ष के बीच बताई गई है। 5. ब्रिटिश सरकार ने इस घटना पर क्या कूटनीतिक कदम उठाया है? ब्रिटिश सरकार ने ईरानी राजदूत को तलब कर अपनी कड़ी नाराजगी और विरोध दर्ज कराया है। 6. अमेरिका ने इस घटना के बाद एयरबेस से क्या कदम उठाया? अमेरिका ने संभावित खतरे को देखते हुए पिछले सप्ताह आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से अपने बमवर्षक विमानों को हटा लिया था। https://trendkia.com/europe/iran-behind-plot-to-attack-uk-airbase-claims-prime-minister-andy-burnham-47100 TrendKia — Har trend, sabse pehle.