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  "title": "इटली में मतदान प्रणाली में भारी फेरबदल, मेलोनी सरकार ने संसद से पास कराया नया चुनावी कानून",
  "summary": "इटली की संसद ने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के प्रस्तावित चुनावी सुधार बिल को 227 के मुकाबले 164 वोटों से पारित कर दिया है। विपक्ष ने इसे सत्ता में बने रहने की कोशिश बताया है।",
  "content": "इटली की संसद ने देश की चुनावी प्रणाली में बड़े बदलाव से जुड़े एक बेहद विवादास्पद विधेयक को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन द्वारा आगे बढ़ाए गए इस कानून के पक्ष में सांसदों ने 227 वोट डाले, जबकि इसके विरोध में 164 मत पड़े। इस नए कानून के तहत देश अपनी मौजूदा मिली-जुली चुनावी व्यवस्था को छोड़कर पूरी तरह से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली अपनाएगा। प्रधानमंत्री मेलोनी का दावा है कि इस बड़े कदम से संसद में स्पष्ट विजेता सामने आएंगे और देश को राजनीतिक रूप से एक मजबूत व टिकाऊ सरकार मिलेगी। दूसरी ओर, विपक्षी दल इस सुधार का कड़ा विरोध कर रहे हैं और उनका आरोप है कि यह पूरी कवायद अगले साल होने वाले चुनावों में मौजूदा गठबंधन को दोबारा सत्ता दिलाने के मकसद से तैयार की गई है।\n\nसीक्रेट बैलेट और मेलोनी की इस्तीफे की चेतावनी\nइस विधेयक पर मतदान से पहले संसद में बेहद तीखी बहस देखने को मिली। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस वोटिंग को अपने अधिकार और राजनीतिक पकड़ की परीक्षा बना दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी चुनावी योजना को संसद में खारिज कर दिया गया, तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगी और देश में समय से पहले चुनाव करा दिए जाएंगे। मतदान गुप्त मतदान यानी सीक्रेट बैलेट के जरिए हुआ, जिससे सरकार के भीतर बगावत का खतरा बढ़ गया था। हालांकि, संख्या बल सरकार के पक्ष में रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि यह मतदान शायद ही विफल होगा, क्योंकि यदि समय से पहले मध्यावधि चुनाव होते, तो कई सांसदों की संसदीय पेंशन की पात्रता खतरे में पड़ सकती थी। इस पेंशन को सुरक्षित रखने की मजबूरी ने भी सत्तारूढ़ गठबंधन को एकजुट रखने में मदद की।\n\nमौजूदा हाइब्रिड मॉडल से नए आनुपातिक सिस्टम की ओर\nइटली अब तक एक हाइब्रिड चुनावी ढांचे के तहत मतदान करता रहा है। इस पुरानी व्यवस्था में संसद के लगभग एक तिहाई सदस्यों का चुनाव फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट पद्धति से सीधे तौर पर होता था, जबकि शेष दो तिहाई सीटों का फैसला आनुपातिक प्रतिनिधित्व के जरिए किया जाता था। अब पारित किए गए नए कानून के बाद यह दोहरी व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाएगी और समूचा चुनाव आनुपातिक मतों पर आधारित होगा। इस बदलाव के साथ ही गठबंधन राजनीति के लिए नए नियम तय किए गए हैं। अब किसी भी आम चुनाव में उतरने से पहले गठबंधन बनाने वाले दलों को अपने प्रधानमंत्री पद के संयुक्त उम्मीदवार का औपचारिक ऐलान करना अनिवार्य होगा, साथ ही मतदाताओं के सामने अपना साझा न्यूनतम राजनीतिक कार्यक्रम भी पहले ही रखना होगा।\n\n42 प्रतिशत वोट पर मिलेगा 105 सीटों का भारी बोनस\nइस नए कानून का सबसे अहम और विवादित पहलू बहुमत बोनस का प्रावधान है। यदि कोई एकल पार्टी या गठबंधन देश भर में सबसे अधिक वोट हासिल करता है और उसका कुल वोट शेयर 42% के आंकड़े को पार कर जाता है, तो उसे संसद में 105 अतिरिक्त सीटें उपहार स्वरूप दी जाएंगी। इन 105 सीटों में से 70 अतिरिक्त सीटें संसद के निचले सदन में और 35 सीटें सीनेट में आवंटित की जाएंगी। इस बोनस सीट फॉर्मूले का सीधा असर यह होगा कि मामूली अंतर से जीतने वाला दल या गठबंधन भी दोनों सदनों में एक आरामदायक और मजबूत बहुमत में तब्दील हो जाएगा। विपक्ष का मुख्य ऐतराज इसी बिंदु पर है, क्योंकि उन्हें लगता है कि 42 प्रतिशत वोट शेयर के साथ कोई भी बड़ा गठबंधन संसद पर एकतरफा नियंत्रण हासिल कर सकता है।\n\nविपक्ष का कड़ा विरोध और लोकतंत्र के हनन का आरोप\nसंसद में गुरुवार को हुई तीखी चर्चा के दौरान वाम-मध्य विपक्षी दलों ने सरकार पर नई चुनावी नियमावली को जबरन थोपने का आरोप लगाया। विपक्षी सांसदों ने कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक सिद्धांतों की खुली अवहेलना करता है। डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता एली श्लेन ने संसद के पटल पर सरकार को सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि चुनावी कानून बदलने से कुछ हासिल नहीं होगा, क्योंकि विपक्षी गठबंधन किसी भी वोटिंग प्रणाली के तहत जीत दर्ज करने में सक्षम है। श्लेन ने सरकार पर अपनी गिरती लोकप्रियता को बचाने के लिए नियमों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। विपक्ष का मानना है कि मेलोनी का दक्षिणपंथी मोर्चा अपनी चुनावी संभावनाओं को सुरक्षित करने के लिए संस्थानों और नियमों को अपने अनुकूल ढाल रहा है।\n\nगठबंधन की आंतरिक खींचतान और मेलोनी का पलटवार\nइस चुनावी मसौदे को लेकर केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि मेलोनी के अपने गठबंधन के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आए थे। मेलोनी की ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी के साथ उनके प्रमुख सहयोगी दल, धुर-दक्षिणपंथी लीग और केंद्र-दक्षिणपंथी फोर्जा इटालिया, सीटों के बंटवारे और नई शर्तों को लेकर असहज थे। हालांकि, मतदान के बाद जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर अपने विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि जो लोग केंद्र-दक्षिणपंथी गठबंधन में फूट की उम्मीद लगाए बैठे थे, उन्हें आज तथ्यों के साथ जवाब मिल गया है। मेलोनी ने दोहराया कि उनका गठबंधन पूरी तरह से एकजुट, संगठित और नागरिकों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने आगे कहा कि ये नए नियम किसी खास दल के लिए नहीं, बल्कि किसी भी राजनीतिक दल की भावी सरकार में स्थिरता और संसदीय सामंजस्य को बढ़ावा देने के लिए लाए गए हैं।\n\nद्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे टिकाऊ सरकार\nसाल 2022 में सत्ता संभालने के बाद से जॉर्जिया मेलोनी के गठबंधन ने इटली को एक दुर्लभ राजनीतिक स्थिरता प्रदान की है। पिछले महीने ही उनकी सरकार ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से इटली की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बनने का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। इटली की राजनीति पारंपरिक रूप से बार-बार सरकारें गिरने और छोटे-छोटे गठबंधनों के टूटने के लिए जानी जाती रही है, लेकिन मेलोनी ने अब तक अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है। औपचारिक रूप से जॉर्जिया मेलोनी का मौजूदा कार्यकाल अक्टूबर 2027 में पूरा होना है, हालांकि यह संभावना बनी हुई है कि वह राजनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए आम चुनावों को अगले साल वसंत के मौसम में ही कराने का फैसला ले सकती हैं। नया कानून लागू होने के बाद इटली की राजनीति एक नए चुनावी दौर में प्रवेश करने जा रही है।\n\nइसका आप पर असर\nइटली की चुनावी प्रणाली में हुए इस बदलाव से देश में बार-बार सरकारें गिरने का सिलसिला थमने और नीतिगत निरंतरता बढ़ने की उम्मीद है।\n\n• मतदाताओं पर प्रभाव: मतदाताओं को अब चुनाव से पहले ही गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और साझा एजेंडे की पूरी जानकारी मिलेगी। इससे चुनाव बाद होने वाले गुप्त राजनीतिक समझौतों और जोड़-तोड़ पर प्रभावी रोक लगेगी।\n• स्पष्ट बहुमत की संभावना: चुनाव में 42 प्रतिशत से अधिक वोट पाने वाले सबसे बड़े दल या गठबंधन को 105 अतिरिक्त सीटें दी जाएंगी। इस बोनस व्यवस्था से देश में त्रिशंकु संसद की नौबत कम आएगी और स्थिर सरकार बनेगी।\n• विपक्षी दलों की रणनीति: विपक्षी खेमे के बिखरे रहने पर सत्ताधारी गठबंधन को बड़ा फायदा मिल सकता है। इसलिए छोटे और मध्यम विपक्षी दलों पर एकजुट होकर साझा मोर्चा बनाने का भारी राजनीतिक दबाव रहेगा।\n• आर्थिक व नीतिगत स्थिरता: सरकारों के जल्दी गिरने की अनिश्चितता समाप्त होने से इटली के बजटीय और आर्थिक सुधारों को गति मिलेगी। विदेशी निवेशकों और यूरोपीय साझेदारों के लिए सरकारी नीतियों का पूर्वानुमान लगाना अब अधिक आसान हो जाएगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nइटली लंबे समय से कमजोर और अस्थिर गठबंधनों से जूझता रहा है, जिसके चलते बार-बार सरकारें गिरती रही हैं। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश को स्थायी प्रशासन देने और चुनावी नतीजों में स्पष्टता लाने के लिए इस सुधार को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया था।\n\n• अस्थिरता का पुराना इतिहास: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से इटली में सरकारों का औसत कार्यकाल बेहद कम रहा है। मौजूदा दक्षिणपंथी गठबंधन ने इस राजनीतिक कमजोरी को दूर करने के लिए चुनावी नियमों को पुनर्गठित करने की पहल की।\n• पुराने हाइब्रिड सिस्टम की खामियां: पूर्ववर्ती व्यवस्था में फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट और आनुपातिक प्रतिनिधित्व के घालमेल से अक्सर संसद खंडित हो जाती थी। इसके चलते किसी भी गठबंधन के लिए बिना कड़े समझौतों के शासन चलाना मुश्किल साबित होता था।\n• मेलोनी का कड़ा अल्टीमेटम: प्रधानमंत्री ने विधेयक पारित न होने की स्थिति में पद छोड़ने और मध्यावधि चुनाव कराने की खुली चेतावनी दी थी। समय पूर्व चुनाव होने पर अपनी पेंशन छिनने के डर से सत्तारूढ़ सांसदों ने एकजुट होकर सुधार के पक्ष में मतदान किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इटली की संसद में चुनावी सुधार विधेयक कितने वोटों से पास हुआ?\nसंसद में इस सुधार के पक्ष में 227 वोट पड़े, जबकि विरोध में 164 सांसदों ने मतदान किया।\n\n2. नए कानून के तहत चुनावी प्रणाली में क्या मुख्य बदलाव किया गया है?\nदेश अब पुरानी हाइब्रिड व्यवस्था को त्यागकर पूरी तरह से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की ओर बढ़ रहा है।\n\n3. विजेता पार्टी या गठबंधन को कितनी बोनस सीटें मिलेंगी?\nकम से कम 42 प्रतिशत वोट हासिल करने वाले अग्रणी दल या गठबंधन को संसद में 105 अतिरिक्त सीटें (70 निचले सदन में और 35 सीनेट में) मिलेंगी।\n\n4. विपक्षी दलों ने इस नए चुनावी कानून का विरोध क्यों किया?\nविपक्ष का आरोप है कि यह कानून सत्ताधारी दक्षिणपंथी गठबंधन को सत्ता में बनाए रखने के लिए गढ़ा गया है और यह लोकतंत्र की अनदेखी करता है।\n\n5. प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का मौजूदा कार्यकाल कब समाप्त हो रहा है?\nउनका कार्यकाल आधिकारिक तौर पर अक्टूबर 2027 में समाप्त होगा, हालांकि वे अगले साल वसंत में भी चुनाव करा सकती हैं।",
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  "category": "यूरोप",
  "publishedAt": "2026-10-08",
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    "यूरोपीय राजनीति"
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