# यूरोपीय सुपरमार्केट के फ्रीजर्स पर बड़ा साइबर हमला, ब्रिटिश फूड सप्लाई चेन में भी बढ़ी हलचल

> यूरोप भर के सैकड़ों सुपरमार्केट्स में फ्रिज सिस्टम हैक कर तापमान बढ़ाए जाने से लाखों यूरो का भोजन बर्बाद हो गया है। ब्रिटेन की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ने स्थानीय खाद्य आपूर्ति तंत्र में सुरक्षा कमजोरियां सामने आने के बाद अलर्ट जारी किया है।

**Type:** article · **Category:** यूरोप · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/europe/jhajjara-ki-taraha-yuropa-men-suparamarketa-phrijara-haika-uk-phuda-saplai-chena-men-satarkata-55788 · **Language:** Hindi
**Tags:** साइबर हमला, यूरोप सुपरमार्केट, खाद्य सुरक्षा, एनसीएससी, रेफ्रिजरेटर हैक, ब्रिटिश रिटेल

यूरोप के कई मुल्कों में सुपरमार्केट्स के कोल्ड स्टोरेज सिस्टम में घुसपैठ कर रेफ्रिजरेटरों का तापमान बढ़ाने की एक असामान्य साइबर घटना सामने आई है। इस तकनीकी हमले ने सैकड़ों रिटेल स्टोर्स में रखे ताजे और फ्रोजन खाद्य पदार्थों को खराब कर दिया, जिससे लाखों यूरो का नुकसान हुआ है। इस घटना की आंच ब्रिटेन तक भी पहुंची है, जहां नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर यानी एनसीएससी ने स्वीकार किया है कि घरेलू स्तर पर भी कुछ संवेदनशील प्रणालियों में इसी तरह की खामियों का फायदा उठाया गया। इस खतरे को देखते हुए ब्रिटिश साइबर एजेंसी ने रात भर काम करके संभावित रूप से प्रभावित होने वाले संस्थानों को पहले ही सतर्क कर दिया।

## ब्रिटिश मीट उद्योग में हलचल और सतर्कता की अपील
ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ इंडिपेंडेंट मीट सप्लायर्स यानी एआईएमएस के मुताबिक, उसके 300 से अधिक सदस्यों में से कुछ संस्थान अनजाने में इस साइबर हमले का अप्रत्यक्ष शिकार बने हैं। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रभावित सदस्य का मांस खराब नहीं हुआ। एआईएमएस के संचार प्रमुख टोनी गुडगर ने स्पष्ट किया कि भले ही किसी का स्टॉक नष्ट नहीं हुआ, लेकिन यह वाकया खाद्य उद्योग के हर स्तर पर काम करने वाले कारोबारियों के लिए एक कड़ा सबक है। उन्होंने आगाह किया कि आपूर्ति श्रृंखला में मौजूद हर कड़ी को कुछ असामाजिक तत्व आसान निशाना मान सकते हैं, इसलिए पूरे उद्योग को तकनीकी सुरक्षा के प्रति बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

## सोमवार की रात कई यूरोपीय मुल्कों में तबाही
यह संगठित हमला सोमवार की रात को हुआ, जिसके बाद आयरलैंड, स्वीडन, एस्टोनिया और बेल्जियम के सुपरमार्केट्स में तापमान अचानक बढ़ गया। सैकड़ों दुकानों को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में ताजे और जमे हुए उत्पाद सड़ गए, जिसका वित्तीय नुकसान लाखों यूरो आंका गया है। साइबर सुरक्षा जांचकर्ताओं ने कई महीने पहले ही उन सॉफ्टवेयर प्रणालियों में गंभीर खामियों की पहचान की थी, जिनका इस्तेमाल रेफ्रिजरेशन यूनिट्स को दूर बैठकर नियंत्रित या प्रबंधित करने के लिए किया जाता है। हमलावरों ने ठीक इन्हीं पुरानी और अनसुलझी सुरक्षा कमियों का फायदा उठाकर तापमान नियंत्रण में छेड़छाड़ की।

## हमले का तरीका और प्रभावित स्टोर्स का आंकड़ा
सोमवार के इस साइबर वाकये में बेल्जियम और लक्ज़मबर्ग के करीब 40 डेलहाइज़ सुपरमार्केट सीधे तौर पर प्रभावित हुए। इसके अलावा स्वीडन, आयरलैंड, नीदरलैंड्स, एस्टोनिया और फिनलैंड में भी कई रिटेल दुकानें इसकी चपेट में आईं। प्रभावित रेफ्रिजरेटर बनाने वाली बेल्जियम की कंपनी सबकॉबेल ने बताया कि हमलावरों ने यूनिट्स के इवेपोरेटर को डिफ्रॉस्ट मोड पर डाल दिया था, जिसकी वजह से तापमान तेजी से गर्म होने लगा। माना जा रहा है कि पिछले महीने फ्रांस के सैकड़ों सुपरमार्केट्स को नुकसान पहुंचाने वाली घटना में भी बिल्कुल यही तरीका अपनाया गया था। बेल्जियम में डेलहाइज़ स्टोर चलाने वाले मैथ्यू टिलमैन ने इस बर्बादी को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि जब दुनिया में इतने लोग भूखे हैं, तब इतना खाना फेंकना दिल तोड़ देने वाला है। कई खुदरा व्यापारियों ने पुष्टि की कि उनके पास खराब उत्पाद फेंकने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था, जिससे व्यक्तिगत स्टोर्स को सैकड़ों हजारों यूरो का नुकसान झेलना पड़ा।

## बुनियादी ढांचे में कम निवेश और एआई का बढ़ता खतरा
एनसीएससी के मुख्य कार्यकारी डॉ रिचर्ड हॉर्न ने कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन हमलों के पीछे किसका हाथ है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कंपनियों को अपने उन तकनीकी टूल्स को तुरंत आधुनिक और सुरक्षित बनाना होगा जिन पर दैनिक कामकाज निर्भर करता है। डॉ हॉर्न ने रेखांकित किया कि जिस टेक्नोलॉजी पर हमारा समाज टिका है, उसमें जरूरी स्तर का निवेश नहीं किया गया है। बहुत सी कंपनियां सिस्टम के एक्सपायरी या एंड ऑफ लाइफ पार करने के बाद भी उनका इस्तेमाल करती रहती हैं, न तो उन्हें समय पर अपग्रेड किया जाता है और न ही उन्हें इंटरनेट से अलग सुरक्षित कम्पार्टमेंट में रखा जाता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही हमलावरों के लिए खुले दरवाजे की तरह होती है, और विरोधी ताकतों के हाथ में एआई होने से वे इन सुरक्षा छेदों को बहुत तेजी से खोजकर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

## ब्रिटिश सुपरमार्केट्स की सुरक्षा तैयारियां
ब्रिटेन में अब तक इस तरह के नुकसान का कोई बड़ा असर नहीं दिखा है, फिर भी बड़े रिटेलर्स चौकन्ने हो गए हैं। ब्रिटिश रिटेल कंसोर्टियम के नियामक मामलों के सहायक निदेशक ग्राहम व्यान ने बताया कि रिटेलर्स साइबर सुरक्षा में भारी निवेश करते हैं और वे एनसीएससी के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनके फ्रिज और फ्रीजर संभावित हमलों से पूरी तरह सुरक्षित रहें। इस कंसोर्टियम में एस्डा, लिडल, एमएंडएस, सेन्सबरीज और टेस्को जैसे प्रमुख ब्रिटिश सुपरमार्केट शामिल हैं, जो अपनी कोल्ड स्टोरेज श्रृंखला को डिजिटल हमलों से बचाने के लिए तकनीकी निगरानी बढ़ा रहे हैं।

## इसका आप पर असर
इस तकनीकी हमले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दैनिक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और खुदरा खाद्य प्रणालियों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ा है।

- **खाद्य बर्बादी और सप्लाई:** यूरोपीय खुदरा दुकानों में तापमान बढ़ने के कारण लाखों यूरो की ताजा और फ्रोजन खाद्य सामग्री नष्ट हो गई है। प्रभावित इलाकों के ग्राहकों को स्थानीय सुपरमार्केट्स में कई ताजे उत्पादों की अचानक किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
- **ब्रिटिश उपभोक्ताओं के लिए स्थिति:** ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर खाद्य सामग्री का नुकसान नहीं हुआ है और सुपरमार्केट्स सुरक्षित हैं। स्थानीय खरीदारों के लिए रोजमर्रा की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और आपूर्ति व्यवस्था पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ा है।
- **खुदरा कारोबारियों पर वित्तीय दबाव:** अलग-अलग स्टोर्स को सैकड़ों हजारों यूरो का नुकसान झेलना पड़ा है। स्टोर संचालकों को अब कोल्ड स्टोरेज उपकरणों को सुरक्षित करने और नेटवर्क को इंटरनेट से अलग रखने के लिए अतिरिक्त खर्च करना होगा।
- **आपूर्ति श्रृंखला में तकनीकी सतर्कता:** कोल्ड स्टोरेज और खाद्य आपूर्ति से जुड़े उद्योगों को अपने पुराने सॉफ्टवेयर तुरंत अपडेट करने होंगे। कंपनियों को अपने तापमान नियंत्रण टूल्स को सीधे इंटरनेट से हटाने और सुरक्षा ऑडिट कराने की हिदायत दी गई है।

## ऐसा क्यों हुआ
सुपरमार्केट रेफ्रिजरेटरों में लगे रिमोट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर की पुरानी तकनीकी खामियों और कमजोर नेटवर्क सुरक्षा के कारण यह हमला संभव हुआ।

- **प्रत्यक्ष तकनीकी कारण:** हमलावरों ने रिमोट कंट्रोल सिस्टम की सुरक्षा कमजोरियों का फायदा उठाकर फ्रिज के इवेपोरेटर को डिफ्रॉस्ट मोड पर डाल दिया। इस वजह से यूनिट्स ने ठंडा करने के बजाय अंदर का तापमान तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया।
- **अनसुलझी सॉफ्टवेयर खामियां:** सुरक्षा शोधकर्ताओं ने कुछ महीने पहले ही इन प्रणालियों में मौजूद कमजोरियों को उजागर कर दिया था। इसके बावजूद कई कारोबारियों ने अपने पुराने सिस्टम्स को न तो अपडेट किया और न ही उन्हें इंटरनेट से अलग सुरक्षित रखा।
- **पूर्व घटना की पुनरावृत्ति:** पिछले महीने फ्रांस के सैकड़ों सुपरमार्केट्स में भी बिल्कुल इसी तरीके का इस्तेमाल करके रेफ्रिजरेटरों को निशाना बनाया गया था। पुरानी घटनाओं से सीख न लेने के कारण यह हमला दूसरे यूरोपीय देशों में भी आसानी से फैल गया।
- **हमलावरों की पहचान:** इस साइबर हमले के पीछे कौन सा समूह जिम्मेदार है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल इस मामले की जांच कर रही हैं और तकनीकी कमजोरियों को दूर करने पर ध्यान दे रही हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. यूरोपीय सुपरमार्केट्स में क्या साइबर घटना हुई?
हैकर्स ने रिमोट सिस्टम में सेंध लगाकर फ्रीजर और रेफ्रिजरेटरों का तापमान बढ़ा दिया, जिससे लाखों यूरो का भोजन खराब हो गया।

### 2. इस हमले से कौन-कौन से देश प्रभावित हुए हैं?
बेल्जियम, स्वीडन, आयरलैंड, एस्टोनिया, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड्स और फिनलैंड के सुपरमार्केट्स में इसका असर देखा गया।

### 3. क्या ब्रिटेन में खाने-पीने की चीजों का नुकसान हुआ है?
ब्रिटेन में कुछ संवेदनशील प्रणालियों में खामियां पाई गईं, लेकिन ब्रिटिश मीट सप्लायर्स के अनुसार उनके किसी सदस्य का मांस खराब नहीं हुआ।

### 4. हैकर्स ने फ्रिज का तापमान कैसे बढ़ाया?
रेफ्रिजरेटर निर्माता सबकॉबेल के अनुसार, हमलावरों ने यूनिट्स के इवेपोरेटर को डिफ्रॉस्ट मोड पर स्विच कर दिया था।

### 5. क्या इस हमले के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान हो गई है?
ब्रिटिश साइबर एजेंसी एनसीएससी के मुताबिक अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन हमलों के पीछे किसका हाथ है।

### 6. ब्रिटिश सुपरमार्केट्स अपनी सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रहे हैं?
एस्डा, लिडल, एमएंडएस, सेन्सबरीज और टेस्को जैसे प्रमुख रिटेलर्स एनसीएससी के साथ मिलकर अपने फ्रीजर सिस्टम्स को सुरक्षित कर रहे हैं।

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