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  "type": "article",
  "title": "खेरसॉन के ओलेशकी से सुरक्षित निकाले जा रहे हैं नागरिक, सीजफायर के बीच खुला बचाव गलियारा",
  "summary": "खेरसॉन के फ्रंटलाइन इलाके में युद्धविराम लागू होने के बाद ओलेशकी शहर से नागरिकों को निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस निकासी अभियान के दौरान लोगों को सुरक्षित मार्ग और मानवीय सहायता मुहैया कराई जा रही है।",
  "content": "यूक्रेन के खेरसॉन क्षेत्र में स्थित और रूसी कब्जे वाले शहर ओलेशकी से स्थानीय निवासियों को बाहर निकालने का काम शुरू हो गया है। रूसी और यूक्रेनी दोनों पक्षों के अधिकारियों ने इस राहत अभियान की पुष्टि की है। इस पूरे क्षेत्र में मंगलवार से एक सीजफायर लागू है, जिसे अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की मध्यस्थता से संभव बनाया गया। इस अस्थायी शांति समझौते के चलते शहर से बाहर निकलने वाली प्रमुख सड़कों से बारूदी सुरंगों को हटाने का काम पूरा किया जा सका, जिससे लोगों की सुरक्षित आवाजाही का रास्ता साफ हुआ।\n\nसीमित समय और निकासी की व्यवस्था\nओलेशकी से निकलने के इच्छुक बाशिंदों के लिए चार घंटे का एक खास समय तय किया गया था। इस अवधि में करीब 750 लोगों को सुरक्षित निकालने के मकसद से 25 बसों का एक बड़ा काफिला तैनात किया गया। यह व्यवस्था दोपहर 14:00 बजे (12:00 जीएमटी) तक प्रभावी रही। इसके साथ ही चलने-फिरने में असमर्थ और गंभीर रूप से बीमार लोगों की मदद के लिए विशेष एम्बुलेंस भी मौके पर भेजी गईं, ताकि किसी भी जरूरतमंद को रास्ते में चिकित्सकीय दिक्कतों का सामना न करना पड़े।\n\nशहर में भीषण तबाही मची हुई है और बुनियादी नागरिक सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। नलों में पानी नहीं आ रहा है, गैस की आपूर्ति ठप है और बिजली ग्रिड पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। इन विकट परिस्थितियों के बावजूद, कई सौ नागरिकों ने शहर छोड़कर कहीं भी न जाने का फैसला किया है और वे अपने क्षतिग्रस्त मकानों में ही डटे हुए हैं।\n\nमानवाधिकार अधिकारियों की संयुक्त पहल\nयूक्रेन के मानवाधिकार लोकपाल दिमित्रो लुबिनेट्स ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि जो कोई भी ओलेशकी छोड़ना चाहता है, उसे सुरक्षित रूप से जाने का अवसर दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जो लोग वहीं रुकने का निर्णय लेते हैं, उन्हें हर आवश्यक मानवीय सहायता प्रदान की जाएगी। यूक्रेन का स्वतंत्र नियंत्रण वाला इलाका ओलेशकी से मात्र 5 किलोमीटर (3.1 मील) की दूरी पर है। हालांकि, सीधे संपर्क मार्ग बंद होने के कारण वहां से निकलने वाले लोगों को एक लंबा और जटिल रास्ता तय करना होगा।\n\nनिकासी योजना के अनुसार, नागरिकों को सबसे पहले रूसी कब्जे वाले क्षेत्र से होते हुए दक्षिणी रूस के शहर अनापा ले जाया जाएगा। अनापा से उन्हें रूसी सरकारी विमान के जरिए बेलारूस के गोमेल शहर पहुंचाया जाएगा। इसके बाद वे सड़क मार्ग से सीमा पार करके यूक्रेन के चेर्निहाइव क्षेत्र में दाखिल होंगे। दूसरी ओर, कुछ नागरिकों के बारे में यह अनुमान है कि वे रूसी नियंत्रण वाले इलाकों में ही बसने का विकल्प चुन सकते हैं।\n\nजटिल यात्रा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं\nइस निकासी अभियान को संचालित करने के लिए दिमित्रो लुबिनेट्स और उनकी रूसी समकक्ष याना लांत्रातोवा शुक्रवार को एक साथ ओलेशकी पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने रूसी कब्जे वाले क्रीमिया प्रायद्वीप के आर्मियान्स्क से अपनी यात्रा शुरू की थी। युद्ध शुरू होने के बाद से यह पहला मौका है जब यूक्रेन का कोई उच्च अधिकारी रूसी कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्र के दौरे पर गया है। इसके अलावा, शनिवार को निकाले गए नागरिकों को वापस यूक्रेन लाते समय लुबिनेट्स रूस का दौरा करने वाले पहले यूक्रेनी अधिकारी भी बन जाएंगे।\n\nओलेशकी में युद्धविराम को लागू कराने और मानवीय गलियारा बनाने के लिए लांत्रातोवा के साथ नजदीकी तालमेल बैठाना पड़ा। लुबिनेट्स ने इस कदम को पूरी तरह इंसानी जिंदगियों को बचाने के हित में उठाया गया कदम बताया है। हालांकि, यूक्रेन के भीतर कुछ हलकों में इस मुलाकात को लेकर नाराजगी भी देखी गई है। आलोचकों का मानना है कि जिस रूसी सत्ता ने शहर के कई नागरिकों की जान ली और बाकी बचे लोगों का जीवन दूभर कर दिया, उसके प्रतिनिधि के साथ यूक्रेनी अधिकारी का खड़े होना असहज करने वाला है।\n\nजमीनी हालात और सहायता के प्रयास\nलुबिनेट्स और लांत्रातोवा दोनों ने ओलेशकी से अपने सोशल मीडिया चैनलों पर कई वीडियो साझा किए। इन वीडियो में बताया गया कि नागरिकों को उनकी इच्छा के अनुसार दो अलग-अलग समूहों में बांटा गया, ताकि जो लोग रूसी नियंत्रण वाले क्षेत्र में जाना चाहते हैं वे वहां जा सकें और जो यूक्रेन लौटना चाहते हैं उन्हें यूक्रेन भेजा जा सके। एक वीडियो में लुबिनेट्स रोते-बिलखते स्थानीय निवासियों से मिलते हुए दिखाई देते हैं, जहां उन्होंने कहा कि असली समस्या यह है कि बहुत से लोग रुक रहे हैं। उन्होंने आगे जोड़ा कि उन्हें बताया गया है कि यह नागरिकों की अपनी मर्जी है, और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।\n\nरूस ने गुरुवार को जानकारी दी थी कि जो लोग शहर नहीं छोड़ना चाहते, उनके लिए दर्जनों टन राहत सामग्री तैयार रखी गई है। इस सहायता पैकेज में भोजन, जीवनरक्षक दवाएं, स्वच्छता उत्पाद और जनरेटर चलाने के लिए जरूरी ईंधन शामिल किया गया है, जिससे बुनियादी जरूरतें पूरी की जा सकें।\n\nस्थानीय लोगों के रुकने की दर्दनाक वजहें\nओलेशकी की एक महिला निवासी ने शहर न छोड़ने का फैसला किया। उनका कहना था कि बचाव दल उनके पालतू जानवरों को साथ ले जाने की अनुमति नहीं दे रहे थे, इसलिए उन्होंने रुकने का मन बना लिया। कीव में रहने वाली ओलेना ने बताया कि ओलेशकी में उनकी दादी और परिवार के अन्य सदस्य भी वहीं रुके हुए हैं। बुजुर्ग पीढ़ी अपनी मिट्टी और घर को छोड़कर कहीं जाने को तैयार नहीं है। ओलेना ने बताया कि वह अपने पिता को जाने के लिए बमुश्किल राजी कर पाईं, क्योंकि उन्होंने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया है जिसे उनके पिता अन्यथा कभी नहीं देख पाते।\n\nओलेना ने पिछले साल सर्दियों में घटी एक दुखद घटना का भी जिक्र किया, जब उनकी नानी की बहन की ओलेशकी में जान चली गई थी। बर्फ से ढकी जमीन पर बिछी एक बारूदी सुरंग पर पैर पड़ने से उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए थे। स्थानीय लोग उन्हें बगीचे में इस्तेमाल होने वाली हाथगाड़ी में लादकर अस्पताल ले गए थे। ओलेना के अनुसार, ओलेशकी में घायल और मृत लोगों को अस्पताल तथा मुर्दाघर तक पहुंचाने के लिए स्थानीय लोग केवल बगीचे की हाथगाड़ियों का ही सहारा लेते हैं।\n\nयुद्धविराम की सीमा और कूटनीतिक आयाम\nयह युद्धविराम रविवार 1 नवंबर के अंत तक लागू रहने वाला है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण आक्रमण के बाद से खेरसॉन क्षेत्र में यह शांति के पहले कुछ दिन साबित हुए हैं। खेरसॉन के निवासी इस सीजफायर से काफी राहत महसूस कर रहे हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों में यह गहरी चिंता भी है कि इस शांति समझौते की आड़ में रूस नीप्रो नदी के किनारों पर अपनी सैन्य ताकत को दोबारा मजबूत कर सकता है, जिससे सीजफायर खत्म होने के बाद एक नया भीषण हमला शुरू होने का खतरा बना हुआ है।\n\nशुक्रवार को क्रेमलिन ने यह स्पष्ट कर दिया कि ओलेशकी में हुए इस समझौते की सफलता का यह अर्थ बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि रूस पूरे यूक्रेन में युद्धविराम का विस्तार करने को तैयार है। मॉस्को ने इस निकासी प्रक्रिया को दिखाने के लिए मुट्ठी भर विदेशी पत्रकारों को भी आमंत्रित किया है, ताकि इसे ओलेशकी की जनता की रक्षा के लिए दया भाव से चलाए गए एक मानवीय मिशन के रूप में पेश किया जा सके। वहीं यूक्रेन में कई लोगों का मानना है कि रूस का वास्तविक इरादा व्हाइट हाउस के साथ संबंध सुधारना और आगामी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को राजनीतिक बढ़त दिलाना है।\n\nइसका आप पर असर\nइस अस्थायी युद्धविराम और बचाव अभियान से युद्धग्रस्त क्षेत्र के नागरिकों को सुरक्षित निकलने और बुनियादी सहायता मिलने का तात्कालिक अवसर मिला है।\n\n• नागरिकों की सुरक्षा: युद्ध क्षेत्र में फंसे 750 लोगों के लिए सुरक्षित निकलने का रास्ता बना है। जो लोग निकलना चाहते हैं वे बिना किसी गोलीबारी के अपनी पसंद के गंतव्य तक पहुंच सकते हैं।\n• सहायता सामग्री की आपूर्ति: शहर में रुके कई सौ लोगों के लिए भोजन, दवाइयां और ईंधन की आपूर्ति की जाएगी। इससे ध्वस्त बुनियादी ढांचे के बीच जीवन रक्षक संसाधनों की उपलब्धता संभव होगी।\n• यात्रा की कठिनाई: यूक्रेन लौटने वाले लोगों को रूस और बेलारूस से होकर लंबा चक्कर लगाना होगा। सीधे सीमा पार करने के बजाय यात्रियों को कई दिन का सफर तय करना पड़ेगा।\n• सामरिक जोखिम: सीजफायर समाप्त होने के बाद स्थानीय आबादी पर नए हमलों का खतरा बना हुआ है। नदी के किनारों पर सैन्य जमावड़े के कारण 1 नवंबर के बाद हालात फिर बिगड़ सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nखेरसॉन में भीषण मानवीय संकट और कूटनीतिक वार्ताओं के मेल से यह अस्थायी युद्धविराम और बचाव गलियारा संभव हो सका है।\n\n• सीजफायर समझौता: अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की मध्यस्थता से इस क्षेत्र में संघर्ष विराम लागू हुआ। इसी समझौते के आधार पर सड़क मार्ग से बारूदी सुरंगें हटाकर निकासी का रास्ता बनाया गया।\n• मानवीय संकट की गंभीरता: ओलेशकी शहर में बिजली, पानी और गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो चुकी थी। बुनियादी ढांचे के विनाश और भारी जान-माल के नुकसान ने मानवीय गलियारा खोलना अनिवार्य बना दिया।\n• कूटनीतिक हित: रूस इस अभियान के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी प्रशासन के सामने सकारात्मक छवि पेश करना चाहता है। विश्लेषकों का मानना है कि इसका संबंध आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से भी जुड़ा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ओलेशकी शहर से लोगों को निकालने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?\nनागरिकों को निकालने के लिए 25 बसों का काफिला और बीमार लोगों के लिए विशेष एम्बुलेंस लगाई गई हैं, जिससे 750 लोग निकल सकें।\n\n2. इस क्षेत्र में युद्धविराम किसकी मध्यस्थता से हुआ है?\nयह युद्धविराम अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की मध्यस्थता से संभव हुआ है।\n\n3. ओलेशकी से निकलने वाले लोगों को यूक्रेन जाने के लिए कौन सा रास्ता लेना होगा?\nलोगों को पहले रूस के अनापा शहर जाना होगा, फिर विमान से बेलारूस के गोमेल और वहां से सड़क मार्ग से यूक्रेन के चेर्निहाइव पहुंचना होगा।\n\n4. खेरसॉन में लागू यह सीजफायर कब तक चलेगा?\nयह युद्धविराम रविवार 1 नवंबर के अंत तक प्रभावी रहने के लिए तय किया गया है।\n\n5. शहर में रहने वाले लोगों को क्या सुविधाएं दी जा रही हैं?\nशहर में रुकने वालों के लिए दर्जनों टन भोजन, दवाइयां, स्वच्छता उत्पाद और जनरेटर के लिए ईंधन भेजा जा रहा है।",
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