पोस्ट-ब्रेक्सिट नियमों में उलझी 78 वर्षीय ब्रिटिश विधवा, 22 साल बाद स्वीडन से निकाला जाने का खतरा स्वीडन में 22 साल से रह रही 78 वर्षीय सेवानिवृत्त नर्स पोस्ट-ब्रेक्सिट निवास आवेदन की समयसीमा चूकने के कारण निर्वासन के संकट से जूझ रही हैं। स्वीडन में दो दशकों से अधिक समय से रह रही एक 78 वर्षीय ब्रिटिश सेवानिवृत्त नर्स को यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर होने के बाद निवास नियमों से जुड़े एक प्रशासनिक आवेदन की समयसीमा चूकने के कारण देश से निकाले जाने का सामना करना पड़ रहा है। 22 साल पहले स्वीडन आकर बसीं जोयस थॉमस को आव्रजन अधिकारियों द्वारा मंगलवार, 8 सितंबर तक स्वेच्छा से देश छोड़ने का औपचारिक नोटिस दिया गया है। इस मामले ने पूरे यूरोप में लंबे समय से रह रहे ब्रिटिश नागरिकों पर पोस्ट-ब्रेक्सिट नियमों के कड़े प्रभाव और प्रशासनिक जटिलताओं को उजागर किया है। पारिवारिक जड़ें और निर्वासन का गहरा मानवीय प्रभाव जोयस थॉमस 22 वर्ष पूर्व अपने पति के साथ सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन बिताने के लिए स्वीडन आई थीं। तीन साल पहले उनके पति का कैंसर से निधन हो गया था, जिसके बाद से वह स्वीडन में ही रहकर अपने स्थानीय सामाजिक और पारिवारिक नेटवर्क के सहारे जीवन व्यतीत कर रही हैं। स्वीडन में बिताए दो दशकों के दौरान थॉमस ने वहां अपनी मजबूत पारिवारिक जड़ें जमाई हैं। उनका बेटा, पोते-पोतियां और करीबी दोस्त सभी स्वीडन में रहते हैं, और उनके दिवंगत पति की कब्र भी स्वीडन में ही स्थित है, जिससे उनका जीवन पूरी तरह से इस देश से जुड़ा हुआ है। देश छोड़ने के प्रशासनिक दबाव ने 78 वर्षीय विधवा महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। थॉमस ने बताया कि वह निरंतर चिंता और तनाव से जूझ रही हैं, जिसके कारण उनके लिए सामान्य रूप से सोना और खाना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने साझा किया कि हर सुबह उठना उनके लिए भारी मानसिक भय लेकर आता है क्योंकि उन्हें यह नहीं मालूम होता कि उनके भविष्य का क्या होगा और क्या सीमा अधिकारी उन्हें अपने घर और परिवार से दूर करने का फरमान जारी कर देंगे। प्रशासनिक प्रक्रिया में मानवीय संवेदनाओं की कमी पर दुख और निराशा व्यक्त करते हुए थॉमस ने सवाल उठाया कि स्वीडन में 20 से अधिक वर्षों तक रहने, अपने परिवार और दोस्तों के साथ जीवन बिताने के बावजूद उन्हें इस उम्र में बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह इस स्थिति से बेहद थक चुकी हैं और अपनी इस बढ़ती उम्र में कानूनी लड़ाइयों और बेदखली के भय को सहने में खुद को असमर्थ महसूस कर रही हैं। पोस्ट-ब्रेक्सिट निवास नियम और अपीलों का घटनाक्रम थॉमस के सामने खड़ी कानूनी मुसीबतें मुख्य रूप से ब्रेक्सिट के बाद अंतरराष्ट्रीय कानूनों में हुए बदलावों का परिणाम हैं। जब 31 जनवरी 2020 को ब्रिटेन आधिकारिक तौर पर यूरोपीय संघ से बाहर हुआ, तो ब्रिटिश नागरिक अपने आप ही यूरोपीय संघ के नागरिकों के अधिकारों से वंचित हो गए। इसके परिणामस्वरूप, स्वीडन जैसे यूरोपीय संघ के देशों में रह रहे ब्रिटिश नागरिक अब निवास के स्वचालित अधिकार पर निर्भर नहीं रह सकते थे। इस बदलाव को लागू करने के लिए यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के बीच हुए समझौते के तहत एक संक्रमणकालीन अवधि तय की गई थी, जिसके दौरान ईयू देशों में रह रहे ब्रिटिश नागरिकों को औपचारिक निवास स्थिति के लिए आवेदन करना था। स्वीडन में यह आवेदन करने की समयसीमा 31 दिसंबर 2021 को समाप्त हो गई थी। हालांकि, थॉमस और उनके दिवंगत पति को इस बात की जानकारी ही नहीं दी गई थी कि उन्हें देश में वैध रूप से रहने के लिए किसी नए कागजी आवेदन को जमा करने की आवश्यकता है। थॉमस को पहली बार अपनी गैर-कानूनी निवास स्थिति का पता 2023 में चला, जब वह विदेश यात्रा के बाद स्वीडन वापस लौट रही थीं और सीमा नियंत्रण अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनके पास वैध निवास दस्तावेज नहीं हैं। इसके बाद, उन्होंने अपनी स्थिति को वैध बनाने के लिए कई निवास आवेदन और प्रशासनिक अपीलें प्रस्तुत कीं। हालांकि, उनकी लंबी रहने की अवधि और मजबूत पारिवारिक संबंधों के बावजूद, स्वीडन के अधिकारियों द्वारा उनके प्रत्येक आवेदन और अपील को खारिज कर दिया गया। प्रशासनिक कार्रवाई पिछले महीने अपने चरम पर पहुंच गई जब स्वीडन में प्रवासन और शरण मामलों का प्रबंधन करने वाली सरकारी एजेंसी माइग्रेशन्सवेर्केट ने उन्हें औपचारिक नोटिस जारी कर स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए मंगलवार, 8 सितंबर की समयसीमा निर्धारित कर दी। थॉमस के वकील कानूनी तर्कों के आधार पर इस बेदखली आदेश को चुनौती दे रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अंतिम फैसले का इंतजार अभी जारी है। ब्रिटिश नागरिकों को देश से निकालने के आदेश में स्वीडन यूरोपीय संघ में शीर्ष पर आधिकारिक आंकड़े दर्शाते हैं कि थॉमस के खिलाफ की जा रही कार्रवाई स्वीडन में पोस्ट-ब्रेक्सिट ब्रिटिश निवासियों के प्रति अपनाई जा रही एक व्यापक और सख्त नीति का हिस्सा है। यूरोस्टैट द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, 2021 और 2025 के बीच स्वीडिश अधिकारियों ने 2,490 यूके नागरिकों को देश छोड़ने के आदेश दिए। यह संख्या इसी अवधि के दौरान सभी 27 यूरोपीय संघ सदस्य देशों द्वारा ब्रिटिश नागरिकों को जारी किए गए कुल 7,500 निर्वासन आदेशों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। इसके अतिरिक्त, आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि ब्रेक्सिट नियम लागू होने के बाद से अब तक 458 ब्रिटिश नागरिकों को स्वीडन से जबरन निकाला गया है या निर्वासित किया गया है। थॉमस के मामले पर माइग्रेशन्सवेर्केट ने कहा कि वह संबंधित व्यक्ति की सहमति के बिना व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। एजेंसी ने इस सवाल का भी जवाब नहीं दिया कि वर्तमान में स्वीडन भर में कितने अन्य ब्रिटिश नागरिकों को निर्वासन का खतरा है। स्वीडिश प्रवासन मंत्री ने नियमों में उदारता बरतने का संकेत दिया पोस्ट-ब्रेक्सिट निर्वासन पर बढ़ते विवाद के बीच स्टॉकहोम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के बयान सामने आए हैं। स्वीडन के प्रवासन मंत्री जोहान फ़ॉरसेल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान आव्रजन ढांचा पिछली सरकार द्वारा लागू किया गया था। हालांकि, फ़ॉरसेल ने पुष्टि की कि वर्तमान सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और यह जांच कर रही है कि प्रभावित व्यक्तियों की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। हालांकि मंत्री फ़ॉरसेल ने सीधे तौर पर थॉमस के मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि स्वीडिश सरकार का मानना है कि प्रवासन नियमों को उदारतापूर्वक लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ब्रिटेन, स्वीडन के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण साझेदार है और स्वीडन चाहता है कि वहां रहने और काम करने वाले ब्रिटिश नागरिक वहीं बने रहें। मंत्री फ़ॉरसेल ने आगे कहा कि कार्यकारी अधिकारी वर्तमान में संबंधित स्वीडिश प्रशासनिक प्राधिकरणों के साथ सक्रिय चर्चा कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट तस्वीर मिल सके कि प्रभावित ब्रिटिश निवासियों के लिए कौन से कानूनी या प्रक्रियात्मक उपाय संभव हो सकते हैं। राजनयिक पहल और ब्रिटिश सरकार का रुख इस घटनाक्रम ने ब्रिटेन और स्वीडन के बीच राजनयिक संवाद को भी सक्रिय कर दिया है। ब्रिटेन के फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस के एक प्रवक्ता ने स्वीडिश अधिकारियों के उस बयान का स्वागत किया जिसमें नियमों की समीक्षा की बात कही गई है। ब्रिटिश प्रवक्ता ने कहा कि यूके के अधिकारी प्रभावित नागरिकों के हित में समाधान तलाशने के लिए स्वीडिश एजेंसियों को सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मंगलवार, 8 सितंबर की समयसीमा नजदीक आने के साथ ही जोयस थॉमस स्वीडन में अपने घर पर इंतजार कर रही हैं, इस उम्मीद में कि राजनयिक प्रयास या मंत्री स्तर का हस्तक्षेप उन्हें उनके परिवार और पति की यादों से दूर होने से बचा लेगा। इसका आप पर असर यह पोस्ट-ब्रेक्सिट कानूनी विवाद यूरोपीय संघ के देशों में रहने वाले ब्रिटिश प्रवासियों के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक और निवास नियमों के पालन को रेखांकित करता है। • यूरोप में रह रहे ब्रिटिश प्रवासियों के लिए: यूरोपीय संघ के देशों में रह रहे लंबे समय के निवासियों को निर्वासन के जोखिम से बचने के लिए अपने निवास दस्तावेजों की तुरंत जांच करनी चाहिए। प्रशासनिक समयसीमा चूकने से रहने की अवधि चाहे कितनी भी लंबी हो, कानूनी अधिकार समाप्त हो सकते हैं। • स्वीडन में विदेशी नागरिकों के लिए: स्वीडन के आव्रजन प्राधिकरण बिना किसी विशेष छूट के औपचारिक आवेदन की समयसीमा को सख्ती से लागू कर रहे हैं। संक्रमणकालीन स्थिति वाले व्यक्तियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके कागजात समयसीमा से पहले जमा हों। • अंतरराष्ट्रीय परिवारों के लिए: बड़े कूटनीतिक बदलावों के बाद केवल पारिवारिक संबंध या संपत्ति का स्वामित्व स्वतः निवास अधिकार की गारंटी नहीं देता है। बुजुर्ग प्रवासियों के रिश्तेदारों को उनके कानूनी दस्तावेजों के सत्यापन में तुरंत मदद करनी चाहिए। • ईयू में यात्रा करने वालों के लिए: यूरोपीय सीमाओं पर पासपोर्ट नियंत्रण जांच नियमित रूप से मियाद पूरी कर चुके निवास परमिटों की डेटाबेस से मिलान करती है। अनसुलझी स्थिति वाले यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर पहुंचते ही हिरासत या देश से बाहर किए जाने की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ जोयस थॉमस को जारी किया गया निर्वासन का नोटिस ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने के बाद उत्पन्न भू-राजनीतिक संधियों के बदलावों और प्रशासनिक नियमों के सख्त प्रवर्तन का परिणाम है। • ईयू की आवाजाही की स्वतंत्रता की समाप्ति: 31 जनवरी 2020 को ब्रेक्सिट लागू होने के बाद, ब्रिटिश नागरिकों ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में रहने का अपना स्वचालित कानूनी अधिकार खो दिया। इस राजनीतिक बदलाव के तहत सभी ब्रिटिश निवासियों को वापसी समझौते के तहत नए निवास परमिट के लिए आवेदन करना अनिवार्य कर दिया गया। • आवेदन की समयसीमा की समाप्ति: स्वीडन ने ब्रिटिश निवासियों के लिए अपने पोस्ट-ब्रेक्सिट निवास स्थिति को पंजीकृत करने हेतु 31 दिसंबर 2021 की सख्त समयसीमा निर्धारित की थी। व्यापक जन जागरूकता की कमी के कारण थॉमस और उनके पति जैसे कई दीर्घकालिक निवासी अनिवार्य आवेदन प्रक्रिया से अनभिज्ञ रहे। • सख्त प्रशासनिक नियम: स्वीडन की प्रवासन एजेंसी माइग्रेशन्सवेर्केट कड़े वैधानिक दिशानिर्देशों के तहत काम करती है जहाँ व्यक्तिगत छूट की गुंजाइश बेहद सीमित है। थॉमस द्वारा दायर अपीलों को लगातार खारिज कर दिया गया क्योंकि प्रारंभिक आवेदन की समयसीमा समाप्त हो चुकी थी। • व्यापक प्रशासनिक नीति: स्वीडिश अधिकारियों ने पोस्ट-ब्रेक्सिट दस्तावेजों के मामले में पूरे यूरोप में सबसे सख्त रुख अपनाया है। आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 के बीच ईयू में ब्रिटिश नागरिकों को जारी कुल निर्वासन आदेशों में से लगभग एक-तिहाई स्वीडन द्वारा जारी किए गए हैं। सवाल-जवाब 1. जोयस थॉमस को स्वीडन से निकाले जाने का खतरा क्यों मंडरा रहा है? ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने के बाद उन्होंने 31 दिसंबर 2021 तक पोस्ट-ब्रेक्सिट निवास स्थिति के लिए आवेदन करने की समयसीमा मिस कर दी थी। 2. जोयस थॉमस कितने समय से स्वीडन में रह रही हैं? वह 22 वर्षों से स्वीडन में रह रही हैं, जहाँ वह अपने दिवंगत पति के साथ आई थीं। 3. उन्हें स्वेच्छा से स्वीडन छोड़ने के लिए क्या समयसीमा दी गई है? स्वीडिश प्रवासन अधिकारियों ने उन्हें स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए मंगलवार, 8 सितंबर की समयसीमा दी है। 4. ब्रेक्सिट के बाद से कितने ब्रिटिश नागरिकों को स्वीडन छोड़ने का आदेश मिला है? आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 के बीच 2,490 यूके नागरिकों को स्वीडन छोड़ने का आदेश दिया गया, जबकि 458 को जबरन निकाला गया है। 5. पोस्ट-ब्रेक्सिट निवास नियमों पर स्वीडिश सरकार का क्या रुख है? स्वीडन के प्रवासन मंत्री जोहान फ़ॉरसेल ने कहा कि नियमों को उदारता से लागू किया जाना चाहिए और सरकार प्रभावित निवासियों की मदद के उपायों की समीक्षा कर रही है। https://trendkia.com/europe/posta-breksita-niyamon-men-ulajhi-78-varshiya-british-vidhava-22-sala-bada-sweden-se-nikala-jane-ka-khatara-29713 TrendKia — Har trend, sabse pehle.