रूसी हमलों और कंपकंपाती ठंड की दोहरी मार, कीव छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जुटे यूक्रेनी नागरिक यूक्रेन के बुनियादी ढांचे पर भीषण हमलों और आगामी सर्दियों के डर से राजधानी कीव के बाशिंदे ग्रामीण इलाकों व विदेशों की ओर रुख कर रहे हैं। यूक्रेन के शहरों पर रूस के लगातार बढ़ते हवाई हमलों और शरद ऋतु की दस्तक के साथ गिरते पारे ने कीव के नागरिकों के सामने एक अत्यंत गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। जैसे-जैसे सर्दियां नजदीक आ रही हैं, स्थानीय लोग मिसाइल तथा ड्रोन हमलों के निरंतर खतरे और हाड़ कंपा देने वाली ठंड की दोहरी चुनौती से निपटने के रास्ते तलाश रहे हैं। पिछली सर्दियों में ऊर्जा ग्रिड पर व्यापक हमलों के कारण देश भर में बिजली और हीटिंग आपूर्ति कई हफ्तों तक ठप रही थी, जिससे तापमान शून्य से काफी नीचे चला गया था। इस बार हालात और अधिक बिगड़ने की आशंका के बीच बड़ी संख्या में परिवार शहर छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। लगातार हो रहे हमलों के बीच राजधानी खाली करने की मजबूरी कीव में अपने दो छोटे बच्चों के साथ रहने वाली मारिया शोस्तक उन नागरिकों में शामिल हैं जो इस बार सर्दियां आने का इंतजार किए बिना ही अपने छोटे से फ्लैट को छोड़कर जा रही हैं। उनका चार वर्षीय बेटा आर्तुर और दो वर्षीय बेटी कीरा, दोनों 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर किए गए आक्रमण के बाद पैदा हुए हैं। पिछली सर्दियों के अपने कटु अनुभव को याद करते हुए मारिया बताती हैं कि तब कीव में हालात कुछ हफ्तों तक असहनीय हो गए थे। उस समय उन्होंने तय कर लिया था कि वे अपने बच्चों को दोबारा ऐसे कष्टदायी और खतरनाक माहौल में नहीं रखेंगी। अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में कीव पर चौबीसों घंटे हमले शुरू होने के बाद हालात में बहुत बड़ा बदलाव आया। मारिया के अनुसार, पहले मिसाइलों और ड्रोनों को शहर के बाहरी इलाकों में ही मार गिराया जाता था, लेकिन अब वे सीधे शहर के केंद्र में, सिर के बिल्कुल ऊपर फटने लगे हैं। पूरी तरह असुरक्षित महसूस करने के कारण उन्होंने मिस्र के लाल सागर तट पर स्थित शहर हुरघाडा जाने की योजना बनाई है। यूरोप के अन्य देशों की तुलना में हुरघाडा सस्ता भी है और वहां का मौसम भी गर्म रहता है, जिससे बच्चों को सर्दियों में राहत मिलेगी। नागरिकों में बढ़ता तनाव और विस्थापन का दबाव कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने सितंबर के अंत तक पेट्रोल पंपों, बिजली संयंत्रों और नीप्रो नदी पर बने प्रमुख पुलों को निशाना बनाए जाने के बाद स्वीकार किया कि शहर इस समय अत्यंत नाटकीय स्थिति का सामना कर रहा है। राजधानी की सड़कों पर बिखरे रूसी ड्रोनों के मलबे इस निरंतर खतरे की गवाही दे रहे हैं। ग्राडुस रिसर्च कंपनी द्वारा सितंबर में कराए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 40 प्रतिशत यूक्रेनी नागरिक जीवन स्तर में और गिरावट आने पर विस्थापित होने पर विचार कर रहे हैं। इस सर्वेक्षण में 35 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे कहीं नहीं जाएंगे, जबकि 25 प्रतिशत लोग अब तक कोई निर्णय नहीं ले सके हैं। ग्राडुस की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी इवगेनिया ब्लिज्न्यूक बताती हैं कि लोग केवल पिछली सर्दियों की तरह बिजली कटौती के बारे में ही नहीं सोच रहे हैं, बल्कि तनाव के कई अन्य कारकों से भी जूझ रहे हैं। रूसी सेना द्वारा बड़े लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निशाना बनाए जाने के कारण नागरिकों को इस बात की गहरी चिंता सता रही है कि आने वाली सर्दियों में भोजन और आवश्यक वस्तुओं की गंभीर किल्लत हो सकती है। हालांकि उनका मानना है कि राजधानी से बड़े पैमाने पर अचानक पलायन शायद न हो, क्योंकि लोग अपनी नौकरी गंवाने या बच्चों को स्कूल से हटाने में हिचकिचा रहे हैं और जब तक हालात बिल्कुल असहनीय नहीं हो जाते, तब तक वे शहर में डटे रहने की कोशिश करेंगे। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बमबारी का गहरा असर लगातार बजते हवाई सायरनों, हमलों और क्षतिग्रस्त इमारतों ने छोटे बच्चों वाले परिवारों के लिए स्थिति को विशेष रूप से नाजुक बना दिया है। राजधानी के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित एक बहुमंजिला इमारत में रहने वाली इरीना अपनी तीन साल की बेटी पोलीना के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर बेहद चिंतित हैं। पिछली सर्दियों में उनके अपार्टमेंट में हफ्तों तक हीटिंग नहीं थी और कमरे का तापमान शून्य से पांच डिग्री सेल्सियस के बीच गिर जाता था, जिससे बच्ची लगातार बीमार रहने लगी थी। इस वर्ष उनके इलाके में दो सीधे मिसाइल हमले हुए, जिसने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया। जून की शुरुआत में हुए पहले धमाके से इरीना के फ्लैट की खिड़कियां उड़ गई थीं। जब कुछ मरम्मत पूरी हुई, तो ठीक एक महीने बाद उनकी 10 मंजिला इमारत की नींव के पास दूसरा जोरदार धमाका हुआ, जिससे फ्लैट के भीतर मिट्टी का बड़ा ढेर घुस गया और उन्हें अस्थायी ठिकाने पर जाना पड़ा। इस आघात के कारण पोलीना का मानसिक स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। वह अत्यधिक चिंता, बेकाबू कंपकंपी, उल्टी और अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षणों से जूझ रही है। इरीना के पति सेना में हैं, और वे स्वयं पोलैंड में किसी अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन के साथ रिमोट काम करने की संभावना तलाश रही हैं, क्योंकि यूक्रेन के राष्ट्रपति ने भी स्पष्ट किया है कि कीव इस समय पहला प्रमुख निशाना बना हुआ है। गांवों के खुले माहौल में सुकून और सुरक्षा की तलाश देश छोड़कर जाने के बजाय कई नागरिक यूक्रेन के ग्रामीण इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां कारखानों या बुनियादी ढांचे की गैर-मौजूदगी उन्हें हमलों से अपेक्षाकृत सुरक्षित रखती है। ओलेना कोनोप्लिया ने हफ्तों की तलाश के बाद राजधानी से लगभग दो घंटे की दूरी पर स्थित एक शांत गांव में कॉटेज लिया है। उनका मानना है कि ऐसे गांव में शरण लेना सबसे बेहतर विकल्प है जहां कोई कारखाना, गोदाम या रेलवे स्टेशन न हो, क्योंकि यही सब रूसी हमलों के प्राथमिक लक्ष्य होते हैं। यूक्रेनी परंपरा के अनुसार अपने नए घर को एक पादरी से आशीर्वाद दिलाने के बाद, ओलेना ने वहां एक नया दरवाजा लगवाया है और जरूरी सामान जुटाने में व्यस्त हैं। इस कॉटेज में गैस से चलने वाले कन्वेक्शन हीटर लगे हैं, जबकि पास के बाड़े में जमा की गई लकड़ियों का ढेर बिजली कटौती की स्थिति में गर्माहट देने के काम आएगा। कीव स्थित एक धर्मार्थ संगठन में काम करने वाली ओलेना ने अपने काम और आलेख लेखन के लिए वहां हाई-स्पीड इंटरनेट भी लगवा लिया है। कई रातों तक बिना किसी सायरन और धमाके के शांति से सो पाने के बाद वे खुद को बेहतर महसूस कर रही हैं और जल्द ही कीव के एक खतरनाक इलाके में रहने वाली अपनी बुजुर्ग मां को भी वहां लाने की योजना बना रही हैं। प्रशासन की तैयारियां और आगामी सर्दियों की चुनौतियां हर किसी के पास ग्रामीण इलाकों में घर लेने या महीनों तक विदेश में रहने की आर्थिक क्षमता नहीं है। राजधानी में रहने वाले अधिकांश लोग पहले की तरह ही कीव में रहकर इन कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए मजबूर हैं। प्रशासन ने कुछ कमजोर नागरिकों, विशेष रूप से बुजुर्गों और छोटे बच्चों वाली महिलाओं के लिए शहर के वन क्षेत्रों में स्थित पुनर्वास केंद्रों और सेनेटोरियम में ठहरने की व्यवस्था की है। इसके अलावा, कीव के चरमराते पावर ग्रिड को संभालने के लिए पिछले 18 महीनों में शहर के चारों ओर लगभग 15 छोटे पैमाने के बिजली संयंत्र बनाए गए हैं। इन संयंत्रों को विशेष रूप से मजबूत बंकरों में स्थापित किया गया है और ड्रोन हमलों से सुरक्षा के लिए उन पर लोहे के विशाल पिंजरे लगाए गए हैं। इनमें से प्रत्येक संयंत्र कई सौ बहुमंजिला आवासीय ब्लॉकों को बिजली और हीटिंग उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। इसके बावजूद, ऊर्जा कंपनियों द्वारा तय शेड्यूल के तहत बिजली कटौती की चेतावनी दिए जाने और सुपरमार्केट में जरूरी सामान की समय-समय पर कमी होने के कारण राजधानी के निवासियों पर सुरक्षित स्थानों पर जाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसका आप पर असर युद्धग्रस्त क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के टूटने और विस्थापन का असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, शरणार्थी नीतियों तथा मानवीय सहायता पर पड़ता है। • वैश्विक शरणार्थियों पर असर: यूक्रेन से विस्थापित होने वाले परिवारों की बढ़ती संख्या से पड़ोसी यूरोपीय और मध्य पूर्व के देशों में आवास तथा वीजा सेवाओं पर मांग बढ़ेगी। लंबी अवधि के प्रवास की तैयारी कर रहे लोगों को संबंधित देशों के स्थानीय नियमों और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था समय रहते करनी होगी। • ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति पर प्रभाव: बिजली संयंत्रों और ग्रिड पर हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। आने वाले शीतकालीन महीनों में हीटिंग और बिजली की बढ़ती वैश्विक खपत से ऊर्जा बाजारों पर दबाव बना रहेगा। • मानवीय सहायता और राहत कार्य: यूक्रेन के भीतर बुनियादी ढांचे की बहाली और आपातकालीन सुविधाओं के संचालन के लिए अंतरराष्ट्रीय राहत सामग्री की आवश्यकता बढ़ेगी। स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए जा रहे बंकर संयंत्रों और शरणार्थी केंद्रों को सहयोग देने के लिए सहायता तंत्र सक्रिय रहेगा। • नागरिक सुरक्षा और पलायन की योजना: खतरनाक क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को बिजली कटौती और कड़ाके की ठंड से बचने के लिए समय से पहले वैकल्पिक उपाय करने होंगे। जिन लोगों के पास बाहर जाने के साधन सीमित हैं, उन्हें सामुदायिक केंद्रों और आपातकालीन हीटिंग सुविधाओं पर निर्भर रहना पड़ेगा। ऐसा क्यों हुआ कीव के नागरिकों का यह नया विस्थापन संकट रूसी सेना द्वारा शहर के बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बनाए जाने और आगामी सर्दियों के दौरान अत्यधिक ठंड की आशंका के कारण उत्पन्न हुआ है। • बुनियादी ढांचे पर केंद्रित हमले: रूसी हमलों ने कीव के बिजली संयंत्रों, पेट्रोल पंपों, लॉजिस्टिक्स केंद्रों और प्रमुख पुलों को सीधे तौर पर निशाना बनाया है। ऊर्जा ग्रिड को पहुंचे भारी नुकसान के चलते शहर में बिजली, पानी और हीटिंग की निरंतर आपूर्ति बाधित होने की गंभीर आशंका बन गई है। • शून्य से नीचे तापमान और पिछली सर्दियों का अनुभव: पिछले वर्ष सब-जीरो तापमान के दौरान हफ्तों तक हीटिंग और बिजली गुल रहने से नागरिकों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इस बार सर्दियां शुरू होने से पहले ही हमलों की तीव्रता बढ़ जाने से लोगों को उसी भीषण संकट के दोहराव का डर सता रहा है। • शहरी केंद्रों में सीधा खतरा: पहले मिसाइलों और ड्रोनों को शहर की बाहरी सीमाओं पर रोक लिया जाता था, लेकिन हालिया हफ्तों में धमाके सीधे आवासीय इलाकों और केंद्र के ऊपर हो रहे हैं। इससे नागरिकों में व्यक्तिगत सुरक्षा और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता तेजी से बढ़ी है। • आपूर्ति श्रृंखला में बाधा: बड़े गोदामों और वितरण केंद्रों पर हमलों के कारण आवश्यक खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा के सामान की कमी का डर पैदा हो गया है। इसी कारण लोग बड़े शहरों को छोड़कर ग्रामीण कॉटेज या विदेशों का रुख कर रहे हैं। सवाल-जवाब 1. कीव के निवासी इस समय शहर छोड़कर क्यों जा रहे हैं? रूस द्वारा बिजली संयंत्रों, पुलों और बुनियादी ढांचे पर लगातार किए जा रहे हमलों तथा आगामी कड़ाके की ठंड के डर से लोग शहर छोड़ रहे हैं। 2. ग्राडुस रिसर्च के सर्वेक्षण में नागरिकों के विस्थापन को लेकर क्या आंकड़े सामने आए? सर्वेक्षण के अनुसार 40 प्रतिशत लोग हालात बिगड़ने पर विस्थापन पर विचार कर रहे हैं, 35 प्रतिशत नहीं जाना चाहते और 25 प्रतिशत अनिर्णीत हैं। 3. शहर के पावर ग्रिड की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं? प्रशासन ने पिछले 18 महीनों में स्टील के पिंजरों से सुरक्षित बंकरों में करीब 15 छोटे बिजली संयंत्र तैयार किए हैं, जो सैकड़ों अपार्टमेंट्स को बिजली दे सकते हैं। 4. ग्रामीण इलाकों में जाने वाले लोग किस तरह के ठिकाने पसंद कर रहे हैं? लोग ऐसे शांत गांवों का चयन कर रहे हैं जहां कोई कारखाना, गोदाम या रेलवे स्टेशन न हो, ताकि वे संभावित रूसी हमलों के निशानों से दूर रह सकें। https://trendkia.com/europe/rusi-hamalon-aura-knpaknpati-thnda-ki-dohari-mara-kyiv-chhorakara-surakshita-thikanon-ki-talasha-men-jute-yukreni-nagarika-45238 TrendKia — Har trend, sabse pehle.