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  "type": "article",
  "title": "सैक्सनी-अनहाल्ट में एएफडी की ऐतिहासिक जीत के बाद बुंडेसटैग में तीखी झड़प, चांसलर फ्रिड्रिक मर्ज़ ने एलिस वीडेल की नीतियों को बताया विनाशकारी",
  "summary": "जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सनी-अनहाल्ट में दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी को मिली बड़ी जीत के बाद संसद में जोरदार राजनीतिक घमासान देखने को मिला है। चांसलर फ्रिड्रिक मर्ज़ ने एएफडी की आप्रवास नीतियों को कुशल कार्यबल के खिलाफ बताते हुए पार्टी पर जर्मन हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।",
  "content": "जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सनी-अनहाल्ट में रविवार को संपन्न हुए प्रांतीय चुनावों में दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) की अभूतपूर्व जीत के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस ऐतिहासिक चुनावी परिणाम के तुरंत बाद जर्मन संसद यानी बुंडेसटैग में देश के चांसलर फ्रिड्रिक मर्ज़ और एएफडी की प्रमुख एलिस वीडेल के बीच बेहद तीखी और तीखी बहस हुई। प्रांतीय चुनाव में मिली करारी हार के बाद पहली बार आमने-सामने आए दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर देश के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया। चांसलर मर्ज़ ने एएफडी की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए पार्टी को एक विनाशकारी ताकत करार दिया और चेतावनी दी कि उनकी आप्रवास नीति देश में काम कर रहे कुशल विदेशी कारीगरों और पेशेवरों के खिलाफ एक प्रकार की नस्लीय सफाई जैसी साबित होगी।\n\nसंसद में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच तीखा मुकाबला\nबुंडेसटैग के विशेष सत्र की शुरुआत में ही दोनों पक्षों के बीच तनाव स्पष्ट नजर आने लगा था। मुख्य विपक्षी दल की नेता के रूप में चर्चा की शुरुआत करते हुए एलिस वीडेल ने संसद सदस्यों को संबोधित करते हुए दावा किया कि सैक्सनी-अनहाल्ट के मतदाताओं ने चांसलर के नेतृत्व वाले केंद्र-वाम गठबंधन को पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने कहा कि कंजर्वेटिव और सोशल डेमोक्रेट्स का यह संयुक्त शासन देश को आर्थिक तबाही की ओर ले जा रहा है और चांसलर मर्ज़ का राजनीतिक समय अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। वीडेल ने आरोप लगाया कि अनियंत्रित आप्रवास के कारण देश में दैनिक स्तर पर चाकूबाजी की घटनाएं बढ़ रही हैं और रेलवे स्टेशनों तथा ट्रेनों में नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।\n\nइसके जवाब में चांसलर फ्रिड्रिक मर्ज़ ने एएफडी के सभी आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि एएफडी अपनी रूस समर्थक नीतियों और विभाजनकारी बयानों के जरिए जर्मनी के राष्ट्रीय हितों को भारी नुकसान पहुंचा रही है। मर्ज़ ने विशेष रूप से एएफडी की तथाकथित रीमाइग्रेशन यानी विदेशी मूल के लोगों को वापस भेजने की योजना पर हमला बोला। उन्होंने जोर देकर कहा कि जर्मनी के कुशल कार्यबल में से हर छह में से एक व्यक्ति विदेशी या आप्रवासी पृष्ठभूमि से आता है। अगर एएफडी की नीतियां लागू कर दी गईं, तो रंग और मूल के आधार पर कुशल कारीगरों और तकनीकी विशेषज्ञों को बाहर निकालने का प्रयास किया जाएगा, जो पूरी तरह अनुचित है।\n\nसैक्सनी-अनहाल्ट चुनाव के आंकड़े और राजनीतिक झटके\nसैक्सनी-अनहाल्ट में हुए इस चुनाव के नतीजे जर्मनी की मुख्यधारा की राजनीति के लिए बेहद चौंकाने वाले रहे हैं। इस चुनाव में एएफडी ने भारी बढ़त हासिल करते हुए लगभग 44 प्रतिशत वोट अपने नाम किए। इसके विपरीत चांसलर फ्रिड्रिक मर्ज़ की कंजर्वेटिव पार्टी (सीडीयू) का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा और उसका वोट शेयर घटकर आधा रह गया। पार्टी को महज 17.2 प्रतिशत वोट ही हासिल हुए, जो उसके पारंपरिक जनाधार में भारी गिरावट को दर्शाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जर्मनी के किसी भी 16 राज्यों में से किसी में भी किसी सुदूर दक्षिणपंथी दल ने इस स्तर की सफलता हासिल नहीं की थी।\n\nहालांकि, लगभग 44 प्रतिशत वोट हासिल करने के बावजूद एएफडी पूर्ण बहुमत के आंकड़े से तीन सीटें दूर रह गई है। इस वजह से राज्य में सरकार गठन का पेंच अभी फंसा हुआ है। चांसलर मर्ज़ ने भी यह स्वीकार किया कि यह भूकम्पीय चुनावी परिणाम जर्मनी के राजनीतिक परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल चुका है। उन्होंने संसद में कहा कि यह चुनावी परिणाम भले ही एक बड़ा राजनीतिक बदलाव दर्शाता हो, लेकिन यह देश की संवैधानिक और सामाजिक व्यवस्था को अस्थिर करने का लाइसेंस नहीं बन सकता।\n\nकुशल श्रम बल और बुनियादी सेवाओं पर मंडराता संकट\nचांसलर मर्ज़ ने एएफडी की आप्रवास नीतियों के व्यावहारिक और आर्थिक दुष्परिणामों को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार उन लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने और उन्हें वापस भेजने की आवश्यकता को अच्छी तरह समझती है जिनके पास देश में रहने का स्थायी कानूनी अधिकार नहीं है या जो अनियमित आप्रवासी हैं। लेकिन इसके साथ ही सरकार उन लाखों लोगों के योगदान का पूरा सम्मान करती है जो अपनी कड़ी मेहनत से जर्मनी की समृद्धि और अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।\n\nमर्ज़ ने चेतावनी दी कि अगर एएफडी के रीमाइग्रेशन एजेंडे को लागू किया जाता है, तो देश का बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदमों के बाद जर्मनी का कोई भी केयर होम, अस्पताल, क्लीनिक या रेस्तरां सुचारू रूप से संचालित नहीं हो सकेगा, क्योंकि इन सभी क्षेत्रों में विदेशी मूल के कर्मचारी बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने वीडेल की पार्टी पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि एएफडी एक ऐसी नकारात्मक ताकत बनी रहेगी जो केवल समस्याओं को भुनाने का काम करती है।\n\nगठबंधन की गणित और फायरवॉल नीति पर बहस\nसैक्सनी-अनहाल्ट में सरकार बनाने के लिए एएफडी अब नए राजनीतिक समीकरण तलाश रही है। पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार उलरिच सीगमंड ने चुनाव से पहले यह दावा किया था कि वह केवल पूर्ण बहुमत मिलने की स्थिति में ही सरकार की कमान संभालेंगे। हालांकि, चुनाव परिणाम आने के कुछ ही घंटों के भीतर एएफडी ने अपने रुख में बदलाव करते हुए अन्य राजनीतिक दलों के साथ सहयोग के रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। चांसलर मर्ज़ ने संसद में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए एएफडी पर मतदाताओं के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया।\n\nवर्तमान परिस्थितियों में एएफडी वामपंथी लोकलुभावन पार्टी बीएसडब्ल्यू के साथ हाथ मिलाने पर विचार कर रही है, बशर्ते वह उलरिच सीगमंड को मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन करे। इसके अतिरिक्त, सैक्सनी-अनहाल्ट में एएफडी के दूसरे शीर्ष नेता ने संकेत दिए हैं कि अगर चांसलर मर्ज़ की पार्टी अपनी ऐतिहासिक फायरवॉल यानी ब्रांडमौर नीति को त्याग देती है, तो दोनों पार्टियां मिलकर सरकार चला सकती हैं। उल्लेखनीय है कि जर्मनी की सभी मुख्यधारा की लोकतांत्रिक पार्टियों ने ऐतिहासिक रूप से यह संकल्प लिया है कि वे किसी भी स्थिति में सुदूर दक्षिणपंथी एएफडी के साथ मिलकर सरकार नहीं बनाएंगी, जिसे राजनीतिक भाषा में फायरवॉल कहा जाता है।\n\nसुरक्षा एजेंसियों का वर्गीकरण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं\nएएफडी की इस जीत ने केवल जर्मनी ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक ध्यान आकर्षित किया है। जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी ने सैक्सनी-अनहाल्ट में एएफडी की राज्य इकाई को आधिकारिक तौर पर दाएं हाथ की चरमपंथी संस्था के रूप में वर्गीकृत किया है। सुरक्षा एजेंसियों की इस गंभीर चेतावनी के बावजूद पार्टी को मिला भारी जनाधार जर्मन मतदाताओं के एक बड़े वर्ग में व्याप्त असंतोष को उजागर करता है। पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में अनियमित आप्रवासियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर निर्वासन अभियान चलाने का वादा किया था।\n\nदूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एएफडी की इस चुनावी सफलता की सराहना की है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि जर्मनी में लोकलुभावन पार्टी ने एक वाकई बहुत बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने इस राजनीतिक बदलाव को जर्मनी के बेहद खराब और सख्त आप्रवास नियमों एवं विनियमों का सीधा परिणाम बताया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आ रही इन प्रतिक्रियाओं ने जर्मनी की आंतरिक राजनीति को और अधिक गरमा दिया है।\n\nसंसदीय हंगामे के बीच अध्यक्ष की कड़ी चेतावनी\nसंसद के भीतर चल रही यह बहस इस कदर उग्र हो गई कि एएफडी के सांसदों ने चांसलर के भाषण के दौरान लगातार नारेबाजी की और रुकावटें डालीं। एएफडी सदस्यों द्वारा किया जा रहा शोर-शराबा इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही को संचालित करना मुश्किल हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बुंडेसटैग की अध्यक्ष जूलिया क्लॉकनर को कड़ा रुख अपनाना पड़ा।\n\nअध्यक्ष जूलिया क्लॉकनर ने हंगामा कर रहे सांसदों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सदन की गरिमा बनाए नहीं रखी गई, तो वह अमर्यादित आचरण करने वाले सदस्यों को चैंबर से बाहर निकालना शुरू कर देंगी। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, \"हम किसी फुटबॉल मैदान पर नहीं हैं।\" इस चेतावनी के बाद ही सदन में कुछ समय के लिए शांति बहाल हो सकी और संसदीय कार्यवाही को आगे बढ़ाया जा सका।\n\nइसका आप पर असर\nजर्मनी में सुदूर दक्षिणपंथी एएफडी की चुनावी जीत और राजनीतिक गतिरोध का सीधा असर यूरोपीय संघ की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: जर्मनी में आप्रवास और कुशल श्रमिकों पर कड़े नियम बनने से वहां जाने के इच्छुक भारतीय आईटी पेशेवरों, इंजीनियरों और छात्रों के लिए वीजा एवं कार्य नियम प्रभावित हो सकते हैं। यूरोपीय बाजार में राजनीतिक अनिश्चितता के कारण भारतीय निर्यातकों को भी सतर्क रहना होगा।\n• यूरोप और वैश्विक स्तर पर: जर्मनी की गठबंधन सरकार में जारी खिंचाव से यूरोपीय संघ की आर्थिक और विदेश नीतियों के क्रियान्वयन में देरी हो सकती है। इसके अलावा, कुशल श्रमिकों की कमी से जर्मन स्वास्थ्य सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र की उत्पादकता पर विपरीत असर पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सनी-अनहाल्ट में एएफडी की बड़ी चुनावी सफलता का मुख्य कारण आप्रवास नीतियों के प्रति जन-असंतोष और आर्थिक अनिश्चितता है।\n\n• आप्रवास नीति पर असंतोष: मतदाताओं के एक बड़े वर्ग का मानना है कि अनियंत्रित आप्रवास के कारण स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ा है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा हुई हैं।\n• आर्थिक मंदी और सरकार विरोधी लहर: चांसलर मर्ज़ के सत्तारूढ़ गठबंधन की आर्थिक नीतियों और लगातार बढ़ती महंगाई के कारण पारंपरिक राजनीतिक दलों के प्रति जनता का विश्वास कम हुआ है।\n• पूर्वी जर्मनी में क्षेत्रीय भिन्नता: पूर्वी जर्मन राज्यों में ऐतिहासिक रूप से मुख्यधारा की पश्चिमी जर्मन पार्टियों के प्रति असंतोष रहा है, जिसका सीधा फायदा एएफडी जैसी लोकलुभावन पार्टियों को मिला है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सैक्सनी-अनहाल्ट चुनाव में एएफडी को कितने प्रतिशत वोट मिले?\nसैक्सनी-अनहाल्ट के प्रांतीय चुनाव में एएफडी ने लगभग 44 प्रतिशत वोट हासिल किए, जो उसकी अब तक की सबसे बड़ी चुनावी जीत है।\n\n2. चांसलर फ्रिड्रिक मर्ज़ की पार्टी सीडीयू का प्रदर्शन कैसा रहा?\nचांसलर फ्रिड्रिक मर्ज़ की कंजर्वेटिव पार्टी (सीडीयू) का वोट शेयर घटकर आधा रह गया और उसे केवल 17.2 प्रतिशत वोट मिले।\n\n3. जर्मन संसद में चांसलर मर्ज़ ने एएफडी की किस नीति की आलोचना की?\nमर्ज़ ने एएफडी की रीमाइग्रेशन योजना की आलोचना करते हुए कहा कि यह कुशल विदेशी कामगारों के खिलाफ नस्लीय सफाई जैसी नीति है।\n\n4. जर्मनी में राजनीतिक फायरवॉल (Brandmauer) क्या है?\nफायरवॉल जर्मनी की मुख्यधारा की लोकतांत्रिक पार्टियों का वह सर्वसम्मति से लिया गया फैसला है जिसके तहत वे सुदूर दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी के साथ कोई गठबंधन नहीं बनाती हैं।",
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  "category": "यूरोप",
  "publishedAt": "2026-09-09",
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