# सर्बिया में अलेक्जेंडर वुčić के 12 साल के शासन पर मंडराया बड़ा खतरा, छात्र आंदोलन ने बढ़ाई मुश्किलें

> सर्बिया में रविवार को होने वाले अहम संसदीय चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पिछले दो सालों से चल रहे छात्र आंदोलन ने राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुčić के लंबे शासन के सामने कड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

**Type:** article · **Category:** यूरोप · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/europe/serbia-snap-election-tests-longtime-leader-vucic-as-student-led-movement-shakes-political-landscape-50640 · **Language:** Hindi
**Tags:** सर्बिया चुनाव, अलेक्जेंडर वुčić, छात्र आंदोलन, नोवी साद, राजनीतिक संकट, अंतरराष्ट्रीय समाचार

सर्बियाई राजनीतिक गलियारों में इन दिनों अभूतपूर्व हलचल देखने को मिल रही है, क्योंकि देश एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है जहाँ एक दशक से अधिक समय से सत्ता में काबिज नेतृत्व को जमीनी स्तर पर बड़ी चुनौती मिल रही है। राजनीतिक भविष्य का फैसला करने वाले इन आगामी चुनावों से ठीक पहले पूरे देश में रैलियों और प्रदर्शनों का दौर जारी है, जो मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक कड़ा इम्तहान साबित हो रहा है। इन प्रदर्शनों की सुगबुगाहट पिछले दो वर्षों से लगातार तेज हो रही थी, और अब यह सीधे तौर पर संसद की सीटों के लिए होने वाले मतदान के रूप में सामने आ रही है।

## छात्रों की पहल लेकिन समाज के हर वर्ग की भागीदारी
इस बड़े राजनीतिक बदलाव की प्रेरणा युवा पीढ़ी और विश्वविद्यालयों के परिसरों से निकली है, हालांकि चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों की फेरिस्त में कोई सीधे तौर पर छात्र शामिल नहीं हैं। इसके बजाय, यह प्रभावशाली मंच समाज के विभिन्न तबकों से ताल्लुक रखने वाली जानी-मानी और पेशेवर हस्तियों को अपने साथ लेकर चल रहा है। इस अनोखे राजनीतिक गठबंधन में देश भर के शिक्षक, प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, जाने-माने अभिनेता, डॉक्टर, मेहनतकश किसान और वैज्ञानिक कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

## कैसे सुलग उठी विरोध की चिंगारी
इस बड़े सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन की मजबूत नींव 1 नवंबर 2024 को पड़ी थी, जब सर्बिया के दूसरे सबसे बड़े शहर नोवी साद के रेलवे स्टेशन पर कंक्रीट की एक भारी-भरकम छतरी अचानक ढह गई थी। इस दिल दहला देने वाली दुर्घटना में कुल 16 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। आम जनता ने इस भीषण त्रासदी को देश के भीतर फैली गहरी प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का सीधा और जीवंत प्रतीक मान लिया था।

## भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आक्रोश
उस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के बाद से ही जनमानस में गुस्सा उबलने लगा था, क्योंकि आलोचकों ने इस स्टेशन के बेहद दोषपूर्ण पुनर्निर्माण कार्य को सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व से जोड़ दिया था। राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुčić ने खुद को इस परियोजना के साथ बेहद करीबी तौर पर जोड़ा हुआ था, जिसके चलते जनता का आक्रोश सीधे सरकार की नीतियों और कामकाज के तरीकों पर केंद्रित हो गया। बिना किसी पूर्व चेतावनी के भरभरा कर गिरे उस ढांचे ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया था।

## सड़कों से शुरू होकर संसद तक पहुंचा सफर
शुरुआत में यह विरोध प्रदर्शन केवल विश्वविद्यालयों के परिसरों और चुनिंदा शहरी चौराहों तक ही सीमित था, जहाँ न्याय की गुहार लगाई जा रही थी। लेकिन धीरे-धीरे यह अभियान एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन में तब्दील हो गया, जो स्थानीय स्तर पर भी फैल गया और इसमें समाज के तमाम वर्ग जुड़ते चले गए। किसानों से लेकर न्यायपालिका के लोग और कला जगत से जुड़े अभिनेता तक इस मुहीम का हिस्सा बन गए। इस बढ़ते दबाव का असर तुरंत दिखाई दिया जब कुछ ही हफ्तों के भीतर देश के प्रधानमंत्री को अपना पद छोड़ना पड़ गया था।

## पारंपरिक विपक्षी दलों से पूरी तरह अलग रणनीति
बीते चुनावों के दौरान जब मुकाबला हुआ था, तब सत्ताधारी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी यानी SNS के खिलाफ बिखरे हुए विपक्षी दलों का एक ढीला-ढाला गठबंधन खड़ा हुआ था जो बाद में बिखर गया था। लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग और कहीं अधिक गंभीर है, क्योंकि मौजूदा आंदोलन ने मुख्यधारा के पुराने राजनीतिक दलों से पूरी तरह दूरी बना ली है। इस पूरी मुहिम का कोई एक औपचारिक सर्वोच्च नेता नहीं है, और इसके सदस्य आम सभाओं यानी प्लेनम के माध्यम से लोकतांत्रिक ढंग से अपने फैसले लेते हैं।

## शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय चिंताएं
देश के शीर्ष पर काबिज दक्षिणपंथी लोकलुभावन नेता अलेक्जेंडर वुčić ने इन तमाम विरोध प्रदर्शनों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बाहरी ताकतों की साजिश बताया है। उनका दावा है कि इसके पीछे कोई छात्र या प्रोफेसर नहीं बल्कि बड़ी महाशक्तियां हैं जो सर्बिया को अस्थिर करना चाहती हैं। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और यूरोपीय पर्यवेक्षकों ने चुनावी माहौल को लेकर अपनी गहरी चिंताएं जाहिर की हैं। यूरोपीय परिषद की संसदीय यानी PACE ने अपने एक पूर्व आकलन में यहाँ के माहौल को बेहद तनावपूर्ण और ध्रुवीकरण से भरा करार दिया है।

## चुनावी प्रक्रिया और कड़े मुकाबले की शर्तें
सर्बियाई संसद में कुल 250 सीटें हैं और पूरे देश में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एक ही राष्ट्रीय निर्वाचन क्षेत्र बनाया गया है। मतदान के इस महापर्व में कुल 18 सूचियां मैदान में हैं, लेकिन उनमें से केवल सात ही ऐसी हैं जो सभी 250 सीटों पर अपने पूरे उम्मीदवार उतार रही हैं। चुनाव जीतने के लिए किसी भी दल या सूची को कम से कम 3 प्रतिशत वोट हासिल करना अनिवार्य होता है, जिसके बाद ही सांसदों का चयन तय होता है। कई छोटे विपक्षी दलों ने इस बार मुकाबले को धार देने के लिए अपनी उम्मीदवारी वापस लेते हुए इस नई सूची का समर्थन किया है।

## इसका आप पर असर
सर्बिया में हो रहे इन चुनावों का असर देश की राजनीतिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर सीधा पड़ेगा।

- **भारत में:** इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का भारत के आम नागरिकों के दैनिक जीवन या घरेलू बाजार पर कोई प्रत्यक्ष व्यावहारिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- **सर्बिया में:** मतदाताओं के लिए यह चुनाव देश की शासन प्रणाली, भ्रष्टाचार विरोधी सुधारों और मीडिया स्वतंत्रता की दिशा तय करने वाला साबित होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक उठापटक अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे कई वर्षों से सुलग रहा जन असंतोष और एक बड़ी प्रशासनिक त्रासदी मुख्य कारण रही है।

- **मुख्य तात्कालिक कारण:** नोवी साद रेलवे स्टेशन पर कंक्रीट की छतरी गिरने से हुई 16 लोगों की मौत ने जनता के बीच व्यवस्था के प्रति अविश्वास को चरम पर पहुंचा दिया।
- **शासन विरोधी नाराजगी:** पिछले 12 वर्षों से सत्ता में काबिज नेतृत्व और उसकी कार्यशैली के खिलाफ समाज के विभिन्न वर्गों में लंबे समय से असंतोष पनप रहा था।
- **पारंपरिक दलों की विफलता:** पुराने विपक्षी दलों के एकजुट होने में नाकाम रहने के कारण एक नए और गैर-पारंपरिक आंदोलन के उभरने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार हुईं।

## सवाल-जवाब

### 1. सर्बिया में यह चुनाव क्यों हो रहा है?
यह चुनाव देश के भविष्य पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है, जो पिछले दो सालों से चल रहे व्यापक छात्र और नागरिक आंदोलनों की पृष्ठभूमि में हो रहा है।

### 2. इस आंदोलन की शुरुआत कहाँ से हुई थी?
इसकी शुरुआत 1 नवंबर 2024 को नोवी साद रेलवे स्टेशन की छतरी गिरने की दुर्घटना से हुई थी, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी।

### 3. चुनाव में मुख्य चुनौती किसकी तरफ से है?
मुख्य चुनौती 'स्टूडेंट लिस्ट-स्टूडेंट्स विन' नामक आंदोलन से मिल रही है, जिसमें समाज के विभिन्न पेशेवर लोग मैदान में उतरे हैं।

### 4. सर्बियाई संसद में कुल कितनी सीटें हैं?
सर्बियाई संसद में कुल 250 सीटें हैं जिनके लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत मतदान होता है।

### 5. संसद में पहुंचने के लिए न्यूनतम कितने वोट जरूरी हैं?
किसी भी राजनीतिक सूची को संसद में जगह बनाने के लिए कम से कम 3 प्रतिशत वोट हासिल करना अनिवार्य है।

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