स्वीडिश आम चुनाव में वामपंथी गठबंधन आगे, दूर-राइट के समर्थन में आई गिरावट स्वीडन के आम चुनाव के एग्जिट पोल के मुताबिक, वामपंथी राजनीतिक ब्लॉक नई सरकार के गठन की दौड़ में आगे चल रहा है। स्वीडन में हाल ही में हुए आम चुनावों के शुरुआती एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ चुके हैं, जिसके अनुसार वामपंथी राजनीतिक गठबंधन नई सरकार के गठन की दौड़ में सबसे आगे चल रहा है। इस चुनावी मुकाबले में चार-पार्टी का यह वामपंथी ब्लॉक आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि दक्षिणपंथी धड़े को कम समर्थन मिलने के संकेत मिले हैं। सार्वजनिक प्रसारक एसवीटी और टीवी4 द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वामपंथी ब्लॉक को 51.3 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि इसके मुकाबले दक्षिणपंथी गठबंधन को 46.8 प्रतिशत मत मिलने की संभावना जताई गई है। यदि ये चुनावी अनुमान पूरी तरह से सही साबित होते हैं, तो सोशल डेमोक्रेट्स की नेता मैग्डालेना एंडरसन एक बार फिर स्वीडन की नई प्रधानमंत्री बन सकती हैं। मैग्डालेना एंडरसन इससे पहले साल 2021 से 2022 तक भी देश की प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। दक्षिणपंथी गठबंधन और सहयोगियों की स्थिति दूसरी तरफ, मौजूदा प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा किया था कि यदि वह सत्ता में बने रहते हैं, तो वह अपने कट्टर-दक्षिणपंथी सहयोगियों को कैबिनेट में अहम पद सौंपेंगे। उल्फ क्रिस्टरसन को सरकार चलाने के दौरान स्वीडन डेमोक्रेट्स यानी एसडी का समर्थन मिलता रहा है, एक ऐसा राजनीतिक दल जिसके वैचारिक तार नव-नाजी जड़ों से जुड़े हुए हैं। इस बार सामने आए एग्जिट पोल के परिणामों से संकेत मिलते हैं कि यह पार्टी, जिसने साल 2010 में पहली बार संसद में प्रवेश किया था, अपने समर्थन आधार में पहली बार गिरावट का सामना कर सकती है। स्वीडन की राजनीतिक व्यवस्था में मुख्य रूप से दो बड़े राजनीतिक ब्लॉक काम करते हैं, जिनमें से प्रत्येक पक्ष में चार-चार पार्टियां शामिल हैं। इसी वजह से देश में गठबंधन और अल्पसंख्यक सरकारों का गठन होना एक बेहद आम बात मानी जाती है। मैग्डालेना एंडरसन की पार्टी सोशल डेमोक्रेट्स द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से ही स्वीडिश राजनीति की एक बेहद प्रमुख और प्रभावशाली ताकत बनी हुई है। हालांकि, नाजी समर्थकों द्वारा 1980 के दशक में स्थापित की गई पार्टी एसडी को वर्षों तक राजनीतिक रूप से अलग-थलग रखा गया था, लेकिन साल 2022 में यह देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई थी, जब उसने मुख्य रूप से हिंसक अपराधों और आव्रजन के मुद्दों पर अपना आक्रामक चुनाव अभियान चलाया था। नेताओं के अपने तर्क और प्रमुख चुनावी मुद्दे रविवार को मतदान प्रक्रिया पूरी करने के बाद मैग्डालेना एंडरसन ने स्वीडिश जनता के सामने मौजूद मुख्य विकल्प को बहुत स्पष्ट शब्दों में रखा था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या स्वीडन में ऐसी सरकार आनी चाहिए जो पूरी तरह से स्वीडन डेमोक्रेट्स के प्रभाव से ढकी हो, जो कि देश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ है, या फिर देश की कमान ऐसी सरकार के हाथ में होनी चाहिए जो उनके नेतृत्व में चले और स्वीडन को सहयोग की एक नई भावना के साथ आगे बढ़ाए। वहीं दूसरी तरफ, मौजूदा प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने मतदान करने के बाद कहा था कि यह बेहद जरूरी है कि वह और उनका पूरा गठबंधन अपने महत्वपूर्ण कार्यों को लगातार आगे बढ़ाते रहें। स्ट्रैंगनास नगरपालिका में अपना वोट डालने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि उनके द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों को आगे भी जारी रखने को लेकर लोगों में एक वास्तविक उत्साह मौजूद है। इस पूरे चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, गिरोहों से जुड़े अपराध और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च किए जाने वाले बजट जैसे गंभीर मुद्दे सबसे हावी रहे। इसका आप पर असर स्वीडन में हुए इन आम चुनावों के परिणामों का सीधा असर देश की कर नीतियों, आव्रजन कानूनों और कल्याणकारी बजट आवंटन पर पड़ेगा। • भारत में: इस अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक बदलाव का भारत के आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर कोई सीधा और प्रत्यक्ष वित्तीय असर नहीं पड़ेगा। • स्वीडन में: वहां के स्थानीय निवासियों को नई सरकार के गठन के बाद स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा लाभों और सख्त कानून-व्यवस्था से जुड़े नए नियमों का सामना करना पड़ सकता है। • आर्थिक मोर्चे पर: देश की नई नीतियों के कारण कॉर्पोरेट टैक्स और श्रम कानूनों में बदलाव हो सकते हैं, जिससे निवेशकों और स्थानीय व्यापारियों की रणनीतियां प्रभावित होंगी। • सुरक्षा मामलों में: गिरोहों से जुड़े अपराधों पर नकेल कसने के लिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अतिरिक्त अधिकार दिए जाने की संभावना है। • आप्रवासन नीतियां: वामपंथी गठबंधन के सत्ता में आने से शरणार्थियों और आव्रजन से जुड़े नियमों में पूर्व की तुलना में कुछ नरमी या बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ स्वीडन के इस चुनावी परिणाम की पृष्ठभूमि में देश की सुरक्षा व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक ध्रुवीकरण मुख्य कारण रहे हैं। • बढ़ता अपराध और सुरक्षा चिंताएं: पिछले कुछ वर्षों में देश में संगठित गिरोहों की हिंसा और अपराध दर बढ़ने से मतदाताओं का ध्यान राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित हो गया था। • आप्रवासन नीति पर बहस: आव्रजन नियंत्रण और शरणार्थियों के प्रवेश को लेकर समाज में गहरा विभाजन पैदा हो गया था, जिसने दक्षिणपंथी दल को मजबूत किया था। • कल्याणकारी राज्य का मुद्दा: स्वीडन के पारंपरिक कल्याणकारी मॉडल और सरकारी खर्च को बनाए रखने या उसमें कटौती करने को लेकर जनता के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई थी। • राजनीतिक गठजोड़ का प्रभाव: चार-चार पार्टियों के दो स्पष्ट ब्लॉकों में बंटी राजनीतिक व्यवस्था के कारण हर चुनाव में दलों के बीच कड़ा गठबंधन संघर्ष देखने को मिलता है। सवाल-जवाब 1. स्वीडन के आम चुनाव में कौन सा राजनीतिक ब्लॉक आगे चल रहा है? एग्जिट पोल के अनुसार चार-पार्टी का वामपंथी राजनीतिक ब्लॉक 51.3 प्रतिशत वोटों के साथ आगे चल रहा है। 2. स्वीडन की अगली प्रधानमंत्री कौन बन सकती हैं? सोशल डेमोक्रेट्स की नेता मैग्डालेना एंडरसन स्वीडन की नई प्रधानमंत्री बन सकती हैं। 3. मैग्डालेना एंडरसन इससे पहले किस पद पर थीं? वह साल 2021 से 2022 तक स्वीडन की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं। 4. वर्तमान प्रधानमंत्री कौन हैं और किस दल से हैं? उल्फ क्रिस्टरसन वर्तमान में देश के कंजर्वेटिव प्रधानमंत्री हैं। 5. स्वीडन डेमोक्रेट्स पार्टी की स्थापना कब और किसने की थी? इस पार्टी की स्थापना 1980 के दशक में नाजी सहानुभूति रखने वाले लोगों द्वारा की गई थी। 6. इस चुनाव में कौन से मुद्दे सबसे हावी रहे? राष्ट्रीय सुरक्षा, गिरोहों से जुड़े अपराध और कल्याणकारी योजनाओं पर होने वाला खर्च चुनाव के मुख्य मुद्दे रहे। https://trendkia.com/europe/swedish-general-election-sees-left-wing-bloc-ahead-as-far-right-support-drops-in-exit-polls-32018 TrendKia — Har trend, sabse pehle.