यूक्रेन में स्टारलिंक की गति फिर बहाल, ड्रोन संचालन में मिली राहत यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क पर लगा गति प्रतिबंध हट गया है और कनेक्टिविटी सामान्य हो चुकी है। हालिया पाबंदियों के कारण ड्रोन उड़ानों पर बुरा असर पड़ा था। यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में बेहद अहम माने जाने वाले सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क पर लगी तकनीकी रुकावटें अब दूर कर ली गई हैं। देश के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि स्टारलिंक प्रणाली अब पूरी तरह स्थिर संपर्क उपलब्ध करा रही है, जिससे अग्रिम मोर्चे पर जारी सैन्य कार्रवाइयों को नई ताकत मिली है। इससे पहले कई दिनों तक इस नेटवर्क की गति और कार्यक्षमता सीमित कर दी गई थी, जिसकी वजह से सेना के संचार तंत्र और मानव रहित विमानों के संचालन में गंभीर दिक्कतें आ रही थीं। प्रतिबंध हटने के बाद गति में बड़ा सुधार रक्षा मंत्री येवहेन खमारा ने जानकारी दी कि अब नेटवर्क पर 400 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार पर भी संपर्क बरकरार रह रहा है। उनका कहना है कि यह सुधार सबसे पहले अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों, ड्रोन अभियानों, सैन्य रसद और आंतरिक संचार व्यवस्था के लिए बेहद आवश्यक था। इससे पहले की व्यवस्था में जब कोई ड्रोन 161 किमी/घंटे यानी 100 मील प्रति घंटे की गति पार करता था, तो उसका नेटवर्क संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। इस उच्च गति बहाली का सीधा संकेत है कि यूक्रेन के भीतर नेटवर्क की पूर्ण परिचालन क्षमता वापस लौट आई है। आधुनिक युद्ध रणनीति में हाई-स्पीड ड्रोनों की निगरानी और हमले दोनों के लिए बिना रुकावट डेटा प्रवाह सबसे महत्वपूर्ण शर्त मानी जाती है। भू-राजनीतिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप स्टारलिंक कनेक्टिविटी को लेकर पैदा हुआ यह संकट केवल एक तकनीकी समस्या नहीं था, बल्कि इसके पीछे कूटनीतिक तनाव भी जुड़ा हुआ था। कीव प्रशासन ने आरोप लगाया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कहने पर ही स्पेसएक्स और स्टारलिंक के मालिक एलन मस्क ने नेटवर्क की रफ्तार सीमित करने का कदम उठाया था। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने इन आरोपों को खारिज किया और बाद में यह बयान दिया कि एलन मस्क ने सेवाओं को दोबारा पुरानी स्थिति में बहाल कर दिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने यह गंभीर आरोप भी लगाया था कि अगर रूस के तेल संयंत्रों पर यूक्रेनी हमले बंद नहीं हुए, तो अमेरिका ने खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को वापस लेने की चेतावनी दी थी। इस आरोप का भी डोनाल्ड ट्रंप ने खंडन किया। दूसरी ओर, एलन मस्क ने संकेत दिया था कि स्टारशील्ड नेटवर्क पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण है, इसलिए हालिया गड़बड़ी के तार पेंटागन से जुड़े हो सकते हैं। तेल संयंत्रों पर हमले और ऊर्जा राजनीति यह पूरा विवाद उस समय गहराया जब यूक्रेन ने रूस के भीतर स्थित तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना तेज कर दिया। यूक्रेन का तर्क है कि रूसी युद्ध मशीन को मिलने वाले राजस्व के मुख्य स्रोत को काटने के लिए इन ठिकानों को तबाह करना बेहद जरूरी है। इसके विपरीत, डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि रूसी रिफाइनरियों पर हमलों की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं। अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है और अमेरिकी घरेलू बाजार के लिए रूसी डीजल आयात करने का एक समझौता भी किया है। इस नीतिगत फैसले की यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी देशों ने तीखी आलोचना की है। उल्लेखनीय है कि रूस को स्टारलिंक उपयोग करने की अनुमति नहीं है, इसलिए जब यूक्रेनी ड्रोन या मिसाइलें रूसी सीमा के काफी अंदर रिफाइनरियों पर वार करती हैं, तो यह नेटवर्क वहां काम नहीं करता। रणक्षेत्र में भारी ड्रोन और हवाई हमले जारी कूटनीतिक और तकनीकी खींचतान के बीच दोनों पक्षों के बीच जमीनी स्तर पर भीषण जंग जारी है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने टेलीग्राम पर बयान जारी कर दावा किया कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने यूक्रेन के 616 फिक्स्ड-विंग ड्रोन मार गिराए। ये ड्रोन रूसी कब्जे वाले क्रीमिया सहित कई अलग-अलग क्षेत्रों में हमला करने के इरादे से भेजे गए थे। मास्को समर्थित क्रीमिया के गवर्नर सर्गेई अक्स्योनोव के अनुसार, इन हमलों के बाद बिजली आपूर्ति बाधित होने की वजह से क्षेत्र में बिजली और पानी के इस्तेमाल पर पाबंदियां लगानी पड़ी हैं। दूसरी तरफ, यूक्रेनी अधिकारियों ने भी बड़े हमलों की पुष्टि की है। उनके अनुसार पिछले 24 घंटों में रूस के भीतर एक मिसाइल उपकरण निर्माण संयंत्र, एक रासायनिक कारखाने और एक सैन्य हवाई अड्डे पर खड़े विमान पर सफल हमले किए गए। यूक्रेनी पक्ष ने यह भी बताया कि शुक्रवार को रूस ने 309 ग्लाइड बमों और 10,270 कामिकेज ड्रोनों का उपयोग करते हुए कुल 88 हवाई हमले किए। युद्धक्षेत्र में उपग्रह प्रणाली की भूमिका यूक्रेनी सेना अपनी रणनीतिक योजनाओं और सीमावर्ती इलाकों में अभियानों के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा में चक्कर लगा रहे 10,000 उपग्रहों के विशाल नेटवर्क पर गहराई से निर्भर है। सेना नागरिक स्टारलिंक कनेक्शन के साथ-साथ अधिक सुरक्षित और सैन्य स्तर के स्टारशील्ड नेटवर्क का इस्तेमाल करती है। जब तक यह संचार ढांचा सुचारू रूप से कार्य करता रहता है, तब तक यूक्रेनी बलों को सुदूर युद्ध क्षेत्रों में समन्वय स्थापित करने में मदद मिलती रहती है। इसका आप पर असर युद्धक्षेत्र में संचार नेटवर्क बहाल होने से यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं को सहारा मिला है, जबकि ऊर्जा राजनीति वैश्विक तेल बाजारों पर असर डाल सकती है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों और रूसी डीजल सौदों के घटनाक्रम से भारत में कच्चे तेल के आयात बिल और घरेलू ईंधन की कीमतों पर असर पड़ सकता है। सरकार और तेल रिफाइनरियां वैश्विक आपूर्ति में किसी भी बदलाव पर करीबी नजर रखेंगी। • अग्रिम मोर्चे पर: यूक्रेनी सेना के तेज गति वाले ड्रोन अब 400 किमी/घंटे से अधिक रफ्तार पर बिना संपर्क खोए उड़ान भर सकेंगे। इससे सैनिकों के आपसी संचार और रणनीतिक निगरानी में आ रही रुकावटें तुरंत समाप्त हो जाएंगी। • उपभोक्ताओं और ऊर्जा पर: अमेरिकी बाजार में रूसी ईंधन आयात और प्रतिबंधों में छूट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव में बदलाव आ सकता है। पेट्रोल-डीजल की वैश्विक दरों का सीधा असर आम जनता की महंगाई दर पर पड़ता है। • सैन्य रणनीति पर: आधुनिक रक्षा प्रणालियों में सैटेलाइट संचार पर अत्यधिक निर्भरता की कमजोरियां इस घटनाक्रम से साफ उजागर हुई हैं। विभिन्न देशों की सेनाएं अब भविष्य के लिए स्वतंत्र और बैकअप संचार विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ यह तकनीकी संकट यूक्रेन द्वारा रूसी तेल संयंत्रों पर किए गए लगातार हमलों और वाशिंगटन के साथ बढ़ते कूटनीतिक तनाव की वजह से खड़ा हुआ था। वैश्विक तेल कीमतों में उछाल और आगामी अमेरिकी चुनावों की प्राथमिकताओं ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया। • सीधा कारण: यूक्रेन के लंबी दूरी के ड्रोन हमलों से रूस के तेल शोधन कारखानों को नुकसान पहुंच रहा था, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने का दबाव पैदा हुआ। इस आर्थिक दबाव के चलते सैटेलाइट नेटवर्क की गति को सीमित करने का विवाद सामने आया। • रणनीतिक स्थितियां: यूक्रेनी सेना युद्धक्षेत्र में 10,000 लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रहों वाले स्टारलिंक और स्टारशील्ड नेटवर्क पर पूरी तरह टिकी हुई है। इस निर्भरता के कारण तकनीकी प्रतिबंध लगते ही 161 किमी/घंटे से तेज गति वाले ड्रोनों का संपर्क टूटने लगा था। • आंतरिक राजनीतिक दबाव: अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनावों को देखते हुए अमेरिकी नेतृत्व ने घरेलू ईंधन कीमतों को थामने के लिए कुछ रूसी प्रतिबंधों में ढील देकर डीजल आयात का फैसला किया। यूक्रेन के हमलों से इस रणनीति पर असर पड़ रहा था, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध बढ़ गया। सवाल-जवाब 1. यूक्रेन में स्टारलिंक की गति को लेकर क्या समस्या आई थी? स्टारलिंक की गति को सीमित कर दिया गया था, जिससे 161 किमी/घंटे से तेज उड़ने वाले यूक्रेनी ड्रोनों का नेटवर्क संपर्क टूट जाता था। 2. नेटवर्क सामान्य होने के बाद अब कितनी रफ्तार संभव है? रक्षा मंत्री येवहेन खमारा के अनुसार अब नेटवर्क पर 400 किमी/घंटे से अधिक की गति पर भी संचार सुचारू रूप से काम कर रहा है। 3. क्या स्टारलिंक नेटवर्क का उपयोग रूसी सीमा के अंदर किया जा सकता है? नहीं, रूस को स्टारलिंक का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है, इसलिए वहां के ठिकानों पर हमले के दौरान यह नेटवर्क काम नहीं करता। 4. रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों को लेकर क्या विवाद था? यूक्रेन का कहना है कि युद्ध रोकने के लिए रूस की कमाई का स्रोत काटना जरूरी है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप का तर्क था कि इन हमलों से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें बढ़ रही हैं। 5. रूस ने यूक्रेन के हालिया हमलों को लेकर क्या दावा किया? रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने क्रीमिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में यूक्रेन के 616 ड्रोन मार गिराए। https://trendkia.com/europe/ukraine-men-starlink-ki-gati-phira-bahala-drona-snchalana-men-mili-rahata-51451 TrendKia — Har trend, sabse pehle.