# संयुक्त राष्ट्र जिनेवा परिसर की रौनक बढ़ाएंगे भारत के 5 नए मोर, एरियाना पार्क में पुरानी परंपरा होगी बहाल

> भारत ने स्विट्जरलैंड स्थित संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा मुख्यालय को 5 युवा मोर उपहार में दिए हैं, जिनमें चार नीले और एक दुर्लभ सफेद मोर शामिल है। यह कदम एरियाना पार्क में मोरों की घटती आबादी को फिर से बढ़ाने और दशकों पुरानी कूटनीतिक परंपरा को जीवित रखने के लिए उठाया गया है।

**Type:** article · **Category:** यूरोप · **Published:** 2026-08-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/europe/un-geneva-parisara-ki-raunaka-barhaenge-india-ke-5-nae-mora-ariana-park-men-purani-parnpara-hogi-bahala-15113 · **Language:** Hindi
**Tags:** संयुक्त राष्ट्र, जिनेवा, भारत मोर उपहार, एरियाना पार्क, पैलेस ऑफ नेशंस, विदेश नीति, पर्यावरण

स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित पैलेस ऑफ नेशंस परिसर में भारत की ओर से उपहार स्वरूप भेजे गए 5 नए युवा मोर सफलतापूर्वक पहुंच गए हैं। संयुक्त राष्ट्र कार्यालय जिनेवा (UN जिनेवा) के विशाल एरियाना पार्क में इन पक्षियों का आगमन भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों और एक अनोखी कूटनीतिक परंपरा की निरंतरता को दर्शाता है। भारतीय मिशन ने इस पहल को दोनों पक्षों के बीच बनी बहुआयामी साझेदारी का एक नया और सुंदर प्रतीक करार दिया है। इस बेड़े में चार नीले मोर और एक अत्यंत दुर्लभ सफेद नर मोर शामिल हैं, जिन्हें परिसर में पक्षियों की घटती संख्या को फिर से संतुलित करने के उद्देश्य से भेजा गया है।

 

## एरियाना पार्क में मोरों की घटती संख्या को बढ़ाने की पहल

पैलेस ऑफ नेशंस का एरियाना पार्क लंबे समय से स्वतंत्र रूप से घूमने वाले मोरों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में इनकी संख्या घटकर केवल एक रह गई थी। इसी कमी को दूर करने के लिए भारत ने 5 युवा नर मोरों का यह समूह भेंट किया है। संयुक्त राष्ट्र जिनेवा के आधिकारिक तंत्र ने इस उपहार का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए X पर साझा किए संदेश में उल्लेख किया कि यह कदम मशहूर पांडा डिप्लोमेसी से भी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाता है। इन 5 नए पक्षियों को जिनेवा के सबसे नए और शानदार राजनयिकों के रूप में संबोधित किया गया है।

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## तीन महीने का अनुकूलन और नया अस्थायी घर

वर्तमान समय में इन सभी 5 नए पक्षियों को एरियाना पार्क के भीतर बनाए गए एक विशेष, विशाल और सुरक्षित अस्थायी पक्षीघर (एंक्लोजर) में रखा गया है। UN जिनेवा की महानिदेशक तातियाना वालोवाया ने बताया कि नए माहौल में ढलने के लिए पक्षियों को लगभग 3 महीने का समय दिया जाएगा। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि चार नीले और एक सफेद मोर का यह संयोजन संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक नीले और सफेद रंगों के बिल्कुल अनुकूल है। 3 महीने का अनुकूलन काल पूरा होने के बाद, इन सभी मोरों को बाड़े से बाहर निकालकर पूरे एरियाना पार्क में आजाद घूमने की अनुमति दे दी जाएगी।

 

## विशेष एम्बुलेंस से आगमन और विशेषज्ञों की राय

इन संवेदनशील पक्षियों को सुरक्षित रूप से जिनेवा पहुंचाने के लिए बेहद खास इंतजाम किए गए थे। यूएन न्यूज की जानकारी के मुताबिक जिनेवा बायोपार्क की टीम ने पक्षियों के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं से लैस एक विशेष एम्बुलेंस के जरिए इन्हें स्थानांतरित किया। पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. टोबियास ब्लाहा ने परिसर का मूल्यांकन करते हुए कहा कि पैलेस ऑफ नेशंस का वातावरण मोरों के रहने के लिए सपनों जैसा आदर्श स्थान है। यहां मौजूद सदियों पुराने ऊंचे पेड़, विशाल घास के मैदान, छायादार स्थल और तरह-तरह के फूल मोरों के प्राकृतिक प्राकृतिक आवास के लिए पूरी तरह अनुकूल हैं।

 

## लोमड़ियों के खतरे से सुरक्षा और सतर्कता

विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन युवा पक्षियों को स्थानीय लोमड़ियों से बचाना है। डॉ. टोबियास ब्लाहा के अनुसार, चूंकि ये मोर अभी छोटे हैं और खुले पार्क में रहने के अभ्यस्त नहीं हैं, इसलिए शुरुआती दिनों में वे पेड़ की नीची शाखाओं पर बैठ सकते हैं। लोमड़ियां पेड़ों पर चढ़ने में असमर्थ होती हैं, इसलिए मोर जितनी अधिक ऊंचाई पर रात बिताएंगे, वे उतने ही सुरक्षित रहेंगे। UN का वन्यजीव प्रबंधन अमला शुरुआती हफ्तों में इनकी रात्रि विश्राम आदतों पर कड़ी निगरानी रखेगा ताकि लोमड़ियों के हमले की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

 

## समूह की बनावट और वसंत ऋतु का व्यवहार

उपहार में दिए गए पांचों मोर नर हैं और सभी का जन्म इसी वर्ष हुआ है। UN जिनेवा की फैसिलिटीज मैनेजमेंट ऑफिसर लातीतिया मेनिन के अनुसार, एक ही उम्र के होने के कारण ये मोर आपस में बिना किसी हिंसक प्रतिस्पर्धा के अपने समूह का पदानुक्रम तय कर लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वसंत ऋतु में जब पक्षियों में हार्मोनल बदलाव होते हैं और परिसर में मादा मोर मौजूद होती हैं, तब भी यह युवा नर समूह पार्क से बाहर भागने की कोशिश नहीं करेगा, क्योंकि वे बचपन से एक साथ बड़े हो रहे हैं।

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## 1981 की विरासत और इंदिरा गांधी का योगदान

भारत और जिनेवा मुख्यालय के बीच मोरों के आदान-प्रदान का इतिहास काफी पुराना है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय मिशन के लिए पावो क्रिस्टेटस (Pavo cristatus) प्रजाति के इन 5 मोरों को सौंपना बेहद गर्व का क्षण है। इससे पूर्व वर्ष 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी UN जिनेवा को मोरों की एक जोड़ी उपहार में भेजी थी, जिसकी स्मृति आज भी परिसर में संजोकर रखी गई है।

 

## 1890 की ऐतिहासिक शर्त और नामकरण प्रतियोगिता

एरियाना पार्क में मोरों की उपस्थिति का इतिहास संयुक्त राष्ट्र की स्थापना से भी पहले का है। वर्ष 1890 में इस संपत्ति के मूल संरक्षक गुस्ताव रेविलियोड ने अपनी वसीयत के जरिए यह विशाल पार्क जिनेवा शहर को सौंपा था। उन्होंने वसीयत में एक अनिवार्य शर्त रखी थी कि परिसर में मोरों को हमेशा स्वतंत्र रूप से विचरण करने की आजादी दी जाएगी। उस ऐतिहासिक वचन को निभाते हुए आज भी वहां मोर रखे जाते हैं। जल्द ही UN प्रशासन आम जनता के लिए एक नामकरण प्रतियोगिता शुरू करने जा रहा है, जिसके माध्यम से इन 5 नए मोरों के नाम चुने जाएंगे।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह कदम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सांस्कृतिक पहचान और सॉफ्ट-पावर कूटनीति को मजबूती प्रदान करता है।

**वैश्विक स्तर पर:** जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र परिसर में आने वाले प्रतिनिधि और पर्यटक भारत के राष्ट्रीय पक्षी को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परिसर में देख सकेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. भारत ने संयुक्त राष्ट्र जिनेवा को कितने मोर उपहार में दिए हैं?
भारत ने संयुक्त राष्ट्र जिनेवा को कुल 5 युवा मोर उपहार में दिए हैं, जिनमें 4 नीले मोर और 1 दुर्लभ सफेद मोर शामिल है।

### 2. मोरों को जिनेवा में किस स्थान पर रखा जाएगा?
मोरों को जिनेवा स्थित 'पैलेस ऑफ नेशंस' परिसर के एरियाना पार्क में रखा जाएगा, जहाँ वे 3 महीने के अनुकूलन काल के बाद खुले में घूमेंगे।

### 3. एरियाना पार्क में मोर रखने की शर्त कब से शुरू हुई थी?
यह शर्त 1890 में संपत्ति के मूल मालिक गुस्ताव रेविलियोड ने रखी थी, जब उन्होंने जिनेवा शहर को अपनी जमीन इस नियम के साथ सौंपी थी कि यहां मोर हमेशा स्वतंत्र रूप से रहेंगे।

### 4. क्या भारत ने पहले भी जिनेवा को मोर दिए थे?
हां, वर्ष 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी संयुक्त राष्ट्र जिनेवा को मोरों की एक जोड़ी भेजी थी।

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