# युद्ध रोकने की अपील पर पुतिन क्या बोले, नरेंद्र मोदी की कूटनीति के मायने क्या हैं

> भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन में जारी युद्ध को खत्म करने की अपील की है। हालांकि जानकारों का मानना है कि इससे भारत की विदेश नीति में कोई बदलाव नहीं आने वाला है और मॉस्को के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत बने रहेंगे।

**Type:** article · **Category:** यूरोप · **Published:** 2026-09-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/europe/why-did-modi-urge-putin-to-end-ukraine-war-and-how-did-moscow-respond-25840 · **Language:** Hindi
**Tags:** नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन, रूस यूक्रेन युद्ध, भारत रूस संबंध, विदेश नीति

भारतीय प्रधानमंत्री **नरेंद्र मोदी** ने एक बार फिर रूसी राष्ट्रपति **व्लादिमीर पुतिन** से मॉस्को और **यूक्रेन** के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री ने सोमवार को अपने संबोधन में कहा कि युद्ध में बिताया गया हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है और शांति की ओर बढ़ाया गया हर कदम मानवता को नई उम्मीद तथा उत्साह से भर देता है। भारत लंबे समय से रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी तेल पर अपनी अर्थव्यवस्था के लिए निर्भर रहा है, लेकिन इसके बावजूद 2022 में रूस द्वारा पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किए जाने के बाद से मोदी कई बार पुतिन के सामने शांति की अपील कर चुके हैं।

 

## रणनीतिक स्वायत्तता और भारत-रूस के पुराने संबंध

नई दिल्ली और मॉस्को के बीच कूटनीतिक रिश्ते दशकों पुराने हैं और दोनों देश भू-राजनीति को अलग नजरिए से देखने के बावजूद साथ मिलकर काम करने का रास्ता हमेशा से तलाशते आए हैं। पश्चिमी देशों ने भारत पर इस संघर्ष को लेकर एक स्पष्ट रुख अपनाने का लगातार दबाव बनाया है, लेकिन भारत ने बड़े पैमाने पर तटस्थ रुख बनाए रखा है और बातचीत के जरिए युद्ध समाप्त करने पर जोर दिया है। इस नीति से कई पश्चिमी राजधानियां भले ही पूरी तरह संतुष्ट न हों, लेकिन भारत की विशाल और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को नजरअंदाज करना उनके लिए संभव नहीं है। यही कारण है कि पश्चिमी देश लगातार भारत के साथ अपने संबंध प्रगाढ़ करने में जुटे हैं।

 **नरेंद्र मोदी** की यह ताज़ा टिप्पणी किसी तीसरे देश को खुश करने का प्रयास नहीं कही जा सकती, बल्कि यह पूरी तरह से भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति के अनुरूप है। जानकारों का कहना है कि भारत ब्रिक्स समूह और शंघाई सहयोग संगठन का संस्थापक सदस्य होने के साथ-साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड गठबंधन का भी हिस्सा है। इन तमाम भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भी रूस हमेशा से भारत की रक्षा जरूरतों का सबसे बड़ा स्तंभ रहा है, जो भारत के कुल रक्षा आयातों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पूरा करता है। इसके अलावा, रूस भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी एक बेहद विश्वसनीय भागीदार बना हुआ है।

 

## व्लादिमीर पुतिन की प्रतिक्रिया और ज़मीनी हकीकत

प्रधानमंत्री के इस ताज़ा आह्वान पर प्रतिक्रिया देते हुए रूसी राष्ट्रपति **व्लादिमीर पुतिन** ने कहा कि प्रधानमंत्री का बहुत-बहुत धन्यवाद और हम इस रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि इस तरह की सार्वजनिक अपीलों का पुतिन की रणनीतिक सोच या सैन्य योजनाओं पर तुरंत कोई असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। रूस का नेतृत्व अभी भी यह मानता है कि वह यूक्रेन में अपनी सैन्य विजय के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और मॉस्को की शर्तों पर ही शांति समझौता संभव हो सकता है। यही कारण है कि दोनों पक्षों के बीच भीषण संघर्ष अभी भी जारी है और रूसी सेना लगातार यूक्रेन के सैन्य-औद्योगिक ठिकानों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर अपने हमले तेज कर चुकी है।

 दूसरी ओर, इस संघर्ष को साढ़े चार साल से अधिक का समय बीत चुका है और दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इसके बावजूद यूक्रेन ने भी अपनी तरफ से जवाबी कार्रवाई करते हुए रूस के भीतर लंबी दूरी के ड्रोन हमलों को अंजाम दिया है, जिसके चलते रूसी तेल रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा है और देश के कई हिस्सों में ईंधन की भारी किल्लत तथा पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिली हैं। हाल ही में कीव के पास बोरिस्पिल शहर में हुए रूसी हमलों में चार लोगों की मौत की खबर भी सामने आई है। समाचार पत्र कोमर्सेंट के अनुसार, रूसी पक्ष का यह कड़ा विश्वास है कि इस सैन्य टकराव में समय की चाल कीव के खिलाफ जा रही है, जिसके चलते पुतिन अपने इस विशेष सैन्य अभियान को रोकने के पक्ष में फिलहाल नजर नहीं आते हैं।

## इसका आप पर असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की अपील का असर वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजारों पर देखने को मिल सकता है।

- **भारत में:** कच्चे तेल की कीमतों और रक्षा आयात पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। भारत रूस से रियायती दरों पर ऊर्जा आयात जारी रखेगा जिससे घरेलू ईंधन दरों में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है।

- **वैश्विक स्तर पर:** पश्चिमी देशों और रूस के बीच भारत की कूटनीतिक स्थिति मजबूत होती है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और बहुपक्षीय मंचों पर भारत का रणनीतिक प्रभाव बढ़ता है।

- **आर्थिक मामलों में:** ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अनिश्चितता कम होती है। निवेशकों को भू-राजनीतिक तनावों के बीच आर्थिक नीतियों का स्पष्ट आकलन करने में मदद मिलती है।

- **सुरक्षा क्षेत्र में:** रक्षा साजो-सामान की आपूर्ति सुचारू बनी रहती है। भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए मॉस्को के साथ दीर्घकालिक समझौतों पर अडिग रह सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. नरेंद्र मोदी ने व्लादिमीर पुतिन से क्या अपील की है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन में जारी युद्ध को समाप्त करने और शांति की ओर कदम बढ़ाने का आग्रह किया है।

### 2. रूस से भारत कितना रक्षा आयात करता है?
रूस वर्तमान में भारत की कुल रक्षा जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पूरा करता है और ऊर्जा का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता भी है.

### 3. क्या भारत के इस रुख से पश्चिमी देश नाराज हैं?
पश्चिमी देशों ने भारत के तटस्थ रुख पर पूरी तरह संतुष्टि नहीं जताई है, लेकिन भारत के बड़े बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण वे संबंध बनाए रखे हुए हैं।

### 4. व्लादिमीर पुतिन ने मोदी की अपील पर क्या जवाब दिया?
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का बहुत-बहुत धन्यवाद और हम इस रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।

### 5. यूक्रेन ने रूस के भीतर किस तरह की जवाबी कार्रवाई की है?
यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के जरिए रूस की तेल रिอนरियों को निशाना बनाया है, जिससे देश में ईंधन की किल्लत पैदा हुई है।

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