यूक्रेन में कॉल सेंटर रिश्वत कांड के बाद आंतोन कोवाल्स्की बने नए कार्यवाहक मुख्य अभियोजक यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने पूर्व मुख्य अभियोजक के इस्तीफे और अवैध कॉल सेंटर सिंडिकेट की जांच के बाद आंतोन कोवाल्स्की को देश का नया कार्यवाहक प्रॉसिक्यूटर जनरल नियुक्त किया है। यूक्रेन के न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र में बड़े फेरबदल के तहत 42 वर्षीय आंतोन कोवाल्स्की को देश का नया कार्यवाहक प्रॉसिक्यूटर जनरल बनाया गया है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने गुरुवार को यह नियुक्ति तब की, जब उनके पूर्ववर्ती रुसलान क्रावचेंको पर अवैध कॉल सेंटरों से जुड़े गंभीर वित्तीय भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे। इन आरोपों के बाद क्रावचेंको ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। रूस के खिलाफ जारी युद्ध के बीच राजधानी कीव में शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों पर भ्रष्टाचार की यह नई आंच सीधे तौर पर ज़ेलेंस्की प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। छापेमारी और अवैध कॉल सेंटर नेटवर्क का पर्दाफाश इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब देश की दो प्रमुख स्वतंत्र भ्रष्टाचार-रोधी संस्थाओं, नेशनल एंटी-करप्शन ब्यूरो यानी NABU और स्पेशलाइज्ड एंटी-करप्शन प्रॉसिक्यूटर ऑफिस यानी SAP ने क्रावचेंको के दफ्तर की तलाशी ली। जांच अधिकारियों ने खुलासा किया कि प्रॉसिक्यूटर जनरल के कार्यालय में बैठे एक अधिकारी की देखरेख में मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा संगठित नेटवर्क चलाया जा रहा था। यह सिंडिकेट यूक्रेन में अवैध रूप से संचालित कॉल सेंटरों से नियमित रिश्वत लेता था। बदले में इन ठग कॉल सेंटरों को कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा दी जाती थी। भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों के अनुसार, फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले इन अवैध फोन नेटवर्कों से लाखों की संपत्तियों की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग की गई। NABU ने अपनी जांच में सामने रखा कि घूसखोरी और उगाही से जुटाए गए इस अवैध धन का इस्तेमाल महंगी संपत्तियों, आलीशान इमारतों, कीमती जेवरात और अन्य विलासिता के सामान खरीदने के लिए किया गया। जब यह नेटवर्क बेनकाब हुआ, तो पूरे न्याय विभाग में हड़कंप मच गया। पूर्व अभियोजक के गंभीर आरोप और देश छोड़ने का विवाद कार्यालय पर छापेमारी और गंभीर खुलासों के बीच रुसलान क्रावचेंको ने सार्वजनिक बयान जारी कर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए तमाम आरोप पूरी तरह आधारहीन हैं और उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, बयान जारी करने के ठीक एक दिन बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और यूक्रेन छोड़ दिया। देश छोड़ने से पहले क्रावचेंको ने भ्रष्टाचार रोधी अधिकारियों पर भी पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यालय में ली गई तलाशी के दौरान जानबूझकर जरूरी कानूनी दस्तावेज चुराए गए। उनका कहना था कि इन फाइलों को चुराने का एकमात्र मकसद भ्रष्टाचार-रोधी अधिकारियों के खिलाफ चल रही आपराधिक जांचों पर पर्दा डालना था। इसके अलावा उन्होंने NABU प्रमुख सेमेन क्रिवोनोस पर करीब 20 साल पुराने एक मुकदमे में फर्जी दस्तावेज तैयार करने का भी गंभीर आरोप लगाया। एजेंसियों का कड़ा रुख और जांच में रुकावट डालने की शिकायत इन आरोपों पर NABU और SAP दोनों ने कड़ा रुख अपनाया है। NABU प्रमुख सेमेन क्रिवोनोस ने क्रावचेंको के दावों को बेतुका करार देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच रोकने के लिए बेहद आक्रामक और सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों एजेंसियों का स्पष्ट कहना है कि यह उनकी हाई-प्रोफाइल जांचों को भटकाने और पटरी से उतारने के लिए चलाया जा रहा एक अभूतपूर्व अभियान है। क्रिवोनोस ने यह सनसनीखेज दावा भी किया कि भ्रष्टाचार रोधी जासूसों, उनके कार्यालयों और निजी वाहनों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पूरी कवायद NABU और SAP के कामकाज में बाधा डालने और आने वाले दिनों में होने वाली जांचों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की साजिश नजर आती है। सत्ता के शीर्ष गलियारों में जांच और सुधारों पर बहस यह पहला मौका नहीं है जब यूक्रेन में किसी शीर्ष पद पर भ्रष्टाचार की गाज गिरी हो। युद्ध के कठिन दौर में भी देश की भ्रष्टाचार रोधी एजेंसियां राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के कई करीबी सहयोगियों की पड़ताल कर रही हैं। जांच के घेरे में ज़ेलेंस्की के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ एंड्री येरमक, पूर्व मंत्री और कई प्रभावशाली हस्तियां शामिल हैं। एंड्री येरमक के वकील ने इन तमाम आरोपों को पूरी तरह तथ्यहीन बताया है। यूक्रेन में भ्रष्टाचार-रोधी संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर पहले भी बड़ा तनाव देखा जा चुका है। साल 2025 में जब ज़ेलेंस्की ने ऐसे सुधार लागू करने की कोशिश की थी जिससे NABU और SAP की स्वतंत्रता सीमित हो सकती थी, तब देशव्यापी विरोध प्रदर्शन भड़क उठे थे। भारी जनाक्रोश के बाद राष्ट्रपति को उनकी स्वायत्तता बहाल करनी पड़ी थी। अब अभियोजक कार्यालय में इतने बड़े घोटाले और आंतोन कोवाल्स्की की नई नियुक्ति के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मंचों पर यह बहस तेज हो गई है कि सरकार भ्रष्टाचार मिटाने के वादे पर कितनी खरी उतर रही है। इसका आप पर असर यूक्रेन के अभियोजक कार्यालय में कॉल सेंटर घोटाले और शीर्ष स्तर पर इस्तीफे से अंतरराष्ट्रीय सहायता और युद्धकालीन शासन व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। • वैश्विक वित्तीय मदद: पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिलने वाली अरबों डॉलर की सहायता कड़ी निगरानी की शर्तों के अधीन हो सकती है। अगर विदेशी करदाताओं का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने का अंदेशा बढ़ता है, तो भविष्य में हथियारों और बजट की सीधी फंडिंग में देरी हो सकती है। • यूरोपीय संघ में सदस्यता की राह: यूरोपीय संघ का सदस्य बनने के लिए यूक्रेन को निष्पक्ष और पारदर्शी न्यायिक तंत्र साबित करना अनिवार्य है। इस तरह के संस्थागत विवाद कीव की सदस्यता वार्ता प्रक्रिया को लंबा और बेहद कठिन बना सकते हैं। • साइबर अपराध और आम नागरिक: अवैध कॉल सेंटरों का यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आम लोगों से वित्तीय धोखाधड़ी करता था। अभियोजकों की मिलीभगत टूटने से ऐसे टेलीफोन फ्रॉड पर सख्त कार्रवाई होने की उम्मीद जगेगी। • आंतरिक राजनीतिक स्थिरता: युद्ध के दौरान सरकारी एजेंसियों के आपसी टकराव से जनविश्वास पर असर पड़ता है। इससे प्रशासनिक फैसलों में अनिश्चितता और जनविरोध बढ़ने की संभावना बनी रहती है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम स्वतंत्र भ्रष्टाचार रोधी एजेंसियों द्वारा एक संगठित वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ की गई त्वरित जांच और तलाशी अभियान के चलते सामने आया। • सीधा कारण: पूर्व मुख्य अभियोजक रुसलान क्रावचेंको के कार्यालय में तैनात एक अधिकारी द्वारा अवैध कॉल सेंटरों से घूस लेकर करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग करने का खुलासा हुआ। एजेंसी के छापों के ठीक बाद क्रावचेंको ने इस्तीफा देकर देश छोड़ दिया। • संस्थागत पृष्ठभूमि: यूक्रेन में NABU और SAP जैसी स्वतंत्र संस्थाएं युद्ध के बावजूद शीर्ष राजनीतिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ बड़े वित्तीय मामलों की जांच में जुटी हैं। इस जांच ने अभियोजक कार्यालय के अंदर छिपे संरक्षण तंत्र को सीधे चुनौती दी। • अतीत का संदर्भ: साल 2025 में भी सरकार ने इन स्वतंत्र जांच एजेंसियों के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की थी, जिसका जनता ने सड़कों पर उतरकर तीव्र विरोध किया था। पुरानी तनातनी के चलते ही दोनों पक्षों के बीच अविश्वास चरम पर था। • सुरक्षा और निगरानी के आरोप: जांच अधिकारियों पर निगरानी रखने और दफ्तरों से संवेदनशील दस्तावेज गायब करने के आरोपों ने मामले को सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई से बढ़ाकर एक बड़े संस्थागत संकट में बदल दिया। सवाल-जवाब 1. यूक्रेन का नया कार्यवाहक मुख्य अभियोजक किसे नियुक्त किया गया है? राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने 42 वर्षीय आंतोन कोवाल्स्की को देश का नया कार्यवाहक प्रॉसिक्यूटर जनरल नियुक्त किया है। 2. पूर्व मुख्य अभियोजक रुसलान क्रावचेंको को पद क्यों छोड़ना पड़ा? भ्रष्टाचार रोधी एजेंसियों द्वारा उनके कार्यालय में अवैध कॉल सेंटरों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की तलाशी लेने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। 3. कॉल सेंटर घोटाले में क्या आरोप लगाए गए हैं? आरोप है कि अभियोजक कार्यालय के एक अधिकारी के नेतृत्व वाले नेटवर्क ने फोन फ्रॉड करने वाले कॉल सेंटरों को संरक्षण देकर लाखों की मनी लॉन्ड्रिंग की। 4. NABU प्रमुख सेमेन क्रिवोनोस ने क्या गंभीर खुलासे किए? उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार की जांच रोकने के लिए आक्रामक प्रयास हो रहे हैं और जांच अधिकारियों, उनके दफ्तरों तथा वाहनों की निगरानी की जा रही है। 5. क्या ज़ेलेंस्की के अन्य सहयोगियों के खिलाफ भी जांच चल रही है? हां, NABU और SAP राष्ट्रपति के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ एंड्री येरमक, पूर्व मंत्रियों और कई अन्य प्रभावशाली हस्तियों के खिलाफ जांच कर रहे हैं। 6. साल 2025 में यूक्रेन में किस बात को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे? साल 2025 में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की द्वारा NABU और SAP की स्वायत्तता को सीमित करने वाले सुधारों के विरोध में देशभर में बड़े प्रदर्शन हुए थे। https://trendkia.com/europe/yukrena-men-kola-sentara-rishvata-kanda-ke-bada-anton-kovalskyi-bane-nae-karyavahaka-mukhya-abhiyojaka-33666 TrendKia — Har trend, sabse pehle.