# यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए पीएम मोदी के पास अच्छे विचार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की सराहना

> रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष को समाप्त कराने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कूटनीतिक प्रयासों और विचारों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के बावजूद पीएम मोदी लगातार शांति का मुद्दा उठाते रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** यूरोप · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/europe/yukrena-sngharsha-ke-samadhana-ke-lie-pm-modi-ke-pasa-achchhe-vichara-rusi-rashtrapati-vladimir-putin-ne-ki-sarahana-41572 · **Language:** Hindi
**Tags:** नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन, रूस यूक्रेन युद्ध, भारत रूस संबंध, शांति वार्ता, विदेश नीति

मॉस्को में लोगों को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को स्थानीय समयानुसार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांति प्रयासों को खुले दिल से सराहा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के साथ चल रहे सैन्य टकराव को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के पास बेहद व्यावहारिक और सकारात्मक विचार हैं। पुतिन ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और मजबूत दोस्ताना रिश्ते होने के बावजूद, भारतीय प्रधानमंत्री लगातार इस मुद्दे पर खुलकर बात करते हैं और संघर्ष को बातचीत के जरिए सुलझाने पर बल देते हैं।

## शांति प्रयासों में भारतीय नेतृत्व का निष्पक्ष रुख
रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पूरी तरह निष्पक्ष और संतुलित नजरिया रखते हैं, लेकिन उनकी वास्तविक रुचि केवल और केवल शांति की बहाली में है। पुतिन ने इस बात का उल्लेख किया कि पीएम मोदी दोनों पक्षों की सहमति से समाधान तलाशने के लिए लगातार सक्रिय रहते हैं। उनके अनुसार, इस तरह के संकट में एक सच्चे मित्र की तरह खुलकर अपनी राय रखना और समाधान पेश करना एक सराहनीय कदम है, जिसके लिए रूस उनका आभार व्यक्त करता है।

> "उनकी गहरी दिलचस्पी है और उनके पास आपसी सहमति वाले समाधान खोजने के लिए बहुत अच्छे विचार हैं।"
पुतिन ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह से जल्द से जल्द शांतिपूर्ण उपायों के जरिए समाधान निकालने की इच्छा जता रहे हैं, वह बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बातचीत और कूटनीति के माध्यम से इस जटिल मसले को निपटाने के लगातार मिल रहे भारतीय समर्थन के प्रति विशेष कृतज्ञता प्रकट की।

## भारत का सैद्धांतिक और मानवीय दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विभिन्न वैश्विक मंचों पर बार-बार इस बात को दोहराया है कि हिंसा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। अगस्त में अपनी जापान यात्रा के दौरान दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि भारत ने शुरू से ही इस पूरे घटनाक्रम पर एक सैद्धांतिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया है। इसी तटस्थ और मानवीय रुख की वजह से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की, दोनों ही भारतीय नेतृत्व के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए हैं और घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा करते रहे हैं।

## स्थायी समाधान के लिए कूटनीतिक पहल
संघर्ष को सुलझाने में भारत की संभावित भूमिका को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि नई दिल्ली किसी भी ऐसे सार्थक प्रयास का समर्थन करने को तैयार है जो शांति की दिशा में आगे बढ़ता हो। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देशों के साथ भारत के अच्छे संबंध होने के कारण, भारत स्थायी और त्वरित समाधान की दिशा में सेतु की भूमिका निभा सकता है। भारत का मुख्य उद्देश्य बातचीत, कूटनीति और परस्पर विश्वास के जरिए क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल कराना है।

## इसका आप पर असर
यह कूटनीतिक घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर भारत की मध्यस्थता क्षमता और भू-राजनीतिक स्थिरता को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।

- **भारत में:** अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का तटस्थ और शांतिप्रिय रुख देश की कूटनीतिक साख को मजबूत करता है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक संबंधों में संतुलन बनाए रखने में रणनीतिक मदद मिलती है।
- **वैश्विक स्तर पर:** दोनों पक्षों के साथ संवाद कायम रहने से आने वाले समय में शांति वार्ता का रास्ता खुल सकता है। इससे युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक अनिश्चितता और मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने में सहायता मिल सकती है।
- **आयात और अर्थव्यवस्था पर:** क्षेत्र में शांति स्थापित होने से कच्चे तेल और खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं पर छाया संकट टल सकता है। आम उपभोक्ताओं को भविष्य में अचानक होने वाली मूल्य वृद्धि से राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
- **प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा:** संघर्ष खत्म होने की दिशा में प्रगति होने से पूर्वी यूरोप में अध्ययनरत या कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा स्थिति स्थिर होती है। इससे अंतरराष्ट्रीय आवागमन और व्यापार के मार्ग दोबारा सुगम हो सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
रूसी राष्ट्रपति द्वारा यह बयान इसलिए सामने आया क्योंकि भारत संघर्ष शुरू होने के बाद से ही लगातार दोनों देशों के संपर्क में रहते हुए शांति और कूटनीति की वकालत कर रहा है।

- **सीधा कारण:** मॉस्को में एक संबोधन के दौरान रूसी राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्विपक्षीय संबंधों के बावजूद लगातार युद्ध समाप्त करने की मांग उठा रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि भारतीय नेतृत्व के पास व्यावहारिक और निष्पक्ष प्रस्ताव हैं।
- **समानांतर संवाद की पृष्ठभूमि:** भारतीय प्रधानमंत्री दोनों देशों के प्रमुखों, पुतिन और ज़ेलेंस्की, से प्रत्यक्ष संवाद बनाए हुए हैं और दोनों ही पक्षों ने उनके साथ अपने विचार साझा किए हैं। इस खुले संवाद के कारण भारत का रुख दोनों पक्षों द्वारा स्वीकार्य माना गया है।
- **दीर्घकालिक विदेश नीति:** भारत ने शुरुआत से ही तटस्थ और मानवीय नजरिया अपनाते हुए सैन्य टकराव के स्थान पर बातचीत को एकमात्र हल बताया है। इस सुसंगत दृष्टिकोण के चलते भारत को शांति बहाली में एक संभावित मध्यस्थ के तौर पर देखा जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी के बारे में क्या कहा?
पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के साथ संघर्ष को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के पास बहुत अच्छे विचार हैं और वे शांति के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

### 2. यूक्रेन संकट पर भारत का क्या रुख रहा है?
भारत ने इस मुद्दे पर एक सैद्धांतिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान निकालने पर जोर दिया है।

### 3. पीएम मोदी ने जापान में अपने साक्षात्कार में क्या बताया था?
उन्होंने बताया था कि भारत के मानवीय रुख की पुतिन और ज़ेलेंस्की दोनों सराहना करते हैं और दोनों नेताओं ने उनसे अपने विचार साझा किए हैं।

### 4. शांति वार्ता में भारत की भूमिका पर प्रधानमंत्री का क्या विचार है?
पीएम मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों के साथ अच्छे संबंधों के कारण भारत जल्द और स्थायी शांति बहाल करने के प्रयासों को मजबूत कर सकता है।

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