यूक्रेन युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंध रोकने का दिया आदेश व्हाइट हाउस ने अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित कड़े प्रतिबंध कानून के कई हिस्सों को लागू करने से रोक दिया है। इसके साथ ही रूसी डीजल आयात की योजना और उपग्रह इंटरनेट पर लगी पाबंदियों ने यूक्रेन और यूरोपीय सहयोगियों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार रात एक कार्यकारी आदेश जारी करते हुए रूस पर लागू होने वाले कई ताजा प्रतिबंधों को रोक दिया है। अमेरिकी संसद ने यूक्रेन पर रूसी सैन्य हमलों के जवाब में इन कड़े प्रतिबंधों को हाल ही में मंजूरी दी थी। राष्ट्रपति के अनुसार देश के रणनीतिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए इन प्रावधानों पर अस्थायी रोक लगाना जरूरी हो गया था। इस नए कानून को सितंबर के महीने में मंजूरी दी गई थी और रविवार से इसके सभी कड़े नियम प्रभावी होने वाले थे। रूसी डीजल सौदे पर विवाद और संसद की नाराजगी यह फैसला ऐसे नाजुक समय में लिया गया है जब कुछ ही दिन पहले प्रशासन ने रूस से डीजल आयात करने की योजना पेश की थी। इस आयात का मकसद नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका में ईंधन के दामों को नियंत्रित करना है। इन मध्यावधि चुनावों के नतीजों से तय होना है कि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों पर किस राजनीतिक दल का दबदबा रहेगा। अचानक सामने आई इस ईंधन योजना ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों को चौंका दिया और दोनों प्रमुख दलों के सांसदों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। प्रतिबंधों से जुड़ा यह ऐतिहासिक कानून साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम की स्मृति में समर्पित है, जिनका निधन 11 जुलाई को हुआ था। वे लंबे समय तक वाशिंगटन में यूक्रेन की सुरक्षा और सैन्य सहायता के सबसे मुखर समर्थकों में गिने जाते रहे। इस कानून का मुख्य लक्ष्य रूसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर सीधा प्रहार करना और उसके वित्तीय स्रोतों को पूरी तरह सुखाना था। कड़े प्रावधान और भारी भरकम शुल्क का अधिकार इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया था कि वे रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी सीमा शुल्क लगा सकें। इस श्रेणी में विशेष तौर पर चीन और भारत शामिल हैं, जो मॉस्को से सबसे अधिक ईंधन खरीदते हैं। इसके साथ ही कानून में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से लक्षित किया गया था। इसमें रूस के प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों, वित्तीय संस्थानों और उसके गुप्त टैंकर बेड़े को भी शामिल किया गया था, जिसका इस्तेमाल पश्चिमी देशों के पुराने प्रतिबंधों को दरकिनार कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है। दोनों दलों के सांसदों की मांग और तीखे राजनीतिक आरोप गुरुवार को दोनों दलों के 20 अमेरिकी सांसदों ने एक संयुक्त पत्र जारी करके राष्ट्रपति से आग्रह किया था कि वे 18 अक्टूबर से प्रभावी होने वाले इस नए कानून का अक्षरशः पालन करें। इन जनप्रतिनिधियों ने पहले कानून पर हस्ताक्षर करने के लिए राष्ट्रपति की सराहना की थी, लेकिन साथ ही जोर देकर कहा था कि इसकी पूरी और निष्ठावान बहाली बेहद आवश्यक है। सांसदों का तर्क था कि ग्राहम कानून के सभी कड़े प्रावधानों को बिना किसी देरी के लागू करना ही पुतिन को वास्तविक शांति वार्ता की मेज पर आने के लिए विवश कर सकता है। हालांकि प्रतिबंध रोकने के इस कदम के तुरंत बाद राजनीतिक विरोध और तेज हो गया। वर्जीनिया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद डॉन बेयर ने राष्ट्रपति के रुख की तीखी आलोचना करते हुए इसे मॉस्को के सामने समर्पण करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम से कीव और वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को अकेला छोड़ दिया गया है। बेयर ने एक्स पर लिखा कि पुतिन के सामने ताजा समर्पण यूक्रेनी साझेदारों के साथ विश्वासघात है और यह संसद की स्पष्ट मंशा का सीधा उल्लंघन करता है। यूरोपीय सहयोगियों की चिंता और पोलैंड में सैन्य युद्धाभ्यास अमेरिका के पारंपरिक सहयोगियों ने भी रूसी डीजल सौदे को लेकर गहरी असहजता व्यक्त की है। उनका मानना है कि ईंधन खरीद से मिलने वाला राजस्व सीधे तौर पर रूस की युद्ध क्षमताओं को मजबूत करेगा। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी अगले महीने पोलैंड में एक व्यापक संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू करने जा रहे हैं। ये तीनों देश यूक्रेन के सबसे मजबूत यूरोपीय साझेदार माने जाते हैं। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने स्पष्ट किया कि पोलैंड में आयोजित होने वाले इस अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी सहयोगी यूक्रेन की जरूरी सैन्य ट्रेनिंग और युद्ध के बाद उसके पुनर्निर्माण के लिए पूरी तरह तैयार रहें। दूसरी ओर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अमेरिकी डीजल योजना को पुतिन के लिए एक अनुचित उपहार बताया और कहा कि यह एक ऐसे युद्ध में निवेश करने जैसा है जिसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। अस्थायी ऊर्जा संघर्ष विराम का दावा और रिफाइनरी हमलों पर विवाद इससे पहले रविवार, 11 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति ने घोषणा की थी कि रूस और यूक्रेन दोनों ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए एक विशेष संघर्ष विराम पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने दावा किया था कि यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, हालांकि उन्होंने इसके नियमों या शर्तों का कोई आधिकारिक ब्योरा साझा नहीं किया था। ज़ेलेंस्की ने इस सार्वजनिक घोषणा पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया था। उन्होंने साफ किया कि यदि मॉस्को ऊर्जा संयंत्रों पर बमबारी रोकता है तो कीव भी अपनी जवाबी कार्रवाई थाम लेगा। इसके विपरीत मॉस्को ने किसी भी ऐसे समझौते से साफ इनकार कर दिया और यूक्रेनी शहरों पर अपने हवाई हमले लगातार जारी रखे। इसके तीन दिनों बाद कीव ने भी रूसी ऊर्जा ठिकानों पर फिर से हमले शुरू कर दिए। कीव की इस जवाबी कार्रवाई से नाराज होकर व्हाइट हाउस ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों को बेहद अनुचित बताया, जिस पर ज़ेलेंस्की ने दृढ़ता से जवाब दिया कि वे केवल अपने देश के बुनियादी हितों की रक्षा कर रहे हैं। स्टारलिंक इंटरनेट पाबंदी और सुरक्षा सहयोग में खिंचाव रणनीतिक तनाव उस समय और ज्यादा बढ़ गया जब यूक्रेन में अमेरिकी उपग्रह नेटवर्क स्टारलिंक की सेवाओं पर तकनीकी सीमाएं लगा दी गईं। यह इंटरनेट नेटवर्क यूक्रेनी रक्षा बलों के आपसी समन्वय और सुरक्षा अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मंगलवार रात जब इस नेटवर्क की गति में अचानक गिरावट आई, ठीक उसी समय रूस ने यूक्रेन पर कई भीषण और घातक हवाई हमले किए। स्थानीय नागरिकों और सरकार का कहना था कि इंटरनेट ठप होने की वजह से हमलों की कोई पूर्व चेतावनी जारी नहीं की जा सकी। शुक्रवार को ज़ेलेंस्की ने स्टारलिंक की धीमी गति को एक खतरनाक और अत्यंत अप्रिय झटका बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि उपग्रह इंटरनेट की सामान्य गति अभी तक पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है। इसके अतिरिक्त अमेरिकी प्रशासन पहले ही यह चेतावनी दे चुका है कि यदि यूक्रेन ने रूसी तेल शोधन संयंत्रों को निशाना बनाना बंद नहीं किया, तो उसके साथ खुफिया जानकारियों का साझा किया जाना भी रोका जा सकता है, जो कीव की हवाई सुरक्षा के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती है। इसका आप पर असर अमेरिकी प्रशासन द्वारा रूस पर नए प्रतिबंधों को रोकने और ऊर्जा आयात पर पुनर्विचार करने से वैश्विक तेल आपूर्ति और कूटनीतिक समीकरणों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • भारत में प्रभाव: भारत पर रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिकी अतिरिक्त टैरिफ का तत्काल खतरा टल गया है। इससे घरेलू रिफाइनरियों के लिए रियायती कच्चे तेल की आपूर्ति निर्बाध बनी रहेगी और खुदरा ईंधन की कीमतों में अचानक उछाल की आशंका कम होगी। • वैश्विक ऊर्जा बाजार: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रूसी हाइड्रोकार्बन की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता में मामूली कमी आ सकती है। हालांकि यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर जारी हमलों और जवाबी कार्रवाई से आपूर्ति जोखिम लंबे समय तक बना रहेगा। • यूक्रेन सुरक्षा तंत्र: युद्ध क्षेत्र में संचार और उपग्रह इंटरनेट पर पाबंदियों से रक्षा अभियान प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिकी खुफिया सहयोग में रुकावट आने पर नागरिक सुरक्षा और हवाई हमलों की पूर्व चेतावनी प्रणाली कमजोर हो सकती है। • अमेरिकी राजनीति: आगामी मध्यावधि चुनावों में विदेशी नीति और घरेलू तेल कीमतें केंद्रीय मुद्दा बनेंगी। विपक्षी दल इस फैसले को मॉस्को के सामने रणनीतिक नरमी के रूप में प्रचारित कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी राष्ट्रपति ने घरेलू आर्थिक चिंताओं, ईंधन की बढ़ती कीमतों और मध्यावधि चुनावों के दबाव के कारण नए कांग्रेस प्रतिबंधों के कई हिस्सों को रोकने का निर्णय लिया है। • ईंधन की कीमतें घटाने का दबाव: प्रशासन नवंबर के मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले देश के भीतर ऊर्जा और डीजल की बढ़ती कीमतों पर काबू पाना चाहता है। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों पर किस राजनीतिक दल का नियंत्रण रहेगा। • व्यापक टैरिफ अधिकारों का प्रभाव: लिंडसे ग्राहम कानून में रूसी तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक का शुल्क लगाने का प्रावधान था। इसे तुरंत लागू करने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मचने और मित्र राष्ट्रों के साथ रिश्ते बिगड़ने का जोखिम था। • विफल संघर्ष विराम प्रयास: ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर बिना किसी लिखित सहमति के संघर्ष विराम का दावा किया गया था, जिसे मॉस्को ने मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद यूक्रेन के तेल रिफाइनरियों पर दोबारा हमलों से कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया। सवाल-जवाब 1. डोनाल्ड ट्रंप ने किन प्रतिबंधों पर रोक लगाई है? ट्रंप ने अमेरिकी संसद द्वारा हाल ही में पारित उस कानून के कई प्रतिबंधों पर रोक लगाई है, जिसे यूक्रेन युद्ध के चलते रूस की अर्थव्यवस्था को दंडित करने के लिए बनाया गया था। 2. यह प्रतिबंध कानून किसके नाम पर रखा गया है? यह कानून साउथ कैरोलिना के पूर्व रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिनका 11 जुलाई को निधन हुआ था। 3. इस नए कानून में कौन से कड़े प्रावधान शामिल हैं? कानून में पुतिन, रूसी बैंकों और गुप्त टैंकर बेड़े पर प्रतिबंध के अलावा रूस से तेल खरीदने वाले शीर्ष 5 देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार शामिल है। 4. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने डीजल सौदे पर क्या कहा? ज़ेलेंस्की ने अमेरिकी डीजल योजना को पुतिन के लिए एक उपहार बताया और कहा कि यह एक ऐसे युद्ध में निवेश करने जैसा है जिसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। 5. यूक्रेन में स्टारलिंक सेवाओं को लेकर क्या समस्या आई? स्टारलिंक की इंटरनेट गति को सीमित कर दिया गया, जिसके दौरान रूस ने यूक्रेन पर घातक हवाई हमले किए और इंटरनेट धीमा होने के कारण पूर्व चेतावनी नहीं मिल सकी। https://trendkia.com/europe/yukrena-yuddha-ke-bicha-donald-trump-ne-russia-para-nae-pratibndha-rokane-ka-diya-adesha-48854 TrendKia — Har trend, sabse pehle.