# यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में नई दिल्ली की पेशकश सबसे व्यापक, कीव ने मध्यस्थता पर दी सहमति

> यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के अनुसार शांति से जुड़े चार अंतरराष्ट्रीय मसौदों में भारत का प्रारूप सबसे व्यापक है, जिसे दोनों पक्षों की ओर से सकारात्मक कूटनीतिक समर्थन मिल रहा है।

**Type:** article · **Category:** यूरोप · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/europe/yukrena-yuddha-khatma-karane-men-new-delhi-ki-peshakasha-sabase-vyapaka-kyiv-ne-madhyasthata-para-di-sahamati-42089 · **Language:** Hindi
**Tags:** रूस यूक्रेन युद्ध, नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन, वोलोदिमीर जेलेंस्की, एंड्री सिबिहा, भारत शांति प्रस्ताव, क्रेमलिन, काला सागर समझौता

पूर्वी यूरोप में लंबे समय से जारी सैन्य टकराव को सुलझाने की वैश्विक कोशिशों के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रगति सामने आई है। यूक्रेन ने स्पष्ट किया है कि युद्ध विराम और स्थाई समाधान के लिए विचाराधीन चार अंतरराष्ट्रीय रूपरेखाओं में नई दिल्ली की ओर से प्रस्तुत खाका सबसे संतुलित और समग्र है। इस कदम से स्पष्ट संकेत मिलता है कि शांति वार्ता की मेज पर भारत अब केवल परामर्शदाता नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कराने वाले मुख्य सूत्रधार की भूमिका में आ चुका है। कीव प्रशासन ने भी ऊर्जा बुनियादी ढांचे और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर विशिष्ट युद्धविराम के साथ बिना किसी पूर्व शर्त के व्यापक संघर्ष विराम पर आगे बढ़ने की इच्छा जताई है।

## शांति वार्ता के चार प्रारूपों में भारतीय खाका सबसे आगे
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने राजनयिक संवाददाताओं से बातचीत करते हुए शांति प्रक्रिया से जुड़े वैश्विक विकल्पों का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि इस संकट के कूटनीतिक समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस समय कुल चार अलग-अलग योजनाएं सक्रिय रूप से चर्चा में हैं। इन सभी विकल्पों की तुलना करते हुए यूक्रेनी विदेश मंत्री ने माना कि भारतीय पक्ष की रूपरेखा सबसे अधिक समग्र और व्यावहारिक है।

> ## 'हमारे सामने 4 प्रस्ताव हैं। सबसे व्यापक भारत का प्रस्ताव है।'
सिबिहा ने रेखांकित किया कि शांति की दिशा में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नई दिल्ली ने पहली बार इतनी स्पष्ट रुचि दिखाई है। यूक्रेनी नेतृत्व पहले ही अपने वैश्विक सहयोगियों को यह अवगत करा चुका है कि वह तनाव घटाने वाले विभिन्न क्षेत्रीय युद्धविराम प्रस्तावों पर रचनात्मक रूप से चर्चा करने के लिए तैयार है। भारतीय पहल को दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध तोड़ने की दिशा में एक बेहद ठोस आधार के रूप में देखा जा रहा है।

## काला सागर कृषि गलियारा और ऊर्जा सुरक्षा के अलग प्रस्ताव
विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचाराधीन अन्य तीन प्रस्तावों की रूपरेखा भी स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि तुर्किये और मिस्र ने मिलकर एक संयुक्त पहल आगे बढ़ाई है, जिसका मुख्य केंद्र काला सागर में अनाज और अन्य कृषि उपजों की निर्बाध आवाजाही के लिए सुरक्षित समुद्री गलियारा बनाना है। यह सुझाव खाद्य सुरक्षा संकट को कम करने के उद्देश्य से एक सीमित समुद्री युद्धविराम का मार्ग सुझाता है।

इसके समानांतर, वाशिंगटन की ओर से एक अन्य प्रारूप पर विचार किया जा रहा है, जो दोनों देशों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों को रोकने पर केंद्रित है। ऊर्जा ग्रिड और संयंत्रों पर हमलों को थामने से जुड़ा यह मुद्दा यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए द्विपक्षीय विमर्श में भी प्रमुखता से उठा था। हालांकि इन क्षेत्रीय और सीमित विकल्पों की तुलना में भारत की कोशिशें संपूर्ण संकट को एक साथ संबोधित करने का प्रयास करती हैं।

## रूस का दृष्टिकोण और प्रधानमंत्री मोदी के विचारों की सराहना
इस पूरी कूटनीतिक कवायद में सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि मॉस्को भी नई दिल्ली के शांति प्रयासों का पहले ही सार्वजनिक स्वागत कर चुका है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वाल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब के वार्षिक सम्मेलन में स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास इस जटिल संकट को दोनों पक्षों के लिए सम्मानजनक ढंग से सुलझाने के अत्यंत व्यावहारिक और सकारात्मक विचार हैं।

रूसी राष्ट्रपति ने उल्लेख किया था कि भारत के साथ मॉस्को के पारंपरिक और मजबूत मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी जब भी द्विपक्षीय बातचीत करते हैं, वे युद्ध को तुरंत रोकने और शांति वार्ता शुरू करने की आवश्यकता पर निरंतर बल देते हैं। पुतिन के अनुसार, दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान तैयार करने में भारतीय नेतृत्व का निष्पक्ष और रचनात्मक रुख अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है।

## भारतीय बहुलता और सामाजिक ताने-बाने की पुतिन ने की प्रशंसा
वाल्दाई मंच पर वैश्विक मामलों पर चर्चा करते हुए पुतिन ने भारत की सामाजिक एकजुटता और भाषाई विविधता का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विशाल जनसंख्या और भौगोलिक विस्तार वाला यह देश दुनिया के लिए सांस्कृतिक सौहार्द का एक अनोखा उदाहरण प्रस्तुत करता है।

पुतिन ने अपनी पिछली चर्चाओं का स्मरण करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें समझाया था कि देश की लगभग 1.5 अरब आबादी में से करीब 60 करोड़ नागरिक हिंदी बोलते हैं, जबकि बाकी आबादी अपनी-अपनी समृद्ध क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग करती है। इसके बावजूद पूरा देश एक सूत्र में बंधा हुआ है। रूसी राष्ट्रपति ने टिप्पणी की कि भारतीय समाज की यह विविधता और आंतरिक सामंजस्य वैश्विक स्तर पर भी शांति और सह-अस्तित्व की राह दिखाने की क्षमता रखता है।

## BRICS वार्ता और शांति बहाली के निरंतर प्रयास
नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर बैठक से पूर्व दोनों शीर्ष नेताओं के बीच विस्तृत विचार-विमर्श हुआ था। उस संवाद में पुतिन ने भारतीय प्रधानमंत्री को युद्ध के मोर्चे की वास्तविक स्थिति और विभिन्न स्तरों पर जारी शांति पहलों की प्रगति से अवगत कराया था। फरवरी 2022 से चल रहे इस व्यापक सैन्य संघर्ष के दौरान वैश्विक स्तर पर कई मध्यस्थता प्रयास हुए हैं, लेकिन भारत लगातार यही दोहराता रहा है कि समस्याओं का समाधान तोपों से नहीं, बल्कि बातचीत और राजनयिक मेज पर ही संभव है।

क्रेमलिन के मुख्य प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी कुछ समय पूर्व बयान जारी कर पुष्टि की थी कि रूस किसी भी ऐसी शांति प्रक्रिया का तहे दिल से समर्थन करेगा जिसमें भारत सक्रिय भूमिका निभाए। पेस्कोव के शब्दों में, विवादों को कूटनीति के माध्यम से हल करने की मॉस्को की सोच भारतीय विदेश नीति के बुनियादी सिद्धांतों से पूरी तरह मेल खाती है। अब कीव से आई इस सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों प्रतिद्वंद्वी पक्ष भारत को एक भरोसेमंद और स्वीकार्य मध्यस्थ मानने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।

## इसका आप पर असर
रूस और यूक्रेन के बीच शांति बहाली की प्रक्रिया आगे बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा कीमतों, खाद्यान्न आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिरता पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **भारत में:** कच्चे तेल और खाद्य तेलों के वैश्विक आयात मूल्य में स्थिरता आने से घरेलू मुद्रास्फीति पर दबाव कम होगा। इससे आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल, डीजल और रसोई के बजट में अप्रत्यक्ष राहत मिल सकती है।
- **कृषि और खाद्य बाजार पर:** काला सागर के जरिए अनाज के सुरक्षित निर्यात पर सहमति बनने से वैश्विक गेहूं और सूरजमुखी तेल की आपूर्ति सामान्य होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य वस्तुओं के दाम अचानक बढ़ने का जोखिम कम होगा।
- **ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर:** ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों में संभावित ठहराव से यूरोप और एशियाई देशों में प्राकृतिक गैस और बिजली संकट की आशंका घटेगी। उपभोक्ताओं और औद्योगिक विनिर्माण इकाइयों को ऊर्जा लागत में अप्रत्याशित वृद्धि से बचाव मिलेगा।
- **कूटनीतिक साख पर:** अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान में भारतीय मध्यस्थता को दोनों पक्षों से मान्यता मिलने पर वैश्विक कूटनीति में नई दिल्ली की विश्वसनीयता बढ़ेगी। यह स्थिति बहुपक्षीय मंचों पर भारत के व्यापारिक और रणनीतिक हितों को मजबूती देगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनयिक प्रगति इसलिए संभव हुई क्योंकि लगभग तीन वर्षों के विनाशकारी युद्ध के बाद दोनों पक्ष ऐसे मध्यस्थ की तलाश में थे जो तटस्थ और भरोसेमंद हो। भारत के दोनों देशों के साथ मजबूत राजनयिक संबंध और व्यावहारिक शांति प्रस्ताव ने इसे एक स्वाभाविक मंच प्रदान किया।

- **युद्ध की लंबी अवधि और आर्थिक दबाव:** फरवरी 2022 से चल रहे लगातार संघर्ष ने दोनों देशों के बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दबाव डाला है। इसके चलते सीमित क्षेत्रों जैसे कृषि और ऊर्जा में युद्धविराम की तात्कालिक आवश्यकता महसूस की गई।
- **भारत की विशिष्ट कूटनीतिक स्थिति:** नई दिल्ली ने मॉस्को के साथ अपनी पारंपरिक साझेदारी बनाए रखी है और साथ ही कीव के साथ भी सतत संवाद जारी रखा है। इसी संतुलन के कारण दोनों देशों के नेतृत्व को भारतीय मध्यस्थता पर समान रूप से भरोसा है।
- **सीमित प्रस्तावों की तुलना में व्यापक दृष्टिकोण:** जहां अन्य देश केवल अनाज निर्यात या ऊर्जा संयंत्रों जैसे एकांगी मुद्दों पर ध्यान दे रहे थे, वहीं भारत ने समग्र समाधान का खाका पेश किया। यही कारण है कि यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने इसे सभी चार विकल्पों में सबसे व्यापक करार दिया।
- **शीर्ष स्तर पर निरंतर संवाद:** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्लादिमीर पुतिन के साथ हर द्विपक्षीय बातचीत में युद्ध समाप्त करने पर जोर दिया और यूक्रेनी नेतृत्व से भी संपर्क बनाए रखा। शीर्ष नेतृत्व के इस सतत प्रयास ने औपचारिक वार्ता के लिए कूटनीतिक आधार तैयार किया।

## सवाल-जवाब

### 1. यूक्रेन ने शांति प्रक्रिया को लेकर भारत के प्रस्ताव के बारे में क्या कहा?
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने बताया कि विचाराधीन चार अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों में भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है और भारत ने पहली बार इसमें सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा जताई है।

### 2. शांति वार्ता के लिए अन्य कौन-से प्रस्ताव विचाराधीन हैं?
तुर्किये और मिस्र ने काला सागर में अनाज निर्यात के लिए युद्धविराम का सुझाव दिया है, जबकि अमेरिका ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकने का प्रस्ताव रखा है।

### 3. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर क्या टिप्पणी की थी?
पुतिन ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास यूक्रेन संकट के समाधान के लिए बहुत अच्छे विचार हैं और वे हर द्विपक्षीय मुलाकात में युद्ध समाप्त करने का मुद्दा उठाते हैं।

### 4. यूक्रेन किन क्षेत्रों में युद्धविराम के लिए तैयार दिखाई दे रहा है?
यूक्रेन ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे और काला सागर में कृषि व्यापार से जुड़े युद्धविराम के साथ बिना शर्त संघर्ष विराम पर विचार करने की तैयारी दिखाई है।

### 5. रूस-यूक्रेन सैन्य संघर्ष की शुरुआत कब हुई थी?
रूस और यूक्रेन के बीच यह सैन्य संघर्ष फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और तब से दोनों देशों के बीच लगातार जारी है।

### 6. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भारतीय भूमिका पर क्या रुख जताया था?
दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि रूस यूक्रेन संकट समाप्त करने के लिए भारत की किसी भी शांति पहल का स्वागत करेगा क्योंकि दोनों देशों का दृष्टिकोण बातचीत और कूटनीति पर केंद्रित है।

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