# यूक्रेनी यात्री ट्रेनों पर सटीक ड्रोन हमलों की नई लहर से रेल नेटवर्क में भारी व्यवधान

> यूक्रेन के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क पर रूसी ड्रोन हमलों में तेज बढ़ोतरी के बाद दैनिक आधार पर सैकड़ों ट्रेनों को रोका जा रहा है, जिससे यात्रियों को आपातकालीन निकासी और भारी देरी का सामना करना पड़ रहा है।

**Type:** article · **Category:** यूरोप · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/europe/yukreni-yatri-trenon-para-satika-drona-hamalon-ki-nai-lahara-se-rela-netavarka-men-bhari-vyavadhana-43882 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूक्रेन युद्ध, यूक्रेनी रेलवे, ड्रोन हमला, उक्रजालिज़्नित्सिया, ओलेक्सांद्र पेर्त्सोवस्की, रूस यूक्रेन संघर्ष

यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच देश की जीवनरेखा मानी जाने वाली रेल प्रणाली अब सटीक हथियारों और ड्रोन हमलों के सीधे निशाने पर आ गई है। साल 2022 में शुरू हुए पूर्ण पैमाने के सैन्य आक्रमण के बाद से यूक्रेनी रेलवे ने नागरिक आवाजाही और आवश्यक रसद आपूर्ति को निरंतर बनाए रखा था, लेकिन हालिया हफ्तों में चलती यात्री ट्रेनों और लोकोमोटिव्स पर हमलों की तीव्रता कई गुना बढ़ गई है। राज्य के स्वामित्व वाले ऑपरेटर के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक क्षतिग्रस्त हुए सभी लोकोमोटिव्स में से आधे से अधिक इसी साल हमलों का शिकार बने हैं, जिसके चलते युद्ध के मोर्चे से दूर शांतिपूर्ण पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में भी आपातकालीन निकासी आम बात हो गई है।

रेल पटरियों के समीप होने वाले लगातार हमलों ने आम यात्रियों के दैनिक जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। खारकीव की 27 वर्षीय मार्केटिंग विशेषज्ञ यूलिया पोनोमारेंको पिछले महीने वारसॉ की यात्रा पर थीं, जब यूक्रेन-पोलैंड सीमा के ठीक पहले उनकी ट्रेन को अचानक रोक दिया गया। सीमा सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल बोगियों में भागते हुए सभी को बाहर निकलने और खुले में भागने के निर्देश दिए क्योंकि आगे की पटरी पर भारी गोलाबारी हो रही थी। आगे लगी आग को बुझाने और रेलवे लाइन को साफ करने में छह घंटे लग गए, जिसके दौरान यात्री ट्रैक के किनारे दहशत में इंतजार करते रहे। यूलिया का कहना है कि उनकी ट्रेन कुछ मिनट की देरी से चल रही थी, जिसने संभवतः उन्हें सीधे मिसाइल या ड्रोन की चपेट में आने से बचा लिया।

## सितंबर में पांच हजार से अधिक ट्रेनों की आपातकालीन निकासी
यूक्रेन के सरकारी रेलवे ऑपरेटर उक्रजालिज़्नित्सिया के अनुसार, केवल सितंबर के महीने में रूसी ड्रोन हमलों और हवाई अलर्ट के कारण कुल 5,831 ट्रेनों को खाली कराना पड़ा। इसका सीधा मतलब यह है कि देश में प्रतिदिन औसतन 205 ट्रेनों को बीच रास्ते में ही रोककर यात्रियों को बोगियों से बाहर निकालना पड़ा। युद्ध की विभीषिका अब केवल अग्रिम मोर्चे तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूरदराज के इलाकों में सफर करने वाले नियमित यात्री भी लगातार अनिश्चितता और खतरे के साए में यात्रा कर रहे हैं।

ओडेसा से किरोवोह्राद की यात्रा कर रही 17 वर्षीय अनस्तासिया रिवबाल्चेंको ने भी 16 सितंबर को ऐसी ही एक भयावह स्थिति का सामना किया। भोर में लगभग 4:00 बजे उनकी ट्रेन को एक सुनसान इलाके में रोककर सभी यात्रियों को नीचे उतार दिया गया। अनस्तासिया ने बताया कि ओडेसा जाते समय भी कई बार निकासी हुई थी और लौटते समय दोबारा ऐसा होने से यात्रियों का मानसिक तनाव चरम पर पहुंच गया। लगभग डेढ़ घंटे तक अंधेरे में पटरियों के पास इंतजार करने के बाद पास में ही एक जोरदार ड्रोन धमाका हुआ, जिसके बाद सभी लोग जान बचाने के लिए नजदीकी जंगलों की ओर भागे। उस हमले में ट्रेन को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन रात के आसमान में लगातार होते धमाकों को देखकर उन्होंने पैदल ही आगे बढ़ने का फैसला किया, जिसके बाद उनके माता-पिता ने उन्हें गाड़ी से सुरक्षित निकाला। इस घटना के बाद अनस्तासिया ने रेल यात्रा से पूरी तरह तौबा कर ली है।

## आधुनिक ड्रोन तकनीक और बदलती युद्ध रणनीति
साल 2025 के अंत से चलती यात्री ट्रेनों को निशाना बनाने वाले ड्रोन हमलों की शुरुआत के बाद यात्रियों के लिए एक नया और तनावपूर्ण नियम बन चुका है। ट्रेन रुकते ही बोगियों को खाली करना, ड्रोन और मिसाइल लॉन्च की ताजा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनलों को लगातार रिफ्रेश करना और परिजनों को सुरक्षित होने का संदेश भेजना अब एक नियमित प्रक्रिया बन गई है। समय की पाबंदी के लिए गर्व महसूस करने वाले रेल प्रबंधन के लिए यह स्थिति सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

उक्रजालिज़्नित्सिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलेक्सांद्र पेर्त्सोवस्की ने बताया कि शांति काल के यूरोपीय देशों की तुलना में युद्ध के दौरान यूक्रेनी रेलवे ने असाधारण समयबद्धता दिखाई थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यात्रियों और क्रू सदस्यों के जीवन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, 2022 से अब तक कुल 521 लोकोमोटिव्स पर हमले हुए हैं, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत हमले इसी साल दर्ज किए गए हैं। रेलवे की बुनियादी सुविधाओं पर कुल हमलों की संख्या भी वर्ष 2025 के 1,206 से बढ़कर इस साल अब तक 1,700 तक पहुंच गई है।

पेर्त्सोवस्की के अनुसार, हमलों की यह नई लहर अत्यधिक तीव्र है क्योंकि इसमें शाहेद ड्रोनों की मारक क्षमता के साथ कैमरों और मेश नेटवर्क के जरिए मिलने वाली सटीकता का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे वे चलती ट्रेनों को भी सटीक निशाना बना रहे हैं। इनमें से कई आधुनिक ड्रोनों में AI उपकरण और इमेज रिकग्निशन तकनीक भी शामिल है। यूक्रेनी रेलवे इस तकनीकी खतरे से निपटने के लिए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और ड्रोन कनेक्टिविटी में व्यवधान डालने वाली तकनीकों का सहारा ले रहा है, जिसे पेर्त्सोवस्की ने बिल्ली और चूहे का निरंतर खेल करार दिया। हालांकि दूसरी ओर, रूस के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि वे नागरिकों को निशाना नहीं बना रहे हैं, बल्कि केवल उस रेलवे ढांचे पर हमला कर रहे हैं जिसका उपयोग सैन्य कर्मियों और हथियारों के परिवहन के लिए किया जाता है।

## 'आयरन कमांड सेंटर' और आगामी सर्दियों की रणनीति
राजधानी कीव में जमीन के नीचे बने एक सुरक्षित बंकर, जिसे 'आयरन कमांड सेंटर' कहा जाता है, से रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी पूरे नेटवर्क पर वास्तविक समय में नजर रखते हैं। विशाल वीडियो स्क्रीन पर पूरे यूक्रेन की धमनियों जैसे फैले रेल नेटवर्क पर यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को अलग-अलग रंगों में प्रदर्शित किया जाता है। निगरानी के दौरान यदि किसी ड्रोन की गतिविधि दिखाई देती है, तो उसके चारों ओर 100 किलोमीटर (62 मील) का एक सुरक्षा घेरा बनाया जाता है। इस घेरे के दायरे में आने वाली सभी यात्री ट्रेनों को तुरंत खाली करा दिया जाता है, और यात्रियों को तब तक दोबारा सवार होने की अनुमति नहीं दी जाती जब तक कि ट्रेन उस दायरे से बाहर न निकल जाए और ड्रोन दूर न चला जाए।

सख्त सुरक्षा उपायों की बदौलत हताहतों की संख्या को सीमित रखने में मदद मिली है। वर्ष 2026 के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी के 8 कर्मचारियों की मौत हुई है, जिनमें से 6 कर्मचारी कीव में एक लोकोमोटिव डिपो पर बैलिस्टिक मिसाइल गिरने के दौरान मारे गए थे। सायरन बजते ही स्टेशनों और टर्मिनलों को फौरन खाली करा लिया जाता है और यात्रियों को भूमिगत रास्तों में शरण लेनी पड़ती है।

आने वाले महीनों में हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण होने की आशंका है क्योंकि सर्दियों के मौसम में तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस (-20C) नीचे तक गिर जाता है और भारी बर्फबारी होती है। शून्य से नीचे के तापमान में पटरियों पर यात्रियों की निकासी बेहद जोखिम भरी हो सकती है। इससे निपटने के लिए उक्रजालिज़्नित्सिया अंतरराष्ट्रीय दाताओं के सहयोग से विंटर इवैक्यूएशन पैक, मोबाइल शेल्टर और बार-बार प्रभावित होने वाले संवेदनशील क्षेत्रों में वैकल्पिक बस सेवाओं की व्यवस्था कर रहा है। पेर्त्सोवस्की ने जोर देकर कहा कि चाहे सर्दी हो या गर्मी और दुश्मन कितना भी कड़ा प्रहार करे, यूक्रेनी रेलवे देश को आपस में जोड़ने के अपने संकल्प पर पूरी तरह अडिग रहेगा।

## इसका आप पर असर
यूक्रेन के रेल बुनियादी ढांचे पर हमलों की तीव्रता बढ़ने से पूर्वी यूरोप में नागरिक यात्रा और क्षेत्रीय रसद आपूर्ति पर सीधा असर पड़ रहा है।

- **नागरिक यात्रा पर प्रभाव:** यूक्रेन और पड़ोसी यूरोपीय देशों के बीच चलने वाली यात्री रेल सेवाओं में अप्रत्याशित देरी और बार-बार आपातकालीन रुकावटें आ रही हैं। सीमा पार यात्रा करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय और वैकल्पिक सड़क परिवहन का प्रबंध करना पड़ सकता है।
- **शीतकालीन सुरक्षा जोखिम:** आगामी सर्दियों में शून्य से 20 डिग्री नीचे के तापमान में पटरियों पर ट्रेन खाली कराए जाने से यात्रियों के लिए अत्यधिक ठंड का खतरा बढ़ गया है। यात्रियों को लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान गर्म कपड़े, आपातकालीन राशन और बैकअप संपर्क साधन साथ रखने की सलाह दी जा रही है।
- **आपातकालीन लॉजिस्टिक्स:** युद्धग्रस्त क्षेत्रों से पश्चिमी सीमाओं तक आवश्यक रसद, राहत सामग्री और घायलों के परिवहन के समय में भारी वृद्धि हो रही है। आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की लागत और वितरण समय प्रभावित हो सकता है।
- **सुरक्षा प्रोटोकॉल का विस्तार:** ड्रोन खतरे वाले क्षेत्रों में 100 किलोमीटर के सुरक्षा दायरे के कारण रेल यात्राओं के दौरान किसी भी समय बोगियों को खाली करना पड़ सकता है। यात्रियों को यात्रा के दौरान डिजिटल अलर्ट चैनलों और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों पर लगातार नजर रखनी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यूक्रेन के रेल नेटवर्क पर बढ़ते हमले दोनों पक्षों के बीच चल रहे युद्ध में सामरिक प्राथमिकताओं और आधुनिक ड्रोन तकनीक के विकास का परिणाम हैं।

- **तकनीकी विकास और सटीकता:** हमलों में शाहेद ड्रोनों के साथ-साथ AI-सक्षम इमेज रिकग्निशन, ऑनबोर्ड कैमरों और मेश नेटवर्किंग का इस्तेमाल शुरू हुआ है, जिससे वे चलती ट्रेनों जैसे गतिशील लक्ष्यों को दूर से सटीक निशाना बनाने में सक्षम हो गए हैं।
- **सामरिक बुनियादी ढांचे का टकराव:** यूक्रेन की रेलवे देश के आंतरिक परिवहन और रसद की मुख्य रीढ़ है, जिसे बाधित करने से नागरिक और सैन्य दोनों तरह की गतिविधियों पर गहरा असर पड़ता है।
- **आधिकारिक रुख में विरोधाभास:** जहां यूक्रेनी पक्ष इसे यात्री सेवाओं और बुनियादी ढांचे पर सीधा हमला बता रहा है, वहीं रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उनके हमलों का लक्ष्य केवल सैनिकों और हथियारों के परिवहन में इस्तेमाल होने वाला नेटवर्क है।
- **इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का दायरा:** रेलवे लाइनों और लोकोमोटिव्स की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स और 100 किमी के सुरक्षा दायरे वाले कमांड प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं, जिससे ट्रेनों का संचालन लगातार बाधित हो रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. यूक्रेनी ट्रेनों को बार-बार क्यों खाली कराया जा रहा है?
ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे और 100 किलोमीटर के सुरक्षा दायरे में ड्रोन के प्रवेश करने पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेनों को आपातकालीन रूप से खाली कराया जाता है।

### 2. सितंबर के महीने में कितनी ट्रेनों की निकासी की गई?
सितंबर में रूसी ड्रोन हमलों के कारण 5,831 ट्रेनों को खाली कराया गया, जो प्रतिदिन औसतन लगभग 205 ट्रेनों के बराबर है।

### 3. युद्ध की शुरुआत से अब तक कितने लोकोमोटिव्स हमलों की चपेट में आए हैं?
वर्ष 2022 से अब तक कुल 521 लोकोमोटिव्स पर हमले हुए हैं, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत हमले अकेले इसी साल दर्ज किए गए हैं।

### 4. ट्रेनों को निशाना बनाने वाले नए ड्रोनों में कौन सी तकनीक देखी गई है?
नए ड्रोनों में कैमरों और मेश नेटवर्क के साथ-साथ AI उपकरण और इमेज रिकग्निशन तकनीक शामिल है, जो चलती ट्रेनों को भी निशाना बना सकती है।

### 5. यूक्रेनी रेलवे आगामी सर्दियों के लिए क्या तैयारियां कर रहा है?
माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय दाताओं की मदद से विंटर इवैक्यूएशन पैक, मोबाइल शेल्टर और वैकल्पिक बस सेवाओं की व्यवस्था की जा रही है।

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