झारखंड सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा विवाद में सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका, सीबीआई जांच कराने की उठी मांग झारखंड लोक सेवा आयोग की 2025 सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जहां याचिकाकर्ता ने सीबीआई या किसी स्वतंत्र समिति से निष्पक्ष जांच कराने और सभी परीक्षा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में हुई कथित धांधली का मामला देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरीशरण देवगन ने सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। इस याचिका में 2025 की प्रारंभिक परीक्षा में सामने आई गंभीर अनियमितताओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या किसी उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति से कराने की गुहार लगाई गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि राज्य के हजारों योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए इस पूरी परीक्षा प्रक्रिया की न्यायिक निगरानी में जांच होना बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका और स्वतंत्र ऑडिट की मांग सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में केवल जांच एजेंसी की नियुक्ति की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने पर भी जोर दिया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि उत्तर पुस्तिकाओं यानी OMR शीट की स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और अंतिम परिणाम तैयार करने में इस्तेमाल की गई संपूर्ण डिजिटल और मैन्युअल व्यवस्था का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। इसके अलावा, याचिका में यह वैज्ञानिक और सांख्यिकीय आकलन करने का आग्रह भी शामिल है कि क्या उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सही तरीके से सफल हुए अभ्यर्थियों और अनुचित साधनों के जरिए पास हुए उम्मीदवारों को अलग किया जा सकता है या नहीं। परीक्षा से जुड़े सभी कागजी और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की अपील याचिका में परीक्षा से संबंधित संपूर्ण रिकॉर्ड को तत्काल प्रभाव से सील और सुरक्षित रखने के निर्देश देने की मांग की गई है ताकि जांच के दौरान किसी भी तरह की साक्ष्य सामग्री के साथ छेड़छाड़ न की जा सके। इसके तहत परीक्षा केंद्रों की OMR शीट, अभ्यर्थियों के पास उपलब्ध कार्बन कॉपियां, प्रश्नपत्र, आधिकारिक आंसर की, उपस्थिति पत्रक, बायोमेट्रिक उपस्थिति डेटा, परीक्षा केंद्रों की CCTV फुटेज, केंद्र अधीक्षकों की विस्तृत रिपोर्ट, स्कैनिंग लॉग और परिणाम प्रोसेसिंग से जुड़े सभी डिजिटल डेटाबेस को सुरक्षित अभिरक्षा में रखने का आदेश देने की प्रार्थना की गई है। 48 सवालों के जवाब पर उत्तीर्ण घोषित होने का विवाद यह पूरा विवाद 19 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 के बाद शुरू हुआ, जिसका प्रारंभिक परिणाम 2 जुलाई 2026 को घोषित किया गया था। परिणाम जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर एक सफल अभ्यर्थी की OMR शीट की कार्बन कॉपी तेजी से वायरल हो गई। वायरल दस्तावेज के आधार पर यह गंभीर आरोप लगाया गया कि संबंधित उम्मीदवार ने प्रश्नपत्र 1 में कुल 100 प्रश्नों में से केवल 48 प्रश्नों के ही उत्तर दिए थे, फिर भी आयोग द्वारा जारी मेरिट सूची में उसे उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया। इस खुलासे के बाद परीक्षा की शुचिता और मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। सीआईडी जांच और ओएमआर कार्बन कॉपी का सत्यापन मामले पर चौतरफा दबाव और अभ्यर्थियों के भारी आक्रोश के बीच JPSC की ओर से यह स्पष्टीकरण जारी किया गया कि कथित गड़बड़ियों की जांच सीआईडी (CID) द्वारा की जा रही है। इसके साथ ही, आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किए गए सभी अभ्यर्थियों को निर्देश दिया कि वे अपने प्रश्नपत्र 1 और प्रश्नपत्र 2 की असली OMR कार्बन कॉपियां आयोग के समक्ष सत्यापन के लिए जमा कराएं। इसके लिए अभ्यर्थियों को 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक का समय दिया गया था ताकि प्राप्त दस्तावेजों की गहन जांच की जा सके। रांची में छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन और बिगड़ती तबीयत दूसरी तरफ, परीक्षा में व्यापक धांधली के विरोध में राज्य की राजधानी रांची में अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। छात्रों का यह आंदोलन 25 जुलाई 2026 को रांची स्थित बापू वाटिका से शुरू हुआ था, जिसके बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए। आंदोलनकारी छात्र 14वीं JPSC परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने, भर्ती व्यवस्था में आमूलचूल सुधार लाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं। इस दौरान अनशन पर बैठे छात्र नेता राहुल की स्वास्थ्य स्थिति अत्यधिक चिंताजनक हो गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत सदर अस्पताल के ICU में भर्ती कराना पड़ा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक परीक्षा रद्द करने का फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। इसका आप पर असर भारत में: राज्य लोक सेवा आयोगों की परीक्षाओं में अनियमितता के आरोपों और अदालती मुकदमों से देशभर के प्रतियोगी परीक्षार्थियों में भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर चिंता बढ़ती है। झारखंड में: 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हजारों स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए परिणाम और अगली चयन प्रक्रिया पर अनिश्चितता का संकट खड़ा हो गया है। सवाल-जवाब 1. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में JPSC परीक्षा की किस तरह की जांच की मांग की गई है? याचिका में 2025 की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की जांच सीबीआई (CBI) या किसी स्वतंत्र जांच कमेटी से कराने की मांग की गई है। 2. JPSC 2025 प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन और परिणाम कब जारी हुआ था? प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन 19 अप्रैल 2026 को हुआ था और इसका परिणाम 2 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। 3. सोशल मीडिया पर वायरल ओएमआर शीट से क्या विवाद सामने आया? एक सफल उम्मीदवार की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी वायरल हुई, जिसमें प्रश्नपत्र 1 के 100 में से केवल 48 सवालों के जवाब देने के बावजूद उसे पास घोषित किए जाने का आरोप लगा। 4. रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांग क्या है? छात्र 14वें जेपीएससी एग्जाम को रद्द करने, निष्पक्ष जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं। 5. JPSC ने ओएमआर कार्बन कॉपी जमा करने के लिए क्या समयसीमा तय की थी? आयोग ने सफल अभ्यर्थियों को 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक अपने पेपर 1 और पेपर 2 की ओएमआर कार्बन कॉपी जमा करने का समय दिया था। https://trendkia.com/exam/jharkhand-sivila-seva-prarnbhika-pariksha-vivada-men-supreme-court-men-dayara-hui-janahita-yachika-cbi-jancha-karane-ki-uthi-manga-15083 TrendKia — Har trend, sabse pehle.