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  "title": "पड़ोसी मुल्कों से आए लोगों को लेकर यूपीएससी का नियम क्या कहता है, जानिए पूरा हिसाब-किताब",
  "summary": "नेपाल, भूटान और पाकिस्तान से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में नागरिकता को लेकर अलग-अलग शर्तें तय हैं, आईएएस-आईपीएस जैसे टॉप पदों के लिए भारतीय नागरिकता अनिवार्य है जबकि कुछ अन्य सेवाओं में खास छूट मिलती है.",
  "content": "हर साल लाखों अभ्यर्थी यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन इनमें से कई के मन में एक सवाल हमेशा उलझा रहता है, क्या पड़ोसी मुल्क नेपाल, भूटान या पाकिस्तान से जुड़े लोग भी भारत में बड़े प्रशासनिक पदों तक पहुंच सकते हैं. आम धारणा यह बन गई है कि सीमा पार से जुड़े लोगों का भारतीय अफसरशाही में कोई स्थान नहीं हो सकता, जबकि हकीकत में संघ लोक सेवा आयोग ने इस मसले पर बेहद सुलझे और तार्किक नियम बना रखे हैं.\n\nसंघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा असल में एक साथ कई सेवाओं के लिए अफसरों की भर्ती करती है, इनकी संख्या बीस से भी ज्यादा है. इनमें एक तरफ आईएएस, आईपीएस और आईएफएस जैसी सबसे प्रतिष्ठित ऑल इंडिया व विदेश सेवाएं आती हैं, तो दूसरी तरफ आईआरएस, आईआरटीएस और आईएएएस जैसी ग्रुप ए और ग्रुप बी की केंद्रीय सेवाएं भी शामिल हैं. आयोग ने नागरिकता से जुड़े नियमों को दो अलग-अलग स्तर पर बांटा है, यानी एक तरह का दोहरा ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें हर सेवा के लिए पात्रता की शर्तें अलग हैं.\n\nटॉप सेवाओं के लिए सिर्फ भारतीय नागरिकता ही रास्ता\nआईएएस, आईपीएस और आईएफएस के लिए एक ही शर्त बेहद सख्ती से लागू होती है, अभ्यर्थी का भारत का नागरिक होना जरूरी है. इसका मतलब यह हुआ कि नेपाल, भूटान या पाकिस्तान का कोई भी ऐसा नागरिक, जिसके पास भारतीय नागरिकता नहीं है, सीधे तौर पर इन तीन सेवाओं के लिए योग्य नहीं माना जाएगा. हालांकि यहां एक अहम पहलू है, भारतीय नागरिकता किसी भी माध्यम से मिली हो, जन्म से, पंजीकरण से या प्राकृतिक रूप से हासिल हुई हो, ऐसा हर व्यक्ति इन पदों के लिए पूरी तरह पात्र माना जाता है. यानी सिर्फ नागरिकता की उत्पत्ति नहीं, बल्कि उसका मौजूद होना ही अंतिम कसौटी है.\n\nनेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए अलग रास्ता खुला है\nपाकिस्तान के किसी भी नागरिक को यूपीएससी की परीक्षा में सीधे बैठने की इजाजत नहीं है, लेकिन नेपाल और भूटान के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग है. इन दोनों देशों के नागरिकों को यूपीएससी की परीक्षा में शामिल होने की छूट दी गई है, बशर्ते वे आईएएस, आईपीएस या आईएफएस के लिए दावेदारी न करें. उनके लिए रास्ता ग्रुप ए और ग्रुप बी की अन्य सेवाओं में खुलता है, जैसे भारतीय राजस्व सेवा, भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा सेवा, रेलवे से जुड़ी सेवाएं और कुछ अन्य केंद्रीय विभागीय सेवाएं. लेकिन इतना काफी नहीं है, नियुक्ति से पहले ऐसे उम्मीदवारों को भारत सरकार के गृह मंत्रालय से जारी होने वाला एक खास प्रमाणपत्र, यानी एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट, जमा करना अनिवार्य होता है. यह प्रमाणपत्र ही यह पुष्टि करता है कि उम्मीदवार सरकारी सेवा में शामिल होने की सभी शर्तें पूरी करता है.\n\nपाकिस्तान समेत अन्य देशों से आए भारतीय मूल के लोगों के लिए क्या नियम है\nपाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार यानी बर्मा, केन्या, युगांडा या तंजानिया जैसे देशों से भारत में हमेशा के लिए बसने की नीयत से आए भारतीय मूल के लोगों को भी मौका मिलता है. ऐसे लोग आईएएस, आईपीएस और आईएफएस को छोड़कर बाकी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसमें एक बेहद दिलचस्प प्रावधान भी है, अगर पाकिस्तान से आया कोई शरणार्थी भारत की नागरिकता हासिल कर लेता है, चाहे यह नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए के जरिए मिली हो या किसी और नागरिकता कानून के तहत, तो नागरिकता मिलते ही वह व्यक्ति आईएएस और आईपीएस जैसे टॉप पदों के लिए भी पूरी तरह योग्य बन जाता है. इसी तरह एक जनवरी 1962 से पहले भारत आकर स्थायी रूप से बस चुके तिब्बती शरणार्थियों को भी गैर आईएएस-आईपीएस सेवाओं में आवेदन का अधिकार दिया गया है.\n\nएलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया कैसे शुरू होती है\nगृह मंत्रालय की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में बेहद अहम है. नेपाल, भूटान या प्रवासी पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को शुरुआत में परीक्षा में बैठने की इजाजत तो मिल जाती है, लेकिन उनकी अंतिम नियुक्ति तभी पक्की होती है जब गृह मंत्रालय उनकी पृष्ठभूमि की पूरी जांच करने के बाद एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट जारी करता है. यही वजह है कि करियर काउंसलर ऐसे उम्मीदवारों को सलाह देते हैं कि प्रीलिम्स परीक्षा पास करते ही देर न करें, बल्कि तुरंत विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर प्रमाणपत्र से जुड़ी कागजी कार्रवाई शुरू कर देनी चाहिए, क्योंकि यह प्रक्रिया समय लेने वाली होती है और आखिरी वक्त पर शुरू करने से नियुक्ति में देरी हो सकती है.\n\nइसका आप पर असर\nअगर आप यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं या आपकी पृष्ठभूमि नेपाल, भूटान, पाकिस्तान जैसे देशों से जुड़ी है, तो नागरिकता से जुड़े ये नियम सीधे आपके करियर की दिशा तय कर सकते हैं.\n\n• आईएएस-आईपीएस के दावेदारों के लिए: अगर आपके पास भारतीय नागरिकता नहीं है तो आईएएस, आईपीएस और आईएफएस के लिए आवेदन न करें. अपना समय और मेहनत सीधे उन सेवाओं पर लगाएं जिनके लिए आप वाकई पात्र हैं.\n• नेपाल-भूटान मूल के अभ्यर्थियों के लिए: परीक्षा में बैठ जाने का मतलब नौकरी पक्की होना नहीं है. प्रीलिम्स पास होते ही गृह मंत्रालय के एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट की प्रक्रिया शुरू कर दें, वरना अंतिम नियुक्ति में देरी हो सकती है.\n• पाकिस्तान से आए नागरिकता प्राप्त लोगों के लिए: अगर सीएए या किसी अन्य नागरिकता कानून के तहत भारतीय नागरिकता मिल चुकी है, तो अब आईएएस और आईपीएस जैसे टॉप पदों के दरवाजे भी आपके लिए खुले हैं.\n• तिब्बती शरणार्थी परिवारों के लिए: 1 जनवरी 1962 से पहले स्थायी रूप से बसे परिवारों के सदस्य गैर आईएएस-आईपीएस सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं, इस पात्रता के दस्तावेज पहले से तैयार रखें.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्या पाकिस्तान का कोई नागरिक सीधे यूपीएससी परीक्षा दे सकता है?\nनहीं, पाकिस्तान का कोई भी नागरिक जिसके पास भारतीय नागरिकता नहीं है, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में शामिल नहीं हो सकता.\n\n2. आईएएस, आईपीएस और आईएफएस के लिए सबसे जरूरी शर्त क्या है?\nइन तीनों सेवाओं के लिए अभ्यर्थी का भारत का नागरिक होना अनिवार्य है, चाहे नागरिकता जन्म से, पंजीकरण से या प्राकृतिक रूप से मिली हो.\n\n3. नेपाल और भूटान के नागरिक किन सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं?\nवे आईएएस, आईपीएस और आईएफएस को छोड़कर भारतीय राजस्व सेवा, भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा सेवा, रेलवे जैसी अन्य ग्रुप ए और ग्रुप बी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं.\n\n4. एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट क्या है और यह कौन जारी करता है?\nयह भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी किया जाने वाला प्रमाणपत्र है, जिसे नेपाल, भूटान या प्रवासी उम्मीदवारों को नियुक्ति से पहले जमा करना अनिवार्य होता है.\n\n5. पाकिस्तान से आए शरणार्थी आईएएस कैसे बन सकते हैं?\nअगर ऐसा शरणार्थी सीएए या किसी अन्य नागरिकता कानून के तहत भारतीय नागरिकता हासिल कर लेता है, तो नागरिकता मिलते ही वह आईएएस और आईपीएस के लिए भी पात्र हो जाता है.\n\n6. तिब्बती शरणार्थियों के लिए क्या नियम है?\n1 जनवरी 1962 से पहले भारत आकर स्थायी रूप से बसे तिब्बती शरणार्थी गैर आईएएस-आईपीएस सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं.\n\n7. प्रीलिम्स पास करने के बाद क्या करना चाहिए?\nएक्सपर्ट्स की सलाह है कि प्रीलिम्स पास करते ही विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर जाकर एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए.",
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  "category": "परीक्षा",
  "publishedAt": "2026-09-07",
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